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हरियाणा के 10 में से 8 मंत्री हारे, उनके बारे में ये जरूरी बातें जान लीजिए

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हरियाणा के रिजल्ट आ गए हैं. मामला अधर में लटका है. किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला. बीजेपी 40 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. मगर ये जीत बीजेपी के लिए किसी हार से कम नहीं. 75 प्लस के नारे के साथ चले भगवा दल के लिए ये रिजल्ट चौंकाने वाला रहा. और इस चौकाने के पीछे सबसे बड़ा कारण है उसके बड़े नेताओं का बेहद खराब प्रदर्शन. ये एकदम वैसा ही है कि आपके टॉप 4 बैट्समेन 0 पर मुंह लटका के लौट आएं. बीजेपी के कुल 12 मंत्री थे. जिनमें से 2 का टिकट काटा गया था. बचे 10 में से 8 चुनाव हार गए. और तो और बीजेपी के हरियाणा संगठन के कैप्टन सुभाष बराला भी बुरी तरह हारे. तो आपको इन्हीं पुरोधाओं के बारे में बताते हैं.

कैप्टन अभिमन्यु
कैप्टन अभिमन्यु और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

1. कैप्टन अभिमन्यु – वित्त मंत्री, हिसार की नारनौंद विधानसभा सीट से विधायक थे. इस बार भी यहीं से लड़े.

क्या रहा रिजल्ट – कैप्टन को जननायक जनता पार्टी के रामकुमार गौतम ने 12,029 वोटों के अंतर से हराया.

फैक्टर – मनोहर सरकार में वित्तमंत्री रहे. हरियाणा में बीजेपी का जाट फेस थे. बड़े नेताओं में गिनती होती थी. पिछली बार 2014 में बीजेपी आई तो मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे. इलाके में काम से जनता उनसे खुश नहीं थी. लोकसभा में बीजेपी हिसार से जीती मगर उनकी विधानसभा में बड़े अंतर से पीछे रही. कैप्टन के सामने जेजेपी के रामकुमार गौतम मैदान में थे, जो 2005 में विधायक का चुनाव जीत चुके हैं. वो भी बीजेपी के टिकट पर. इस बार वो जेजेपी से लड़े और जीते.

राम बिलास शर्मा
राम बिलास शर्मा

2. राम बिलास शर्मा – शिक्षा मंत्री, महेंद्रगढ़ से विधानसभा पहुंचे थे. इस बार भी यहीं से लड़े.

क्या रहा रिजल्ट – कांग्रेस के राव दान सिंह ने शर्मा को 10 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया.

फैक्टर – रामबिलास शर्मा हरियाणा के वो नेता हैं कि जब हरियाणा में 2005 में बीजेपी के 2 विधायक थे तो वो उनमें से एक थे. 2014 के चुनाव के वक्त रामबिलास बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे. महेंद्रगढ़ के लोग कहते हैं कि पिछली बार लगा था कि रामबिलास मुख्यमंत्री बन सकते हैं. इसलिए जिता दिया. रामबिलास से महेंद्रगढ़ की शहरी जनता काफी नाराज थी. क्योंकि वहां सड़कों का बुरा हाल था. जो पार्क हुड्डा के जमाने में बने, उनका मेंटेनेंस नहीं था. लोगों ने बताया कि उनकी नगर पालिका अध्यक्ष से पटरी नहीं खाती. फिर राम बिलास का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी और पुराने नेता राव दान सिंह से था. दोनों सातवीं बार आमने-सामने थे. दोनों के बीच छह बार हुए मुकाबले में दोनों तीन-तीन बार विधायक रहे. इस बार मुकाबला दान सिंह के पक्ष में रहा.

ओमप्रकाश धनखड़
ओमप्रकाश धनकड़

3. ओपी धनकड़ – कृषि मंत्री झज्जर की बादली विधानसभा सीट से विधायक थे. यहीं से लड़े.

क्या रहा रिजल्ट – कांग्रेस के कुलदीप वत्स ने धनकड़ को 11,245 वोटों से अंतर से शिकस्त दी.

फैक्टर – ओपी धनखड़ की गिनती भी हरियाणा के बड़े बीजेपी नेताओं में होती है. मगर झज्जर जो कि जाट लैंड में आता है. वहां भूपिंदर सिंह हुड्डा की वापसी ने धनकड़ के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं. जिन कुलदीप वत्स को पिछली बार धनकड़ ने 11 हजार वोटों से हराया था. इस बार कुलदीप वत्स ने पासा पलट दिया. धनकड़ का खेल जेजेपी के संजय कबलाना ने भी बिगाड़ा. जिनकी वजह से चुनाव त्रिकोणीय हो गया था.

 

कविता जैन
कविता जैन

4. कविता जैन – महिला एवं बाल विकास मंत्री सोनीपत से विधायक थीं. यहीं से लड़ीं.

क्या रहा रिजल्ट – कांग्रेस के सुरेंद्र पंवार ने जैन को 32,878 वोटों के बड़े अंतर से मात दी.

फैक्टर – कैबिनेट मंत्री कविता जैन तीसरी बार विधानसभा में पहुंचने को लेकर आश्वस्त थीं. लेकिन कांग्रेस के सुरेंद्र पवार ने उनका सपना तोड़ दिया.

कृष्ण लाल पंवार
कृष्ण लाल पंवार

5. कृष्ण लाल पंवार – ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर इसराना से विधायक थे. यहीं से लड़े.

क्या रहा रिजल्ट – कांग्रेस के बलबीर सिंह ने पंवार को करीब 20 हजार वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी.

फैक्टर – खट्टर सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर रहे कृष्ण लाल पंवार एक और मंत्री हैं जो अपनी सीट नहीं बचा पाए. 2014 में उन्होंने कांग्रेस के बलबीर सिंह को ही हराया था. पंवार पहले आईएनएलडी के सक्रिय सदस्य रहे हैं. वह हरियाणा सर्किल में हरियाणा ओलंपिक संघ के अध्यक्ष और कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे हैं. मगर क्षेत्र में उनकी निष्क्रियता और मंत्रियों उन पर भारी पड़ी.

मनीष ग्रोवर
मनीष ग्रोवर

6. मनीष ग्रोवर – सहकारिता मंत्री रोहतक से विधायक थे. इस बार भी यहीं से लड़े.

क्या रहा रिजल्ट – कांग्रेस के भारत भूषण बत्रा ने ग्रोवर को 2735 मतों के अंतर से हराया.

फैक्टर – खट्टर सरकार में मंत्री मनीष ग्रोवर अपने इलाकों में जनता की नब्ज पकड़ ही नहीं पाए. रोहतक की 4 में से सिर्फ 1 सीट कांग्रेस हारी थी. और वो यही रोहतक सीट थी. मगर लोगों का कहना था कि ग्रोवर का व्यवहार मंत्री बनने के बाद बदल गया. उन्होंने लोकल मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया. उनकी बजाए उनसे पहले दो बार कांग्रेस से विधायक रहे बीबी बत्रा ज्यादा मिलनसार थे. उनके समय रोहतक में काफी काम भी हुए. वहीं ग्रोवर जनता की मूलभूत समस्याएं सुलझाने के बजाए राष्ट्रवाद, भ्रष्टाचार व जाट आंदोलन का मुद्दा ही उछालते रहे.

करन देव कम्बोज
करन देव कम्बोज

7. करन देव कंबोज – खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रादौर से विधायक हैं. इस बार भी यहीं से लड़े.

क्या रहा रिजल्ट – कांग्रेस के बिशन लाल ने 2,541 वोटों के अंतर से हराया.

फैक्टर – राज्य मंत्री करन देव कंबोज की सीट भाजपा ने इंद्री से बदलकर रादौर कर दी थी. रादौर में भाजपा ने मौजूद विधायक श्याम सिंह राणा का टिकट काटा था. जिससे राजपूत समुदाय नाराज था. कांबोज को इसका नुकसान भी उठाना पड़ा. कांग्रेस को फायदा मिला.

कृष्ण बेदी
कृष्ण कुमार बेदी

8. कृष्ण कुमार बेदी – राज्य मंत्री शाहबाद से विधायक थे. यहीं से लड़े.

क्या रहा रिजल्ट – कृष्ण कुमार बेदी को जननायक जनता पार्टी के राम करन ने करीब 37 हजार वोटों से हराया है.


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