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क्या ख़ास है हरदीप सिंह पुरी में कि चुनाव हारने के बाद भी मोदी ने उन्हें मंत्री बना दिया

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हरदीप सिंह पुरी. मोदी सरकार में शहरी विकास राज्यमंत्री थे. लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. वह एकमात्र मंत्री हैं जिन्हें चुनाव हारने के बाद भी फिर से मंत्री बनाया गया है. उन्हें शहरी विकास और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) दिया गया है. पुरी ने पंजाब के अमृतसर से चुनाव लड़ा था. कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला ने उन्हें 99,626 वोटों से हरा दिया था.

बात 2014 की है. अरुण जेटली ने अमृतसर से चुनाव लड़ा. मोदी लहर में भी हार गए. बाद में राज्यसभा से संसद पहुंचे. मोदी सरकार में मंत्री बनाए गए. अरुण जेटली के बाद हरदीप सिंह पुरी दूसरे व्यक्ति हैं जो इस सीट से चुनाव लड़े. हारे फिर भी मंत्री बने. हरदीप सिंह पुरी और अरुण जेटली में गहरी दोस्ती है. दोनों दोस्त अलग-अलग टाइम पर अमृतसर से चुनाव लड़े. लेकिन हार गए. इसके बाद भी मंत्री बने.

कौन हैं हरदीप सिंह पुरी

hardeep singh puri

हरदीप के पिता भी राजनयिक थे. ज़्यादातर पढ़ाई बोर्डिंग स्कूल में हुई. दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की. खूब पढ़े थे, तो DU के प्रतिष्ठित स्टीफेंस कॉलेज में पढ़ाया भी. कुछ महीने पढ़ाने के बाद आईएफएस ज्वॉइन कर लिया. शादी भी एक आईएफएस अफसर लक्ष्मी पुरी से ही की. 28 फरवरी, 2013 को जब रिटायर हुए, तब तक ब्राज़ील, जापान, श्रीलंका और ब्रिटेन जैसी जगहों पर डिप्लोमैटिक पोस्टिंग पर जा चुके थे. काफी काम यूएन में भी किया. इसलिए इन्हें विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का जानकार माना जाता है. पुरी सियासत से ज़्यादा दूर कभी नहीं रहे. पढ़ाई के दौरान जेपी आंदोलन से साथ जुड़े रहे थे. अरुण जेटली के साथ गाढ़ी दोस्ती है.

#सियासत

JP आंदोलन के साथ जुड़े रहे
2 जनवरी 2014 को BJP में शामिल हुए
अरुण जेटली के साथ गाढ़ी दोस्ती है. वो खुद कहते हैं, ‘अरुण जेटली के साथ बड़ा हुआ मैं. एक ही यूनिवर्सिटी में पढ़े थे’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब पुरी के BJP जॉइन करने की खबर एक पूर्व राजनयिक को मिली तो उन्होंने कहा, ‘वो BJP से गए कब थे’
1999 में जेटली द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पहली बार मोदी से मिले थे
2003 में जब ये जीनिवा में पोस्टेड थे, तब गुजरात के तत्कालीन CM मोदी भी वहां पहुंचे. 2 दिन तक हरदीप मोदी के ही साथ रहे थे
मोदी स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा के अस्थि-अवशेष लेने स्विट्जरलैंड गए थे

IFS की पारी

काफी हाई-प्रोफाइल पदों पर रह चुके हैं
विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा पर काफी जानकारी और अनुभव है
इंटरनेशनल पीस इंस्टिट्यूट के उपाध्यक्ष रह चुके हैं
ब्राजील में भारत के राजदूत रह चुके हैं
संयुक्त राष्ट्रसंघ (UN) में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि भी नियुक्त किए जा चुके हैं
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की काउंटर-टेररिज़म कमेटी के चेयरमैन रह चुके हैं
ब्राजील, जापान, श्रीलंका और ब्रिटेन जैसी जगहों पर इन्हें डिप्लोमैटिक पदों पर भेजा गया
एक बार कहा था, ‘UN में अपने कार्यकाल के दौरान कई मौकों पर मुझे लगता था कि काश हमारी सरकार मजबूत होती’
28 फरवरी 2013 को रिटायर हुए

किताब भी लिख चुके हैं

2016 में इनकी एक किताब ‘Perilous Interventions: The Security Council and the Politics of Chaos’पब्लिश हुई
लीबिया, सीरिया, यमन, क्रीमिया और श्रीलंका की केस स्टडी थी इस किताब में. काफी तारीफ भी हुई.
हामिद अंसारी और अरुण जेटली ने किया था किताब का विमोचन
‘द ग्रैजुएट इंस्टिट्यूट’ जीनिवा में विजिटिंग फैकल्टी.


सबसे गरीब सांसद जिसे मोदी ने मंत्री बना दिया

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Hardeep Singh Puri despite losing election becomes minister once again in Modi government

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