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विजय रूपानी की सीट पर क्या हुआ यह जान लो

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सीट- राजकोट वेस्ट
बीजेपी- विजय रूपानी-131586
कांग्रेस- इंद्रनील राजगुरु-77831

अंतर- 53755

पिछले 22 साल से गुजरात बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक रहा है. पिछले तीन विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत दिलाने वाले नरेंद्र मोदी फिलहाल प्रधानमंत्री की कुर्सी पर हैं. ऐसे में गुजरात बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है. इस विधानसभा में जिस सीट पर लोगों की सबसे ज्यादा नज़र रहेगी वो है, राजकोट वेस्ट. यहां से मुख्यमंत्री विजय रूपानी चुनाव लड़ रहे हैं. उनके सामने कांग्रेस ने उतारा है इन्द्रनील राजगुरु को. इस सीट पर कांटे की टक्कर की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन नतीजे एकतरफा तौर पर विजय रुपानी के पक्ष में गए हैं.

1956 में बर्मा के रंगून में पैदा हुए विजय रूपानी का अबतक सियासी सफ़र काफी दिलचस्प रहा है. वो छात्र जीवन से आरएसएस से जुड़ गए थे. 1987 के साल में उनका सियासी सफ़र शुरू हुआ. इस साल राजकोट म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन का चुनाव था. रूपानी ये चुनाव लड़े और जीत गए. इसके बाद राजकोट भाजपा के जिलाध्यक्ष बने. 2006 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया. 2014 में जब बीजेपी के सीनियर लीडर वजूभाई वाला को केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया गया. इससे राजकोट वेस्ट सीट खाली हो गई. 2014 में हुए उप-चुनाव में विजय रूपानी बीजेपी की टिकट से लड़े और जीते.

2014 में उप-चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे विजय रुपानी सालभर के भीतर सत्ता के शीर्ष पर पहुंच गए.
2014 में उप-चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे विजय रुपानी सालभर के भीतर सत्ता के शीर्ष पर पहुंच गए.

रूपानी के खिलाफ लड़ रहे इंद्रनील राजगुरु का सियासी सफ़र भी कम दिलचस्प नहीं रहा है. वो खांटी कांग्रेसी परिवार से आते हैं. उनके दादा लक्ष्मण राजगुरु आजादी के आंदोलन के समय कांग्रेस से जुड़े थे और यह जुड़ाव अब भी बरकरार है. उनके पिता संजय राजगुरु कांग्रेस के टिकट पर जिला पंचायत के अध्यक्ष बने थे. 2012 में इन्द्रनील ने पहली दफा विधानसभा चुनाव लड़ा था. यह चुनाव वो 4272 वोट के अंतराल से जीतने में कामयाब रहे थे. राजगुरु गुजरात चुनाव में सबसे ज्यादा पैसे वाले उम्मीदवारों में से एक हैं. चुनाव आयोग के सामने पेश किए हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति 141 करोड़ बताई है. वो रियल स्टेट, होटल और एजुकेशन के व्यवसाय में हैं.

पिछला चुनाव 

2014 के विधानसभा चुनाव में यहां से बीजेपी के वजूभाई वाला चुनाव लड़े थे. उनके सामने थे कांग्रेस के अतुल राजानी. वजुभाई को मिले 89568 वोट जबकि राजानी की गिनती सिमट गई महज़ 63734 पर. 2014 में वजुभाई को कर्नाटक का राज्यपाल बन गए और यह सीट खाली हो गई. 2014 में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने विजय रूपानी को टिकट दिया था जबकि कांग्रेस की तरफ से जयंतीभाई कलारिया को उतारा गया था. इस चुनाव में विजय रूपानी को मिले 81,092 वोट जबकि कांग्रेस को 57,352. रूपानी 23,740 वोट से यह चुनाव जीतने में कामयाब रहे.

नरेंद्र मोदी के साथ वजुभाई वाला
नरेंद्र मोदी के साथ वजुभाई वाला

सीट का गणित

राजकोट वेस्ट सीट बीजेपी के लिए काफी अहम है. 1977 के चुनाव में यहां से केशुभाई पटेल विधायक रहे थे. तब से यह सीट पहले जनसंघ और बाद में बीजेपी का गढ़ मानी जाती रही है. 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने इसी सीट से उप-चुनाव जीतकर विधानसभा में दाखिला लिया था. पिछले चुनाव में बीजेपी के कद्दावर नेता वजूभाई वाला ने 24978 के बड़े अंतराल से जीत हासिल की थी. राजकोट वेस्ट गुजरात की सबसे बड़ी विधानसभा सीट है. यहां 3 लाख से ज्यादा वोटर हैं.

राजकोट रैली के दौरान नरेंद्र मोदी
राजकोट रैली के दौरान नरेंद्र मोदी

इस बार के चुनाव में बीजेपी अपने पुराने गढ़ में कड़ी चुनौती झेल रही थी. इस सीट पर 70,000 के करीब पटेल मतदाता हैं. पाटीदार आरक्षण आंदोलन के चलते बीजेपी के इस वोट बैंक में डेंट पड़ने की उम्मीद जताई जा रही थी. विजय रुपानी की शांत छवि के मुकाबले आक्रामक छवि वाले इन्द्रनील राजगुरु ने मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया था. वो चुनाव से करीब सालभर पहले ही रुपानी को राजकोट वेस्ट सीट से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दे चुके थे.

चुनाव के दौरान भी यह सीट काफी चर्चा में रही. दो दिसम्बर को नरेंद्र मोदी की रैली से ठीक एक दिन पहले इन्द्रनील राजगुरु के भाई ने आरोप लगाया कि पोस्टर लगाते वक्त उन पर बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया. इस घटना ने स्थानीय मीडिया में काफी सुर्खी बटोरी थी. 3 तारीख को 5 बजे नरेंद्र मोदी की सभा होनी थी. इसके ठीक एक घंटे पहले इंद्रनील राजगुरु ने भी राजकोट में सभा की. इसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी की सभा से कहीं ज्यादा भीड़ बटोरकर सनसनी पैदा कर दी थी. इसके बाद बीजेपी के कई कार्यकर्ता दबी जुबान में ‘कड़ा मुकाबला’ कहते हुए पाए गए थे.

जीत का फैक्टर 

#मुख्यमंत्री होने का अपना फायदा होता है. आप मतदाताओं में यह भरोसा सिला सकते है कि अगर उनकी सीट से मुख्यमंत्री जीतता है तो क्षेत्र का विकास होना तय है.

#इंद्रनील राजगुरु ने इस सीट पर पोस्टर वॉर में रुपानी को कड़ी टक्कर दी लेकिन जनसंपर्क में वो पिछड़ गए.

#राजकोट वेस्ट बीजेपी का पुराना गढ़ है. ऐसे में इन्द्रनील राजगुरु ने अपने लिए यह कठिन डगर थी. उनकी योजना रुपानी को हराकर जैकपॉट पर निशाना लगाना चाहते थे. इस प्रयास के अपने खतरे थे.

#विजय रुपानी का सियासी सफ़र राजकोट महानगरपालिका के सभासद के तौर पर शुरू हुआ. वो मुख्यमंत्री बनने से पहले वो राजकोट में लगातार सक्रीय रहे.


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