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कहानी उस जिले की, जिसने बीजेपी को राजनीति में एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में दुनिया का एक मशहूर मंदिर है सोमनाथ. देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में इसकी गिनती होती है. हिंदू धर्म में इन ज्योतिर्लिंगों का खासा महत्व है. अपनी भव्यता और मान्यता की वजह से भारत पर हमला करने वालों ने कई बार इसे तोड़ा. हर बार ये मंदिर अपनी भव्यता को और बढ़ाता रहा और हर बार तोड़ा जाता रहा.

सोमनाथ मंदिर की पुरानी तस्वीर, जिसे सरदार पटेल ने रिनोवेट करवाया था.
सोमनाथ मंदिर की पुरानी तस्वीर, जिसे सरदार पटेल ने रिनोवेट करवाया था.

राजनीति के तौर पर इस मंदिर का पहला जिक्र भारत की आजादी के तुरंत बाद आया था, जब गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस मंदिर को फिर से बनाने का निर्देश दिया. पटेल के सहयोगी रहे कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने इसका जिम्मा संभाला और मंदिर को एक बार फिर से भव्य रूप दिया गया. इस दौरान सरदार पटेल की मौत हो गई. मंदिर की ओर से देश के राष्ट्रपति रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद को न्यौता भेजा गया. यहीं से शुरू हुई राजनीति, जो अब भी जब-तब होती रहती है.

सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार पर जवाहर लाल नेहरू और राजेंद्र प्रसाद के बीच मतभेद थे.
सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार पर जवाहर लाल नेहरू और राजेंद्र प्रसाद के बीच मतभेद थे.

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को जब इस बात का पता चला, तो उन्होंने डॉ राजेंद्र प्रसाद से भारत देश के सेक्युलर होने की दुहाई देते हुए मंदिर के उद्घाटन समारोह में न जाने को कहा. डॉ. राजेंद्र प्रसाद नहीं माने और मंदिर के उद्घाटन में गए. वहां उन्होंने देश की पुरानी परंपरा और इस परंपरा को कायम रखने में मंदिरों के योगदान के बारे में भाषण भी दिया. उस वक्त भारतीय राजनीति में नेहरू और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बीच की इस तल्खी को खूब उछाला गया.

लालकृष्ण आडवानी ने 1990 में सोमनाथ से रथयात्रा निकाली थी.
लालकृष्ण आडवानी ने 1990 में सोमनाथ से रथयात्रा निकाली थी.

सियासत के केंद्र में यह मंदिर 1990 के दशक में फिर सामने आया, जब उस वक्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे लाल कृष्ण आडवाणी ने इस सोमनाथ मंदिर से अयोध्या तक की रथयात्रा निकाली. भले ही बिहार में इस रथयात्रा को उस वक्त के मुख्यमंत्री रहे लालू यादव ने रोक दिया और आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इसके बीजेपी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. 1995 में एक बार फिर इस मंदिर का जिक्र तब आया, जब देश के राष्ट्रपति रहे शंकर दयाल शर्मा ने 1 दिसंबर 1995 को मंदिर को देश के लिए समर्पित कर दिया. मंदिर का संचालन एक न्यास के जिम्मे है, जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी, अमित शाह, केशुभाई पटेल, पी के लाहिड़ी, जे डी परमार और हर्ष नेवतिया जैसे नेता न्यास के सदस्य हैं.

Soamnath mandir
सोमनाथ मंदिर को 1996 में राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने देश को समर्पित किया था.

जब गुजरात राज्य अस्तित्व में आया तो सोमनाथ मंदिर जूनागढ़ जिले में था. 2013 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने राज्य में सात नए जिलों को बनाने की मंजूरी दी थी. इन साल जिलों में एक जिला था गिर सोमनाथ, जो अगस्त 2013 में अस्तित्व में आया. जूनागढ़ जिले के काटकर नए बने इस जिले में छह तालुका हैं. इनके नाम हैं वेरावल, तलाला, सूत्रपारा, कोडिनार, ऊना और गिर गधादा. गिर सोमनाथ जिले का मुख्यालय वेरावल में है. गुजरात के सबसे दक्षिण में स्थित इस जिले की सीमाएं अरब सागर से मिलती हैं.

इस जिले में चार विधानसभाएं हैं.
1. ऊना

ऊना में 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पंजाभाई वंश ने बीजेपी के कल्लूभाई राठौड़ को लगभग 8 हजार वोटों से हराया था. 2007 में ये सीट बीजेपी के कल्लूभाई राठौड़ के ही पास थी. इस बार भी कांग्रेस ने पंजाभाई वंश पर ही दाव लगाया है, जबकि बीजेपी ने इस बार हरिभाई बोघाभाई सोलंकी को मैदान में उतारा है. टिकट घोषित होने से पहले जब हरिभाई सोलंकी का नाम उम्मीदवार के तौर पर उछला था, तो कल्लूभाई राठौड़ के समर्थकों ने ऊना बंद का आयोजन किया था. ये ऊना दलित आंदोलन का भी केंद्र रहा है. इसी ऊना में अगस्त 2016 में गोरक्षकों ने दलितों की पिटाई की थी. इसके बाद पूरे देश में दलितों ने आंदोलन किया. गुजरात में जिग्नेश मेवाणी के नेतृत्व में आंदोलन हुए, वहीं यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस मुद्दे को खूब उछाला. जिग्नेश ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया है, ऊना में पहले से भी कांग्रेस का विधायक है, ऐसे में बीजेपी को यहां से उम्मीदवार बदलना पड़ा है.

ऊना में दलितों की पिटाई के बाद पूरे गुजरात में आंदोलन हुए थे.

2. कोडिनार सुरक्षित

कोडिनार अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है. 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के जेठाभाई सोलंकी ने कांग्रेस के मोहन भाई एम बाला को तकरीबन 8 हजार वोटों से हराया था. 2007 में भी ये सीट बीजेपी के ही पास थी और तब दीनूभाई सोलंकी चुनाव जीते थे. इस सीट पर उम्मीदवारों के नाम के ऐलान से ठीक पहले विधायक और बीजेपी के संसदीय सचिव जेठाभाई सोलंकी ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और फिर पार्टी भी छोड़ दी. उन्होंने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में दलितों ने अत्याचार का सामना किया है. सोलंकी ने कहा कि ऊना घटना के दौरान आनंदीबेन पटेल के शासन में कुछ कदम उठाए गए थे. विजय रूपानी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए कोई कदम नहीं उठाया. इसके बाद बीजेपी ने प्रो. डॉ. रामभाई बाढ़ेर को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है. इस बार भी कांग्रेस ने मोहन भाई एम बाला को ही उम्मीदवार बनाया है.

3. सोमनाथ

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सोमनाथ विधानसभा से जसाभाई लगातार तीन बार से विधायक हैं.

2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जसाभाई बराड ने बीजेपी के राजसीभाई जोटवा को लगभग 2000 वोटों से हराया था. 2014 में जसाभाई बराड ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में चले गए. यहां पर फिर से उपचुनाव हुए, जिसमें बीजेपी के प्रत्याशी जसाभाई बराड ने कांग्रेस के निशांत चोटई को 25,000 से अधिक वोटों से हरा दिया. बड़ी जीत हासिल करने के बाद जसाभाई बराड को उस वक्त मुख्यमंत्री रहीं आनंदीबेन पटेल ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया. जसाभाई लगातार तीन बार सोमनाथ से विधायक रहे हैं. इसके अलावा एक बार वो तलाला विधानसभा से भी जीत हासिल कर चुके हैं. इस बार भी सोमनाथ सीट पर बीजेपी से जसाभाई ही उम्मीदवार हैं. वो करडिया राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. वहीं कांग्रेस ने भी क्षत्रिय उम्मीदवार विमल चूडस्मा को उम्मीदवार बनाया है. क्षत्रिय वोटरों की संख्या यहां तकरीबन 28000 है, जबकि मुस्लिम वोटर 40,000 के आस-पास हैं. 32 हजार कोली, 25 हजार खरवास और 25000 अहीर बिरादरी के वोटर सोमनाथ विधानसभा में हैं.

4. तलाला
तलाला में 2012 के चुनाव में कांग्रेस के जसूभाई बराड ने बीजेपी उम्मीदवार गोविंद परमार को हरा दिया था. 2016 में जसू बराड का निधन हो गया तो उपचुनाव हुए. बीजेपी की ओर से फिर से गोविंद परमार मैदान में थे, जबकि कांग्रेस ने जसू बराड के छोटे बाई भगवानजी बराड को टिकट दिया था. गोविंद ने 2240 वोटों के अंतर से सीट जीत ली. 2007 में भी ये सीट कांग्रेस के जसू बराड के पास ही थी. 2002 के चुनाव में गोविंद परमार ने जसू बराड को पराजित किया था. बीजेपी ने इस बार भी गोविंदभाई परमार को ही उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस की ओर से भगवानजी बराड ही उम्मीदवार हैं. तलाला अपने आमों के लिए पूरे गुजरात में मशहूर है. यहां का केसर आम पूरे देश में एक्सपोर्ट किया जाता है. यहां से आम अमेरिका और यूरोप में भी एक्सपोर्ट किया जाता है. बीजेपी विधायक गोविंद परमार खुद करडिया राजपूत हैं. इस क्षेत्र में 35 हजार कोली, 32 हजार करडिया वोटर, 27000 पाटीदार और 25 हजार यादव वोटर हैं. कांग्रेस प्रत्याशी भगवानजी बराड भी करडिया राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.

जिले की खासियत

1. गिर का वन्य जीव अभयारण्य पूरे देश में अपने शेरों के लिए मशहूर है. गिर के जंगल में शेरों के अलावा हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, चिंकारा और बारहसिंगा पाए जाते हैं. यहां कई तरह के पक्षी भी पाए जाते हैं.

gir lion
गिर के शेर पूरी दुनिया में मशहूर हैं.

2. गिर सोमनाथ में बानेज गांव में चुनाव आयोग ने एक वोटर के लिए बूथ बनवाया है. 2002 के चुनाव से ही बानेज में एक ही वोटर हैं, जो मंदिर के पुजारी हैं. आयोग हर चुनाव में उनके लिए बूथ बनवाता है और वो भी हर साल वोट देने जाते हैं.

3. अक्टूबर 2017 में गिर सोमनाथ तब चर्चा में आया था जब गिद्दी समुदाय के लोगों की ओर से गुंद्रान गांव के लोगों पर हमला करने का मामला सामने आया था. इस हंगामे में 14 लोगों के घायल होने की खबर आई थी, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे.

4. सोमनाथ के पास में ही प्राची नाम का एक मंदिर है, जो भगवान कृष्ण के साथ जुड़ा है. माना जाता है कि कृष्ण ने यहीं पर अपने प्राण त्यागे थे.

ऐसी मान्यता है कि कृष्ण की मौत प्राची तीर्थ में ही हुई थी.
ऐसी मान्यता है कि कृष्ण की मौत प्राची तीर्थ में ही हुई थी. (फोटो: Soamnath Trust)

5. गिर सोमनाथ जिले का मुख्यालय वेरावल में है, जो गुजरात में मछली कारोबार का सबसे बड़ा गढ़ है. यहां मछली उत्पादन से जुड़ी 80 फैक्ट्रियां हैं, जहां से यूरोप के कई देशों में मछली की सप्लाई होती है.

6. इस जिले की तलाला विधानसभा में एक गांव है जाम्बूर. यहां पर बहुत से अफ्रीकी मूल के लोग रहते हैं, जिन्हें सिद्दी कहा जाता है. ये लोग मूलत: अफ्रीकी हैं, लेकिन बात सिर्फ गुजराती में करते हैं. ऐसी मान्यता है कि मुगल काल में मुगल शासकों ने इनकी कदकाठी को देखते हुए अपने अंगरक्षक के तौर पर नियुक्त किया था. तब से ये लोग यहीं रहते आ रहे हैं.


वीडियो में देखिए गिर के जंगलों में बने सबसे अनोखे बूथ की कहानी

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