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गुजरातः जहां आदिवासियों के इतने सुंदर घर देखकर कोई भी जल जाएगा

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छोटा उदयपुर. गुजरात में आदिवासी बेल्ट का एक हिस्सा. यहां से गुजरात का मध्य प्रदेश बॉर्डर शुरू हो जाता है. एमपी का अलिराजपुर जुड़ता है छोटा उदयपुर से.

एक दिन पहले ही टिकट फाइनल हुआ है कांग्रेस के मोहनभाई राठवा का. 9 बार जीत चुके हैं. 10 बार लगातार लिखा जाता अगर बीच में 2002 न होता.

कांग्रेस के मोहनभाई राठवा 9 बार चुनाव जीत चुके हैं. दसवीं बार लड़ रहे हैं (फोटोःअमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)
कांग्रेस के मोहनभाई राठवा 9 बार चुनाव जीत चुके हैं. दसवीं बार लड़ रहे हैं (फोटोःअमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)

शंकरसिंह वाघेला के जाने के बाद नेता विपक्ष भी बनाए गए. इतने बड़े कद के नेता और इतनी बार जीत चुके नेता के इलाके की हालत खस्ता है. सड़क थोड़ी ठीक है. लेकिन उस पर भी इतने पिछड़े आदिवासी इलाके में सार्वजनिक परिवहन की हालत ठीक न हो, तो लोगों को गाड़ियों की छतों और बोनट पर बैठकर सफर करना पड़ता है.

मुझे यूपी में भी गाड़ियों की छतों पर बैठकर सफर करते लोग दिखे कई साल हो गए. बिहार के दोस्त बताते हैं कि वहां भी अब ऐसा नहीं होता. गुजरात के इस इलाके में छत के साथ-साथ बोनट पर भी लोग बैठे दिखते हैं. बस ड्राइवर के शीशे के आगे जगह छोड़ देते हैं कि वो देख सके.

यहां के आदिवासी पिथौरा पेंटिंग बनाते हैं. इनके घरों में भी ये बनी होती हैं. (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)
यहां के आदिवासी पिथौरा पेंटिंग बनाते हैं. इनके घरों में भी ये बनी होती हैं. (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)

सबसे बड़ी दिक्कत रोजगार की है. यहां पर बस एक ही उद्योग है. माइनिंग का. डोलोमाइट. सफेद पत्थर जैसा होता है. इसका पाउडर टूथपेस्ट समेत कई चीजें बनाने में इस्तेमाल किया जाता है.

आदिवासियों के घरों की दीवारों पर पिथौरा पेंटिंग्स बनाई जाती हैं. इतनी खूबसूरत कि जलन होने लगे. उसी घर में रहने का मन करने लगे. गर्मी का मौसम होता, तो मुझे ताड़ी भी पीने को मिलती.

इलाके के लोग इल्ज़ाम लगाे हैं कि रेलवे के राज्यमंत्री रहे नारनभाई ने रेलवे लाइन का अलाइनमेंट बदलवाया. ताकि अपनी ज़मीन बचा सकें. (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)
इलाके के लोग इल्ज़ाम लगाे हैं कि रेलवे के राज्यमंत्री रहे नारनभाई ने रेलवे लाइन का अलाइनमेंट बदलवाया. ताकि अपनी ज़मीन बचा सकें. (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)

यहां एक रेलवे लाइन बन रही है. एमपी में जाती है. लोग कहते हैं कि नारनभाई ने रेल लाइन को थोड़ा चेंज करवा दिया, ताकि उनकी जमीन उसमें न जाए. नारनभाई रेलवे के राज्यमंत्री रह चुके हैं. मैं आदिवासियों के जिस घर में गया, उनके घर के ठीक सामने से रेलवे लाइन निकली है. उनके घर तक पहुंचने वाले रास्ते का पूरा हुलिया चेंज हो गया. उनकी भी जमीन रेलवे लाइन में गई है. उनकी जिंदगी पर रेलवे लाइन का कैसा असर पड़ा, कुछ साल बाद ही पता चलेगा. साढ़े तीन साल पहले जब मैं उनसे मिला था, तो मैंने उन्हें कहा था कि दिल्ली आएं, तो मिलें. उन्होंने हंसते हुए कहा था कि वडोदरा तक तो गया नहीं कभी. इस बार मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.

मोहनभाई उम्रदराज नेता हैं. उनके सामने भाजपा का नया नेता है. बहुत से लोग उसे जानते तक नहीं हैं, लेकिन वो लोग मोदी जी को जानते हैं.

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संखेडा के मशहूर फर्नीचर बनाने वाले हों या फिर छोटा उदयपुर के शिवराम भाई. तमाम दिक्कतों के बाद भी उनका भरोसा नरेंद्र मोदी पर है. शिवराम भाई कहते हैं कि मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो यहां सब कुछ ठीक था. वो दो केस में कई सालों से कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं. एक उनकी बेटी का केस है, दूसरा उनकी प्रॉपर्टी का. शिवराम भाई महंगाई से भी परेशान हैं. लेकिन उनका भरोसा नरेंद्र मोदी पर है.

संखेडा के फर्नीचर बहुत मशहूर हैं. सितंबर 2014 में जब चीन के नेता शी चिनपिंग भारत आए. तो अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट पर जिस झूले में नरेंद्र मोदी के साथ झूले, वो संखेडा का ही था. जापान के नेता शिंजो अबे को संखेडा में बनी कुर्सी पर बिठाया गया.

सनखेड़ा फर्नीचर बहुत सस्ता होता है और सालों-साल चलता है (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)
सनखेड़ा फर्नीचर बहुत सस्ता होता है और सालों-साल चलता है (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)

बहुत खूबसूरत. टिकाऊ. सस्ता. सालों-साल तक एक ही कंडिशन में रहने वाला फर्नीचर. लेकिन GST से परेशान. पहले कोई टैक्स नहीं लगता था. VAT आया, तो उससे भी इसे बाहर रखा गया. लेकिन GST लगाया गया. पहले 28%. बाद में 18% कर दिया गया. बहुत छोटे लेवल का काम है. बस संखेडा में ही लोग इसे बनाते हैं. ज्यादातर काम हाथ से होता है.

संखेडा के फर्नीचर की बस दो दिक्कतें हैं. बल्कि ये कहें कि दिक्कत एक है और एक मदद उन्हें सरकार से चाहिए. दिक्कत GST. मदद ये चाहिए कि सरकार बस उनके काम को हल्का सा पुश कर दे और बिक्री को चैनलाइज़ कर दे. सरकार का एक डिपार्टमेंट था, जो उनके फर्चीनर को दिल्ली आदि में रखता था, लेकिन उसके लिए इन्हें फर्नीचर बनाकर दे देना पड़ता था और उसकी बिक्री का इंतजार करना पड़ता था, बिक्री के भी महीनों बाद पैसा मिलता था. कुछ टूट-फूट हुई, तो नुकसान इनके जिम्मे. तो इन लोगों ने वहां देना बंद कर दिया.
इस काम से जुड़े लोग (जो BJP से भी जुड़े हैं) GST की वजह से नाराज हैं, लेकिन भरोसा है कि नरेंद्र मोदी सब ठीक कर देंगे.

इतना भरोसा बड़ी चीज है. ये भरोसा टूटना खतरनाक.


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