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नरेंद्र मोदी 16 जनवरी 2012 की सुबह 11.35 पर किए वादे से मुकर गए

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लल्लनटॉप का चुनावी दौरा. हवा-हवाई सर्वे जैसा कुछ नहीं होता इसमें. हर किस्म के लोगों से मुलाक़ात का लंबा सिलसिला होता है. पहले यूपी और फिर हिमाचल के बाद अब अगला पड़ाव है गुजरात. गांधी का गुजरात. मोदी का गुजरात. गुजरात में दी लल्लनटॉप की टीम पहुंची है सुरेंद्रनगर, जिसे सौराष्ट्र का प्रवेशद्वार कहा जाता है. यहां सौरभ द्विवेदी ने उन लोगों के समूह से बात की जो अक्सर कैमरे के पीछे या लैपटॉप के आगे पाए जाते हैं. पत्रकार बिरादरी. सुरेंद्रनगर के जर्नलिस्ट्स साजिदभाई, जिग्नेशभाई, जितेंद्रभाई, भावेशभाई, मयूरभाई, राजेशभाई, तुषारभाई और विपुलभाई से खूब बातें हुईं. दिलचस्प बातें निकल आई हैं, जो आपसे साझा कर रहे हैं.


पानी को तरसते लोग

तमाम लोगों से बातचीत में जो सबसे बड़ा मुद्दा उभर कर सामने आया वो था पानी का. पानी की भयानक समस्या से जूझते हैं सुरेंद्रनगर वाले. नर्मदा पे बना बांध सरदार सरोवर यूं तो सारे गुजरात की प्यास बुझा रहा है, लेकिन सुरेंद्रनगर प्यासा है. पास में ही चोटिला में नरेंद्र मोदी ने रैली की और आश्वासन दिया कि पानी मिलेगा, लेकिन नहीं मिला. कहते हैं नर्मदा पर डैम का सबसे बड़ा फायदा सुरेंद्रनगर को मिला है जबकि ये ग़लत है. सुरेंद्रनगर में दस दिन में एक बार पानी आता है. वो भी सिर्फ एक घंटा. इससे निजात पानी है तो बोरवेल खुदवा लो. पीने के लिए पानी खरीद लो. 30 सालों से ये दिक्कत है. जब नई पाइपलाइन डाली गई थी, तब गटर की लाइन भी साथ जुड़ गई. घर-घर गंदा पानी पहुंचा.

केशुभाई पटेल से लेकर नरेंद्र मोदी तक सब जुमलेबाज़

पत्रकार बिरादरी बताती है कि 1995 में केशुभाई ने बोला था सुरेंद्रनगर को पानी देंगे. अब तक वो वादा जुमला ही बना हुआ है. उनके बाद मुख्यमंत्री बदलते रहे लेकिन समस्या जस की तस बनी रही. मोदीभाई ने भी केशुभाई के इस जुमले को कैरी किया.

जैसा भी पानी मयस्सर होता है वो साफ़ नहीं है. बी-12 विटामिन की कमी से जूझ रहे हैं इलाके के 80 प्रतिशत से ज़्यादा बाशिंदे. इसका स्वास्थ्य पर बहुत असर हो रहा है. इलाके का हाल ऐसा है कि 40 साल पहले टीबी के मरीज़ यहां इसलिए आते थे कि यहां की आबोहवा अच्छी थी. अब यहां के लोग खुद टीबी से जूझ रहे हैं.

केशुभाई पटेल के साथ नरेंद्र मोदी.
केशुभाई पटेल के साथ नरेंद्र मोदी.

सारे ज़रूरी ओहदों पर भाजपा के लोग हैं, फिर भी…

इसे ऐसे देखिए. नगर पालिका अध्यक्ष भाजपा का. विधायक भाजपा का. लोकसभा सांसद भाजपा का. राज्यसभा सांसद भाजपा का. जिले से मंत्री भाजपा का. प्रदेश में सरकार भाजपा की. देश में भी सरकार भाजपा की. इसके बावजूद डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर सुरेंद्रनगर के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं.

लॉ एंड ऑर्डर का हाल

लॉ एंड ऑर्डर की दिक्कत भी है. पत्रकार बिरादरी खुद की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित है. दो गुटों के बवाल को सुलटाने में पुलिस को ही डर लगता है. पत्रकारों की रक्षा क्या करेगी! शराबबंदी सिर्फ चुनावों तक है. वरना हमेशा बिकती है. चुनावों के वक़्त भी चोरी-छिपे बिक ही जाती है. ऑफिशियल बैन का मज़ाक उड़ता है यहां. बल्कि पूरे ही गुजरात में. इससे तो शराबबंदी हटा ही दी जाए. सरकार को राजस्व तो मिलेगा. शमशान घाट भी एक ही है. जिसकी इलेक्ट्रिक मशीन बिगड़ गई है. लकड़ी खुद लानी पड़ती है.

नरेंद्र मोदी की वादाखिलाफी

2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2600 करोड़ रुपए सुरेंद्रनगर को देना कमिट किया था. कॉटन इंडस्ट्री को जिलाने का वादा किया था. सुरेंद्रनगर को टेक्सटाइल का हब बनाने की बात की थी. पत्रकार बिरादरी एग्जैक्ट दिन तारीख भी बताती है. 16 जनवरी 2012 को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर.

पत्रकार कहते हैं कि हम लोग काम करते हैं, सरकार की आलोचना करते हैं, जनता से जुड़े मुद्दे भी उठाते हैं. लेकिन जनता हमारी बात को नहीं उठाती. ऐसे में सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ता.

2012 में सुरेंद्रनगर को भेंट दी थी नरेंद्र मोदी ने.
2012 में सुरेंद्रनगर को भेंट दी थी नरेंद्र मोदी ने.

कांग्रेस क्यों फेल हो रही है? कमज़ोर होने की क्या वजह है? भाजपा आगे क्यों है?

सौरभ ने जब ये सवाल पत्रकारों से पूछे तो दिलचस्प जवाब मिले. भाजपा का जो पार्टी बेस है, उसमें इंटरनल डेमोक्रेसी है. ऐसा कांग्रेस में नहीं है. भाजपा जैसा कैडर मैनेजमेंट भी नहीं है कांग्रेस का. वैसे भी प्रदेश में 20-22 सालों से हिंदूवादी राजनीति का जोर है. विकास हो न हो धर्म की रक्षा होती रहे. कांग्रेस में गुटबाजी है. मैनेजमेंट ठीक नहीं है. कांग्रेस लोगों में ठीक से जा भी नहीं पाई. भाजपा झूठ बोल के भी काम चला लेती है.

हालांकि कुछ पत्रकारों का ये कहना भी है कि इस बार कांग्रेस मज़बूत लग रही है. राहुल गांधी ने कमान संभाल के खुद काम बांटे हैं.

आख़िरी सवाल ‘भाजपा ने चुनाव प्रचार के लिए बाहर से लोग क्यों बुलाए हैं?’ के जवाब में सबका एकमत है कि चुनाव फंसा हुआ है इसलिए बुलाए हैं.

पत्रकारों से बातचीत का ये पूरा वीडियो यहां देखिए: 


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