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राजकोट, लगभग 300 साल पहले शासक को मारकर जिसका नाम मासूमाबाद रख दिया गया था

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गुजरात का इलाका है सौराष्ट्र. महात्मा गांधी के पिता करमचंद गांधी सौराष्ट्र के दीवान थे. इस सौराष्ट्र की राजधानी थी राजकोट. महात्मा गांधी पैदा भले ही पोरबंदर में हुए थे, लेकिन उनका बचपन राजकोट में ही बीता था. हाईस्कूल तक की पढ़ाई महात्मा गांधी ने राजकोट से ही की थी. उन्होंने अल्फ्रेड हाई स्कूल से पढ़ाई की थी. महात्मा गांधी के सबसे बड़े हथियार सत्य और अहिंसा का शुरुआती इस्तेमाल गांधी ने राजकोट में ही किया था.

इस स्कूल में गांधी जी 12वीं तक पढ़े. सोर्स: Wikimedia Commons
इस स्कूल में गांधी जी 12वीं तक पढ़े. सोर्स: Wikimedia Commons

राजकोट की स्थापना 1612 ई में जडेजा वंश के ठाकुर साहब विभाजी जडेजा ने की थी. यहां कुल आठ विधानसभाएं हैं.

1. राजकोट पूर्व

राजकोट पूर्व से कांग्रेस के इंद्रनील राजगुरु ने 2012 का विधानसभा चुनाव चार हजार वोटों से जीता था. इंद्रनील राजगुरु ने बीजेपी के कश्यप चिमनभाई शुक्ला को मात दी थी. 2007 में इस सीट का नाम राजकोट-1 था और इस सीट से बीजेपी के गोविंदभाई ऊखाभाई पटेल ने कांग्रेस के जयेशभाई विट्ठलभाई रदाडीया को 35 हजार से अधिक वोटों से हराया था. इस बार बीजेपी ने यहां से अरविंद भाई रेवाडी को उम्मीदवार बनाया है. वहीं कांग्रेस ने मिथुल डोंगा को उम्मीदवार बनाया है.

2. राजकोट पश्चिम

2012 के चुनाव में यहां से बीजेपी के वजूभाई रुदाभाई वाला जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के अतुल रसिकभाई रजनी को लगभग 25 हजार वोटों से हराया था. 2014 में केंद्र सरकार ने वजूभाई को कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया. इसके बाद राजकोट पश्चिम की सीट पर उपचुनाव हुए, जिसमें बीजेपी के विजय रूपानी ने जीत हासिल की और मुख्यमंत्री बने. राजकोट पश्चिम वो सीट है, जिससे पहली बार नरेंद्र मोदी 2002 में चुनाव लड़े थे और जीतकर मुख्यमंत्री बने थे. ये सीट लगातार बीजेपी के खाते में रही है. 2007 में भी इस सीट से बीजेपी के वजूभाई वाला ने कांग्रेस की कश्मीरा बकुलभाई नाथवानी को करीब 10 हजार वोटों से हरा दिया था. इस बार भी बीजेपी से गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी उम्मीदवार हैं. उनके सामने कांग्रेस ने राजकोट पूर्व के विधायक इंद्रनील राजगुरु को मैदान में उतारा है.

राजकोट गुजरात की सबसे हॉट सीट मानी जाती है.
राजकोट गुजरात की सबसे हॉट सीट मानी जाती है.

3. राजकोट दक्षिण

यह नई सीट है, जो 2008 में अस्तित्व में आई थी. 2012 में बीजेपी के गोविंद पटेल चुनाव जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के मितुल हिम्मतभाई डोंगा को चुनाव में करीब 28 हजार वोटों से मात दी थी. इस बार भी बीजेपी ने गोविंदभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है. वहीं कांग्रेस ने यहां से दिनेश चोवटिया को उम्मीदवार बनाया है.

4. राजकोट ग्रामीण (एससी)

2012 के चुनाव में बीजेपी की भानुबेन मनोहरभाई बावरिया चुनाव जीती थीं. उन्होंने कांग्रेस के लाखाभाई जेठाभाई सागठिया को लगभग 11 हजार वोटों से मात दी थी. 2007 के चुनाव में भी भानुबेन मनोहरभाई ने कांग्रेस की कांताबेन बाबूभाई डाभी को 41 हजार से अधिक वोटों से हराया था. बाद में 2012 के कांग्रेस उम्मीदवार लाखाभाई बीजेपी में शामिल हो गए. इसके बाद इस चुनाव में बीजपी से लाखाभाई सागटिया उम्मीदवार हैं. वहीं कांग्रेस ने वाश्रम ए संगठिया को उम्मीदवार बनाया है.

वो दुर्लभ क्षण जब मोदी जी कैमरे में नहीं देख रहें.
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5. जसदन

2012 में कांग्रेस के भोलाभाई भीखाभाई गोहेल चुनाव जीते थे. उन्होंने बीजेपी के भरतभाई बोघरा को 10 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया था. 2017 के राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के बाद बैलेट दिखाने का आरोप लगा था. इसके बाद पार्टी ने उन्हें निकाल दिया था. 2007 में ये सीट कांग्रेस के कुंवरजी मोहनभाई बावलिया ने जीती थी. उन्होंने बीजेपी के पोपटभाई अमरसीभाई राजपारा को 25 हजार से अधिक वोटों से हराया था. इस बार भी बीजेपी से भरतभाई बोघरा ही उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने अपने पुराने विधायक कुंवरजी मोहनभाई बावलिया पर दांव लगाया है.

6. गोंडल

2012 के चुनाव में बीजेपी के जयराज सिंह जडेजा चुनाव जीते थे. उन्होंने गुजरात परिवर्तन पार्टी के गोरधनभाई जडफिया को 19 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. यहां पर कांग्रेस का उम्मीदवार तीसरे नंबर पर था. 2004 में जमीन विवाद में नीलेश रायानी नाम के रीयल एस्टेट एजेंट की हत्या हो गई थी. अगस्त 2017 में 13 साल पुराने मामले में हाई कोर्ट ने जयराज सिंह जडेजा को उम्रकैद की सजा दी है. 2007 के चुनाव में ये सीट एनसीपी के खाते में थी. इस सीट से चंदूभाई बच्चूभाई वाघसिया ने बीजेपी के जयराज सिंह को कुल 488 वोटों से हरा दिया था. हालांकि जयराज सिंह ने 2012 में ये सीट जीत ली. इस बार बीजेपी से गीताबेन जयराजभाई जडेजा उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने अर्जुन खटारिया को मैदान में उतारा है.

राजकोट में कुल आठ विधानसभाएं हैं.

7. जेतपुर

2012 में कांग्रेस के जयेशभाई रादडीया जीते थे. उन्होंने बीजेपी के जसूबेन सवजीभाई कोराट को लगभग 18 हजार वोटों से हराया था. 2013 में कांग्रेस विधायक जयेशभाई ने विधानसभा और कांग्रेस दोनों से ही इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए. इसके बाद सीट पर उपचुनाव हुए, जिसमें जयेशभाई को जीत हासिल हुई. उन्हें कैबिनेट में शामिल कर लिया गया और खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों का मंंत्री बनाया गया. 2007 में ये सीट जसूबेन सवजीभाई कोराट के पास थी और उन्होंने कांग्रेस के गोरधनभाई पोपटभाई दमेलिया को 12 हजार से अधिक वोटों से हराया था. इस बार भी बीजपी ने इस सीट से जयेशभाई रादडीया को ही उम्मीदवार बनाया है. उनके सामने कांग्रेस ने रवी अंबालिया को टिकट दिया है.

8. धोराजी

2012 में कांग्रेस के विट्ठल भाई हंसराज भाई रदादिया चुनाव जीते थे. उन्होंने बीजेपी के हरीलाल माधवजी भाई पटेल को लगभग 3 हजार वोटों से मात दी थी. 2013 में विट्ठलभाई ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए. इस सीट पर 2013 में उपचुनाव हुए थे. बीजेपी के प्रवीण मकड़िया ने इस चुनाव में कांग्रेस के राजूभाई त्रिकमभाई कोटादिया को हरा दिया था. 2007 में भी ये सीट विट्ठलभई हंसराज भाई रदादिया के ही पास थी और उन्होंने बीजेपी के शामजी भाई भीमजीभाई कुंट को 12 हजार से अधिक वोटों से हराया था. इस बार भी बीजेपी के हरीभाई पटेल उम्मीदवार हैं. कांग्रेस की ओर से ललित वसाया उम्मीदवार है.

राजकोट की स्थापना विभाजी जडेजा ने की थी.
राजकोट की स्थापना विभाजी जडेजा ने की थी.

जब राजकोट का नाम मासूमाबाद हो गया था

राजकोट शहर की स्थापना ठाकोरजी विभाजी ने 1610 में की थी. राजकोट का शाब्दिक अर्थ होता है राजकुमारियों का शहर, जिसका नाम ठाकोरजी विभाजी के सहयोगी राजू संधी ने रखा था. उस वक्त राजकोट का 282 वर्ग मील में फैला हुआ था, जिसमें 64 गांव शामिल थे. 1720 में सौराष्ट्र के डिप्टी सूबेदार मासूम खान ने राजकोट पर हमला कर दिया और उसके शासक को मारकर नाम रख दिया मासूमाबाद. 1732 में राजकोट के मारे गए शासक के बेटे मेरामानजी ने मासूम खान को हरा दिया और फिर से इसका नाम राजकोट रख दिया. 1822 में अंग्रेजी शासनकाल में इसका नाम काठियावाड एजेंसी कर दिया गया. इस वक्त राजकोट में कस्टम और रेलवे के जो ऑफिस हैं, अंग्रेज अपने ऑफिस के तौर पर उनका इस्तेमाल करते थे.

नरेंद्र मोदी की राजकोट रैली में उनका एक डुप्लीकेट भी देखा गया.
नरेंद्र मोदी की राजकोट रैली में उनका एक डुप्लीकेट भी देखा गया.

1889 में राजकोट रेल मार्ग से जुड़ गया था. 1893 में राजकोट और जेतालसर के बीच रेल सेवा शुरू हो गई. आजी और नारी नदी के किनारे बसे राजकोट में पीने के पानी की व्यवस्था करने के लिए 1895 में लालपरी झील का निर्माण करवाया. 1925 में महात्मा गांधी ने पहली बार इस शहर में शिक्षण संस्थान स्थापित किए. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी इस शहर की भूमिका रही. आजादी के बाद 15 अप्रैल 1948 को सौराष्ट्र अस्तित्व में आया. राज्य बनने के बाद राजकोट इसकी राजधानी बना और 31 अक्टूबर 1956 तक बॉम्बे स्टेट में विलय तक इसकी राजधानी बना रहा. 1 मई 1960 को राजकोट फिर से गुजरात में शामिल हो गया.


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