Submit your post

Follow Us

बनासकांठा, कांग्रेस का वो गढ़ जहां हर साल बाढ़ में दर्जनों लोग मर जाते हैं

5
शेयर्स

माउंटआबू और अरावली रेंज के बीच एक नदी बहती है. नाम है पश्चिमी बनास. इसे बनास के नाम से भी जाना जाता है. गुजरात के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से से होकर गुजरती है. इस नदी के किनारे एक शहर बसा हुआ है. शहर का नाम नदी के नाम पर रखा गया है बनासकांठा. इस शहर के रेगिस्तान की सीमाएं पाकिस्तान से जुड़ती हैं, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से ये शहर बेहद संवेदनशील है. इस संवेदशील शहर पर और शहरों की तरह कुदरत कभी मेहरबान नहीं रही है. आजादी के बाद से अब तक गुजरात में बारिश और बाढ़ ने जब भी तबाही मचाई है, इस इकलौते शहर को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. इस साल भी जब जुलाई के अंतिम दिनों में बाढ़ आई थी तो सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बनासकांठा ही था. बाढ़ की वजह से अकेले गुजरात में करीब 270 लोगों की मौत हो गई थी. उनमें से अकेले 61 लोगों की मौत बनासकांठा में हुई थी.

इस साल बाढ़ में पूरा बनासकांठा डूब गया था.
इस साल बाढ़ में पूरा बनासकांठा डूब गया था.

आमतौर पर ये जिला कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. इस जिले में 9 विधानसभा सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत हासिल की थी. 2014 में एक सीट पर उपचुनाव हुआ तो वो सीट भी बीजेपी के पाले से खिसककर कांग्रेस के साथ आ गई. कहा जाता है कि गुजरात की बीजेपी दो खेमों में बंटी हुई है. एक खेमा मुख्यमंत्री विजय रूपानी और नितिन पटेल का है, जबकि दूसरा खेमा शंकरभाई लगधीरभाई पटेल का है, जिन्हें क्षेत्र के लोग शंकर चौधरी के नाम से जानते हैं.

शंकर चौधरी बनासकांठा से ही आते हैं और बनासकांठा की एक सीट वाव से विधायक हैं. जब हार्दिक पटेल के पाटीदार अनामत आंदोलन और ऊना में दलितों की पिटाई के बाद ऊना आंदोलन की वजह से गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को इस्तीफा देना पड़ा था तो शंकर चौधरी ने खुद को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लॉबिंग की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शंकर चौधरी ने मुख्यमंत्री बनने के लिए संघ के नेताओं से कई बार मुलाकात की थी, लेकिन अंतिम वक्त में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने विजय रूपानी का नाम फाइनल कर दिया था. दो खेमों में बंटी बीजेपी इस जिले में आपसी खींचतान से ही परेशान है.

वाव

2012 में बीजेपी के शंकरभाई लगधीरभाई पटेल ने यहां से चुनाव जीता था. उन्होंने कांग्रेस के जेनीबेन नागाजी ठाकोर को करीब 12 हजार वोटों से मात दी थी. चुनाव जीतने के बाद शंकर चौधरी को कैबिनेट में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, मेडिकल शिक्षा, पर्यावरण और शहरी विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. 2007 के चुनाव में भी ये सीट बीजेपी के ही खाते में थी. बीजेपी के पर्बतभाई सावाभाई पटेल ने आईएनडी के मावजीभाई छतरभाई पटेल को 42 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया था. इस बार बीजेपी ने शंकरभाई चौधरी को ही फिर से उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने भी जेनीबेन ठाकोर को ही चुनावी मैदान में उतारा है.

शंकरभाई लगधिरभाई पटेल.
शंकरभाई लगधीरभाई पटेल.

थराड

2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ये सीट जीती थी. बीजेपी के प्रभातभाई सवाभाई पटेल ने कांग्रेस के मावजीभाई छत्राभाई पटेल को तीन हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. ये सीट 2008 में परिसीमन के बाद बनी थी. बीजेपी ने इस बार चुनाव में इस सीट से परबतभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस से उनके सामने डीडी राजपूत चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी विधायक प्रभाल पटेल इलाके के कद्दावर नेता माने जाते हैं. पहले प्रभात कांग्रेस में थे, लेकिन अब वो बीजेपी से विधायक हैं.

धनेरा

2012 के चुनाव में धनेरा की सीट कांग्रेस के खाते में थी. कांग्रेस के जोयताभाई कसनाभाई पटेल ने वसंतभाई रणछोड़जी पुरोहित को 30 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. 2007 के चुनाव में ये सीट बीजेपी के पास थी. यहां से मफतलाल मोतीराम पुरोहित ने कांग्रेस के नाथाभाई हीगोलाभाई पान्त्रोड को 13 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. बीजेपी ने इस बार मावजीभाई रबारी को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने इस सीट से फिर से नाथाभाई पटेल को ही टिकट दिया है.

दांता

दांता सीट 2012 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी. इस सीट पर कांग्रेस के कांतिभाई कलाभाई खरादी ने बीजेपी के गामाभाई भीखाभाई खरादी को करीब 27 हजार वोटों से हरा दिया था. 2007 में जब इस सीट पर चुनाव हुए थे, तो कांग्रेस के मुकेश कुमार भीरावदनजी गधावी ने बीजेपी के जवानसिंह गंभीरसिंह सोलंकी को करीब 33 हजार वोटों से हरा दिया था. बीजेपी ने इस सीट पर मालजीभाई कोदरबी को उम्मीदवार बनाया है. कांतिभाई कलाभाई खरादी फिर से इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. आदिवासी सीट है. 90 और 95 के चुनाव को छोड़ दें तो यह सीट कांग्रेस के पास रही है.

कांतिभाई कलाभाई खरादी
कांतिभाई कलाभाई खरादी.

वडगाम

वडगाम सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित थी. इस सीट पर कांग्रेस के मनेलाल जेठाभाई वाघेला ने बीजेपी के फकीरभाई राघाभाई वाघेला को करीब 22 हजार वोटों से मात दी थी. 2007 में भी ये सीट सुरक्षित ही थी. इस सीट पर बीजेपी के फकीरभाई राघाभाई वाघेला ने कांग्रेस के दौलतभाई परमार को करीब 10 हजार वोटों से मात दी थी. इस बार बीजेपी ने विजयभाई हरखाभाई चक्रवती को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने इस सीट से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है. ऊना आंदोलन से निकले दलित नेता जिग्नेश मेवानी इस सीट से उम्मीदवार हैं, जिन्हें कांग्रेस समर्थन कर रही है.

पालनपुर

पालनपुर की सीट 2012 में कांग्रेस के खाते में गई थी. इस सीट पर कांग्रेस के महेश कुमार अमरुतिलाल पटेल ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने बीजेपी के गोविंदभाई माधवलाल प्रजापति को पांच हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. 2007 के चुनाव में ये सीट बीजेपी के खाते में थी. बीजेपी के गोविंदभाई माधवलाल प्रजापति ने कांग्रेस के राजेंद्रकुमार दूधालाल जोशी को 16 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. इस बार बीजेपी ने लालजीभाई प्रजापति को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने फिर से महेश कुमार अमृतलाल पटेल को ही उम्मीदवार बनाया है.

महेश कुमार अमृतलाल पटेल.
महेश कुमार अमृतलाल पटेल.

दीसा

दीसा में 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लीलाधरभाई खोडाजी वाघेला ने जीत दर्ज की थी. वाघेला ने कांग्रेस के राजेंद्रकुमार दूधालाल जोशी को 17 हजार से अधिक वोटों से हराया था. राजेंद्र कुमार को राजूभाई जोशी के नाम से भी जाना जाता है. 2014 में जब लोकसभा ते चुनाव हुए तो दीसा के विधायक लीलाधरभाई खोडाजी को बीजेपी ने पाटन से लोकसभा का टिकट दे दिया. इसके बाद दीसा में उपचुनाव हुए. इसमें कांग्रेस के गोवाभाई हमीरभाई रबारी ने बीजपी उम्मीदवार लेबाभाई चमनजी ठाकोर को हरा दिया. 2007 के चुनाव में ये सीट बीजेपी के ही पास थी. बीजेपी के लीलाधरभाई खोडाजी वाघेला ने कांग्रेस के गोवाभाई हमीरभाई रबारी को 18 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. बीजेपी ने इस सीट से शशीकांतभाई पंड्या को चुनावी मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने अपने पुराने उम्मीदवार गोवाभाई हमीरभाई रबारी को चुनावी मैदान में उतारा है.

दीयोदर

दीयोदर में 2012 में चुनाव हुए तो बीजेपी के केशाजी शिवाजी चौहान ने कांग्रेस के गोवाभाई हमीरभाई रबारी को करीब 21 हजार वोटों से मात दी थी. 2007 के चुनाव में बीजेपी के अनिल कुमार अमरुतिलाल माली ने बीएसपी के मनसिंहजी प्रतापसिंहजी वाघेला को 20 हजार से अधिक वोटों से पटखनी दी थी. इस बार बीजेपी ने केशाजी चौहान को यहां से उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने इस सीट से शिवभाई भूरिया को चुनावी मैदान में उतारा है.

केशाजी चौहान.
केशाजी चौहान.

कांकरेज

कांकरेज में 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. कांग्रेस के दर्शीभाई लाखाभाई खानपुरा ने बीजेपी के किर्तीसिंह प्रभात सिंह वाघेला को मात्र 600 वोटों से हरा दिया था. 2007 के चुनाव में बीजेपी के बाबूभाई जेसांगभाई देसाई ने कांग्रेस के दर्शीभाई लाखाभाई खानपुरा से ये सीट मात्र 840 वोटों से जीत ली थी. बीजेपी ने इस सीट पर फिर से किर्तीसिंह वाघेला पर ही दांव लगाया है. कांग्रेस ने दिनेश जलेरा पर दांव लगाया है.

बाढ़ के बाद राहत और बचाव के लिए अगस्त के शुरुआती दिनों में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी बनासकांठा गई थीं. वहां उन्होंने राहत पैकट बंटवाए थे. इस दौरान आरोप लगा था कि बीजेपी ने राहत सामग्री वाले पैकेट पर पार्टी का चिह्न लगवाया है. वहीं स्मृति ने कहा था कि बनासकांठा के लोग बाढ़ से परेशान हैं और कांग्रेस के पांच विधायक बंगलुरु के रिजॉर्ट में आराम फरमा रहे हैं. 8 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनासकांठा के दौरे पर थे, तो उन्होंने एक बार फिर से यही आरोप दुहराए और बाढ़ के दौरान बीजेपी के किए गए कामों को भी गिनाया.


गुजरात चुनाव की लल्लनटॉप ख़बरें यहां पढ़ें:

‘हूं छू विकास’ के दावे के आगे अब एक सवाल खड़ा है – ‘किसका विकास’

पीएम मोदी ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है

ये राहुल अब पहले वाला राहुल गांधी नहीं रहा, तेवर बदल गए हैं इनके

10 साल PM रहते हुए मनमोहन सिंह ने जो न किया, वो इस चिट्ठी में कर दिया

वीडियो: आपकी मम्मी जो साड़ी पहनती हैं वो यहां तैयार होती है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

चुनाव 2018

कमल नाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, कैबिनेट में ये नाम हो सकते हैं शामिल

कमल नाथ पहली बार दिल्ली से भोपाल की राजनीति में आए हैं.

राजस्थान: हो गया शपथ ग्रहण, CM बने गहलोत और पायलट बने उनके डेप्युटी

राहुल गांधी, मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस के ज्यादातर बड़े नेता जयपुर के अल्बर्ट हॉल पहुंचे हैं.

मायावती-अजित जोगी के ये 11 कैंडिडेट न होते, तो छत्तीसगढ़ में भाजपा की 5 सीटें भी नहीं आती

कांग्रेस के कुछ वोट बंट गए, भाजपा की इज़्ज़त बच गई.

2019 पर कितना असर डालेंगे पांच राज्यों के चुनावी नतीजे?

क्या मोदी के लिए परेशानी खड़ी कर पाएंगे राहुल गांधी?

क्या अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए अपनी गोटी सेट कर ली है

लेकिन सचिन पायलट का एक दाव अशोक गहलोत को चित्त कर सकता है.

मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी क्यों हैं ये नतीजे?

आज लोकसभा चुनाव हो जाएं तो पांच राज्यों में भाजपा को क्यों लगेगा जोर का झटका?

भंवरी देवी सेक्स सीडी कांड से चर्चित हुई सीटों पर क्या हुआ?

इस केस में विधायक और मंत्री जेल में गए.

क्या शिवराज के कहने पर कलेक्टरों ने परिणाम लेट किए?

सोशल मीडिया का दावा है. जानिए कि परिणामों में देरी किस तरह हो जाती है.

राजस्थान चुनाव 2018 का नतीजा : ये कांग्रेस की हार है

फिनिश लाइन को पार करने की इस लड़ाई में कांग्रेस ने एक बड़ा मौका गंवा दिया.

बीजेपी को वोट न देने पर गद्दार और देशद्रोही कहने वाले कौन हैं?

जनता ने मूड बदला तो इनके तेवर बदल गए और गालियां देने लगे.