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बीजेपी के वो 8 बड़े नेता जो गुजरात चुनाव में हार गए

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गुजरात में भारतीय जनता पार्टी लगातार छठी बार सरकार बनाने जा रही है. भले ही राहुल गांधी लगातार गुजरात में चुनाव प्रचार करते रहे, लेकिन वो अपनी पार्टी को हारने से नहीं बचा सके. उनका हासिल बस इतना सा रहा कि उन्होंने कुछ सीटों की बढ़त हासिल कर ली. लेकिन इस चुनाव में बीजेपी के कुछ ऐसे भी बड़े चेहरे रहे, जो खुद की सीट नहीं बचा सके.

#1. शंकर चौधरी

Shankar Chaudhari

क्यों बड़े नेताः विजय रूपानी की सरकार में राज्य मंत्री थे. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, मेडिकल शिक्षा, पर्यावरण, शहरी विकास मंत्रालय उनके पास था.
सीट: वाव (बनासकांठा)
किसने हरायाः कांग्रेस की जेनीबेन ने
कितने अंतर सेः 6,655 वोटों से
क्यों हारे शंकर चौधरीः 
1. पिछले पांच साल में कई बार विवादों में फंसे. फर्जी डिग्री हासिल करने का आरोप लगा. उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता MBA बताई थी, जबकि 2011 में उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी की. स्कूल में गए तो ब्लैकबोर्ड पर ELEPHANT की गलत स्पेलिंग लिखकर आ गए.
2. अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में है और उनका यहां के ठाकोरों में अच्छा प्रभाव है. ऐसे में जेनीबेन की स्थिति मजबूत हुई.
3. इसी साल उनकी सीट वाव बाढ़ की चपेट में भी रही थी. वहां शंकर चौधरी के खिलाफ नाराज़गी देखने को मिली थी.


 #2. महेंद्र मसरू

महेंद्र मसरू लगातार छह बार से विधायक थे.
महेंद्र मसरू लगातार छह बार से विधायक थे.

क्यों बड़े नेता: लगातार छह बार विधायक रहे हैं, अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं.
सीट: जूनागढ़ (जूनागढ़)
किसने हरायाः कांग्रेस के भीखाभाई गलाभाई जोशी ने
कितने अंतर से: 6,084 वोटों से
क्यों हारे महेंद्र मसरूः
1. जूनागढ़ में चुनाव में एक ही नारा था, ऊपर अल्ला, नीचे गल्ला. गल्ला यानी गलाभाई जोशी. मसरू छह बार विधायक बनने के बाद ओवर कॉन्फिडेंट हो गए थे.
2. महेंद्र मसरू की सादगी तो ठीक थी, लेकिन लोगों को शिकायत थी कि वो बड़े प्रोजेक्ट नहीं लाए. लोगों को धरना देने वाला विधायक नहीं, काम करने वाला विधायक चाहिए था.
3. सीट पर लोहाना और ब्राह्मण सबसे ज्यादा संख्या में थे. लोहाना समुदाय से इकलौते विधायक होने की वजह से वहां का ब्राह्मण वोटर मसरू से नाराज था.


#3. नारायण पटेल

narayan patel (1)
पांच बार के विधायक रहे नारायण पटेल 19 हजार से अधिक वोटों से हार गए हैं.

क्यों बड़े नेता: पांच बार के विधायक हैं.
सीट: ऊंझा (मेहसाणा)
किसने हरायाः कांग्रेस की आशा पटेल ने.
कितने अंतर से: 19,529 वोटों से
क्यों हारे नारायण पटेलः
1. मेहसाणा पाटीदार आंदोलन का गढ़ रहा था. हार्दिक पटेल की सभाओं ने कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया.
2. पांच बार विधायक बनने के बाद भी नारायण पटेल, पाटीदारों के लिए कुछ खास नहीं कर सके थे.
3.आशा पटेल पिछली बार हार गईं थीं, लेकिन वो लगातार चुनाव में सक्रिय बनी रहीं.


#4. भूषण भट्ट

क्यों बड़े नेता: वे भट्ट गुजरात बीजपी के बड़े नेता रहे अशोक भट्ट के बेटे हैं. भूषण की खास पहचान उनकी आरएसएस की पृष्ठभूमि है. उनकी दादी शारदा बेन भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं.
सीट: जमालपुर खादिया (अहमदाबाद)
किसने हरायाः कांग्रेस के इमरान खेड़ावाला ने.
कितने अंतर से: 29,339 वोटों से
क्यों हारे भूषण भट्टः
1. जमालपुर खादिया के विधायक अशोक भट्ट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि के रहे हैं. इस सीट पर करीब 62 फीसदी मुस्लिम आबादी है.
2. ये बीजेपी की परंपरागत सीट रही है, लेकिन दंगों के बाद से यहां की तस्वीर बदल गई. कहा जाता है कि गुजरात का कोई भी दंगा जमालपुर खादिया से ही शुरू होता है.
3. 2012 के चुनाव में भूषण भट्ट बस 6,000 वोटों से जीते थे. पिछले चुनाव में दलित नेता सबीरभाई निर्दलीय लड़े थे और तीसरे नंबर पर रहे थे. इस बार दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने कांग्रेस को वोट देने की अपील की थी.


#5. आत्माराम परमार

Atmaram Parmar

क्यों बड़े नेता: रूपानी सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री थे.
सीट: गढडा (बोटाद)
किसने हरायाः कांग्रेस के प्रवीनभाई मारू ने.
कितने अंतर से: 9,424 वोटों से
क्यों हारे आत्माराम परमारः
1. पिछली बार चुनाव हारने के बाद भी प्रवीनभाई मारू लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय बने रहे.
2. इस सीट पर खेती, कपास और हीरे का कारोबार मुख्य रूप से होता था. पहले जीएसटी और फिर नोटबंदी की वजह से किसानों के साथ ही कारोबारियों की कमर टूट गई थी, जिससे उनमें नाराजगी थी.
3. आत्माराम परमार इस सीट से लगातार दो बार से विधायक हैं. वो किसानों के लिए कुछ खास नहीं कर पाए हैं, जिससे लोग नाराज थे.


#6. केशाजी ठाकोर

क्यों बड़े नेता: रूपानी सरकार में राज्य मंत्री थे. सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े लोगों के कल्याण का विभाग इनके जिम्मे था.
सीट: दीयोदर (बनासकांठा)
किसने हरायाः कांग्रेस के शिवाभाई भूरिया ने.
कितने अंतर से:
972 वोटों से
क्यों हारे केशाजी ठाकोरः
1. अल्पेश ठाकोर ने पिछड़ों का मुद्दा उठाया था और कहा था कि पिछड़ों को उनका हक नहीं मिल पाया है.
2. केशाजी खुद सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ा विभाग के मंत्री थे, लेकिन पिछड़ा वर्ग उनके काम से सहमत नहीं हो सका.


#7. जशा बराड़

Jashabhai Barad

क्यों बड़े नेता: रूपानी सरकार में राज्यमंत्री थे. वाटर सप्लाई, नमक उद्योग और नागरिक उड्डयन का जिम्मा इनके पास था.
सीट: सोमनाथ
किसने हरायाः कांग्रेस के विमलभाई चूडास्मा ने.
कितने अंतर से: 19,950 वोटों से.
क्यों हारे जशा बराड़ः
पहले कांग्रेस में थे. पाला बदलकर बीजेपी में आना वोटरों को रास नहीं आया.


#8. चिमन सापरिया

Chiman bhai

क्यों बड़े नेता: रूपानी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. कृषि विभाग उनके पास था.
सीट: जमजोधपुर (जामनगर)
किसने हरायाः कांग्रेस के चिराग कालरिया ने.
कितने अंतर से: 2,518 वोटों से
क्यों हारे चिमन सापरियाः
1. वे कृषि मंत्री थे. कपास और मूंगफली के किसान सरकार से नाराज थे, क्योंकि उनका कहना था कि उन्हें फसलों का सही दाम नहीं मिल रहा है.
2. उनके खिलाफ अवैध कब्जे के आरोप थे. इसकी शिकायत पुलिस में भी की गई थी.
3. तुअर खरीद में गड़बड़ी के मामले सामने आए. सीधा आरोप चिमन पर भी लगा.


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