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2002 में गोधरा दंगों के बाद से अब जाकर इस आदमी ने बीजेपी को दिलाई है ये सीट

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विधानसभा सीट: गोधरा (पंचमहल)

बीजेपी 258 वोटों से जीती.

बीजेपी के सी. के. राउलजी कोः 75,149 वोट 

कांग्रेस के राजेंद्र सिंह पटेल कोः 74,891 वोट

निर्दलीय जसवंत सिंह परमार कोः 18,856 वोट

पांच बार विधायक और तीन बार मंत्री रहे राउलजी ने जनता दल के साथ अपनी राजनीति शुरू की थी. फिर जब शंकरसिंह वाघेला ने बीजेपी छोड़ी और अपनी अलग राष्ट्रीय जनता पार्टी (RJP) बना ली तो राउलजी उनके साथ हो लिए. फिर RJP कांग्रेस में मिल गई. राउलजी भी कांग्रेस में आ गए. पहले के चुनावों की बात करें तो वो पांच बार गोधरा से जीत चुके हैं. इनमें से दो बार बीजेपी के टिकट पर मिली जीत भी शामिल है. मतलब, पांच बार विधायकी – एक जनता दल से, दो बीजेपी से और दो कांग्रेस से. ये छठी बार है जब वो चुनाव जीते हैं. पिछली बार 2012 में भी जीते थे जब वे कांग्रेस में थे.

बहुत उठापटक के बाद बीजेपी को मिली है ये जीत

जब तक राउलजी कांग्रेस के साथ रहे, मुसलमानों ने उन्हें समर्थन दिया. गोधरा की कुल आबादी में करीब 25 फीसदी संख्या मुसलमानों की है. इस बार वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी से मिल गए. ऐसा लग रहा था कि मुसलमान नाराज होकर उन्हें वोट नहीं देंगे. राउलजी के सामने एक और चुनौती थी इस बार. इस चुनौती का नाम था जसवंत सिंह परमार. परमार पहले बीजेपी में थे. इस बार राउलजी को टिकट मिलने से नाराज़ होकर बगावत कर दी थी उन्होंने. निर्दलीय लड़े. अनुमान लगाया जा रहा था कि परमार OBC वर्ग का वोट काटेंगे. मगर इन दोनों संभावनाओं में से कोई भी सही साबित नहीं हुई. बहुत कांटे की टक्कर हुई इस सीट के लिए. वोटों की गिनती शुरू होने के बाद बहुत देर तक राउलजी लगातार आगे रहे. फिर कांग्रेस के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह पटेल आगे हो गए. फिर ये लुका-छिपी का खेल चलता रहा. कभी बीजेपी आगे, तो कभी कांग्रेस. जब गिनती पूरी हुई, तो बीजेपी आगे थी. 2002 के बाद अब जाकर बीजेपी को ये सीट वापस मिली है. वैसे राउलजी की जीत ऐसी ही है मानो शेर के मुंह का निवाला छीनकर लाए हों. जाती हुई जीत को लपक लिया हो जैसे. एकदम बाउंड्री लाइन के पास बॉल लपकी है.

सी के राउलजी का दल-बदल का पुराना रेकॉर्ड रहा है. इस बार चुनाव से पहले वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ गए थे.
सी. के. राउलजी का दल-बदल का पुराना रिकॉर्ड रहा है. इस बार चुनाव से पहले वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ गए थे.

बीजेपी की जीत की प्रमुख बातेंः
 इतने कम अंतर से सीट जीतने के कारण जीत-हार का फैक्टर बहुत मजबूत नहीं कहा जा सकता.
 राउलजी मजबूत उम्मीदवार थे. बीजेपी में जाकर भी कमजोर नहीं हुए.
 मुस्लिम वोटरों ने भी शायद राउलजी पर भरोसा बनाए रखा.

कांग्रेस की हार के फैक्टरः
 राउलजी ने पार्टी भले बदल दी, मगर लोगों का भरोसा नहीं खोया.
 जसवंत सिंह परमार ने बीजेपी से बगावत की, मगर कांग्रेस को इससे फायदा नहीं हुआ.


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