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हार्दिक पटेल के इस आदमी ने भाजपा के धुरंधर नेता को हरा दिया है

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विधानसभा: पाटन (पाटन)

कांग्रेस 25,279 वोटों से जीती.

कांग्रेस के किरीट पटेल कोः  1,03,273 वोट

बीजेपी के रणछोड़भाई महीजीभाई देसाई कोः  77, 994 वोट

पाटन की सीट लंबे समय से बीजेपी के पास रहती आई है. पहले गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन यहां से जीतती रही हैं. 2002 और 2007 में ये सीट उन्हीं के कब्ज़े में थी. 2012 में उनकी जगह बीजेपी की तरफ से रणछोड़भाई महीजीभाई देसाई ने चुनाव लड़ा. उन्होंने कांग्रेस के जोधाजी गलाबजी ठाकोर को करीब 6 हजार वोटों से हराया था. इस बार फिर से रणछोड़भाई देसाई मैदान में थे. बीजेपी ने अपने विजयी नुमाइंदे पर ही फिर से दांव लगाया था. सामने थे कांग्रेस के किरीट पटेल.

रणछोड़भाई जिनको हार्दिक पटेल के कैंडिडेट ने हरा दिया.
रणछोड़भाई जिनको हार्दिक पटेल के कैंडिडेट ने हरा दिया.

किरीट पटेल ‘पास’ (PAAS – पाटीदार अनामत आंदोलन समिति) के कन्वीनर हैं. हार्दिक पटेल की वही समिति जिसने गुजरात में पाटीदारों को आरक्षण दिलाने के लिए बड़ा आंदोलन किया था. पास के कन्वीनर्स को एडजस्ट करने के लिए कांग्रेस को अपनी पहली लिस्ट रिवाइज़ करनी पड़ी थी. किरीट पटेल उसी सुधार के बाद इक्वेशन में आए. वो पाटन के शेठ एम एन लॉ कॉलेज में प्रोफ़ेसर हैं. उनका कहना था कि उन्होंने आईपीसी (इंडियन पीनल कोड) कॉलेज में पढ़ाया है, अब चुनावों के बाद जनता को पढ़ाएंगे. दिलचस्प बात ये है कि पाटन के दलित समाज ने किरीट पटेल की उम्मीदवारी का विरोध किया था. उन्होंने मोर्चा निकालकर साफ़ किया था कि अगर कांग्रेस ने किरीट पटेल को उम्मीदवार बनाया, तो वो कांग्रेस को वोट नहीं देंगे. पाटन में दलित समाज के वोट भारी मात्रा में हैं. लगता है दलित समाज ने अपनी धमकी को बाद में खारिज कर दिया था.

किरीट पटेल न सिर्फ जीते हैं बल्कि बड़े मार्जिन से जीते हैं.

उनकी जीत के कारण:

# सौम्य छवि और प्रोफेसरी के पेशे से अच्छा प्रभाव पड़ा.

# दलितों का भाजपा से अपेक्षाकृत ज़्यादा गुस्सा होना उन्हें फायदा कर गया.


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