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लोगों ने कहा ये नेता हमारा दुख-दर्द पूछने नहीं आता, लेकिन वोट उसे ही देकर आए

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विधानसभाः डांग (डांग, एसटी)

कांग्रेस 768 वोटों से जीती.

कांग्रेस के मंगलभाई गंगाजीभाई गावित कोः 57,820 वोट 

बीजेपी के विजयभाई पटेल कोः 57,052 वोट 

आदिवासी बहुल इलाका है डांग. इतिहास में इसका स्टेटस बड़ा भारी है. अंग्रेजों ने इसे जीतने की बड़ी कोशिश की, मगर नाकाम रहे. देश के सबसे पिछड़े जिलों में गिनती होती है इसकी. 2012 और 2017, दोनों बार के चुनाव में मुख्य उम्मीदवार एक ही रहे. कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ने अपने उम्मीदवार रिपीट किए. पिछले चुनाव में कांग्रेस के मंगलभाई जी गावित ने बीजेपी के उम्मीदवार विजय पटेल को हराया था. मगर जीत का अंतर था मात्र 2,422 वोट. इसीलिए बीजेपी ने दोबारा अपने हारे हुए प्रत्याशी विजय पटेल पर भरोसा जताया. इस बार जीत का अंतर घटकर 768 वोटों पर पहुंच गया है. मगर जीत तो जीत होती है.

42 साल के विजयभाई पटेल डांग के ही अहवा तालुका के रहने वाले हैं. स्नातक हैं. मैकेनिकल इंजिनियरिंग में डिप्लोमा भी है इनके पास. राज्यसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी उसके विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया था. इस पर कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला सहित पांच विधायकों के दस्तखत थे. इन विधायकों में मंगलभाई गावित का नाम भी शामिल था. डांग में कुछ लोग कांग्रेस विधायक से नाराजगी जता रहे थे. कह रहे थे कि मंगलभाई गावित कभी उनके दुख-दर्द पूछने नहीं आए. साल में कभी एक-आध बार आते भी थे, तो बिना खोज-खबर लिए निकल जाते थे.

आदिवासी बहुल डांग जिला देश के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है. इन ट्रायबल इलाकों पर एक समय में कांग्रेस की बहुत पकड़ थी.
आदिवासी बहुल डांग जिला देश के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है. इन ट्रायबल इलाकों पर एक समय में कांग्रेस की बहुत पकड़ थी.

कांग्रेस की जीत के फैक्टर
1. मंगलभाई गावित काफी मजबूत नेता हैं.
2. ये गुजरात के आदिवासी बेल्ट का वो इलाका है, जहां अब भी कांग्रेस काफी मजबूत स्थिति में है.

बीजेपी की हार के फैक्टर
1. विजयभाई पटेल पिछली बार भी हारे थे. क्या पता अगर बीजेपी उम्मीदवार बदलती, तो उसे कुछ फायदा होता.
2. राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू तो कीं, मगर उन्हें अपने पक्ष में नहीं भुना सकी.
3. कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ है यहां. बीजेपी काम तो कर रही है, मगर कसर बाकी है अभी थोड़ी.


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