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ये सीट जीतकर कांग्रेस ने शंकरसिंह वाघेला से बदला ले लिया है

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विधानसभाः कापड़वंज (खेड़ा)

कांग्रेस 27,226 वोट से जीती.

कांग्रेस के कालूभाई डाभी कोः 85195

बीजेपी से कानूभाई भूलाभाई डाभी कोः 57969

निर्दलीय विमल शाह कोः 46928

गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा का रथ खींचा प्रधानमंत्री मोदी ने. ये रथ विधानसभा न पहुंचे, इसलिए ज़ोर लगाया कांग्रेस के सर्वेसर्वा राहुल गांधी ने. राहुल को कुछ मदद मिली हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश ठाकोर से. लेकिन गुजरात में एक सीट ऐसी भी थी जहां एक निर्दलीय प्रत्याशी का भौकाल सबसे अधिक था. नाम उनका विमल शाह है. विमल का भौकाल इतना था कि उसके समर्थन में कांग्रेस के लिए नए-नए पराए हुए शंकर सिंह वाघेला ने तो यहां से कैंडिडेट ही नहीं उतारा. जबकि ये उन्हीं की सीट थी. 2012 में वाघेला कापड़वंज से ही जीते थे, कांग्रेस के टिकट पर.

क्रमशः भाजपा के कानुभाई डाभी, कभी भाजपा के रहे और अब निर्दलीय विमल पटेल और कांग्रेस के कानूभाई पटेल
क्रमशः भाजपा के कानुभाई डाभी, कभी भाजपा के रहे और अब निर्दलीय विमल पटेल और कांग्रेस के कानूभाई पटेल

विमल पहले भाजपा में थे. भाजपा सरकार में मंत्री तक रहे हैं लेकिन जब कानू डाभी को टिकट मिला तो बगावत कर के निर्दलीय पर्चा भर दिया. ये 2012 में भी बीजेपी छोड़कर केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी में शामिल हो गए थे. उनके ही वफादार भी माने जाते हैं. लेकिन फिर मार्च 2014 में वापस बीजेपी में आ गए.

ये जो भाजपा के कानू भाई हैं, उनको वाघेला ने पिछले चुनाव में हराया था. वाघेला ने इस बार उन्हें टिकट मिलने से खार खाए विमल को जितवाने के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया यहां. वैसे इस साल अगस्त में हुए राज्यसभा चुनाव से पहले जो भी कांग्रेस विधायक बीजेपी में शामिल हुआ और उसे इस चुनाव में बीजेपी ने टिकट दिया, उन सबके खिलाफ वाघेला ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं. उनका कहना है कि कुछ उम्मीदवारों के साथ निजी तौर पर उनके अच्छे संबंध हैं, सो उनके खिलाफ नहीं लड़ सकते वो.

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तीन चीज़ें जो कांग्रेस के हक में गईं :

1. खेड़ा के किसान अपेक्षाकृत संपन्न हैं. किसानों के बीच कांग्रेस खासी लोकप्रिय है. उनका कहना है कि कांग्रेस ने उनके लिए काम किया है.

2. ओबीसी वोट खूब हैं यहां. इलाके में अल्पेश ठाकोर की रैली हुई थी, जिसका फायदा कांग्रेस को मिला.

3. भाजपा के खिलाफ ये बात गई कि उसने एक हारे हुए कैंडिडेट को टिकट दिया. साथ ही एक पूर्व मंत्री को खो दिया जो अपने साथ अपना वोटर बेस ले गया.


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