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उस सीट का नतीजा जहां से अमित शाह ने बूथ लेवल कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत की थी

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विधानसभा : नारानपुरा (अहमदाबाद)

बीजेपी 66,215 वोटों से जीती.

बीजेपी के कौशिकभाई पटेल को: 1,06,458 वोट

कांग्रेस के नितिन भाई पटेल को: 40,243 वोट मिले.

गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के उस वक्त उपाध्यक्ष रहे राहुल गांधी आक्रामक अंदाज में प्रचार कर रहे थे. हर रोज इनकी चुनावी सभा होती थी, लेकिन अपने कद के हिसाब से जो शख्स सबसे कम दिखा उनका नाम है अमित शाह. वो चुनावी सभाओं में कम और बूथ लेवल मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह 2017 तक अहमदाबाद की नारानपुरा सीट से विधायक थे. उसके बाद अमित शाह राज्यसभा चले गए और ये सीट खाली हो गई थी. 2008 में जब परिसीमन हुआ था, तो ये सीट बनी थी. इससे पहले सीट का नाम सांखरेज था, जहां से अमित शाह ने लगातार 1997 से ही चुनाव जीता है.

Kaushik Patel Amit Shah
अमित शाह ने अपनी सीट के लिए कौशिक पटेल के नाम को चुना था, जो दरियापुर से तीन बार विधायक रह चुके हैं.

लगातार चार चुनाव जीतकर अमित शाह ने इस सीट को बीजेपी की पारंपरिक सीट के रूप में बदल दिया है. इस बार बीजेपी ने कौशिकभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया था, जो दरियापुर से 1995, 1998 और 2002 में तीन बार विधायक रहे थे. वो राज्य सरकार में राजस्व मंत्री का भी जिम्मा संभाल चुके थे. अमित शाह की विरासत संभालने का जिम्मा बीजेपी ने इन्हीं को सौंपा था. कांग्रेस ने मुकाबले के लिए नितिन पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है, जो पहले भी अमित शाह से मुकाबला करके हार चुके थे.

पिछला नतीजा : अमित शाह ने कांग्रेस के जीतू पटेल को 63,000 वोटों से हराया था.

इस बार का नतीजा : बीजेपी के कौशिकभाई पटेल ने कांग्रेस के नितिन पटेल को 66,215 वोटों से हराया है.

Amit Shah Campaign
गुजरात में खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने डोर-टू-डोर कैंपेन की शुरुआत की थी.

वो तीन वजहें जिनकी वजह से बीजेपी को जीत मिली

1. ये सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खाली की थी, जो यहां से चार बार विधायक रहे थे.

2. अमित शाह ने इसी क्षेत्र से बूथ लेवल के पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर राजनीतिक करियर शुरू किया था, इसलिए पूरे इलाके में अमित शाह की अच्छी पकड़ है.

3. सीट शहरी है, जहां जैन, ब्राह्मण और पटेल समुदाय के वोटर बड़ी तादाद में हैं. पाटीदार आंदोलन को छोड़ दिया जाए, तो तीनों ही समुदाय गुजरात में बीजेपी के पारंपरिक वोटर हैं.


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