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मितरों, राहुल गांधी के हिंदू होने का प्रमाण मिल गया है!

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जब से राहुल गांधी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की है, उनकी आइडेंडिटी बदल गई है. राहुल गांधी को देश और दुनिया कांग्रेस के उपाध्यक्ष के तौर पर, देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे के तौर पर, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते के तौर पर या फिर कांग्रेस के होने वाले अध्यक्ष के तौर पर जानती है. जो उनके समर्थक हैं, वो उन्हें देश के होने वाले प्रधानमंत्री के तौर पर भी देखते हैं. लेकिन जब से उन्होंने मंदिर में पूजा की है, लोग और खासतौर पर उनके विरोधी उन्हें हिंदू या गैर हिंदू के तौर पर जानना चाह रहे हैं.

rahul dwarka mandir
राहुल गांधी ने 25 सितंबर को द्वारकाधीश मंदिर में विशेष पूजा की थी, जो कोई गैर हिंदू नहीं कर सकता है.

गुजरात चुनाव के पहले चरण में कुछ ही दिन बचे हैं तो बीजेपी हो या कांग्रेस सबने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रखा है. गुजरात में कांग्रेस के चुनाव प्रचार की शुरुआत खुद राहुल गांधी ने ही की थी. उन्होंने इसके लिए विश्वप्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर का चुनाव किया था. 25 सितंबर 2017 को राहुल गांधी द्वारकाधीश मंदिर पहुंचे थे और वहां विशेष पूजा भी की थी. अहमदाबाद मिरर के मुताबिक इस मंदिर में गैर हिंदुओं को जाने की इजाज़त तो है, लेकिन वो इस मंदिर में होने वाली विशेष पूजा में हिस्सा नहीं ले सकते हैं. इस मंदिर को चलाने के लिए एक संस्था है, जिसे द्वारकाधीश देवस्थान कमेटी कहते हैं. मंदिर को चलाने के लिए यह कमेटी 1968 में बनी थी और तब से ही मंदिर में यह कानून लागू है. इस कमेटी का मुखिया वहां का डीएम होता है.

rahul dwarka special
राहुल गांधी ने द्वारकाधीश मंदिर में विशेष पूजा के साथ ही पादुका पूजा, देवकी मां पूजा और द्वारकाधीश पूजा की थी.

अहमदाबाद मिरर का दावा है कि द्वारका जिले के डीएम जेआर दोधिया राहुल के दौरे के वक्त छुट्टी पर थे, इसलिए उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. लेकिन अगर राहुल गांधी हिंदू नहीं होते तो उन्हें इस मंदिर में विशेष पूजा करने की इजाजत नहीं मिलती. जबकि राहुल गांधी इस मंदिर में लगभग 45 मिनट तक रहे थे और इस दौरान उन्होंने विशेष पूजा के साथ ही पादुका पूजा, देवकी मां पूजा और द्वारकाधीश पूजा की थी. गुजरात चुनाव के एेलान के बाद से ही राहुल गांधी अब तक गुजरात के 21 मंदिरों में पूजा-अर्चना कर चुके हैं. अधिकांश मंदिरों के पुजारियों का दावा है कि राहुल गांधी ने उन मंदिरों में बतौर हिंदू पूजा अर्चना की थी.

जहां से शुरू हुआ विवाद

Rahul soamnath cotroversy
विजिटर बुक (ऊपर) में राहुल का नाम दर्ज होने के बाद विवाद शुरू हुआ. नीचे (बाएं) मंदिर के बाहर सूचना लगी है कि गैर हिंदुओं को अलग रजिस्टर में नाम दर्ज करना होगा. कांग्रेस ने इसे खारिज कर एक और रजिस्टर (दाएं) जारी किया है.

25 सितंबर से मंदिरों का दर्शन शुरू करने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 29 सितंबर को गुजरात के गिर सोमनाथ के सोमनाथ मंदिर के दर्शन किए. इस मंदिर में हिंदू और गैर हिंदू दोनों ही जा सकते हैं, लेकिन गैर हिंदुओं को अलग से एक रजिस्टर में एंट्री करवानी होती है. राहुल गांधी के मंदिर से निकलने के थोड़ी ही देर बाद मीडिया में एक पर्ची वायरल हो गई. इस पर्ची के उस रजिस्टर की फोटो कॉपी होने का दावा किया गया, जिसमें मंदिर में घुसने के दौरान गैर हिंदू अपनी एंट्री करते हैं. इस पर्ची में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल के साथ ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नाम भी शामिल था. ये एंट्री कांग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर मनोज त्यागी ने की थी. यहीं से विवाद शुरू हो गया और बीजेपी के साथ ही कांग्रेस विरोधियों ने राहुल गांधी से उनका धर्म पूछना शुरू कर दिया.

कांग्रेस ने बताया जनेऊधारी हिंदू

Rahul Janeu
कांग्रेस ने राहुल गांधी की फोटो जारी कर उन्हें जनेऊधारी हिंदू बताया है.

मंदिरों के दर्शन कर गुजरात चुनाव में जीत हासिल करने का मकसद लिए उतरे राहुल गांधी को सारा काम-धाम छोड़कर खुद को हिंदू बताने की सफाई देनी पड़ी. कांग्रेस की ओर से तस्वीर जारी करके बताया गया कि राहुल सिर्फ हिंदू ही नहीं, जनेऊधारी हिंदू हैं. इसके अलावा कांग्रेस की ओर से वायरल हुई पर्ची को गलत बताया गया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सोमनाथ मंदिर में जो विजिटर बुक है, उस पर खुद राहुल गांधी ने साइन किए हैं और उन्होंने लिखा है कि यह एक प्रेरणादायी जगह है. कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी कहा है कि पूरा देश जानता है कि राहुल गांधी अनन्य शिवभक्त हैं.

जो फोटो वायरल हो रही है, उसमें राहुल गांधी के नाम के आगे जी लिखा हुआ है. सुरजेवाला का दावा है कि कोई भी आदमी कम से कम अपने नाम के आगे तो जी नहीं ही लगाएगा. वहीं मंदिर के ट्रस्टी प्रवीण लहरी ने भी इस बात पर सफाई दी है कि उनके रजिस्टर में किसी ने राहुल गांधी और अहमद पटेल का नाम लिख दिया है. इस लिखे से मंदिर प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है. सोमनाथ ट्रस्ट के महाप्रबंधक विजय सिंह छावड़ा ने कहा है कि सोमनाथ मंदिर प्रथा के मुताबिक अगर कोई गैर-हिंदू मंदिर के अंदर जाता है तो उसे रजिस्टर में एंट्री करनी होती है.

इसके अलावा कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार की तस्वीरें जारी करते हुए बताया है कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू विधि-विधान से हुआ था.


मंदिर के ट्रस्टी हैं पीएम मोदी, अमित शाह और बड़े बीजेपी नेता सोमनाथ मंदिर को चलाने का जिम्मा एक ट्रस्ट के पास है. इस ट्रस्ट में पीएम मोदी, लाल कृष्ण आडवाणी, अमित शाह, केशुभाई पटेल, पी के लाहिड़ी, जे डी परमार और हर्ष नेवतिया जैसे नेता सदस्य हैं. कांग्रेस और राहुल समर्थकों का आरोप है कि बड़े बीजेपी नेताओं के दबाव और साजिश के तहत मंदिर के गैर हिंदू वाले रजिस्टर में राहुल गांधी के नाम की एंट्री की गई है और उन्हीं के कहने पर इसे मीडिया में वायरल किया गया है. कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी ट्वीट कर इस पर सवाल उठाए हैं.

पहले भी उठते रहे हैं सवाल

राहुल गांधी के धर्म के बारे में बीजेपी और कांग्रेस का विरोध करने वाले हमेशा से सवाल उठाते रहे हैं. पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बेटी थीं इंदिरा गांधी. उनकी शादी फिरोज गांधी से हुई थी, जो पारसी थे. हालांकि जब फिरोज और इंदिरा गांधी की शादी हुई थी तो वो हिंदू विधि-विधान से हुई थी. तस्वीरें इसकी गवाह हैं.

फिरोज और इंदिरा की शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी.
फिरोज और इंदिरा की शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी.

फिरोज और इंदिरा के बेटे हैं राजीव गांधी. उन्होंने इटली मूल की सोनिया से शादी की है, जो जन्म से क्रिश्चियन है. जब राजीव और सोनिया की शादी हुई थी तो वो आर्य समाज के तरीके से हुई थी. तस्वीरें इसकी गवाही देती हैं.

राजीव और सोनिया की शादी आर्य समाज के रीति-रिवाजों से हुई थी.
राजीव और सोनिया की शादी आर्य समाज के रीति-रिवाजों से हुई थी.

गुजरात में चल रहे चुनाव ने राहुल गांधी के धर्म के मुद्दे को और भी धार दे दी है. चुनाव शुरू होने के ठीक पहले जो कांग्रेस गुजरात के लिए विकास गांडो थाई गयो छे (विकास पागल हो गया है) के नारे के साथ उतरी थी, उसके नेता मंदिर परिक्रमा करने में लग गए. जो बीजेपी इसका जवाब देने के लिए हूं विकास छूं, हूं छू गुजरात ( मैं विकास हूं, मैं गुजरात हूं) नारा लेकर आई थी, वो अब राहुल गांधी के धर्म को खोजने और उन्हें गैर हिंदू साबित करने में लग गई है. ऐसे में गुजरात का चुनाव अब विकास या काम के नाम पर नहीं मंदिर की परिक्रमा और धर्म की राजनीति पर लड़ा जा रहा है.


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