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मोदी जी, आपने रक्षामंत्री को न हटाया तो आपके झूठे CM नाराज हो जाएंगे

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जब मोदी सरकार ने निर्मला सीतारमण को रक्षामंत्री बनाया, तो बड़ी तारीफ हुई. देश की पहली फुल-टाइम महिला रक्षामंत्री. कानों को अच्छा लगता है ये सुनकर. हमें तो अच्छा लगता है, मगर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी का नहीं पता. वो शायद कुढ़ गए होंगे. क्या है न कि रुपानी को ‘JNU वाले’ पसंद नहीं. उन्होंने गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी को ‘JNU वाला’ कहा. अंदाज ऐसा था मानो ‘JNU वाला/वाली’ होना बड़े शर्म की बात हो. मजे की बात तो ये है कि जिग्नेश JNU से हैं ही नहीं. अब या तो रुपानी जी अपने विरोधियों के बारे में ठीक जानकारी नहीं रखते, या फिर वो जान-बूझकर जिग्नेश को ‘JNU वाला’ कह रहे थे. गोया ये ऐसा दाग हो कि आदमी पर उंगली उठाई जा सके. किसी को कोसना हो, तो ‘JNU वाला’ बोल दो. नीचा दिखाना हो, तो ‘JNU वाला’ बोल दो. अगर ये लॉजिक मेवानी पर फिट होता है, तो निर्मला सीतारमण पर भी फिट होगा. वो तो असल में वहीं की पढ़ी हैं. मोदी जी को चाहिए कि वो फौरन सीतारमण को फायर कर दें. वरना रुपानी के नाराज हो जाने का अंदेशा रहेगा. क्योंकि उनके हिसाब से तो JNU से पढ़े लोग ‘खराब’ होते हैं. पार्टी के लोगों में बैरभाव पैदा हो, ये मोदी जी भी कहां चाहेंगे.

ऊना में दलित युवकों के साथ हुई घटना के बाद गुजरात में दलितों का आंदोलन शुरू हुआ. इस आंदोलन ने जिग्नेश को काफी पहचान दी. इसी दौरान वो JNU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार से भी मिले.
ऊना में दलित युवकों के साथ हुई घटना के बाद गुजरात में दलितों का आंदोलन शुरू हुआ. इस आंदोलन ने जिग्नेश को काफी पहचान दी. इसी दौरान वो JNU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार से भी मिले.

शुक्रवार, 1 दिसंबर की बात है. रुपानी नर्मदा जिले में थे. यहां केवाड़िया कॉलोनी में उनका प्रोग्राम था. भाषण दे रहे थे कि मेवानी का जिक्र उठा. रुपानी बोल पड़े:

जिग्नेश मेवानी JNU के प्रॉडक्ट हैं. वो ही JNU जहां देशद्रोहियों ने मीटिंग की थी और देशविरोधी नारे लगाए थे. जब देशद्रोहियों ने JNU में मीटिंग की, वो ही यूनिवर्सिटी जहां से ये मेवानी और बाकी लोग आए हैं, तो उन्होंने नारे लगाए कि भारत तेरे टुकड़े होंगे, अफजल हम शर्मिंदा हैं.

JNU की तो बहुत तारीफ करती हैं निर्मला सीतारमण
रुपानी ने जिस घटना का जिक्र किया, उसकी फिलहाल कोर्ट में सुनवाई चल रही है. ये वो ही फरवरी 2016 की घटना है, जिसपर देश में खूब हल्ला-हंगामा हुआ. अभी तक कुछ साबित नहीं हुआ है वैसे. उस घटना से मेवानी का वैसा ही रिश्ता है, जैसे रोटी और बूट पॉलिश का. मतलब, दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है. वो JNU के हैं ही नहीं. अहमदाबाद के एच के आर्ट्स कॉलेज से पढ़ाई की थी उन्होंने. कानून की. जिग्नेश के मामले में तो रुपानी झूठे निकल गए. मगर निर्मला सीतारमण वहीं की हैं. उन्होंने JNU के ‘सेंटर फॉर इकॉनमिक स्टडीज ऐंड प्लानिंग’ से PhD किया है. अपने वक्त में JNU की ‘फ्री थिंकर्स’ ग्रुप में थीं. 2009 में दिए गए अपने एक इंटरव्यू में JNU की बहुत तारीफ भी की थी. कहा था:

मैं जो कुछ भी हूं, उसकी प्रेरणा मुझे JNU में ही मिली. JNU ने मुझे हर तरह की बहस में शामिल होना और अलग तरह से सोचना सिखाया. सबसे बेहतरीन मौके दिए. JNU के लोग अलग तरीके से चीजें करते हैं, फिर चाहे वो जहां कहीं भी रहें. ये ही चीज उन्हें औरों से अलग करती है.

अगर रुपानी यूं सरेआम JNU में पढ़ने को 'गाली' की तरह इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते, तो ये बड़ी निराशा की बात है. मोदी जी ने तो कई JNU पासआउट्स को अहम पदों पर जगह दी है.
अगर रुपानी यूं सरेआम JNU में पढ़ने को ‘गाली’ की तरह इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते, तो ये मोदी जी के लिए बड़ी निराशा की बात है. प्रधानमंत्री ने तो कई JNU पासआउट्स को अहम पदों पर जगह दी है. जैसे, अमिताभ कांत हुए. एस जयशंकर हुए. अरविंद गुप्ता हुए. सब के सब मोदी के पसंदीदा और भरोसेमंद.

गुजरात के सबसे बड़े दलित नेता बन गए हैं जिग्नेश मेवानी
विजय रुपानी अगर JNU और JNU वालों को इतनी ही ‘हेय दृष्टि’ से देखते हैं, तो उनको पक्का सीतारमण से भी चिढ़ होगी. और निर्मला सीतारमण JNU की तारीफ करती हैं, ये जानकर तो और चिढ़ होगी. मोदी जी को पक्का कुछ सोचना चाहिए. बाकी जिग्नेश मेवानी के बारे में थोड़ा बता देते हैं. दलित नेता हैं. पत्रकार भी रहे हैं. बस 36 साल के हैं अभी. ऊना दलित अत्याचार लड़त समिति के संयोजक थे. ऊना में गाय की तस्करी का झूठा इल्जाम लगाकर चार दलित युवकों की पिटाई की गई थी. इसके बाद बहुत हंगामा हुआ था. जिग्नेश दलितों के अधिकारों के संघर्ष कर रहे थे. फिर धीरे-धीरे लोकप्रिय होने लगे. आज की तारीख में गुजरात के सबसे बड़े दलित नेता माने जाते हैं. चुनाव लड़ रहे हैं. बतौर निर्दलीय उम्मीदवार. बनासकांठा जिले की वडगाम सीट से. कांग्रेस उनका समर्थन कर रही है. उनके खिलाफ अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है कांग्रेस ने. जिग्नेश बीजेपी का विरोध कर रहे हैं. घूम-घूमकर दलितों से अपील कर रहे हैं कि बीजेपी को कतई वोट मत देना. गुजरात की कुल आबादी में सात फीसद से ज्यादा दलित हैं.


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