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पीएम मोदी से जुड़ी एक चीज, जो अमित शाह को नापसंद है!

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पीएम मोदी के ‘मन की बात’ से तो अब शायद ही कोई अनजान है. अगर कोई अनजान रहा भी होगा तो 26 नवंबर को जान गया होगा. प्रधानमंत्री ने 26 नवंबर को एक बार फिर से ‘मन की बात’ की थी. प्रधानमंत्री बनने के बाद ये 38वीं बार था, जब मोदी ने देश से अपने ‘मन की बात’ की थी. कार्यक्रम पूरे देश के लिए था, लेकिन गुजरात में चुनाव हैं तो इसे स्वाभाविक तौर पर उसे चुनावी रंग दे दिया गया.

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अमित शाह ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मन की बात सुनी.

बीजेपी ने इस चर्चा को ‘मन की बात-चाय के साथ’ के रूप में तब्दील कर दिया. गुजरात के 50 हजार से ज्यादा बूथों पर बीजेपी ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, धर्मेंद्र प्रधान, स्मृति ईरानी, उमा भारती, जुएल ओराव, पुरुषोत्तम रूपाला, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष जीतू वघानी, मुख्यमंत्री विजय रुपानी, सांसद परेश रावल के साथ ही गुजरात के कई मंत्री, विधायक और सांसद शामिल थे.

अब ऐसे बड़े कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शामिल हों और उसकी चर्चा न हो, ऐसा तो मुमकिन ही नहीं है. तो साहेबान अमित शाह इस कार्यक्रम में भी चर्चा में रहे, लेकिन उसकी वजह उनका कांग्रेस पर हमला या बीजेपी की तारीफ नहीं, वो खुद ही हैं. दरअसल अमित शाह अहमदाबाद के दरियापुर इलाके के तंबु चौकी पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर ‘मन की बात’ सुन रहे थे. ये ‘मन की बात’, चाय के साथ थी तो सुनने वालों को चाय भी परोसी गई. ये चाय 100 साल पुरानी दुकान अम्बिका टी स्टाल से बनवाई गई थी. बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तो चाय पी, लेकिन वहां मौजूद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चाय नहीं पी.

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एक अखबार का दावा है कि अमित शाह के हाथ में जो कप था, उसमें चाय नहीं कॉफी थी.

अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी अध्यक्ष ने चाय पीने से मना कर दिया था. उनके लिए चाय की जगह पर ब्लैक कॉफी मंगवाई गई थी. यह ब्लैक कॉफी स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता के घर तैयार करवाई गई थी. जब बीजेपी अध्यक्ष ने खुद ही चाय नहीं पी तो और लोगों ने कितनी चाय पी होगी और पीएम मोदी की कितनी बात सुनी होगी, ये भी एक जुमला ही है. मन की बात के साथ चाय जोड़ने का आइडिया बीजेपी को कांग्रेस से ही मिला है. यूथ कांग्रेस की ऑनलाइन मैगजीन ने पीएम मोदी का चाय बेचने को लेकर एक ट्वीट जारी किया था.

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यूथ कांग्रेस की ऑनलाइन मैगजीन ने पीएम मोदी पर यही फोटो ट्वीट की थी.

बीजेपी ने जब इस ट्वीट को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला, ट्वीट तुरंत डिलीट कर दिया गया. बीजेपी ने इसका राजनीतिक फायदा तुरंत ही उठाया और कांग्रेस को गरीब विरोधी बता डाला. बीजेपी के गुजरात प्रभारी भूपेंद्र यादव ने इस ट्वीट का जवाब देने के लिए ही मन की बात चाय के साथ कार्यक्रम की घोषणा कर दी. कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ, लेकिन इससे एक चीज़ साफ हो गई कि अमित शाह को चाय पसंद नहीं है. इसीलिए उन्होंने कार्यक्रम में भी चाय की जगह ब्लैक कॉफी को ही तरजीह दी है. मामला सिर्फ पसंद का है या कुछ और, इसका जवाब तो बस एक ही आदमी दे सकता है और वो हैं अमित शाह. यहां ये याद रखना जरूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी के हर आदमी के खाते में 15 लाख रुपए आने के वादे को जुमला करार देने वाले भी अमित शाह ही थे.


वीडियो में देखें, पीएम मोदी को उनका पांच साल पुराना वादा याद दिला रहे हैं लोग

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