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गुजरात में बीजेपी ने 18 दिसंबर से पहले ही कांग्रेस को हरा दिया है!

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भरत सिंह सोलंकी गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. गुजरात में चुनावी सभाओं या फिर डोर डू डोर कैंपेन में उनकी आवाज उतनी सुनाई नहीं देती, जितना वो सोशल मीडिया पर दिखाई देते हैं. लेकिन इसमें भी एक झोल है. वो सोशल मीडिया पर जितना दिखाई देते हैं, वो उनका खुद का किया-धरा होता ही नहीं है. हर बार उनके विरोधी उन्हीं के नाम से सोशल मीडिया पर आते हैं और फिर उनके किए धरे पर पलीता लगाकर चले जाते हैं.

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भरत सिंह सोलंकी पिछले दो साल से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं.

गुजरात चुनाव में जब 9 दिसंबर को वोटिंग हो रही थी, तो उसस वक्त सोशल मीडिया पर एक और चीज वायरल हो रही थी. ये था गुजरात के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी का राहुल गांधी को लिखा हुआ पत्र, जिसे कांग्रेस का इंटरनल सर्वे बताया जा रहा था. इस पत्र का मजमून ये था कि गुजरात चुनाव में कांग्रेस हार गई है और बीजेपी ने फिर से बाजी मार ली है. पहले आप इस पत्र को देखिए.

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अब पत्र को एक बार फिर गौर से देखिए. लेटर हेड गुजराती में हैं. उस पर हिंदी में लिखा गया है और कोशिश की गई है कि भाषा ठीक ठाक लच्छेदार है. जब बात सिग्नेचर की आई है तो वो अंग्रेजी में किया गया है. पत्र को अब गौर से पढ़िए. अंतिम वाक्यों में लिखा है कि आप से मुलाकात होने पर इसपर विस्तृत चर्चा होगी. लिखा है कि अच्छी प्रचार पद्धति के लिए आपका मार्गदर्शन आवश्यक है.

गुजरात के चुनाव में जो बात साफ तौर पर नजर आ रही है, वो ये है कि राहुल गांधी अब तक के अपने सबसे आक्रामक रूप में हैं. लगातार गुजरात दौरे पर हैं और बीजेपी पर निशाना साधने की कोई भी गुंजाइश नहीं छोड़ रहे हैं. उनके हर दौरे में भरत सिंह सोलंकी लगभग मौजूद होते हैं. ऐसे में भरत सिंह सोलंकी का पत्र लिखना और मिलने पर विस्तार से बात करने की बात बेमानी ही है. रही बात मार्गदर्शन की तो, गुजरात में इस बार कांग्रेस जितना दिख रही है, उसका पूरा-पूरा श्रेय अकेले राहुल गांधी के ही पास है. ऐसे में बिना उनके मार्गदर्शन के कांग्रेस इस स्थिति में खड़ी हो ही नहीं सकती थी. खुद भरत सिंह सोलंकी ने भी इस पत्र को फेक बताया है और इसे विरोधियों की साजिश करार दिया है.

लेकिन भरत सिंह सोलंकी ही क्यों? सब ठीक तो है!

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पिछले दिनों भरत सिंह सोलंकी का इस्तीफा वायरल हुआ था.

गुजरात में जब से तारीखों का एलान हुआ है, भरत सिंह सोलंकी निशाने पर ही रहे हैं. जब कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अपने उम्मीदवारों का नाम घोषित नहीं किया था, सोशल मीडिया में इसी तरह का एक लेटर पैड नमूदार हुआ था. उसमें कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम थे और नीचे भरत सिंह सोलंकी के सिग्नेचर थे. भरत सिंह को तुरंत ही सफाई देने आना पड़ा और आनन-फानन में उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करनी पड़ी. अभी वो ठीक तरह से डैमेज कंट्रोल में जुटे ही थे कि इस बार उनके साथ इससे भी बड़ा हादसा हो गया. इस बार सोशल मीडिया पर उनका इस्तीफा वायरल हो गया. एक बार फिर भरत सिंह सोलंकी ने खुद को राहुल का सिपाही बताया और कहा-

‘मैं कांग्रेस और राहुल गांधी का सैनिक हूं. मेरी चार पीढ़ियां कांग्रेस के साथ जुड़ी रही हैं. इसलिए इस्तीफे का तो सवाल ही नहीं उठता है. 182 प्रत्याशियों को चुनाव जितवाना है, इसलिए खुद चुनाव नहीं लड़ रहा हूं. जो पत्र सोशल मीडिया पर जारी हुआ है, वो फर्जी है. जनता को गुमराह करने के लिए बीजेपी की ओर से ये पत्र जारी किया गया है. जनविरोधी नीतियों के चलते घिरी बीजेपी अलग-अलग पैंतरे आजमा रही है.’

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सोलंकी केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं.

हर बार निशाना भरत सिंह सोलंकी ही बन रहे हैं. हर बार उन्हें सामने आकर सफाई देनी पड़ रही है कि ये मैने नहीं किसी और ने किया. ऐसे में ये सवाल तो बार बार उठ ही रहा है कि गुजरात में जब राहुल के अलावा अहमद पटेल और अर्जुन मोढवाडिया जैसे भी कद्दावर नेता हैं, हर बार निशाने पर सिर्फ भरत सिंह ही क्यों आ रहे हैं. भरत सिंह सोलंकी के समर्थकों का दावा है कि बीजेपी उनकी बढ़ती लोकप्रियता से परेशान है, लेकिन फिर सवाल जस का तस है कि लोकप्रिय तो और भी नेता हैं, फिर निशाने पर वो क्यों नहीं?


वीडियो में देखें जिग्नेश मेवानी के बारे में क्या सोचते हैं गुजरात के बीएसपी कार्यकर्ता

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