Submit your post

Follow Us

क्यों चुनाव आयोग पर बीजेपी को फेवर करने के आरोप पहली नज़र में ठीक लग रहे हैं

चुनाव आयोग ने हमें बार-बार निराश करने की ठान ली है. गुजरात चुनाव में तो आयोग ‘सीरियल ऑफेन्डर’ बनकर उभरा है. पहले बीजेपी के चुनाव से एक दिन पहले मेनिफेस्टो लागू करने पर लीपा-पोती. फिर दूसरे और आखिरी चरण के मतदान पर ‘चुप्पी’ लगाकर बैठना. हमारी बात हुई गुजरात के मुख्य चुनाव अधिकारी बी बी स्वैन से. कई बार कोशिश करने के बाद. दोपहर डेढ़ बजे से हमारी जो जद्दोजहद शुरू हुई, वो शाम साढ़े पांच तक चलती रही. मामला था PM मोदी पर लगे आचार संहिता के उल्लंघन का मामला.

ये न नियम जानते हैं, न अनुमान लगाते हैं

14 दिसंबर को दोपहर में PM नरेंद्र मोदी मतदान करने पोलिंग बूथ पहुंचे. फिर वोट देकर बाहर आए और रोड-शो निकाला. उनकी उंगली पर मतदान वाली स्याही लगी थी. गाड़ी पर एक किनारे खड़े होकर वो लोगों को वो ही उंगली दिखाते गुजरे. इसी बारे में चुनाव आयोग से जानना था कि नियम क्या कहते हैं. पहले की तरह इस बार भी वो ‘जांच करवा रहे हैं/करवाएंगे’ कहकर सवाल से बचने की कोशिश करते रहे.

Video: क्या एक दिन पहले मेनिफेस्टो देकर भाजपा ने उड़ाई आचार संहिता की धज्जियां?

कहा, जांच रिपोर्ट आने के बाद देखेंगे कि उल्लंघन हुआ है कि नहीं. ये पूछे जाने पर कि अगर PM मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन के दोषी पाए जाते हैं, तो कार्रवाई का क्या प्रावधान है? उन्होंने कहा, वो अभी ‘presume’ नहीं करना चाहते. माने, अनुमान नहीं लगाना चाहते. हमने फिर से नियमों के बारे में पूछा. फिर उन्होंने जानकारी न होने की बात कही.

अंत में आयोग पर लग रहे पक्षपात के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. इतनी घबराहट किसलिए है आयोग के अंदर? इतनी डिफेंसिव क्यों है वो? क्या उसे अपनी विश्वसनीयता खत्म होने का कोई डर नहीं? क्या ये बात आयोग के लिए मायने नहीं रखती? उनका बर्ताव तो ये ही चुगली करता है.

विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस बिफर गई है. उसने प्रधानमंत्री पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है. मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन. उसने चुनाव
आयोग के पास शिकायत भी दर्ज कराई है. कांग्रेसी कार्यकर्ता दिल्ली स्थित चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर खड़े होकर विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव आयोग ‘दोहरापन’ दिखा रहा है. जहां तक बात रही PM की, तो चुनावी रैलियों में उनकी बातें सुनकर हम उनसे बड़प्पन की उम्मीद क्या रखें? आते और वोट देकर जाते. नियमों के बारे में जानते हुए भी इस तरह का स्टंट करने की क्या जरूरत थी? इतने उतावलापन क्यों दिखा रहे हैं मोदी?

ये प्रचार नहीं तो क्या है?

पहली नजर में साफ लगता है कि PM ने जो किया, जान-बूझकर किया. चुनावी फायदे की मंशा से किया. एक तरह से प्रचार ही किया. मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की. ऐसा है या नहीं है, ये बताने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है. जानने के लिए हमने फोन मिलाया. गुजरात के मुख्य चुनाव अधिकारी बी बी स्वैन को. कई बार संपर्क करने के बाद भी उनसे बात नहीं हो पाई. उनके सचिव से दो-तीन बार बात हुई. वो हर बार आधे घंटे बाद फोन करने को कहते. बात एक बार भी नहीं हुई मगर.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग 2019 के आमचुनाव में हर बूथ पर VVPAT लगाने की तैयारी कर रहा है
चुनाव आयोग के अधिकारी घंटों टालमटोल करते रहे, स्पष्ट जवाब नहीं दिया.

आधा घंटा जो कभी हुआ ही नहीं

दोपहर डेढ़ बजे फोन मिलाया पहली बार. आधे घंटे बाद फोन करने को कहा गया. हमने दोबारा 02.05 बजे फोन किया. सचिव ने कहा कि फोन ट्रांसफर कर रहे हैं. फिर जवाब मिला कि CEO स्वैन ने बात करने से इनकार कर दिया है. कहा, आधे घंटे बाद फोन करने कहो. हमने दिए गए समय पर फिर फोन किया, तो कोई रेस्पॉन्स नहीं. फोन की घंटी बजती रही, मगर किसी ने फोन नहीं उठाया. हमने पहले मोबाइल से मिलाया. फिर लैंडलाइन से कॉल किया. मगर हाल वो ही. कोई जवाब नहीं. ये ताज्जुब की बात है.

चुनाव वाले दिन आयोग कितना तत्पर और कितना गंभीर है, इस पर संशय पैदा होता है. ये वो ही समय था, जब मेहसाना, आणंद और वडोदरा में चुनावी हिंसा हुई. शाम करीब 04.26 बजे CEO स्वैन के दफ्तर का फोन उठा. उनके सचिव ने इस बार उनके मोबाइल का नंबर दिया. मोबाइल पर फोन किया. घंटी बजती रही, जवाब नहीं मिला. फिर एक मैसेज आया कि बाद में बात करेंगे. हमने सवाल लिखकर भेज दिया. फिर उनका फोन आया. शाम 05.22 के करीब. जो बातचीत हुई, उसके बारे में हम आपको ऊपर ही बता चुके हैं.

चुनाव आयोग का बर्ताव समझ के बाहर है. शाम पांच बजे तक मतदान होना था. क्या आयोग मीडिया के सवालों से बचने के लिए टालमटोल कर रहा था? क्या जान-बूझकर सवालों से बचने की कोशिश की जा रही थी? क्या आयोग ये सोच रहा था कि पहले चुनाव निपट जाएं, फिर देखेंगे आगे क्या करना है? ये सारे सवाल पैदा हो रहे हैं. ये वाजिब भी हैं. ऐसे अहम मौके पर जवाब न मिले, तो क्या माना जाएगा? जवाब नहीं मिलता, मगर कार्रवाई तो होती कोई. वो भी नहीं दिखी.

राहुल गांधी के एबीपी न्यूज़ को दिए इंटरव्यू पर चुनाव आयोग ने आपत्ति ली थी.
राहुल गांधी के एबीपी न्यूज़ को दिए इंटरव्यू पर चुनाव आयोग ने आपत्ति ली थी.

विपक्ष और सत्ता के लिए नियम अलग-अलग?

चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं. पहली नजर में ये आरोप सही भी लग रहे हैं. इसकी एक वजह आयोग का ये ठंडापन भी है. राहुल गांधी टीवी पर इंटरव्यू देते हैं तो उन्हें नोटिस भेज दिया जाता है. अच्छी बात है. जो नियम तोड़े, उसको नाप दो. मगर सत्ता जब नियम तोड़ती दिखती है, तब आयोग का रवैया पुचकारने टाइप क्यों लगता है? ऐसा क्यों लगता है कि चुनाव आयोग बीजेपी सरकार को बचाने की कोशिश कर रहा है? खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश करता भी नहीं दिख रहा है आयोग. ये बेहद अफसोस की बात है. ये हाल रहा तो चुनाव आयोग के वो पुराने दिन याद आ जाएंगे, जब उसके ऊपर सरकार का खुलकर साथ देने का आरोप लगा करता था.


गुजरात चुनाव-2017 की लल्लनटॉप कवरेजः

‘कुछ दिन गुजारिए’ गुजरात के इस गांव में और विकास के सारे मॉडल भूल जाएंगे
गुजरात ने अपने विकास के लिए इन आदिवासियों को ‘नो मैन्स लैंड’ में धकेल दिया है
गुजरातः जहां के मछुआरे बांधों की नींव का गारा बनते जा रहे हैं
ग्राउंड रिपोर्ट नवसारीः जहां गांधी की झोपड़ी के बगल में दो टूटे चरखे एक दूसरे को घूरते हैं
गुजरात के वो तीन ज़िले जहां ‘विकास’ इसलिए नहीं गया कि मोबाइल नेटवर्क नहीं पकड़ता
गुजरात का वो गांव जो सरकार की नाकामी के कारण आत्मदाह करने वाला है
जिन कारीगरों ने मोदी और शी जिनपिंग के बैठने के लिए झूला तैयार किया था उनके साथ बहुत बुरा हुआ
क्या गोधरा कांड की शुरुआत एक स्टेशन पहले हो गई थी?
गोधरा के नाम से अगर दंगे याद आते हैं, तो ये तस्वीरें देखिए
चीतल डायरीज़ः ‘अमूल’ की कामयाबी के कसीदों में खेड़ा-आणंद इलाके की ये सच्चाई छुप जाती है

Video: इस मंदिर की सीढ़ियां चढ़ राहुल गुजरात की सत्ता पाना चाहते हैं

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

चुनाव 2018

कमल नाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, कैबिनेट में ये नाम हो सकते हैं शामिल

कमल नाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, कैबिनेट में ये नाम हो सकते हैं शामिल

कमल नाथ पहली बार दिल्ली से भोपाल की राजनीति में आए हैं.

राजस्थान: हो गया शपथ ग्रहण, CM बने गहलोत और पायलट बने उनके डेप्युटी

राजस्थान: हो गया शपथ ग्रहण, CM बने गहलोत और पायलट बने उनके डेप्युटी

राहुल गांधी, मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस के ज्यादातर बड़े नेता जयपुर के अल्बर्ट हॉल पहुंचे हैं.

मायावती-अजित जोगी के ये 11 कैंडिडेट न होते, तो छत्तीसगढ़ में भाजपा की 5 सीटें भी नहीं आती

मायावती-अजित जोगी के ये 11 कैंडिडेट न होते, तो छत्तीसगढ़ में भाजपा की 5 सीटें भी नहीं आती

कांग्रेस के कुछ वोट बंट गए, भाजपा की इज़्ज़त बच गई.

2019 पर कितना असर डालेंगे पांच राज्यों के चुनावी नतीजे?

2019 पर कितना असर डालेंगे पांच राज्यों के चुनावी नतीजे?

क्या मोदी के लिए परेशानी खड़ी कर पाएंगे राहुल गांधी?

क्या अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए अपनी गोटी सेट कर ली है

क्या अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए अपनी गोटी सेट कर ली है

लेकिन सचिन पायलट का एक दाव अशोक गहलोत को चित्त कर सकता है.

मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी क्यों हैं ये नतीजे?

मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी क्यों हैं ये नतीजे?

आज लोकसभा चुनाव हो जाएं तो पांच राज्यों में भाजपा को क्यों लगेगा जोर का झटका?

भंवरी देवी सेक्स सीडी कांड से चर्चित हुई सीटों पर क्या हुआ?

भंवरी देवी सेक्स सीडी कांड से चर्चित हुई सीटों पर क्या हुआ?

इस केस में विधायक और मंत्री जेल में गए.

क्या शिवराज के कहने पर कलेक्टरों ने परिणाम लेट किए?

क्या शिवराज के कहने पर कलेक्टरों ने परिणाम लेट किए?

सोशल मीडिया का दावा है. जानिए कि परिणामों में देरी किस तरह हो जाती है.

राजस्थान चुनाव 2018 का नतीजा : ये कांग्रेस की हार है

राजस्थान चुनाव 2018 का नतीजा : ये कांग्रेस की हार है

फिनिश लाइन को पार करने की इस लड़ाई में कांग्रेस ने एक बड़ा मौका गंवा दिया.

बीजेपी को वोट न देने पर गद्दार और देशद्रोही कहने वाले कौन हैं?

बीजेपी को वोट न देने पर गद्दार और देशद्रोही कहने वाले कौन हैं?

जनता ने मूड बदला तो इनके तेवर बदल गए और गालियां देने लगे.