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RSS के कार्यक्रम में BSF की वर्दी पहनकर पहुंचने वाले अब चुनाव पर्यवेक्षक बने

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सीमा सुरक्षा बल के रिटायर्ड डीजी केके शर्मा को लेकर तगड़ा बवंडर हो सकता है. चुनाव आयोग ने शर्मा को पश्चिम बंगाल और झारखंड का ‘विशेष केंद्रीय पुलिस पर्यवेक्षक’ बनाने का ऐलान किया है. शर्मा की शख्सियत विवादित रही है. फरवरी, 2018 में केके शर्मा आरएसएस से जुड़े एनजीओ सीमांत चेतना मंच के एक सम्मेलन में वर्दी पहनकर शामिल हुए थे. ये सम्मेलन कोलकाता में हुआ था. इसको लेकर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी. टीएमसी ने इसे इस मुद्दे को गृह मंत्रालय के सामने उठाने की चेतावनी दी थी. टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रॉयन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि वे इस मसले को गृह मंत्रालय के सामने एक बार फिर उठाएंगे.

केके शर्मा हाल ही में बीएसएफ के डीजी पद से रिटायर हुए हैं. फाइल फोटो. पीटीआई.
केके शर्मा हाल ही में बीएसएफ के डीजी पद से रिटायर हुए हैं. फाइल फोटो. पीटीआई.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?
26 मार्च, 2019 को पीआईबी यानी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो एक प्रेस रिलीज जारी की है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इसमें कहा गया है कि ‘चुनाव आयोग ने केके शर्मा को पश्चिम बंगाल और झारखंड के लिए विशेष केंद्रीय पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. वे दोनों राज्यों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और सुरक्षा से जुड़े मसलों की निगरानी करेंगे.’ पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का लंबा इतिहास रहा है. पंचायत चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक हर बार चुनाव में हिंसा होती है. इसके अलावा झारखंड में नक्सल प्रभावित इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर कई बार मतभेद होते रहे हैं. माना जा रहा है कि ये फैसला उसी के मद्देनजर चुनाव आयोग ने लिया है.

डेरेक ओ ब्रॉयन का पुराना ट्वीट.
डेरेक ओ ब्रॉयन का पुराना ट्वीट.

शर्मा के नाम पर आपत्ति क्या है?
केके शर्मा हाल ही में बीएसएफ के डीजी पद से रिटायर हुए हैं. 1982 बैच के आईपीएस अफसर हैं. बीएसएफ के डीजी रहते केके शर्मा ऐसे कदम उठाते रहे हैं, जिससे उनका जुड़ाव आरएसएस या सत्ताधारी भाजपा से जाहिर होता रहा है.
सीमांता चेतना मंच के कार्यक्रम में जब वे शामिल हुए थे, तब बड़ा हो हल्ला कटा था. आपत्ति इस बात को लेकर थी कि वे डीजी के यूनिफॉर्म में ही सम्मेलन में पहुंच गए थे. इसके बाद वे ऐसे बयान भी देते रहे जो पश्चिम बंगालकी सत्ताधारी तृणमूल सरकार को असहज करने वाले थे. रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर एक दिए एक बयान में उन्होंने कहा था कि रोहिंग्या को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार का रवैया ‘ थोड़ा दोस्ताना’ है. इसको लेकर टीएमसी ने कड़ी आपत्ति जताई थी. पार्टी का कहना था कि केके शर्मा राजनीतिक बयान दे रहे हैं.


वीडियोः मायावती मुलायम का प्रचार करेंगी तो चुनाव क्यों नहीं लड़ेंगी?

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