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वो 4 पूर्व मुख्यमंत्री जिन्हें मोदी 2.0 कैबिनेट में मिली जगह

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30 मई, 2019 की शाम मोदी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हुआ. नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. पीएम मोदी के साथ 24 कैबिनेट मंत्रियों, 9 स्वतंत्र प्रभार वहीं 24 राज्य मंत्रियों ने थपथ ली. कुल 57 मंत्रियों ने थपथ ली. इनमें से 4 मंत्री ऐसे हैं जो कभी न कभी मुख्यमंत्री रह चुके हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम रह चुके हैं. जानते हैं इन मंत्रियों के बारे में.

#राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह.

पीएम मोदी के बाद राजनाथ सिंह ने थपथ ली. मोदी सरकार में दूसरे कद्दावर मंत्री. मोदी सरकार में गृहमंत्री रह चुके हैं. मंत्री के तौर पर लंबा अनुभव रहा है. बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं. 28 अक्टूबर 2000 से 8 मार्च 2002 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.

साल था 1976. इमरजेंसी का दौर था. यूपी की एक जेल थी. दो राजनीतिक कैदी थे. एक हाथ पसारे बड़े ध्यान से ऊपर देख रहा था. दूसरा हाथ पर देखते हुए कुछ सोच रहा था. हाथ देखने वाला थोड़ा उम्रदराज था. दिखाने वाला नौजवान. उम्रदराज ने कहा- बेटा, तुम एक दिन बहुत बड़े नेता बनोगे. जवान बोला- कितना बड़ा गुप्ता जी. उम्रदराज ने कहा- यूपी के सीएम जितना बड़ा. नौजवान हंसने लगा. 25 साल का था. उसकी पार्टी की ही हैसियत बहुत कम थी. सीएम कहां बनते. विधायक बनकर टिक जाएं वही बहुत था. पर बुजुर्ग की बात सच निकली. 24 साल बाद वो लड़का उन्हीं उम्रदराज इंसान को हटाकर यूपी का मुख्यमंत्री बना. वो राजनाथ सिंह थे. और बुजुर्ग थे जनसंघी दौर के नेता रामप्रकाश गुप्ता. राजनाथ सिंह ज्योतिष में बहुत यकीन करते हैं. उनके करीबी उन्हें आज भी अध्यक्षजी कहते हैं. यूपी के राजनीतिक गलियारों में अध्यक्षजी का मतलब राजनाथ सिंह होता है. वह उत्तर प्रदेश और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं.

#रमेश पोखरियाल निशंक

बेटी श्रेयसी के साथ रमेश पोखरियाल निशंक.
बेटी श्रेयसी के साथ रमेश पोखरियाल निशंक.

साल 1991 में पहली बार कर्णप्रयाग सीट से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने. साल 1991 से 2012 तक वो यूपी और उत्तराखंड में 5 बार विधायक बने. यूपी की कल्याण सिंह और रामप्रकाश गुप्त सरकार में मंत्री बने. साल 2000 में उत्तराखंड राज्य बना तो वो वित्त, राजस्व और पीने के पानी जैसे 12 विभागों के मंत्री बने. 2007 में भी भुवन चंद्र खंडूरी सरकार के दौरान मंत्री बने. फिर आया साल 2009. लोकसभा चुनाव में हार के बाद खंडूरी को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा और रमेश पोखरियाल निशंक उत्तराखंड के सीएम बन गए. निशंक को खंडूरी का करीबी माना जाता था और वो आरएसएस से भी जुड़े हुए थे. 2009 से 2011 तक उत्तराखंड के पांचवें मुख्यमंत्री बने. 2012 में देहरादून के डोईवाला से विधायक बने. लेकिन 2014 में हरिद्वार से सांसदी का चुनाव लड़ने के लिए विधायकी छोड़ दी.

निशंक पिछली बार भी सांसद चुने गए थे. उनके साथ ही उत्तराखंड से बीसी खंडूरी और बीएस कोश्यारी जैसे कद्दावर और अनुभवी नेता थे. छोटा राज्य होने की वजह से मोदी मंत्रिमंडल में एक राज्यमंत्री का पद ही मिल पाया. उसमें न निशंक आ पाए, न खंडूरी और न ही कोश्यारी. अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद युवा अजय टम्टा को राज्य मंत्री बना दिया गया. लेकिन इस बार अनुभव काम आया. इस बार उत्तराखंड से आने वाले सबसे लंबे राजनीतिक अनुभव वाले नेता निशंक ही हैं लिहाजा वो मंत्री बन गए हैं.

#सदानंद गौड़ा

सदानंद गौड़ा

4 अगस्त 2011 से 12 जुलाई 2012 तक कर्नाटक के सीएम रहे हैं. सीएम तब बनाए गए थे, जब अवैध खनन केस में नाम आने पर बीएस येदियुरप्पा को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. तब कर्नाटक बीजेपी की अंदरूनी कलह इतनी बढ़ गई थी कि दिल्ली के नेताओं को भी पसीने आ गए थे. आखिरकार येदि की सहमति से गौड़ा सीएम बने. वजह थी गौड़ा का वोक्कालिंगा समुदाय से आना, क्योंकि येदि ‘लिंगायतों के मसीहा’ के अपने ओहदे पर कोई आंच नहीं चाहते थे.

फिर पार्टी की कलह की वजह से कुर्सी छोड़नी भी पड़ी. इनके बाद लिंगायत नेता जगदीश शेट्टार सीएम बनाए गए. सीएम रहने के अलावा गौड़ा 2006 और 2007 में कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं. 1994 और 1999 में दक्षिण कन्नड़ा जिले की पुत्तूर विधानसभा सीट से विधायक बने. 2004 में मेंगलोर लोकसभा सीट पर वीरप्पा मोइली को हराया. 2009 में उडुपी-चिकमंगलूर और 2014 में बेंगलुरु नॉर्थ से सांसद बने.

#अर्जुन मुंडा

arjun

अर्जुन मुंडा तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहली बार 18 मार्च 2003 से 2 मार्च 2005 तक, दूसरी बार मार्च 12 2005 से 8 सितंबर 2006 और तीसरी बार 11 सिंतबर 2010 से 8 जनवरी 2013 तक झारखंड के सीएम रहे. उन्होंने पहली बार 35 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री का पद संभाला था. देश में सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया था. झारखंड में अर्जुन मुंडा भारतीय जनता पार्टी के बड़े चेहरा हैं. वर्तमान में वो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं. अर्जुन मुंडा का जन्म झारखंड के जमशेदपुर के घोड़ाबांधा में 3 मई 1968 को गणेश मुंडा और साइरा मुंडा के यहां हुआ था. मोदी-2 सरकार में कैबिनेट मंत्री बने हैं.


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