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गुजरात चुनाव के पहले ही दिन EVM मशीनों के हैक होने का सच ये है

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तो साहेबान जिस बात का डर था, वही सही साबित होती दिख रही है. हमारी-आपकी चहेती ईवीएम, जिस पर लोकतंत्र का पूरा दारोमदार है, एक बार फिर से खराब हो गई हैं. लोग हंगामा कर रहे हैं, ट्वीट कर रहे हैं, शिकायत कर रहे हैं. चुनाव आयोग उन मशीनों की जगह नई मशीनें लगवा रहा है, लेकिन शिगूफा तो छूट ही गया है.

9 दिसंबर को जब गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहचे चरण की वोटिंग शुरू हुई, तो लोग सब काम-धाम छोड़कर वोट देने के लिए अपने-अपने बूथ में जाकर खड़े हो गए. वो अपना वोट देते और बाहर निकल आते. इस बीच कई जगहों से खराब ईवीएम की शिकायतें मिलनी शुरू हो गईं. इसके बाद कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने एक ट्वीट कियाः

इसके तुरंत बाद @zishansays के ट्विटर हैंडल से दो ट्वीट किए गए. दोनों में वीडियो था, जिसमें दावा किया गया था कि मशीनों में कांग्रेस को वोट देने वाला बटन काम नहीं कर रहा है. एक मशीन में प्रत्याशी पहले नंबर पर है तो एक नंबर बटन काम नहीं कर रहा है. दूसरी मशीन में कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे नंबर पर है, तो दूसरा नंबर काम नहीं कर रहा है.

इसके बाद चुनाव आयोग ने भी सफाई दी और कहा कि खराब मशीनों को बदलकर चुनावी प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्रनगर में 5 ईवीएम खराब थीं. सूरत के शहरी इलाकों में करीब 70 मशीनों के खराब होने की बात सामने आई थी. वहीं कच्छ में 9, भुज में 9, मुंद्रा में 2, रौपड़ और अब्दासा में 1, पोरबंदर में 8, अमरेली, रजौला और सावरकुंडला तालुका में 3-3 मशीनें ख़राब होने की बात सामने आई है. वहीं राजकोट पूर्व सीट पर एक बूथ में वोटिंग के दौरान मोबाइल से वीडियो बनाने की घटना सामने आई थी, जिसकी जांच का आदेश जारी कर दिया गया है. पोरबंदर के ठक्कर प्लॉट पोलिंग बूथ पर भी ईवीएम में गड़बड़ी की बात सामने आई और कहा गया कि ईवीएम को ब्लूटूथ से कनेक्ट किया गया है. इसके बाद चुनाव आयोग के अधिकारी वहां जांच के लिए पहुंच गए-

जांच के बाद उन्होंने कहा कि जिसे ब्लूटूथ कहा जा रहा है, वो डिवाइस है, जो वीवीपैट और ईवीएम को कनेक्ट करने के काम आती है. जब दोनों डिवाइस कनेक्ट होती है तो उसमें लाइट ब्लिंक होती है.

एक और जगह पर ईवीएम के वाई-फाई से कनेक्ट होने की शिकायत आई थी. जांच के बाद पाया गया कि बीएसपी प्रत्याशी का वाई-फाई ऑन था, जिसका नाम ईवीएम से मिलता जुलता था.

वहीं बीजेपी नेता जितेंद्र सिंह ने कहा कि हारने के बाद कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा ईवीएम के सिर फोड़ती रहती है. इस बार भी कांग्रेस वही कर रही है, क्योंकि उसे पता है कि वो 18 तारीख को गुजरात का चुनाव हारने जा रही है.

भावनगर में भी ईवीएम खराब होने की शिकायत मिली थी, जिसके बाद कलेक्टर ने कहा कि खराब मशीनें बदलवाकर चुनाव शुरू करवाए जा चुके हैं.

वहीं पाटीदारों की ओर से आरोप लगाया गया कि मशीनें उन इलाकों में जानबूझकर खराब की गई हैं, जहां पाटीदारों की संख्या ज्यादा है.

कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने भी ट्वीट कर लोगों को सावधान किया है और कहा है कि गुजरात चुनाव में ईवीएम खराब होने लगी है.

लेकिन शिगूफा तो शिगूफा ही है. अब छूट गया है. इतनी जल्दी तो बंद नहीं ही होगा. मनमाफिक रिजल्ट आ गया, तब तो 18 दिसंबर के बाद कोई इसका नामलेवा भी नहीं होगा. लेकिन अगर रिजल्ट उल्टा हुआ तो, 18 दिसंबर तो छोड़िए, अगले 18 महीनों तक भी इस ईवीएम की बात सुनी-सुनाई जाती रहेगी. भरोसा न हो तो यूपी का विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए निकाय चुनाव के नतीजों पर एक नज़र डाल लीजिए.


 

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