Submit your post

Follow Us

पहले अमेरिका, फिर नफ़रत फैलाने वाले कुछ इंडियन्स को इस इतिहासकार ने खूब धोया

अभी कोरोना काल है. लॉकडाउन है. आदमी आदमी से मिल नहीं सकता. ऐसे में इंडिया टुडे ई-कॉन्क्लेव कर रहा है. यानी इंटरनेट के जरिए दूर बैठे लोगों से बातचीत. इसी कड़ी में राहुल कंवल ने युवल नोआ हरारी से बात की. वे मशहूर इतिहासकार हैं. सेपियंस, होमो डियस, 21वीं सदी के 21 सबक जैसी किताबों के लेखक हैं. वह इज़रायल के रहने वाले हैं. येरूशलम की हिब्रू युनिवर्सिटी में इतिहास पढ़ाते हैं. ई-कॉन्क्लेव में उन्होंने कोरोना वायरस, दुनिया के नेताओं, धर्म और सर्विलांस यानी लोगों की प्राइवेसी में दखल जैसे मुद्दों पर बात की. आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा-

कोरोना वायरस और पुरानी महामारियां

हरारी ने कहा, “अभी हम बेहतर स्थिति में हैं. ये महामारी मध्य काल यानी 13वीं शताब्दी में आयी ब्लैक डेथ (प्लेग) के लिहाज से काफी कम है. तब ब्लैक डेथ किसी की समझ में नहीं आया, कैसे लोग मर रहे हैं है, कैसे रोका जाये. कुछ लोग उसे ईश्वर का दंड मान रहे थे. अभी महामारी को लेकर वैज्ञानिक जानकारियां मौजूद हैं. जो कुछ भी हो रहा है लोग उसको अच्छे से जानते हैं.”

“हम पहले की तरह अनजान और बेबस नहीं हैं. बस सवाल ये है कि क्या हमें ताकत का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना आता है. कोरोना एक बड़ी महामारी जरूर है, लेकिन इससे लड़ना आसान है. आज हमें सब पता है. दो हफ्ते में वायरस की पहचान कर ली गई. उसके टेस्ट के तरीके डेवलप कर लिए गये. हमारे पास इससे लड़ने की ताकत है.”

युवल नोआ हरारी इज़रायल के रहने वाले हैं. मानव इतिहास पर उनकी किताब सेपियंस काफी लोकप्रिय है.
युवल नोआ हरारी इज़रायल के रहने वाले हैं. मानव इतिहास पर उनकी किताब सेपियंस काफी लोकप्रिय है.

अमेरिका और दुनिया

हरारी ने कहा कि 2014 में जब इबोला आया था तो अमेरिका ने इस संकट को रोकने का नेतृत्व किया था. 2008 में आर्थिक मंदी के समय में भी उसने ऐसा ही किया. लेकिन आज जब पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रहा है तो कोई ग्लोबल ताकत इससे लड़ने के लिए नेतृत्व करती नजर नहीं आ रही. उन्होंने कहा, “आज अमेरिका ने कह दिया कि वो सिर्फ अपनी केयर करते हैं यानी अमेरिका फर्स्ट है. बीमार लोगों में फर्स्ट. मारे गए लोगों में फर्स्ट. अब अमेरिका मुखिया नहीं है. दुनिया को अब अमेरिका की काबिलियत पर भरोसा नहीं रहा. लोग अब अमेरिका की तरफ देख रहे हैं और कह रहे हैं, ‘अरे, ये ऐसे चुनौती का सामना करते हैं…अच्छी बात है कि अमेरिका दुनिया को लीड नहीं कर रहा.’ ”

उन्होंने कहा कि महामारी के खिलाफ दुनिया अब भी एक साथ आ सकती है. चीन, अमेरिका को सुझाव दे सकता है. एक देश से दूसरे देश में मेडिकल टीम और मेडिकल किट्स भेजी सकती हैं. बदकिस्मती से ऐसा नहीं किया जा रहा है. कोरोना का टीका बनाने के लिए सभी देशों को साथ आने की जरूरत है. उनके संसाधनों को एक करने की जरूरत है. कोरोना से होने वाले आर्थिक असर के लिए वैश्विक इकनॉमिक प्लान चाहिए. नहीं तो पूरी दुनिया आर्थिक मंदी में होगी.

12 मार्च, 2019 तक कोरोना वायरस इन्फेक्शन दिखाता नक्शा. WHO ने इससे एक दिन पहले COVID-19 को महामारी घोषित किया था. (सोर्स - WHO)
12 मार्च, 2019 तक कोरोना वायरस इन्फेक्शन दिखाता नक्शा. WHO ने इससे एक दिन पहले COVID-19 को महामारी घोषित किया था. (सोर्स – WHO)

नफरत

हरारी ने कहा, “कोरोना वायरस पर चीन के शुरुआती रवैये की काफी आलोचना हुई. यदि चीन पहलेपहल खुलकर बात करता तो हम इस महामारी को रोक सकते थे. लेकिन मैं खुश हूं कि चीन इस संकट का सामना करने में बाकी देशों की मदद कर रहा है.”

“बड़ी समस्या वायरस नहीं बल्कि इंसान के अंदर बैठा शैतान है. अब हम नफरत देखते हैं. दूसरे देशों के लिए, दूसरे लोगों के लिए. यदि हमने इस नफरत को फैलने दिया तो यह हमें अभी के संकट से निकलने नहीं देगी. और आने वाले सालों में रिश्तों में जहर भर जाएगा.”

कोरोना वायपस के चलते पूरी दुनिया के चेहरे बदल गए, लिटरली. (सोर्स - रॉयटर्स)
कोरोना वायपस के चलते पूरी दुनिया के चेहरे बदल गए, लिटरली. (सोर्स – रॉयटर्स)

तानाशाही या लोकतंत्र

हरारी ने कहा, “संकट के समय बहुत से लोग एक ताकतवर नेता का सपना देखते हैं. ऐसा नेता जो कोरोना वायरस जैसी आपदा से लड़ने में मदद करेगा. लेकिन यह विचार खतरनाक है. ऐसा नेता संकट समाप्त होने के बाद हटेगा नहीं. क्योंकि हमेशा एक नया संकट आता रहता है. लोग सोचते हैं कि तानाशाही सही है क्योंकि इसमें फैसले तेजी से लिए जाते हैं. लेकिन समस्या यह है कि अगर वह नेता गलत फैसला लेगा तो वह मानेगा नहीं कि वह गलत था. वह दूसरों पर दोष चस्पा कर देगा. साथ ही दूसरों का सामना करने के लिए और ताकत चाहेगा.”

उन्होंने कहा कि चीन में एक पार्टी का शासन है. वहां उस सरकार ने संकट का सामना बाकियों की तुलना अच्छे से किया. लेकिन ऐसा ही काम दक्षिण कोरिया. ताइवान और न्यूजीलैंड ने भी किया. इन देशों में लोकतंत्र है. दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड ने तो चीन से भी अच्छा काम किया है.

युवल नोआ हरारी तकनीक के बेजां इस्तेमाल पर भी आगाह करते रहे हैं.
युवल नोआ हरारी तकनीक के बेजां इस्तेमाल पर भी आगाह करते रहे हैं.

धर्म और विज्ञान

बकौल हरारी, “धर्मगुरुओं के साथ समस्या यह है कि वे महामारियों को रोक नहीं पाते. यहां उनकी एक नहीं चलती. धर्मगुरुओं को बहाने बनाने में महारत है. तो इस महामारी में भी वे ऐसा ही करेंगे. वो बीमारी के बारे में कहानियां बनाने, बहाने तैयार करने के काम में लगे हुए हैं. कुछ लोग इन बहानों को मान जाते हैं.”

लेकिन उम्मीद है कि ज्यादा लोग धर्मगुरुओं और वैज्ञानिकों में से वैज्ञानिकों को चुनेंगे. इजरायल का एक उदाहरण है. कोरोना की शुरुआत हुई तो इजरायल में चुनाव के दौरान धार्मिक पार्टी के एक नेता ने कहा कि हमें वोट दीजिये. आपको कोरोना से बचाएंगे. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि उस पार्टी के नेता जो कि इजरायल के हेल्थ मिनिस्टर भी थे वह खुद कोरोना संक्रमित हो गए.

भारत

हरारी मानते हैं कि कोरोना वायरस भारत के लिए बड़ी चुनौती है. क्योंकि भारत पहले की महामारियों में काफी नुकसान झेल चुका है. 1918 की स्पैनिश फ्लू महामारी में भारत पर सबसे ज्यादा असर पड़ा था.

आखिर में उन्होंने कहा,

“मैं यह नहीं कह सकता कि भारत सरकार महामारी पर कैसे काम कर रही है. लेकिन मैं लोगों से कहूंगा कि वे साथ रहें. आपस में नफरत न रखें. दूसरे देशों से भी. और भारत में रह रहे दूसरे समुदायों से भी. कुछ स्टोरिज को लेकर मैं चिंतित था. मैंने सुना कि भारत में मुस्लिमों को वायरस फैलाने के लिये बदनाम किया जा रहा है. यह भी कहा जा रहा कि जानबूझकर आतंक फैलाया जा रहा है. यह निरी बकवास है. और खतरनाक भी. हमें नफरत नहीं चाहिए. हमें एकता की जरूरत है. हमें लोगों में प्यार की जरूरत है.”

युवल नोआ हरारी से पूरी बातचीत यहां देख सकते हैं

भारत में कोरोना वायरस के मामलों का स्टेटस


Video: दुनियादारी: कोरोना वायरस से इस देश में ताबूत कम पड़े, तो शवों को लोग सड़कों पर डाल रहे हैं!

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

मधुबाला को खटका लगा हुआ था इस हीरोइन को दिलीप कुमार के साथ देखकर

एक्ट्रेस निम्मी के गुज़र जाने पर उनको याद करते हुए उनकी ज़िंदगी के कुछ किस्से

90000 डॉलर का कर्ज़ा उतारकर प्राइवेट जेट खरीद लिया था इस 'गैंबलर' ने

उस अमेरिकी सिंगर की अजीब दास्तां, जो बात करने के बजाए गाने में ज़्यादा कंफर्टेबल महसूस करता था

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.

क्या भारत सरकार से पूछे बिना पाकिस्तान चली गई इंडियन कबड्डी टीम?

अब ढेरों खेल-तमाशा हो रहा है.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.