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एक तरफ कोरोना ने मारा, फिर लूटने पर आमादा लालची एंबुलेंस वालों का क्या करें?

कोरोना संक्रमण में तमाम ख़बरों के बीच एक ख़बर ज़रूर सामने आ रही है. कमी की ख़बर. ऑक्सिजन, दवा, अस्पताल में बेड, वैक्सीन के साथ और एंबुलेंस की कमी भी हो रही है. ऐसे में कुछ वो मामले भी हैं, जब एंबुलेंस वालों ने मरीज़ों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने के लिए कई गुना पैसे वसूले हैं. देखिए बानगी :

पहली खबर- आजतक की खबर के मुताबिक, नोएडा में एक कोरोना संक्रमित शख्स को अस्पताल पहुंचाने के लिए एक एंबुलेंस ने 25 किलोमीटर का सफर तय किया और इसके एवज़ में 42 हजार रुपये वसूल लिए. मरीज के परिवार ने जैसे-तैसे इतने पैसों का इंतजाम किया. खबर मीडिया में आई तो पुलिस ने मामले में एक्शन लेते हुए एंबुलेंस वाले को हिरासत में लिया और परिवार को पैसे लौटाने के लिए कहा.

दूसरी खबर- अमर उजाला के मुताबिक, जीएल बजाज कॉलेज में निदेशक मंजू खत्री को मथुरा के केडीसी अस्पताल तक जाना था. नोएडा के एम्बुलेंस चालक ने मथुरा तक का लगभग 140 किलोमीटर का सफ़र 50 हजार के किराए में तय किया. मंजू खत्री के पति अनिल खत्री ने बताया कि मथुरा में उनकी पत्नी की स्थिति फिलहाल सही है.

तीसरी खबर- दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के प्रयागराज में भी यही हालत है. एंबुलेंस चालक मरीजों से बहुत अधिक दाम वसूल रहे हैं. अखबार लिखता है कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के बाहर खड़े एंबुलेंस ड्राईवर पोस्टमार्टम हाउस से लेकर कोविड वार्ड तक तीमारदारों की तलाश में रहते हैं. किसी के मरने या फिर दूसरे अस्पताल रेफर करते ही मरीज के परिवार को घेर लिया जाता है. और बहुत ज़्यादा दाम वसूले जाते हैं.

चौथी खबर- NBT की एक खबर के मुताबिक, पीतमपुरा से शालीमार बाग के फोर्टिस अस्पताल की दूरी मात्र 3 किलोमीटर है. इस दूरी के लिए एक एंबुलेंस चालक ने पीड़ित परिवार से 10 हजार रुपये चार्ज किए. अस्पताल पहुंच पर परिवार के लोगों ने एंबुलेंस के ड्राईवर से कहा कि अगर मरीज यहां एडमिट नहीं हुआ तो वापस भी चलना होगा. इस पर ड्राईवर ने कहा कि उसके 10 हज़ार और लगेंगे.

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कई मामलों में पुलिस प्रशासन एंबुलेंस वालों पर कार्रवाई भी कर रहा है. फोटो- आजतक

तो क्या कोई कार्रवाई नहीं हो रही है?

ऐसा नहीं है कि ऐसा करने वाले एंबुलेंस चालकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. हर राज्य में ऐसा करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है. लेकिन आपदा में जेबें भरने का अवसर तलाश करने वाले ये लोग फिर भी बाज नहीं आ रहे हैं. वाराणसी से लेकर प्रयागराज तक और दिल्ली से लेकर छत्तीसगढ़ तक में पुलिस प्रशासन ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर रहा है.

– दैनिक जागरण में छपी एक खबर के मुताबिक 18 अप्रैल को वाराणसी में 8 ऐसी एंबुलेंसों को पकड़ा गया.
– ललितपुर में 4 एंबुलेंस चालकों के खिलाफ FIR के निर्देश दिए गए. ये खबर 23 अप्रैल के अमर उजाला में छपी है.
– कानपुर पुलिस ने लोगों से कहा है कि अगर आपसे कोई एक्स्ट्रा पैसे मांगे तो 112 पर कॉल करें.
– 28 अप्रैल को नई दुनिया में छपी खबर के मुताबिक छत्तीसगढ़ के रायपुर में अधिक किराया वसूलने वाली 3 एंबुलेंसों पर कार्रवाई की गई है.

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बहुत सारे लोग मदद के कामों में भी जुटे हैं. फोटो- आजतक

तो क्या हर एंबुलेंस वाले ऐसे ही हैं?

नहीं. बता दें कि जहां एक ओर एंबुलेंस से जुड़ी ऐसी बातें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बहुत से एंबुलेंस वाले काफी कम पैसे में लोगों को अस्पताल तक पहुंचा रहे हैं. कई मामलों में तो पैसे तक नहीं ले रहे हैं.

– भोपाल के रहने वाले जावेद खान ने अपनी पत्नी की सोने का लॉकेट 5 हजार में बेच दिया. इस पैसे से उन्होंने अपने ऑटो में एक ऑक्सीजन सिलेंडर लगवा लिया. अब वो उन लोगों को अस्पताल पहुंचाते हैं, जिनको ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस नहीं मिल पाती या एंबुलेंस वाले उनसे अधिक पैसे मांगते हैं.

– मध्यप्रदेश के ही धार के रहने वाले अजीज खान ने इंटरनेट की मदद से बाइक एंबुलेंस बनाना सीखा. अब इस एंबुलेंस से वो उन लोगों की मदद कर रहे हैं जिनको वक्त पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती है. पत्रिका में छपी खबर के मुताबिक इस एंबुलेंस में ऑक्सीजन भी है जिसका वह नाममात्र का पैसा पीड़ित परिवार से लेते हैं.

– प्रयागराज के रहने वाले भवानी के माता-पिता की तबियत खराब हुई. एंबुलेंस नहीं मिली. मां-पिता को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भवानी ने अपनी कार को एंबुलेंस में बदल दिया और लोगों की मदद करने लगे. जागरण में छपी इस खबर के मुताबिक भवानी ने अपनी कार एंबुलेंस में ऑक्सीजन सुविधा भी दे रखी है.

इन तमाम खबरों के बीच यूपी में 16 हजार एंबुलेंस चालकों की छुट्टियां रद्द किए जाने की भी खबर है.

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एंबुलेंस खरीदने पर प्राईवेट अस्पतालों को भारी टैक्स देना होता है. फोटो- आजतक

इत्ती महंगी होती है एक एंबुलेंस?

एंबुलेंस वाले अधिक पैसे ले रहे हैं ये खबरें तो सामने आ रही हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि एंबुलेंस खरीदने पर भारी टैक्स भी देना होता है? हां. ख़बरें बताती हैं कि देश में जब निजी प्लेयर जब एंबुलेंस वास्ते गाड़ी खरीदते हैं, तब उन्हें उस ख़रीद पर 28 प्रतिशत GST चुकानी होती है. इसको ऐसे समझिए कि GST की जो टैक्सबुक है, उसमें गाड़ियों में एंबुलेंस कोई अलग कैटेगरी नहीं है. जैसे कारों पर 28 प्रतिशत GST लगता है, वैसे ही एंबुलेंस पर भी GST का वही रेट लागू होता है. अब गाड़ी ख़रीदकर उसका एंबुलेंस में बदलवाना भी एक जटिल प्रक्रिया है. अंदर हुई कार्रवाई की क़ीमत और साथ ही अस्पताल के उपकरण के दाम और उन पर टैक्स मिलाकर मामला और भी महँगा हो जाता है.

तो क्या विदेश में भी यही अंधेरगर्दी चल रही है?

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन की एक रिपोर्ट के मुताबिक 71 प्रतिशत एंबुलेंस प्रोवाइडर लोगों के इंश्योरेंस कार्ड स्वीकार नहीं करते. दरअसल अमेरिका में मेडिकल बिल इंश्योरेंस कार्ड से चुकाने होते हैं. 79 प्रतिशत पेशेंट्स को औसतन 450 डॉलर एंबुलेंस को देने पड़ते हैं. लगभग 32-33 हज़ार रुपए. ये तो नियम है, लेकिन अंधेरगर्दी का आलम इंडिया वाला ही है. गूगल करने पर ऐसी बहुत सी खबरें दिखाई देती हैं जिनमें 3 से 4 मील की दूरी के लिए मरीजों को 3 से 4 हजार डॉलर चुकाने पड़े हों.

emergency-live.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में 3 किलोमीटर के लिए पेशेंट को 50 युआन चुकाने होते हैं. लगभग 570 रुपए. इसके बाद हर किलोमीटर के लिए 7 युआन यानी करीब 80 रुपये चुकाने होते हैं. 2016 में प्रकाशित हुई bbc.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में बढ़ रहे दामों के बाद सरकार ने एंबुलेंस में टैक्सी स्टाइल मीटर लगाने का फैसला किया.

nib.com.au की एक रिपोर्ट कहती है कि ऑस्ट्रेलिया में एंबुलेंस के लिए 3 ऑस्ट्रेलियन डॉलर से लेकर 14 ऑस्ट्रेलियन डॉलर यानी करीब 800 रुपये तक देने पड़ सकते हैं. हालांकि ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड और तस्मानिया राज्य में एंबुलेंस सेवाएं फ्री हैं.

globalmarketestimates.com की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में एंबुलेंस की मांग बढ़ रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से 2026 के बीच एंबुलेंस की मार्केट का सालाना ग्रोथ रेट 9.5 प्रतिशत है. दुनिया में एंबुलेंस की सबसे अधिक मांग एशिया पैसेफिक इलाके में है. लेकिन इन ख़बरों को देखें तो ये भी साफ़ होता है कि दुनिया के कुछ इलाक़ों में एंबुलेंस के रेट भी निर्धारित किए जा रहे हैं. रेगुलेट किया जा रहा है, ताकि पेशेंट ठगी का शिकार ना हो जाए.

एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

हेल्थ पॉलिसी एक्सपर्ट डॉक्टर विकास केशरी से हमने बात की. उन्होंने बताया कि दिक़्क़त कहां है? दिक़्क़त प्राइवेट एंबुलेंस को लेकर देश की नीतियों की है. उन्होंने कहा,

“भारत में हेल्थ राज्यों का विषय है. हर राज्य ने एंबुलेंस सिस्टम अपने हिसाब से बनाया है. आज गांव-गांव तक एंबुलेंस की पहुंच है. गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक फ्री पहुंचाया जाता है. अन्य रोगियों से भी नाम मात्र के ही पैसे लिए जाते रहे हैं. हालांकि प्राईवेट एंबुलेंस को लेकर कोई स्पष्ट नीति कभी नहीं रही है. ये हम जानते हैं कि एंबुलेंस महंगी आती है और निजी अस्पताल अपने-अपने हिसाब से इसका पैसा लोगों से लेते रहे हैं.”

लेकिन विदेशों के साथ भारत के स्वास्थ्य परिवहन की तुलना करने पर क्या हासिल होता है. उन्होंने कहा,

“अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाएं प्राईवेट हैं. वहां लोगों के पास इंश्योरेंस कार्ड होता है और सब कुछ उसी से होता है. एंबुलेंस का पैसा, अस्पताल का बिल, दवाईयां, सब उसी कार्ड से देना होता है. वहीं ब्रिटेन में स्वास्थ्य सेवाएं काफी हद तक सरकारी हैं. हर देश के एंबुलेंस को लेकर अलग नियम हैं. जहां तक दामों की हम बात करें तो किसी भी देश में एंबुलेंस बहुत सस्ती तो नहीं है और फिलहाल कोविड ने तो हर जगह के हालात बदल दिए हैं. लोग अपनी मनमर्जी से पैसा लेते दिख रहे हैं.”

यानी रेगुलेशन एक असम्भव शै नहीं है. देश में सरकारी और निजी हेल्थकेयर को रेगुलेट करने की बहस लम्बे समय से चलती रही है. जानकार सवाल करते हैं कि क्या जिस तरह से सरकारी सेवाओं को सस्ता बना सकती है, क्या यही सुविधा निजी हेल्थकेयर पर लागू नहीं हो सकती है? चाहे तो एंबुलेंस की सेवा क्यों न हो. अभी कम से कम इतना तो है कि अंडबंड पैसा मांगने पर एक अदद पुलिस कम्प्लेन तो की ही जा सकती है.


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