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सिर्फ कोहली को कोसकर कुछ नहीं होगा, हार के असली कारण तो ये रहे

न्यूज़ीलैंड ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीत ली है, अर्थात विराट कोहली की टीम इंडिया को WTC Final 2021 में हार मिली. औसत से भी बुरा प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम का वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतने का सपना टूट गया. साउथैम्प्टन में हुए WTC Final में भारतीय टीम ज्यादातर वक्त तक न्यूज़ीलैंड से पीछे रही. यूं तो इस हार के तमाम कारण हैं, लेकिन फौरी तौर पर लोगों को सिर्फ एक दिख रहा है- विराट कोहली.

और लोगों को जो ना दिखे, वही दिखाना तो दी लल्लनटॉप का काम है. इसलिए चलिए हम आपको बताते हैं वो पांच कारण जिनके चलते टीम इंडिया के हिस्से हार आई.

# टीम सेलेक्शन

हर हार के बाद टीम सेलेक्शन पर सवाल उठाना एक फैशन सा है. लेकिन इस बार सच में कोहली-शास्त्री की जोड़ी से चूक हो गई. टेस्ट का पहला दिन पूरी तरह से धुल गया. माहौल एकदम बदल चुका था. सभी दिग्गजों का मानना था कि भारत को कम से कम चार पेस बोलर्स के साथ जाना चाहिए. लेकिन कोहली उसी टीम पर अड़े रहे जो उन्होंने मैच की पूर्व संध्या पर घोषित कर दी थी. यानी तीन पेसर और दो स्पिनर.

मोहम्मद शमी, ईशांत शर्मा और जसप्रीत बुमराह के साथ रविंद्र जडेजा और रवि अश्विन. अंत में जब मैच हुआ तो दोनों ही पारियों में टीम इंडिया उम्मीद से कम रन बना पाई. ऐसे में अगर कोहली ने एक एक्स्ट्रा बल्लेबाज लिया होता तो शायद माहौल कुछ और होता. साथ ही हमने यह भी देखा कि कीवी स्विंग बोलर्स ने भारत को खूब परेशान किया. ऐसे में अगर हमारे पास सिराज की स्विंग होती तो भी माहौल सही हो सकता था.

# ओपनर्स

रोहित शर्मा और शुभमन गिल. दोनों से फ़ैन्स को काफी उम्मीद थी. लेकिन यह दोनों ही उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे. पहली पारी में रोहित और शुभमन ने 20.1 ओवर तक बैटिंग की. और इस दौरान इन्होंने 61 रन जोड़े. इतने ओवर्स खेलने के बाद भी दोनों हर ओवर में चार रन भी नहीं बना पाए. स्लो बैटिंग की बात होने पर अक्सर पुजारा पर meme बनाए जाते हैं. लेकिन इस मैच में हमारे ओपनर्स ने भी बेहद निराशाजनक बैटिंग की.

दोनों पारियां मिलाकर शुभमन और रोहित ने 97 और 149 गेंदें खेलीं. और इन गेंदों में कुल रन आए 36 और 64. अगर इन दोनों ने 50 की भी स्ट्राइक रेट से बैटिंग की होती तो भारत के खाते में थोड़े से रन बढ़ते और शायद टीम को इतनी बुरी हार नहीं मिलती. इनकी बैटिंग में सबसे निराशाजनक बात ये रही कि दोनों ही पारियों में यह क्रीज पर लंबा वक्त बिताकर आउट हुए.

# मिडल ऑर्डर

कहने को तो टीम इंडिया के मिडल ऑर्डर में कोहली, पुजारा और रहाणे जैसे दिग्गज हैं. लेकिन जब टीम को इनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, ये नाकाम रहे. पुजारा ने पहली पारी में 54 और दूसरी पारी में 80 गेंदें खेलीं. कोई भी बल्लेबाज इतनी गेंदें खेलने के बाद अच्छे से सेट हो जाता है. बड़ी पारी खेलकर अपनी टीम को आगे ले जाता है. लेकिन पुजारा ये नहीं कर पाए. उन्होंने पहली पारी में 8 और दूसरी पारी में 15 रन बनाए.

बात अजिंक्य रहाणे की करें तो पहली पारी में वह टीम इंडिया के हाईएस्ट स्कोरर रहे. हालांकि पहली पारी में 49 रन बनाने वाले रहाणे दूसरी पारी में सिर्फ 15 रन बना सके. जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, वह लेग स्टंप के बाहर की गेंद को छेड़कर आउट हो गए. अगर वह टिके रहते तो शायद टीम इंडिया दूसरी पारी में सस्ते में ना निपटती.

वहीं बात कप्तान विराट कोहली की करें तो पिछले काफी दिनों से उनका बल्ला शांत है. यह कोहली के करियर के सबसे खराब दिन हैं. पहली पारी में 44 रन बनाने वाले कोहली बेहद डिफेंसिव रहे. तो दूसरी पारी में उनके बल्ले से सिर्फ 13 रन निकले. अगर आपके ओपनर्स के नाकाम होने के बाद मिडल ऑर्डर भी ऐसा करेगा तो आप कैसे जीतेंगे?

# नहीं चला दांव

टेस्ट में रविंद्र जडेजा और अश्विन को खिलाने के पीछे सबसे बड़ा तर्क ये दिया गया था कि ये दोनों ही अच्छी बैटिंग करते हैं. लेकिन यह दोनों ही बैट से नाकाम रहे. हालांकि यह भी है कि जब आपके पहले छह नहीं चलेंगे तो 7-8 नंबर पर आने वालों से क्या उम्मीद करें. लेकिन अगर आपको इसी मेरिट पर टीम में जगह मिली कि आपका बल्ला बेहतर चलता है, तो सवाल तो होंगे की.

हनुमा विहारी की जगह खेले जडेजा दोनों पारियों में विकेट के पीछे कैच हुए. पहली पारी में उनके नाम 15 तो दूसरी पारी में 16 रन रहे. जबकि टेस्ट में पांच सेंचुरी मार चुके अश्विन इस मैच में 29 रन ही बना सके. यानी ऑलराउंडर के तौर पर उतारे गए दो प्लेयर्स ने मिलकर भारत के स्कोर में सिर्फ 60 रन जोड़े.

# बोलिंग

जिस पिच पर कीवी बोलर्स आग उगल रहे थे, वहां मोहम्मद शमी को छोड़ बाकी भारतीय बोलर बहुत प्रभावी नहीं दिखे. खासतौर से जसप्रीत बुमराह ने काफी निराश किया. टीम इंडिया के पेस अटैक की जान कहे जाने वाले बुमराह इस मैच में एक भी विकेट नहीं ले सके. कुल 36 ओवर फेंकने के बाद भी उनका खाता नहीं खुला.

वहीं ईशांत शर्मा ने पहली पारी में तीन विकेट निकाले लेकिन दूरी पारी में उनके हाथ एक भी विकेट नहीं लगा. जबकि जडेजा से कोहली ने दोनों पारियां मिलाकर कुल 15 ओवर ही फिंकवाए. अश्विन को भी ज्यादा ओवर नहीं मिले. हालांकि उन्होंने लिमिटेड मौकों में भी अपनी ओर से पूरी कोशिश की. लेकिन ओवरऑल प्रदर्शन में भारतीय बोलर्स ने काफी निराश किया. एक-दो स्पेल छोड़ दें तो ये निष्प्रभावी ही दिखे.


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