Submit your post

Follow Us

'उन्हें पूरा हक है धोनी पर सवाल उठाने का'

सत्यलल्लनटॉप के पुराने साथी सत्य व्यास विगत वर्षों में हिंदी के उदीयमान लेखक के रूप में उभरे हैं. सत्य व्यास ने हिंदी में एक नया पाठक वर्ग तैयार कर इस धारणा को गलत साबित किया है कि हिंदी में पाठकों की कमी है. उनकी पिछली तीनों किताबें ‘बनारस टॉकीज’, ‘दिल्ली दरबार’ और ‘चौरासी’ बेस्टसेलर की हैट-ट्रिक बना चुकी हैं. लल्लनटॉप के लिए कई बार नायब हीरे-जवाहरात दे देते हैं. मतलब हमारे लिए भी लिखते हैं कभी-कभी.

सत्य का एक दूसरा परिचय भी हो सकता है- क्रिकेट के भीषण फैन. इत्ते बड़े फैन कि एक दिन मैंने पूछ ही डाला- आपकी हर बेस्ट सेलर में क्रिकेट ज़रूर है.

इन्होंने क्या कहा याद नहीं. कम ही कुछ जवाब देते हैं. बड़े हैं मुझसे, लेकिन मॉडेस्ट इतने कि- जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे का जाप करते रहते हैं. लेकिन इनके लिए मैंने जवाब तैयार कर लिया. वो जवाब जो इन्हें हर बार देना चाहिए- मेरी किताबों में क्रिकेट इसलिए रहता है क्यूंकि वो मुझमें है. इवन बेटर- जिस तरह लोगों का शब्दों में बिना नॉवेल लिखना असंभव है वैसा ही मेरा क्रिकेट के बिना. तो जब इस क्रिकेट के जाबड़ फैन से इनके एक फैन ने धोनी के बाबत पूछा गया तो उन्होंने अपना दिल खोल के रख दिया. और इस दिल में क्या रक्खा है? खुद्दे पढ़ लो-


क्या कहूं?

दोस्त-अहबाब मुझसे धोनी की बाबत पूछ रहे हैं। क्या कहूँ! सिवा इसके कि हम अस्सी की दशक की पैदाइश लोग जिन्होंने टीवी पर क्रिकेट पहली बार देखना शुरू किया था। जिन्होंने दृश्य-श्रव्य क्रिकेट का पहला अनुभव लिया था। जिन्होंने क्रिकेट को चढ़ती-उतरती हर सांस के साथ जज़्ब किया था।

और जिन्होंने हर बीतते-गुजरते साल के साथ एक ही आस की थी-एक अदद वर्ल्ड कप जीत लेने की। अपनी जिंदगी में एक विश्व कप देश की झोली में गिरते देखने की।

उम्मीद के सहारे चलने वाले इस ह्रदय ने किससे आस नहीं लगाई थी। गावस्कर, अज़हर, गांगुली,द्रविड़ से लिये हम लोग चेतन शर्मा, प्रभाकर, सदगोपन रमेश, आशीष कपूर और मोहित शर्मा से भी आस लगा लिया करते थे और साल-हा-साल अगले साल के इंतजार में मुब्तिला हो जाते थे।

धोनी आये। धोनी कप्तान भी बने। जीतने की गांगुली की कसमसाहट को धोनी ने जीतने की आदत में तब्दील किया। अपनी मेहनत, अपनी किस्मत और अपने हवाई छक्के के सहारे ही वह भारतीय क्रिकेट को वहाँ ले गए जहाँ पहुंचकर,जिसे देखकर अस्सी के दशक के हर बच्चा क्रिकेट से जुड़ी अपनी एकमात्र आस को अपने जीवन मे ही पूरा होते देख पाया। मैं भी। भारत हमारे देखने में ही विश्व विजेता बना।

विश्व विजेता धोनी
विश्व विजेता धोनी

हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पर जब रो चुकी तब ही यह दीदावर पैदा हुआ था।

मैं अपने साथ-साथ अस्सी के दशक के पैदाइश कौम की जिम्मेदारी लेते हुए कहना चाहूंगा कि आप हमारे हीरो थे, हैं और रहेंगे। इससे ज्यादह की उम्मीद हमें रहती जरूर है मगर वह आप सहित पूरी टीम से। महज आपसे ही नहीं।

हमारी बाद आई पीढ़ी की क्रिकेट की समझ भी जाहिराना तौर पर हमसे ज्यादा बढ़ी है और उनके लिए धोनी ठीक उसी तरह लीजेंड/अपरिहार्य नहीं हैं जिस तरह कभी हमारे लिए गावस्कर एकदिवसीय क्रिकेट के लिए अनफिट थे। उन्हें पूरा हक है धोनी पर सवाल उठाने का। धोनी से सवाल पूछने का। धोनी के चयन पर भी अपनी बात रखने का। यह समय चक्र है। यह होना बदा है।

विधि का विधान, धोनी
विधि का विधान, धोनी

अंत में यह देख पा रहा हूँ कि महेंद्र सिंह धोनी ने यदि अपना अंतिम मैच खेल लिया है तो यह जीवन वृत पूरा होने जैसा ही है। जहां क्रिकेटीय इतिहास के सबसे तेज धावकों में से एक महेंद्र सिंह धोनी अपने पहले और अंतिम मैच में रन आउट ही होता है।

विधि है और उसका अपना ही विधान है।

आप स्वस्थ रहें महेन्द्र सिंह धोनी।


वीडियो देखें:

अंबाती रायडू को टीम में आने के लिए धोनी के रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं योगराज सिंह-

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

QUIZ: देश के सबसे महान स्पोर्टसमैन को कितना जानते हैं आप?

आज इस जादूगर की बरसी है.

चाचा शरद पवार ने ये बातें समझी होती तो शायद भतीजे अजित पवार धोखा नहीं देते

शुरुआत 2004 से हुई थी, 2019 आते-आते बात यहां तक पहुंच गई.

रिव्यू पिटीशन क्या होता है? कौन, क्यों, कब दाखिल कर सकता है?

अयोध्या पर फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रिव्यू पिटीशन दायर करने जा रहा है.

इन नौ सवालों का जवाब दे दिया, तब मानेंगे आप ऐश्वर्या के सच्चे फैन हैं

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

अमिताभ बच्चन तो ठीक हैं, दादा साहेब फाल्के के बारे में कितना जानते हो?

खुद पर है विश्वास तो आ जाओ मैदान में.

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?