Submit your post

Follow Us

भारतीय पुरुष हॉकी टीमः जिसके जुनून और नाम का डंका 'अब' पूरे देश में बज रहा है

इज्ज़त कमाई जाती है. दिन, महीने, साल, दशक, सदी… वक्त में कितना भी पीछे चले जाएं, ये लाइन शाश्वत मिलेगी. फिर चाहे उदाहरण किसी राजकुमार का हो या किसान का, सबको इज्ज़त कमानी ही पड़ती है. अगर आपमें सामर्थ्य है तो एक साधारण किसान भी महान वाइकिंग राजा रैगनार द ग्रेट बन सकता है. और अगर सामर्थ्य नहीं है तो जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर की तरह जीवन योजनाएं बनाने में ही बीत जाता है.

और इस सामर्थ्य की सबसे खास बात ये है कि इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. ये है, तो दिखेगा ही. देर से ही सही, लेकिन इसका दिखना तय है. और इस सर्वकालिक सुंदरतम बात पर एक बार फिर से मुहर लगी जापान की राजधानी टोक्यो में. जहां सामर्थ्यवान 16 लड़ाकों ने सालों से चली आ रही यातना को खत्म कर इज्ज़त कमा ली. बात करेंगे इंडियन हॉकी टीम की. लेकिन उससे पहले एक क़िस्सा सुना देते हैं.

# वक्त बदलता है

साल 1994. दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट. 19 साल की एक लड़की तुर्की से वर्ल्ड चैंपियन बनकर लौटी थी. फ्लाइट से उतरी और बाहर की ओर निकलने लगी तो देखा कि एयरपोर्ट पर बहुत भीड़ है. कर्णम मल्लेश्वरी नाम की ये लड़की खुश हो गई लेकिन इस खुशी में अचरज भी था. क्योंकि इससे पहले कभी कोई उसे रिसीव करने नहीं आया था. और अगले कुछ सेकेंड्स में उसकी खुशी कपूर की तरह उड़ गई. ये भीड़ उसके लिए नहीं थी. ये लोग उसी के राज्य यानी आंध्र प्रदेश से आने वाली 21 साल की दूसरी लड़की का इंतजार कर रहे थे.

ऐश्वर्या राय नाम की ये लड़की साउथ अफ्रीका से लौटी थी. और इसके सिर पर भी विश्वविजय का ताज था. उस दिन मल्लेश्वरी को बहुत बुरा लगा. वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी उसे कोई पहचान ही नहीं रहा था. जबकि ऐश्वर्या की एक झलक के लिए लोग मरे जा रहे थे. आंखों में आंसू लिए मल्लेश्वरी एयरपोर्ट से बाहर निकलीं, ऑटो किया और घर आ गईं.

लेकिन ये बात उनके मन में कहीं ना कहीं दबी रह गई. और फिर आया साल 2000. मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत लिया. और इस जीत के बाद वह एक बार फिर से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरीं. वही जगह, वही गेट और वही भीड़. लेकिन इस बार ये भीड़ किसी और के लिए नहीं मल्लेश्वरी के लिए जमा थी.

# Hockey का भी बदलेगा

और अब यही भीड़ लगने वाली है मनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली भारतीय हॉकी टीम के स्वागत में. इन्होंने काम ही ऐसा किया है. ये टीम वो कर गई जिसका सपना लिए सैकड़ों भारतीयों ने हॉकी उठाई और थककर रख भी दी. हॉकी के स्वर्णिम युग को याद करते-करते जाने कितने बुजुर्ग फ़ैन्स दुनिया से ही चले गए. उस दौर के युवा जीवन की शाम की ओर हैं तो बच्चे अब दादा-दादी बनकर रोहित-विराट में ही खुश थे.

चंगेज खां की तरह सबने उम्मीद छोड़ दी थी. लेकिन चार दशक के इंतजार के बाद चंगेज के पोते कुबलई खां की तरह मनप्रीत की सेना ने अपने बुजुर्गों का सपना पूरा ही कर दिया. जैसे कुबलई ने अपने दादा के लिए सालों से अटल खड़े शांगयांग शहर को जीता था. दशकों तक शहर की सुरक्षा करने वाली दीवारों को ध्वस्त कर पूरे चीन पर मंगोलों का राज कायम कर दिया. कुछ ऐसी ही उम्मीद मनप्रीत, हरमनप्रीत, श्रीजेश की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम ने हम लोगों को दी है.

जैसे शांगयांग का सोंग साम्राज्य 30 साल से दीवारों के पीछे अजेय था, कुछ इसी तरह जर्मनी की हॉकी टीम भी दुनिया की बेस्ट टीमों में से एक मानी जाती है. लेकिन टीम इंडिया ने इस बेस्ट टीम को बता दिया कि हर चंगेज के बाद एक कुबलई खां आता है. जो हर कीमत पर जीतने की कला जानता है. और ये कला वही है जिसे देखने वालों को कहना नहीं पड़ता- ‘SHOW THEM SOME RESPECT, THEY HAVE EARNED IT.’

# कहानी Heroes की

साल 1998 में अपने एथलीट बेटे को घर से 200 किलोमीटर दूर भेजते हुए किसान पीवी रवींद्रन ने सोचा भी नहीं होगा, कि उनका लड़का एक दिन ओलंपिक्स में हॉकी गोलपोस्ट की छत पर बैठकर फोटो खिंचाएगा. और वो फोटो इस देश की हॉकी का चेहरा बन जाएगी. लेकिन ऐसा हो चुका है. पीवी श्रीजेश की ये फोटो हमेशा के लिए अमर यानी अंग्रेजी में कहें तो Iconic हो चुकी है.

क्या अपने क्रिकेटप्रेमी बेटे को जबरदस्ती हॉकी पकड़ाने वाले लोग इसी देश में रहते हैं? जिस देश में लोग खेल के नाम पर सिर्फ क्रिकेट समझते हैं, उसी देश के गांव मीठापुर के रविंद्र सिंह ने अपने बेटे मनदीप के हाथ से बल्ला लेकर उसे हॉकी स्टिक थमा दी. और पंजाब के जिले जालंधर के इस युवा ने अपने पिता को निराश भी नहीं किया. तमाम इंटरनेशनल मेडल्स के बाद अब मनदीप के पास ओलंपिक्स का ब्रॉन्ज़ मेडल भी है.

इससे थोड़ी अलग कहानी है कप्तान मनप्रीत सिंह की. मनदीप के पड़ोसी मनप्रीत 7-8 साल की उम्र में ही अपने गांव के स्टार हॉकी प्लेयर बन गए थे. मैदान पर उनकी कला और फुर्ती देख साथियों ने उन्हें पंजाबी से कोरियन भी बना दिया था. जी हां, मनप्रीत को हॉकी वाले लोग कोरियन ही बुलाते हैं. और अब इस कोरियन ने जापान जाकर तिरंगा लहरा दिया है.

कितने नाम गिनाऊं. हरमनप्रीत सिंह. रुपिंदर पाल सिंह, सुरेंद्र कुमार, अमित रोहिदास, बीरेंद्र लाकरा, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकंठ शर्मा, सुमित, शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, गुरजंत सिंह, ललित कुमार उपाध्याय, मनदीप सिंह या स्टैंडबाई में रहे कृष्णा पाठक, वरुण कुमार, सिमरनजीत सिंह. ये दल जब टोक्यो के लिए निकला था तो लोगों ने कई सवाल उठाए.

# काम आई ताकत

एकदम युवा फॉरवर्ड लाइन वाली इस टीम की सबसे बड़ी ताकत डिफेंस को बताया गया था. और टूर्नामेंट के अंत तक आते-आते ये बात सटीक भी साबित हुई. पूरे टूर्नामेंट में भारत को सिर्फ दो मैचों में हार मिली. ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम के खिलाफ हम हारे. और इन दोनों मैचों को देखा जाए तो हमारा डिफेंस बिखरा दिखा और हमें इसका नुकसान उठाना पड़ा.

लेकिन इन दोनों मैचों से इतर हमने हर मैच में कमाल की हॉकी खेली. हमारे गेम का लेवल ऐसा था कि ये क्रिकेटप्रेमी देश स्ट्रेट ड्राइव छोड़ ड्रैगफ्लिक के पीछे पगलाया था. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग रोहित-विराट को छोड़ श्रीजेश-मनप्रीत पर चर्चा करते थे. देश के खेलों का इतिहास-भूगोल बदल चुका था. लोग अब विकेट गिरने पर नहीं, पेनल्टी कॉर्नर मिलने पर चीख रहे थे. अब कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि क्रिकेट न होने के चलते ऐसा था.

लोग टाइमपास कर रहे थे. लेकिन मैंने इससे पहले टाइमपास के लिए कुछ देखने वालों को पल-पल का हाल सोशल मीडिया पर शेयर करते नहीं देखा था. और फिर ब्रॉन्ज़ मेडल मैच में तो कमाल ही हो गया. इंडियन क्रिकेट टीम ने कमाल की बोलिंग की. इंग्लैंड को 200 के अंदर समेट दिया, लेकिन अगली सुबह हॉट टॉपिक हॉकी का मैच था. इंग्लैंड टेस्ट पर बेहद कम चर्चा हो रही थी.

# बदल जाएगी तस्वीर?

और फिर भारत ने एक एपिक मैच में जर्मनी को मात दी. ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया. और इसके तुरंत बाद क्रिकेटर गौतम गंभीर ने एक अलग चर्चा छेड़ दी. दो बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत चुके गंभीर ने हॉकी के ब्रॉन्ज़ को भारत के सभी क्रिकेट वर्ल्ड कप ट्रॉफियों से बड़ा बता दिया. किसने सोचा था कि इंडियन स्पोर्ट्स में 1983 के वर्ल्ड कप से भी बड़ी जीत आएगी?

शायद किसी ने नहीं. आज से पहले लोग हॉकी की दुर्दशा पर बात करते थे. दुख जताते थे, तरस खाते थे और आगे बढ़ जाते थे. क्योंकि ओलंपिक्स टू ओलंपिक्स हॉकी देखने वाले इस देश के लगभग 60 परसेंट लोग 10 से 44 साल के बीच हैं. उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में हॉकी टीम को कभी ओलंपिक्स मेडल जीतते नहीं देखा.

यानी उनके लिए हमारी हॉकी टीम सामर्थ्यवान नहीं थी. लेकिन अब ये 60 परसेंट लोग भारतीय टीम को ओलंपिक्स मेडल जीतते देख चुके हैं. इन्होंने किंवदंती को सच होते देख लिया है. और अब ये हॉकी मैच देखने के लिए चार साल में एक बार होने वाले ओलंपिक्स का इंतजार नहीं करेंगे. क्योंकि हमारी हॉकी टीम ने इज्ज़त कमा ली है.


ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत पुरुष हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

रामचंद्र गुहा की किताब 'क्रिकेट का कॉमनवेल्थ' के कुछ अंश.

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

शुद्ध और असली स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर करियर ग्राफ़ बाद में गिरता ही चला गया.

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.