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कोरोना की दूसरी लहर में खुद को बचाना है तो ये ख़बर जरूर पढ़ लें

कोरोना मरीज़ों की संख्या भारत में फिर से बढ़ रही है. विशेषज्ञ बता रहे हैं कि देश में कोरोना की दूसरी लहर आ चुकी है. लोगों को वैक्सीन लगाने का काम भी चल रहा है. सरकार बता रही है कि अब तक 5 करोड़ से ज्यादा लोगों को ये कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुख्यमंत्रियों और राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग की है. कहा है कि वैक्सीन लगाने में तेज़ी लाई जाए. ऐसे में कुछ सवाल उपज रहे हैं, और इन सवालों का जवाब देगा आपको लल्लनटॉप.

# क्या देश में कोरोना की दूसरी लहर आ गयी है?

हां. अभी तो ऊपर बताया कि आ गयी है. डॉक्टर और वैज्ञानिक, सब लोगों ने कह दिया है कि आ चुकी है. अभी तो रोज़ाना के केस 45 हज़ार के आसपास हैं. लेकिन अगर इन्फ़ेक्शन फैलने की दर नहीं रुकी, तो प्रतिदिन के केसों की संख्या बढ़ भी सकती है.

# क्या दूसरी लहर से बचा जा सकता है?

एकदम बचा जा सकता है. तरीक़ा वही है. मास्क पहने रखिए, हाथ धोते और सैनिटाइज करते रहिए. दो गज की दूरी बनाए रखिए. कई विशेषज्ञ ऐसा भी मानते हैं कि जब देश में कोरोना के केस कम हुए, तो लोगों ने बड़े स्तर पर लापरवाही बरती. धार्मिक, राजनीतिक आयोजन हुए. इसमें बचाव के नियम ध्वस्त हो गए. केस बढ़े तो बढ़ने ही जा रहे हैं. ऐसे में सरकारें फिर से स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन, कंटेन्मेंट ज़ोन बनाकर काम कर रही हैं. कई शहरों में रात में कर्फ्यू का ऐलान किया जा चुका है. महाराष्ट्र में नागपुर के बाद अब बीड और नांदेड़ में में तो 26 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक पूरी तरह लॉकडाउन की घोषणा की गई है. नागपुर में 15 मार्च से 31 मार्च तक लॉकडाउन का ऐलान किया गया था.

# वैक्सीन का क्या स्टेटस है?

स्टेटस क्या? आ गयी है. लोगों को लगाई जा रही है. अब तो सरकार ने 45 साल से ऊपर से सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की घोषणा कर दी है. अब तक 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए को-मॉर्बिडिटी यानी पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने का सर्टिफ़िकेट देना पड़ता है. लेकिन 1 अप्रैल से ऐसी शर्त नहीं रहेगी. वैक्सीन लगवाने के लिए तरीक़ा वही है. कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. वहाँ से वैक्सीन केंद्र का नाम पता मिलेगा. तय तारीख़ पर जाकर वैक्सीन की डोज़ ले लीजिए. इस वैक्सीन के दो डोज़ जरूरी हैं. पहले दोनों डोज़ के बीच में 28 दिनों का अंतर होता था. अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि दोनों डोज़ के बीच 6 से 8 हफ़्तों तक का अंतर रख सकते हैं.

# वैक्सीन का मतलब अब सब सेफ़ है?

नहीं. ऐसा नहीं है. भारत की जनसंख्या मोटा-मोटी सवा अरब है. अभी जिस रेट से वैक्सीन लग रही है, ज्ञानियों का मानना है कि इससे पूरी जनसंख्या को वैक्सीन लगाने में कई साल लग सकते हैं. जिन लोगों को वैक्सीन लग गयी है, उनके शरीर में ऐंटीबॉडी – यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले सिपाही – बनने में समय लग रहा है. ऐसे में ऐंटीबॉडी बनने तक मुस्तैदी रखनी ही चाहिए. और वैक्सीन कितने लम्बे समय तक कारगर है, इसका पता अभी किसी को भी नहीं चल सका है. कोरोना की सभी वैक्सीन एकाध साल में ही तैयार की गयी हैं. टीका लगाने के लिए भी इमरजेंसी अप्रूवल ही दिया गया है. 

# ऐंटीबॉडी बनने में कितना समय लग रहा?

माना जा रहा है कि वैक्सीन लगने के 2 हफ़्ते के अंदर शरीर में 40 प्रतिशत ऐंटीबॉडी बन जाती हैं. 4 हफ़्तों के अंदर 90 प्रतिशत ऐंटीबॉडी बन जा रही हैं. अब ज़रूरी नहीं है कि ऐंटीबॉडी बॉडी के अंदर हो, तो कोरोना का फिर से इन्फेक्शन ना हो. इन्फेक्शन फिर भी हो सकता है. लेकिन बहुत संभावना है कि ये इन्फेक्शन पहले के मुक़ाबले कमज़ोर हों. ज्यादा घातक न हो.

# ऐंटीबॉडी नहीं बनी तो क्या होगा?

ज़रूरी नहीं कि सबके अंदर कोरोना से लड़ने वाली ऐंटीबॉडीज़ हों ही. वैक्सीन लेने और कोरोना का इन्फेक्शन एक बार होने के बाद ऐंटीबॉडीज़ बन ही जाएं, ऐसा जरूरी नहीं. तो क्या शरीर में इम्यूनिटी के लिए ऐंटीबॉडीज़ ही सबकुछ है. नहीं. सबकुछ ऐंटीबॉडी ही नहीं होती है. इसके अलावा शरीर में होती हैं टी-सेल्स. ऐंटीबॉडीज़ से एक लेवल ऊपर की चीज़. इनका काम होता है इम्यून सिस्टम की याद्दाश्त बनाना ताकि ऐंटीबॉडीज़ ना रहे और कोई वायरस वग़ैरह इन्फ़ेक्ट करे,तो फिर से शरीर के इम्यून सिस्टम को जगाकर ऐंटीबॉडीज़ बनाई जा सकें. 

# क्या कोरोना वैक्सीन बर्बाद हो रही है?

हां. देश के कई राज्यों से ख़बर आ रही है कोविड वैक्सीन की बर्बादी की. पीएम मोदी ने अपने मीटिंग में राज्यों के प्रतिनिधियों से भी कहा कि वो अपने यहां वैक्सीन की बर्बादी न होने दें. अब सवाल उठता है कि वैक्सीन बर्बाद क्यों हो रही हैं? मोटामोटी कारण बता रहे आपको.

कारण नम्बर एक – वैक्सीन की शीशी खुली. उस शीशी में निश्चित मात्रा में वैक्सीन की डोज़ होती हैं. मान लीजिए एक बोतल में 10 डोज़ हैं 10 लोगों के लिए. लगे 8 लोगों को ही. बची हुई 2 डोज़ फेंक दी गईं. वैक्सीन बर्बाद.

कारण नम्बर दो – वैक्सीन की शीशी से टीके लगाना शुरू किया गया. लेकिन गंदे हाथों या और चीजों से वैक्सीन की शीशी का मुंह छू लिया गया, या वैक्सीन लगाने के क़ायदों का पालन नहीं किया गया, या वैक्सीन की शीशी गिर गयी, शीशी के अंदर कुछ गिर गया. वैक्सीन बर्बाद

कारण नम्बर तीन – वैक्सीन को एक ख़ास तापमान पर रखना होता है. और ये कोरोना ही नहीं, बहुतेरी वैक्सीन पर लागू होता है. अब वैक्सीन लगाने वाले अधिकारी या स्वास्थ्यकर्मियों ने इसका ख़याल नहीं रखा. शीशी फ्रिज से बाहर रही. गरम हो गयी. वैक्सीन बर्बाद.

कारण नम्बर चार – ज़्यादा ही ऐक्टिव हो गए. जितने तापमान पर वैक्सीन को रखना था, उससे कम तापमान पर रख दिया. इतना कि वैक्सीन जम गयी. वैक्सीन यहां भी बर्बाद.

# तो करें क्या?

विज्ञान पर भरोसा और ख़ुद को सतर्क. कोरोना की दूसरी वेव है देश में. केस भयानक तेज़ी से बढ़ रहे हैं. मास्क लगाने को विज्ञान कहता है. उसका पालन करिए. शारीरिक दूरी बनाने को विज्ञान कहता है, वो बात भी मानिए और वैक्सीन लगवाने की बारी आए, लगवा लीजिए.


लल्लनटॉप वीडियो : वैक्सीन के बाद भी कोरोना के केसेज बढ़ते क्यों जा रहे हैं?

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