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एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं देने जा रहा कमलापति स्टेशन आम आदमी के लिए कितना महंगा होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर को भोपाल में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया. इस स्टेशन का नाम पहले हबीबगंज रेलवे स्टेशन था, जिसे बदलकर अब रानी कमलापति कर दिया गया है. इसे PPP मॉडल पर एयरपोर्ट जैसी वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है.

जर्मनी के हैडलबर्ग स्टेशन की तर्ज पर बनाया गया

हबीबगंज स्टेशन का रीडेवलपमेंट जर्मनी के हैडलबर्ग रेलवे स्टेशन की तर्ज पर किया गया है. इसकी जिम्मेदारी बंसल पाथवे प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है. कंपनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अबू आसिफ ने इस प्रोजेक्ट को डिज़ाइन किया है. उनके मुताबिक हबीबगंज स्टेशन का कॉन्सेप्ट प्लान जर्मनी के हैडलबर्ग स्टेशन से लिया गया है, लेकिन इसका डिजाइन हैडलबर्ग स्टेशन की तरह नहीं है.

दी लल्लनटॉप से बातचीत में अबू आसिफ ने कहा,

“हमने दो कॉन्सेप्ट हैडलबर्ग स्टेशन से लिए हैं. पहला पैसेंजर सेग्रीगेशन का है. मतलब ट्रेन में चढ़ने और उतरने वाले यात्रियों के रास्ते अलग-अलग बनाए गए हैं. दूसरा कॉन्सेप्ट सिंगल पॉइंट का है, जहां पर सभी तरह की सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी. इनमें सिनेमा, होटल, फूड, शॉपिंग, हॉस्पिटल जैसी सुविधाएं शामिल हैं. महज 100 मीटर के दायरे में ही ये सब होगा.”

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कमलापति स्टेशन के अंदर का हिस्सा (फोटो क्रेडिट : आजतक)

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से लेकर 5 स्टार होटल तक

रानी कमलापति स्टेशन के एक नंबर प्लेटफार्म की तरफ कॉर्पोरेट बिल्डिंग और मिनी शॉपिंग मॉल का निर्माण किया जा रहा है. इस मॉल में होटल, रिटेल स्पेस और मल्टीप्लेक्स होंगे. कॉरपोरेट बिल्डिंग में कंपनियों के ऑफिस होंगे. प्लेटफॉर्म से महज 100 मीटर की दूरी पर ही सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 5 स्टार होटल बनाया जा रहा है. अबू आसिफ के मुताबिक नए डिजाइन में मल्टी मोटर ट्रांसपोर्ट हब के कॉन्सेप्ट को भी अपनाया गया है. यानी रेलवे स्टेशन, बस और मेट्रो स्टेशन की आपस में कनेक्टिविटी होगी. पूरे स्टेशन पर सुरक्षा की दृष्टि से 160 कैमरे लगाए गए हैं.

कितना पैसा रीडेवलपमेंट में खर्च हुआ?

अत्याधुनिक सुविधाओं वाले इस स्टेशन के रीडेवलपमेंट की कुल लागत 450 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इसमें रेलवे स्टेशन और टर्मिनल के डेवलपमेंट में अब तक लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. इसके अलावा कॉर्पोरेट बिल्डिंग, मिनी शॉपिंग मॉल, सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 5 स्टार होटल को बनाने में करीब 350 करोड़ की लागत आएगी.

पार्किंग चार्जेज को लेकर उठे सवाल?

2018 में जब इस स्टेशन को प्राइवेट कंपनी – बंसल पाथवे प्राइवेट लिमिटेड – रीडेवलप कर रही थी, तब उसने स्टेशन पर पार्किंग शुल्क कई गुना बढ़ा दिया था. इससे यहां के पार्किंट रेट ऐसे हो गए कि जान कर आम आदमी की तो रूह कांप जाए. बढ़ोत्तरी के बाद बाइक/स्कूटर के लिए मासिक पास शुल्क 5,000 रुपए और कार के लिए 16,000 रुपए कर दिया गया था.

इसी तरह से दो घंटे के लिए बाइक/स्कूटर खड़ा करने पर 5 रुपए की जगह 15 रुपए और कार के लिए 10 की जगह 40 रुपए लिए जाने लगे. यही नहीं, हर दो घंटे बाद चार्ज बढ़ता जाता था और इस तरह से 24 घंटे के लिए दोपहिया वाहन का चार्ज 235 रुपए और चार पहिया का चार्ज 590 रुपए पहुंच जाता था. हालांकि, इस पर विवाद होने के बाद कंपनी ने किराए में कुछ कमी कर दी.

कार के पार्किंग चार्ज अब भी ज्यादा

दी लल्लनटॉप ने रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के डायरेक्टर अबू आसिफ से इस समय के पार्किंग चार्ज को लेकर भी बात की. उन्होंने बताया कि इस समय पहले 15 मिनट वाहन खड़े करने का कोई चार्ज नहीं है. इसके बाद बाइक/स्कूटर के हर दो घंटे में 10 रुपए और कार खड़ी करने के हर दो घंटे में 20 रुपए चार्ज किए जाते हैं. उन्होंने जानकारी देते हुए ये भी कहा कि अब मासिक पास बाइक/स्कूटर के लिए 999 रुपए में और कार के लिए 4,999 रुपए में बनता है.

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(फोटो क्रेडिट : आजतक)

कार पार्किंग के चार्ज ज्यादा होने की वजह क्या है?

पार्किंग को लेकर इस तरह का नियम और कार के पार्किंग चार्ज ज्यादा होने की वजह बंसल पाथवे की ओर से बताई गई है. अबू आसिफ ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा,

“इस तरह का नियम इसलिए बनाया गया है, क्योंकि पहले (रेट कम होने के चलते) लोग अपनी कारें यहां खड़ी करके छुट्टी पर घूमने चले जाते थे. ये सिटी पार्किंग जैसा बन गया था. जो रेलवे यूजर नहीं थे, वे भी यहां कार पार्क करके चले जाते थे. जब हम PPP मॉडल पर डेवलप करने लगे, तो रेलवे के आगे ये समस्या आई. इसके बाद हमने ‘नेशनल अर्बन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी’ को फॉलो किया. इस पॉलिसी के एक क्लॉज में लिखा है कि अगर आप रेलवे या सिटी की किसी प्राइम जगह पर पार्किंग बनाते हैं, तो पार्किंग का रेवेन्यू, उस जगह के रेंट के बराबर होना चाहिए.”

आसिफ आगे कहते हैं,

“इस तरह की जगह करोड़ों रुपए की होती है, लेकिन महीने भर में उसका (पार्किंग से) रेंट महज 10 से 20 हजार रुपए ही आता है. इसे रेवेन्यू में राष्ट्रीय नुकसान की तरह माना जाता है. ये नुकसान न हो इसलिए पॉलिसी में ये क्लॉज जोड़ा गया है… हालांकि आप देखें तो कमलापति स्टेशन के पार्किंग चार्ज ज्यादा नहीं हैं, रेलवे के यूजर्स के लिए ये एकदम सही हैं. पहले 15 मिनट तक फ्री है, उसके बाद महज 10 और 20 रुपए दो घंटे के लिए देने होंगे. अगर आप रेलवे यूजर हैं तो इतने समय में आप आराम से किसी को भी स्टेशन पर छोड़कर या लेकर आ सकते हो.”

इस भव्य रेलवे स्टेशन पर खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी?

कमलापति रेलवे स्टेशन को लेकर कहा जा रहा है कि इसे एयरपोर्ट की तरह बनाया गया है. ऐसे में कुछ लोगों के दिमाग में ये सवाल है कि क्या इसके प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली खाने-पीने की चीजों के दाम अन्य स्टेशनों से ज्यादा होंगे. हमने प्रोजेक्ट डायरेक्टर अबू आसिफ से ये सवाल भी पूछा. उन्होंने कहा,

“ये बात बिल्कुल भी सही नहीं है. कमलापति स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सभी खाने-पीने की चीजों के दाम वही होंगे, जो पूरे देश के स्टेशनों पर रेलवे द्वारा निर्धारित किए गए हैं. हालांकि, यहां हमने जो टर्मिनल बनाया है, उस पर बड़े फ़ूड ब्रांड्स अपने काउंटर लगाएंगे. ये अपने हिसाब से अपनी चीजें बेचेंगे.”

‘बंसल पाथवे’ अपनी कॉस्ट कैसे निकालेगी?

दी लल्लनटॉप ने बंसल पाथवे के अन्य पदाधिकारियों से भी बात की. उन्होंने बताया कि इतना ज्यादा पैसा इस प्रोजेक्ट में लग रहा है, जिसके चलते लोगों के दिमाग में सब कुछ महंगा हो जाने जैसे सवाल आ रहे हैं. लोग सोच रहे हैं कि अगर चीजें और सुविधाएं महंगी नहीं होंगी, तो करोड़ों रुपए लगाने वाली कंपनी अपना पैसा वापस कैसे लेगी और मुनाफा कैसे कमाएगी? अधिकारियों ने इस तरह के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि बंसल पाथवे इस प्रोजेक्ट में लगी अपनी कॉस्ट को सिनेमा हॉल, अस्पताल और मॉल के रेंट से रिकवर करेगी.


वीडियो देखें-शिवराज सरकार ने उद्घाटन के पहले हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम ही बदल डाला!

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