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'सभी तो चोर हैं फिर वोट देकर क्या करना'

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जिनेन्द्र पारख
जिनेन्द्र पारख

जिनेन्द्र पारख ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर से वकालत की पढ़ाई की है. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर से आते है. इनकी रुचियों में शुमार है- समकालीन विषयों पर पढ़ना, लिखना और इतिहास के विषय में जानना.  प्रस्तुत स्टोरी दी लल्लनटॉप के लिए उन्होंने ही लिखकर भेजी है.


देश में चारों ओर चुनाव का माहौल है. हर राजनैतिक दल अपने अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहा है. प्रधानमंत्री से लेकर एक वार्ड पार्षद भी आम जनता से वोट मांग रहा है क्योंकि आम नागरिक के पास मतदान करने का खास अधिकार है. हमारा भारतीय संविधान उन सभी व्यक्तियों को मतदान का अधिकार प्रदान करता है जो देश के नागरिक हो और जिनकी आयु 18 साल से कम न हो. लेकिन आज़ादी के इतने वर्षो बाद भी देश का एक बड़ा तबका एक वोट की कीमत नहीं समझता. आपका एक वोट बेहद कीमती है. यह वो अधिकार है जो आप पैसों से नहीं खरीद सकते. यह वो अधिकार है जो धर्म, जाति, रंग के भेद को नहीं जानता लेकिन आज़ादी के इतने वर्षो बाद भी क्या हम इस मतदान के महत्वपूर्ण अधिकार को समझ पाए है?

देश के पहले लोकसभा चुनाव में मतदान 67.6 फीसदी था और 2014 लोकसभा चुनाव में मतदान 66.4 फीसदी. आज़ादी के लगभग 70 साल बाद जब साक्षरता प्रतिशत ने एक लम्बी छलांग लगाई है, सुविधाएं बढ़ी हैं फिर भी मतदाता मतदान करने नहीं जा रहा है, यह बेहद निराशाजनक बात है.

इसलिए नहीं करते लोग मतदान

आंकड़े देखकर पता चलता है कि करीब हर लोकसभा चुनाव में 35 से 40 फीसदी मतदाता मतदान नहीं करते. मतदान नहीं करने वालों के पास तरह तरह के तर्क होते हैं- कुछ कहते है कि मेरे एक आदमी के वोट देने से क्या होगा, सभी तो चोर है फिर वोट देकर क्या करना है, कुछ लोग इस दिन को छुट्टी की तरह मानते है और परिवार के साथ बाहर घूमने चले जाते है वही गरीब तबके के लोगों के पास मतदान नहीं करने के अलग कारण है, उनका कहना है कि वे अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए अपने क्षेत्र से बाहर रहते है और सिर्फ मतदान करने के लिए घर जाए तो बहुत महंगा पड़ता है.

क्यों आपका एक एक वोट जरुरी है?

#1  दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव करवाना अपने आपमें एक चुनौती ही है. न केवल व्यवस्था की दृष्टि से बल्कि खर्च की दृष्टि से भी, साल 2014 का लोकसभा चुनाव सबसे ज्यादा खर्चीला था. इस चुनाव में करीब 3870 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. समझा जाता है कि इस बार का लोकसभा चुनाव खर्च के इस आंकड़े को भी पार कर जाएगा.जहां देश के पहले चुनाव में प्रत्येक मतदाता पर 60 पैसे खर्च किया गया था वही 2014 में प्रत्येक मतदाता पर 50 रुपये खर्च हुआ है और यह पैसा किसी और का नहीं बल्कि आम जनता के टैक्स से लिया गया पैसा ही है तो इस बार अगर आप मतदान नहीं करते है तो आप अपने टैक्स से दिए गए पैसे को ही बर्बाद कर रहे हैं.

प्रतीकात्मक इमेज (रॉयटर्स)
सांकेतिक फोटो  (रॉयटर्स)

#2 2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता सीपी जोशी नाथद्वारा सीट से एक वोट से हार गए थे. इनको बीजेपी के कल्याण सिंह चौहान ने हराया था. जोशी को 62215 और चौहान को 62216 वोट मिले थे. 2008 में मध्य प्रदेश के धार सीट से कांग्रेस के बालमुकुंद गौतम पहले बीजेपी की नीना वर्मा से 2 वोटों से जीते घोषित किए गए थे, लेकिन रिकाउंटिंग में नीना वर्मा को 1 वोट से जीता माना गया. लंबे कोर्ट केस के बाद अंततः 2013 में गौतम को जीता हुआ मानकर शपथ दिलाई गई. हरियाणा 2014 सोनीपत जिले की राइ सीट पर कांग्रेस के विधायक जय तीरथ ने सिर्फ 3 वोटों से इनेलो के इंदरजीत को हरा कर सीट बचाई थी.  1989 में आंध्र की अनाकापल्ली सीट से कांग्रेस के कोनाथला रामकृष्ण ने 9 वोटों से जीत हासिल की थी. इन तमाम चुनाव में एक एक वोट कितना महत्वपूर्ण रहा है यह बखूबी देखा जा सकता है.

#3 गुजरात के बानेज गांव में स्थित गिर के जंगल में महंत भारतदास गुरु के लिए विशेष रूप से पोलिंग बूथ बनता है क्योंकि ये बानेज गांव के अकेले वोटर हैं. इनका वोट लेने के लिए हर पांच साल में चुनाव आयोग गिर के जंगल में पहुंचता है. चुनाव आयोग 2002 से यहां पोलिंग बूथ बनाता आ रहा है. इस पोलिंग बूथ की अहमियत इसलिए भी है, क्योंकि अगर यहां बूथ न बनाया जाए तो भारतदास को वोट डालने के लिए कम से कम 20 किमी दूर जाना पड़ेगा. 5 शासकीय कर्मचारी और चार सुरक्षा बल के बीच में यह एक वोटर मतदान करता है, इस बात से पता चलता है कि हमारे एक एक वोट के लिए चुनाव आयोग को कितनी तैयारी करनी पड़ती है.

#4 भारत इस तथ्य पर गर्व कर सकता है कि जितने मतदाता भारत में है उतने विश्व के किसी भी देश में नहीं है लेकिन एक तथ्य और भी है कि आज़ादी के बाद से लेकर अब तक एक भी सरकार ऐसी नहीं बनी जिसे 50 फीसदी से ज़्यादा मत मिले हो. आज भारत में कुल मतदाता करीब 90 करोड़ है और ऐसे में कोई भी दल करीब 35 करोड़ वोट पाकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व कर सकता है लेकिन क्या यही बहुमत है जहा 60 फीसदी मतदान होता हो और 30-35 फीसदी वोट पाकर एक बहुमत की सरकार बनती हो?

आपको अधिकार है शासन-प्रशासन की आलोचना करने का, देश का संविधान आपके अभिव्यक्ति की आज़ादी की सुरक्षा करता है. यही संविधान आपको हर प्रकार के अधिकार देकर एक मजबूत नागरिक बनाता है तो फिर हम अपने कर्तव्यों का पालन करने में पीछे क्यों रहे. इस चुनाव मतदान करिए क्योंकि यह हमारे भारत का सबसे बड़ा त्यौहार है. एक ऐसा त्यौहार जो योग्य प्रतिनिधि चुनने का मौका देता है. एक ऐसा त्यौहार जो हर धर्म का है, हर जाति का है और हर क्षेत्र में है. 17वीं लोकसभा के गठन के लिए 90 करोड़ लोग वोट डालेंगे. आपके मतदान अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए पूरे देश में 10 लाख पोलिंग बूथ बनाए जायेंगे. 1 करोड़ से ज़्यादा शासकीय कर्मचारी और हर संवेदनशील स्थान पर सीआरपीएफ जवान तैनात होंगे. आपके एक वोट पर यह लोकतंत्र खड़ा है इसलिए इस बार मतदान जरूर करिएगा.

लोकतंत्र की यही पहचान, शत-प्रतिशत मतदान


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