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जैसे सुपरहीरोज़ के बीच शक्तिमान, वैसे टीम इंडिया में मिसफिट रिद्धिमान

दिसम्बर 30, 2014. साल 2015 दरवाजा खटखटा रहा था और भारत ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के साथ बॉक्सिंग डे टेस्ट ड्रा कराया था. पिछले 7 सालों में हमने एक टेस्ट सीरीज़ छोड़िये, एक टेस्ट नहीं जीता था. और इसी बीच खबर आई कि इंडियन कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी ने रिटायरमेंट ले लिया है. न कोई फेयरवेल टेस्ट, न ही कोई शानदार क्लोज़िंग स्पीच. उनका खेल ही सब कुछ था.

इससे पहले कि यह सोचा जाता कि भारतीय क्रिकेट के साथ हुआ क्या, इस बात की तसल्ली थी कि कप्तानी की बागडोर के लिए विराट कोहली तैयार हो चुके हैं. बात पर ठप्पा लगा दिया दुनिया भर के चैपलों और टेलरों ने. धोनी टीम में जो स्थिरता लाते थे, उसके बाद अब आने वाली थी कोहली की अग्रेसिव कप्तानी. मगर धोनी के जाने से फिर वही दिक्कत मुंह फाड़े खड़ी थी. एक पुरानी कमज़ोरी जिसने भारतीय क्रिकेट को हमेशा से ही सताया था. दरअसल इंडिया हमेशा ही एक अच्छे विकेट कीपर की तलाश में खोया रहता था. धोनी ने इस तलाश को एक फुल-स्टॉप लगाया था. वरना नयन मोंगिया के बाद सबा करीम, राहुल द्रविड़, पार्थिव पटेल, दिनेश कार्तिक विकेटों के पीछे ग्लव्स पहन कर खड़े हो चुके थे. धोनी ने एक काम ये भी किया था कि आते ही अपनी जगह इस कदर पक्की कर ली थी कि कहा जाने लगा था कि उनके रहते जो भी इंडिया के लिए कीपिंग करने की सोचता है, पागल है.

रिटायरमेंट के तीन ही दिन पहले धोनी ने तोड़ा था सबसे ज़्यादा स्टंपिंग्स करने का रिकॉर्ड. और धोनी की स्टम्पिंग भी आम स्टम्पिंग नहीं होती थीं. उनकी स्टम्पिंग ऐसी होती थीं कि बिजली भी शर्मा जाए. ‘दुर्घटना से देर भली’ इंडियन रेलवे की क्रासिंग के साथ-साथ धोनी के ग्लव्स पे भी छपवा देना चाहिए. यूट्यूब पे चढ़े वीडियो तो ये दवा भी करते हैं धोनी ने सेकण्ड के दसवें हिस्से में स्टम्पिंग की हैं. यानी पलक झपकने से भी तेज़. बैट्समैन क्रीज़ से बाहर निकलता तो ये सोचकर था कि गेंद स्टैंड्स में ही जाकर गिरेगी लेकिन पीछे धोनी गेंद कलेक्ट कर उसकी कहानी ही पैक कर देते थे. कई बार तो ये भी हुआ है कि पिछला पैर रखने में देर हुई और गिल्लियां उखड़ जाती थीं. दुनिया के और धुरंधर विकेट-कीपरों की तरह वो उछल कर और लपक कर नहीं, बल्कि किसी बिलाव की तरह थोड़ा सा खिसक कर कैच पूरा कर लेते. धोनी जिस वक़्त रिटायर हुए, टेस्ट मैचों में उनके खाते में 294 डिसमिसल्स थे. सैय्यद किरमानी से पूरे 100 ज़्यादा.

धोनी की खाली जगह भरने आए बंगाल के रिद्धिमान साहा. रणजी में अपना पहला मैच खेला साल 2007 में. तब जब धोनी इंडिया को टी-20 वर्ल्ड कप जिता चुके थे. डेब्यू पर शतक भी जड़ा और लगातार अच्छा खेलने के बाद 2010 में उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ़ टेस्ट सिरीज़ के लिए चुना गया. मज़ेदार बात ये कि उन्हें बैट्समैन के तौर पर लिया गया था. सीरीज़ इंडिया में होनी थी. पहले टेस्ट की पहली इनिंग्स में ज़ीरो पर आउट हुए और दूसरी इनिंग्स में भी कुछ खास नहीं हो पाया. इस टेस्ट के बाद दोबारा खेलने का मौका मिला 2012 में. इस बार पिच ऑस्ट्रेलिया की थी. मैदान था एडिलेड ओवल. वो मैच जिसने विराट कोहली के सैकड़ों का खाता खोला था. कोहली की उस सेंचुरी में साहा की इनिंग्स का भी एक बड़ा हाथ था. टीम का स्कोर था 111 और आउट हुआ बैट्समैन था वीवीएस लक्ष्मण. साहा जब आउट हुए तब टीम का स्कोर था 225. कोहली शतक कर चुके थे. साहा कीपर तो बुरे नहीं हैं, मगर मात खाते हैं बल्लेबाजी में. एक चक्कर ये भी है कि डोमेस्टिक सर्किट में उनका नाम ऊपर आता है मगर इंडिया के लिए खेलते हुए कुछ हल्के हो जाते हैं. उनकी विकेटकीपिंग धोनी की तरह चपल और खुराफ़ाती तो नहीं है, पर फिटनेस और तकनीकी तौर पर वो खिलाड़ी पूरे हैं.

टी-20 क्रिकेट के आने से हुआ ये है कि टेस्ट क्रिकेट में भी तेज़ बैट्समैन की मांग बढ़ी है. ऐसे में हम कीपर में चाहते हैं एबी डिविलिअर्स टाइप कुछ. डिविलियर्स अब सिर्फ खिलाड़ी नहीं विशेषण बन चुके हैं. मतलब ऐसा है कि आदमी नहीं क्ले है. जैसे ढालना हो ढाल दो. मार कर खेलना हो या रोक कर. मैच जिताना हो या बचाना हो. टीम डिविलियर्स की तरफ देखती है. साथ ही कीपिंग एक नम्बर. ब्रेंडन मैकुलम जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज़ी को एक नई परिभाषा ही दे डाली. 2014 में इंडिया के ख़िलाफ़ उन्होंने अपनी टीम को 94 पर 5 से उठाया और 446 पर 6 विकेट तक पहुंचाया. खुद आउट हुए जब टीम का स्कोर था 625 और खुद का 302. कुमार संगकारा ज़बरदस्त विकेट-कीपर के साथ ही खूबसूरत बैटिंग भी जानते थे. संगा के 10 दोहरे शतक हैं. आज भी इंग्लैंड के विकेटकीपर जॉनी बेयरस्टो बहुत ही काबिल बल्लेबाज़ हैं. हाल ही में इन्होंने श्री लंका को बहुत परेशान किया और 40 की औसत रखते हैं.

साहा अभी सिर्फ 12 टेस्ट मैच खेल पाए हैं, और कम से कम आंकड़ों में तो वो अभी कुछ खास नहीं कर पाए हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा है 60. ऐवरेज के हिसाब से वो अमित मिश्रा को अपने बराबर पाते हैं.

 

हाल ही में टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने उन्हें बताया अपना फर्स्ट-चॉइस विकेट-कीपर. मध्य प्रदेश से आने वाले नमन ओझा भी भारत के लिए 1 टेस्ट खेल चुके हैं. इस वक़्त टीम इंडिया के लिए खेलने के लिए अगर एक और विकेट कीपर का नाम सूझता है तो वो हैं नमन ओझा. शैली से आक्रामक ओझा रणजी में सीनियर खिलाड़ी हो चले हैं. घरेलू क्रिकेट में उनकी औसत साहा से थोड़ी ही ज्यादा है, लेकिन कीपिंग के मामले में वो साहा से कहीं आगे हैं. संकरे स्टांस वाले नमन ओझा का क्लेम-टू-फेम है उनकी 219 रनों की पारी, जो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ ब्रिस्बेन में खेली थी. इस पारी के दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की नेशनल टीम के लिए खेल चुके कैमरन बॉय्स, जेम्स फॉकनर, मिशेल मार्श और मोइसेज़ हेनरीक्स का सामना करते हुए आठ छक्के भी लगाये.

घरेलू क्रिकेट में चयनकर्ताओं की नज़र में और भी विकेटकीपर हैं. स्वयं धोनी की तारीफ पा चुके झारखण्ड के शिव प्रकाश गौतम, ओपनर भी हैं. फरवरी में सर्विसेज़ के खिलाफ लगाया 150 उनका सर्वाधिक स्कोर है. कीपिंग में भी खासे अच्छे हैं. दिनेश कार्तिक भारत के लिए पहले खेल चुके हैं और 40 की फर्स्ट-क्लास औसत भी है. कर्णाटक के रॉबिन उथप्पा भी अच्छे खिलाड़ी रहे हैं जिन्हें आईपीएल में और घरेलू क्रिकेट में कीपिंग का अनुभव है. उथप्पा भी प्रवीण आमरे की वजह से अपना करियर दोबारा पटरी पर ला पाए हैं. ज्यादा दूर न जाया जाये तो टीम ही में मौजूद लोकेश राहुल, जिन्होंने हाल ही में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ 158 रन की पारी खेली, भी आपातकालीन स्थिति के ही सही, मगर कीपर ज़रूर हैं.

Uthappa, Parthiv, Ojha

फ़िलहाल इंडियन क्रिकेट की मजबूरी ये है कि धोनी के जैसी बल्लेबाज़ी और कीपिंग का कॉम्बिनेशन किसी के पास नहीं है. धोनी सिर्फ कीपर या बल्लेबाज़ नहीं हैं, बल्कि एक बहुत बड़े नाम हैं. क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट के तमाम मुकाम उनके पास हैं. अगर कोई कीपर है भी, तो उतना ही भरोसेमंद बल्लेबाज़ नहीं है. कोई बल्लेबाज़ कीपिंग करता है तो कमज़ोर है. काफी समय से रणजी में रन कर रहे दिनेश कार्तिक और रॉबिन उथप्पा की अनदेखी भी बड़ा मसला है. पिछले दो सीज़न में रिद्धिमान साहा ने डोमेस्टिक क्रिकेट में ज्यादा रन तो नहीं बनाये हैं, मगर आईपीएल में पहले उन्होंने कोलकाता और फिर चेन्नई के लिए अच्छा रोल निभाया है. 2014 के आईपीएल फाइनल में पंजाब के लिए 115 भी बनाये थे. शायद इसी मिले-जुले प्रदर्शन के दम पर वो इंडिया के फर्स्ट-चॉइस कीपर हैं.

 

ये आर्टिकल हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे प्रणय पाठक ने लिखा है.

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