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वैक्सीन मैत्री को लेकर विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार को क्यों घेर रही?

कोरोना वायरस से भारत का बुरा हाल है. हर दिन लाखों नए मामले और हज़ारों मौतें हो रही है. इस सबके बीच सरकार की वैक्सीन पॉलिसी पर भी सवाल उठ रहे हैं. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में वैक्सीन की कमी हो गई है. कई राज्यों ने भी इसकी शिकायत की है. ये भी कहा है कि भारत की इतनी बड़ी आबादी को सिर्फ 2 कंपनियां कैसे वैक्सीन देने में सक्षम हो सकती हैं? इस सबके साथ ही वैक्सीन मैत्री पर भी लगातार सवाल उठे हैं. विपक्षी दलों ने सरकार को इस मामले पर घेरने की कोशिश की है. कहा है कि जब भारत की खुद की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है, तो ऐसे में दूसरे देशों को वैक्सीन बांटने और बेचने का क्या तुक है? आइए सबसे पहले वैक्सीन मैत्री के बारे में जानते हैं.

वैक्सीन मैत्री के तहत, भारत दुनियाभर के देशों को कोरोना वैक्सीन की सहायता दे रहा है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक 12 मई तक करीब 6.63 करोड़ खुराक बांटी जा चुकी है. 6.63 करोड़ वैक्सीन के डोज़ में से 1.07 करोड़ मदद के तौर पर दी गई है. 1.98 करोड़ वैक्सीन कोवैक्स प्रोग्राम के तहत दी गई है. इसे भी मदद के तौर पर देखा जा सकता है. बची 3.57 करोड़ वैक्सीन भारत ने बेची है. भारत में कोरोना से हालात बिगड़ने के बाद अप्रैल में वैक्सीन के निर्यात पर रोक लगा दी गई थी.

3 हफ्ते से भारत ने वैक्सीन विदेश नहीं भेजी?

ऐसा नहीं कि वैक्सीन मैत्री से सिर्फ़ दुकानदारी हो रही हो. भारत कई देशों की मुफ़्त मदद भी कर रहा है. ख़ासकर अपने पड़ोसियों और गरीब देशों की. भारत कोवैक्स मिशन के तहत भी देशों को वैक्सीन बांट रहा है. यही है भारत की वैक्सीन डिप्लोमसी. जिसका ऑफिशल नाम है- वैक्सीन मैत्री. इस वैक्सीन मैत्री के तहत भारत अब तक 95 देशों को वैक्सीन पहुंचाई है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ पराग्वे में 22 अप्रैल को आख़िरी बार वैक्सीन भेजी गई थी. उसके बाद से अब तक किसी और देश को भारत से वैक्सीन नहीं भेजी गई है.

भारत ने वैक्सीन मैत्री की शुरुआत की 20 जनवरी, 2021 को. इस रोज़ भूटान में कोरोना वैक्सीन की पहली खेप पहुंची. डेढ़ लाख वैक्सीन का ये पार्सल उसे भारत ने गिफ़्ट किया था.

इसी दिन भारत ने मालदीव को भी एक लाख वैक्सीन गिफ्ट किए थे. मालदीव के राष्ट्रपति ने ट्विटर पर लिखा- थैंक्यू इंडिया.

संबित का बयान कितना सही?

वैक्सीन एक्सपोर्ट को लेकर हाल में बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा का बयान वायरल है. उन्होंने एक वीडियो में कहा है कि भारत ने मदद के तौर पर 1.07 करोड़ वैक्सीन अन्य देशों को दी है. ये विदेश भेजी गई कुल वैक्सीन का करीब 16 फीसद है. बाकी के 84 फीसद वैक्सीन बाध्यताओं के कारण भेजी गई हैं. इन्हें मोदी सरकार को भेजना ही था. 

इस  84 फीसद वाली बाध्यता को लेकर ही लोग सोशल मीडिया पर उबल रहे हैं.

मदद के लिए भेजी गई वैक्सीन और कोवैक्स को जोड़ दिया जाए तो यह करीब 46 फीसद बनता है. माने करीब 54 फीसद वैक्सीन बेचे गए. माने करीब 3.58 करोड़ वैक्सीन बेचे गए. तो ऐसे में संबित पात्रा का 84 फीसद का बयान समझ के परे नज़र आता है?

संबित क्या सफाई दे रहे?

संबित पात्रा ने वैक्सीन बाहर जाने को लेकर दो बाध्यतों के बारे में बात की. कहा कि एक कमर्शियल बाध्यता है और दूसरी लाइसेंसिंग बाध्यता. भारत में दो कंपनियां वैक्सीन बना रही हैं. और इन कंपनियों ने पहले से ही कुछ बुकिंग ली थी. इन कंपनियों ने इन देशों से एडवांस पैसे लिए थे. इन देशों ने भारतीय वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को रॉ मैटिरियल में मदद की थी. लाइसेंसिंग बाध्यता को लेकर संबित ने कहा कि कोविडशील्ड को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजेनेका से लाइसेंस मिला हुआ है. ऐसे में स्वाभाविक है कि आपको कुछ वैक्सीन बाहर भेजनी होगी. भारत भी कोवैक्स प्रोग्राम में भी शामिल है. संबित ने बताया कि भारत ने कोवैक्स के तहत अपने 30 फीसद वैक्सीन बाहर भेजे.

लेकिन 19 जनवरी 2021 को भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रेस रिलीज़ कर बताया था कि भारत में कई चरणों में हो रहे टीकाकरण को ध्यान में रखते हुए भारत अपने सहयोगी देशों के साथ कोविड वैक्सीन को भेजना जारी रखेगा. इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि डोमेस्टिक मैनुफैक्चरर को वैक्सीन बाहर भेजने से पहले भारत की जरूरत पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक रखना होगा.

वैक्सीन मैत्री को लेकर कई सवाल हैं. वैक्सीन को लेकर भी. सरकार का अपना दावा है और विपक्षी दलों का अपना. सोशल मीडिया पर कई लोग कह रहे हैं कि जब इतना वक्त मिला था वैक्सीन बनाने को, तो सरकार क्यों नहीं बनवा पाई? कुछ लोगों ने लिखा है कि नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान सहित और भी मित्र राष्ट्र को वैक्सीन भेजने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन भारत को पहले खुद का ध्यान रखना चाहिए.

कोवैक्स के बारे में जानते जाइए

ये एक ग्लोबल प्रोग्राम है. इसे लॉन्च किया गया अप्रैल 2020 में. ख़ास कोरोना के लिए. ताकि ये बिना भेदभाव के पूरी दुनिया के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराया जा सके. कोवैक्स प्रोग्राम का जिम्मा उठाते हैं CEPI, GAVI और WHO. कोवैक्स का लक्ष्य है, 2021 ख़त्म होते-होते वैक्सीन की कम-से-कम 1.8 बिलियन डोज़ सप्लाई करना. किन्हें? दुनिया के सबसे गरीब 92 देशों को. किसको कितनी वैक्सीन मिलेगी, ये उसकी आबादी के हिसाब से तय होगा. कहीं कोरोना का प्रकोप ज़्यादा हुआ, तो उसे ज़्यादा प्राथमिकता दी जाएगी.


वीडियो- ऑक्सीजन के बाद अब पीएम केयर्स से आए वेंटीलेटर और वैक्सीन की कमी पर घिरी मोदी सरकार

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