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ब्रिटनी स्पियर्स को उनके पिता ने 13 साल से क्यों 'कैद' कर रखा है?

16 साल की एक लड़की थी. एक छोटे से शहर में रहती थी. उसे गाने का श़ौक था. उसने एक गाना बनाया. गीत चल निकला. वो रातोरात सुपरस्टार बन गई. अब वो लड़की 39 साल की हो गई है. उसके दो बच्चे हैं. 14 और 15 साल के. मगर उसे अपनी पर्सनल लाइफ़ के फ़ैसले भी ख़ुद लेने का हक़ नहीं है. उसने बेपनाह दौलत कमाई है. लेकिन उन पैसों पर, अपनी कमाई हुई संपत्ति पर भी उसका कंट्रोल नहीं. कई लोग तो ये तक कहते हैं कि उसे मोबाइल रखने, अपनी मर्ज़ी से कहीं आने-जाने तक की छूट नहीं है.

अब इस ब्योरे में एक नाम डाल दीजिए- मशहूर पॉप सिंगर ब्रिटनी स्पीयर्स. करीब 13 साल से ब्रिटनी की ज़िंदगी किसी और के कंट्रोल में है. क्यों? क्योंकि माना गया कि ब्रिटनी मानसिक तौर पर इतनी फ़िट नहीं कि अपने फ़ैसले ले सकें. इसी समझ के चलते कोर्ट ने ब्रिटनी का कंट्रोल किसी और को सौंप दिया.

13 साल से ब्रिटनी की ज़िंदगी किसी और के कंट्रोल में?

ये जिस ख़ास क़ानूनी व्यवस्था के तहत हुआ, उसे कहते हैं- कंज़र्वेटरशिप. ब्रिटनी के लाखों प्रशंसक बरसों से उन्हें इस कंज़र्वेटरशिप से रिहा करवाने की कोशिश कर रहे हैं. ‘फ्री ब्रिटनी’ नाम का एक कैंपेन चला रहे हैं. आज इस कैंपेन के लिए बड़ा दिन है. क्योंकि बरसों बाद आज ब्रिटनी अपनी चुप्पी तोड़ने वाली हैं. वो इस मामले में कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखने वाली हैं. ये पूरा मामला क्या है, विस्तार से बताते हैं.

12 जनवरी, 1999. इस रोज़ अमेरिका में एक गाना रिलीज़ हुआ. इसके बोल थे- बेबी, वन मोर टाइम. ये ब्रिटनी स्पीयर्स का पहला गाना था. इसमें वो एक ख़ास अदा से, कुछ-कुछ गुर्राने की शैली में कहती हैं- ओह, बेबी बेबी. शब्द सुनकर शायद आप महसूस ना कर सकें. मगर सुनते हुए वो स्टाइल इरॉटिक लगता है. इसी मादक स्टाइल ने, इसी गाने ने नई सदी के टीन पॉप युग का आगाज़ किया था. ब्रिटनी पॉप आयकन बन गईं. एक इंटरव्यू में ब्रिटनी ने इस गाने की रिकॉर्डिंग से पहले की रात का क़िस्सा कुछ यूं सुनाया था-

अगले दिन गाना रिकॉर्ड होना था. उससे पहले की रात मैं सॉफ़्ट सेल का गाया टेन्टेड लव सुनती रही. मैं चाहती थी कि गाने की रिकॉर्डिंग के वक़्त मेरा गला थोड़ा रफ़ रहे. जैसा अक़्सर ज़ोर से चिल्लाने पर हो जाता है, कुछ-कुछ वैसा ही. इसीलिए मैंने ख़ुद को थकाया. बहुत देर तक जगी रही. जब मैं स्टूडियो पहुंची, तो मैं थकी हुई थी. मेरी नींद पूरी नहीं हुई थी. इसका असर मेरी आवाज़ पर भी पड़ा. मेरी आवाज़ कूल और सेक्सी लग रही थी. गाना रिकॉर्ड करने के बाद मैंने ख़ुद से कहा- ब्रिटनी, अब रुकना मत.

ब्रिटनी सच में नहीं रुकीं. वो पॉप आइकॉन बन गईं. उन्हें सबसे सफल कलाकारों की सर्वकालिक कैटगरी में गिना जाने लगा. इस कामयाबी को आप चाहे पैसे में मापें. या, आलोचकों और प्रशंसकों की तारीफ़ों के आधार पर. ब्रिटनी दोनों तरह से सुपर डुपर सक्सेसफ़ुल रहीं.

पैपरात्सी क्या चीज है?

लेकिन इस कामयाबी के भरपूर नुकसान भी थे. सबसे बड़ा साइड इफ़ेक्ट था, पैपरात्सी. ये क्या चीज है? ये हैं वो लोग, जो कैमरा थामे मशहूर हस्तियों का पीछा करते हैं. घर के बाहर, कार के पीछे, रेस्तराओं में, पर्सनल पार्टियों में, छुट्टी मनाते हुए, पर्सनल प्रफ़ेशनल…हर जगह ये सेलिब्रिटी के पीछे पड़े रहते हैं. सिलेब्रिटीज़ को मीडिया अटेंशन अच्छा लगता है. मगर जब ये एक्सट्रीम हो जाए, तो घुटन महसूस होती है.

ब्रिटनीअपने साथ होने वाले बर्ताव के प्रति सार्वजनिक तौर पर रोतीं, चिल्लातीं. (तस्वीर: एपी)
ब्रिटनी अपने साथ होने वाले बर्ताव के प्रति सार्वजनिक तौर पर रोतीं, चिल्लातीं. (तस्वीर: एपी)

ऐसा ही होने लगा ब्रिटनी के साथ. जब ब्रिटनी चिढ़तीं, कोई प्रतिक्रिया देतीं, तो मैगज़ीन्स और टैबलॉइड्स उनपर नेगेटिव ख़बरें छापते. ब्रिटनी जब चिढ़कर सार्वजनिक तौर पर अपना फ्रस्ट्रेशन दिखातीं, तो उनकी नेगेटिव छवि बनाई जाती. मीडिया उनके साथ पर्याप्त बदतमीज़ियां भी करता था. मसलन, जुलाई 2002 का एक वाकया सुनिए. ब्रिटनी एक दौरे पर मैक्सिको सिटी गई थीं. यहां उनकी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. इसमें ब्रिटनी ने जीन्स और लाल रंग का एक झीना सा टॉप पहना हुआ था. ब्रिटनी मंच पर एक टेबल के पीछे बैठकर पत्रकारों के सवाल का जवाब दे रही थीं. इसी दौरान एक पत्रकार ने उनसे कहा-

क्या मैं देख सकता हूं कि आपने क्या पहना हुआ है?

ये सवाल सुनकर ब्रिटनी असहज हो गईं. औपचारिकता के चलते वो मुस्कुरा तो रही थीं, मगर उनके हाव-भाव से स्पष्ट था कि उन्हें अच्छा नहीं लग रहा. उन्होंने हैरान होकर पत्रकार का सवाल दोहराया. पूछा, आप देखना चाहते हैं कि मैंने क्या पहना है? इसपर उस पत्रकार ने हामी भरी. ब्रिटनी कुर्सी से खड़ी हुईं. इसपर उस पत्रकार ने कहा कि वो आगे-पीछे घूमकर अपने कपड़े दिखाएं. ब्रिटनी हल्का सा मुस्कुराईं और वापस बैठ गईं. उन्होंने पत्रकार से कहा कि जब मैं जाने लगूंगी, तो देख लेना.

सोचिए. ये सवाल एक 20 साल की लड़की से पूछा गया था. एक पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म पर, भरी महफ़िल में, पूछा गया था. ये सरासर बदतमीज़ी थी. क़ायदे से वहां मौजूद लोगों को इस सवाल पर आपत्ति उठानी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जब उस पत्रकार ने ब्रिटनी को आगे-पीछे घूमकर कपड़े दिखाने को कहा, तो हॉल में बैठे लोग ज़ोर से खिलखिलाए. असहज ब्रिटनी जब प्रेस कॉन्फ्ऱेंस जल्दी ख़त्म करके जाने लगीं, तो उन्हें ट्रोल किया गया.

ब्रिटनी के रोने को एक्स्क्लूसिव स्टोरी कहकर बेचा जाता?

ऐसी बदतमीज़ियां आम थीं. ब्रिटनी अपने साथ होने वाले बर्ताव के प्रति खीझने लगी थीं. वो अपना विरोध जताने के लिए सार्वजनिक तौर पर रोतीं, चिल्लातीं. उनसे सहानुभूति रखने की जगह मैगज़ीन वाले इसपर भी ख़बरें बना देते. ब्रिटनी के रोने को एक्स्क्लूसिव स्टोरी कहकर बेचा जाता.

अपने बॉयफ्ऱेंड जस्टिन टिंबरलेक के साथ ब्रिटनी. (तस्वीर: एएफपी)
अपने बॉयफ्ऱेंड जस्टिन टिंबरलेक के साथ ब्रिटनी. (तस्वीर: एएफपी)

ऐसा नहीं कि बस मीडिया की ही ग़लती हो. ब्रिटनी के एक बॉयफ्ऱेंड थे, जस्टिन टिंबरलेक. कुछ समय तक दोनों रिश्ते में थे. 2002 में उनका ब्रेक-अप हुआ. इसके बाद टिंबरलेक ने भी ब्रिटनी के लिए ख़ूब अनाप-शनाप बोला. कहा, वो धोखेबाज़ थी. उसका किसी और से अफ़ेयर था. टिंबरलेक ख़ुद भी गायक थे. ब्रेक-अप के बाद उनका एक गाना आया- क्राय मी अ रिवर. इसके बोल कुछ यूं थे-

यू डोन्ट हैव टू से, वॉट यू डिड. आई ऑलरेडी नो, आई फाउंड आउट फ्रॉम हिम. नाऊ यू टेल मी यू नीड मी, वेन यू कॉल मी ऑन द फोन. गर्ल, आई रिफ़्यूज़. नाऊ इट्स योर टर्न टू क्राय, क्राय मी अ रिवर.

इन बोलों को भी ब्रिटनी की कथित धोखेबाज़ी का प्रमाण माना गया. ब्रिटनी से इंटरव्यू में पूछा जाने लगा कि उन्होंने टिंबरलेक के साथ इतना बुरा क्यों किया. उनका दिल क्यों दुखाया. जब भी ब्रिटनी का ब्रेक-अप होता, उनपर ऐसे ही भद्दे सवाल दागे जाते. ऐसा ही एक नाम था, फ्रेड डर्स्ट. अफ़वाह उड़ी कि वो और ब्रिटनी डेट कर रहे थे. ब्रिटनी ने इससे इनकार किया. मगर मीडिया का एक धड़ा डर्स्ट को बुलाकर इस कथित रिश्ते पर इंटरव्यू लेता. ऐसे ही एक इंटरव्यू में डर्स्ट ने MTV के आगे दावा किया-

हमारा ब्रेक-अप पागलपन से भरा था. मैं हमेशा अपने दिल की सुनता हूं. मैंने जो किया, सच्चे दिल से किया. मेरे इरादे भी सच्चे थे. और मैं बता दूं कि मैं झूठा नहीं हूं.

3 साल में ब्रिटनी का डिवोर्स हो गया

डर्स्ट के मुताबिक, वो झूठे नहीं थे. इसका मतलब ये लगाया कि ब्रिटनी झूठी हैं. मूडी हैं. भरोसेमंद नहीं हैं. स्थितियां और बिगड़ीं ब्रिटनी की शादी के बाद. 2004 में ब्रिटनी बस 22 की थीं, जब उन्होंने डांसर केविन फे़डरलाइन से शादी की. दोनों के दो बेटे हुए- जेडन और सीन. ये शादी 2007 में ख़त्म हो गई. दोनों का डिवोर्स हो गया.

फ्रेड डर्स्ट. (तस्वीर: एएफपी)
फ्रेड डर्स्ट. (तस्वीर: एएफपी)

अब सवाल खड़ा हुआ, बच्चों की कस्टडी का. ब्रिटनी को बच्चों की कस्टडी नहीं मिली. इसके बाद से ब्रिटनी के बर्ताव में दिखने वाली अस्थिरता बढ़ गई. वो बिखरी-बिखरी रहतीं. अजीब से कपड़े पहनतीं. मीडियाकर्मियों को देखतीं, तो चिल्लाने लगतीं. 2007 में इसी मेंटल स्टेट में उन्होंने अपना सिर मुंडवा लिया. बोलीं, लोग उनके बाल छूते रहते हैं. उन्हें अब इससे घिन आने लगी है. साफ़ था कि वो चौबीसों घंटे अपने पीछे लगे कैमरों से बीमार हो गई थीं. मगर इस हालत में भी किसी को उनसे हमदर्दी नहीं थी. कहा जाने लगा कि वो ड्रग्स लेती हैं. इसी वजह से इतना अस्थिर बर्ताव करती हैं. उनके बढ़े हुए वजन को लेकर भी उनकी हंसी उड़ाई जाने लगी.

इसी माहौल के बीच 2007 में ब्रिटनी कई बार रेहाब भी गईं. उनके रेहाब जाने पर कैसी स्टोरीज़ छपीं? मिसाल के लिए पीपल्स मैगज़ीन का उदाहरण. इसने अपने कवरपेज़ पर छापा-

इनसाइड ब्रिटनीज़ ब्रेकडाउन: जमकर पार्टियां करना, पब्लिकली रोना, अपना सिर मुंडवा लेना. गायिका की हालत से डरा हुआ परिवार. बच्चों के लिए होने वाली चिंता. इन सबके बीच ब्रिटनी रेहाब पहुंचीं.

US वीकली ने लिखा-

सीन और जेडेन का जन्मदिन कैसे बीता, ये जानकर आपका दिल टूट जाएगा. हम बताएंगे, आख़िरी मिनटों में केविन के आगे कैसे गिड़गिड़ाईं ब्रिटनी? जानिए, दोनों बच्चों जब मां से मिलकर आते हैं, तो उस सदमे से उबरने में क्यों उन्हें कई दिन लग जाते हैं.

आपने ‘विच हंटिंग’ शब्द सुना है?

ब्रिटनी के साथ यही हो रहा था. मीडिया लिखने लगा था कि वो बुरी मां हैं. बच्चों को संभालने के लायक नहीं हैं. एक तरफ़ उनकी पब्लिक इमेज़ इतनी ख़राब कर दी गई थी. दूसरी तरफ़ पर्सनल लाइफ़ में भी तनाव था. उन्हें बच्चों की कस्टडी नहीं मिली थी. ब्रिटनी को अपने दोनों बेटे एक्स-हसबैंड केविन के सुपुर्द करने थे. वो मेंटल ब्रेकडाउन की हालत में थीं. अकेली थीं. बच्चों के साथ रहना चाहती थीं. उनका करियर भी लड़खड़ा रहा था. इन तमाम नकारात्मकताओं का क्लाइमैक्स आया 2008 में.

3 जनवरी, 2008 की बात है. बच्चों की कस्टडी लेने के लिए केविन ने अपने बॉडीगार्ड्स को ब्रिटनी के घर भेजा. ये सब देखने के लिए घर के बाहर पैपरात्सी का जमावड़ा था. ब्रिटनी पैनिक हो गईं. रोने-चिल्लाने लगीं. उन्होंने घर के एक कमरे में ख़ुद को बेटे के साथ बंद कर लिया. वहां पुलिस बुलाई गई. ब्रिटनी को जबरन ऐम्बुलेंस में डालकर अस्पताल ले जाया गया.

ब्रिटनी डिप्रेशन में थीं. उन्हें मदद की ज़रूरत थी. लेकिन हुआ क्या? उन्हें पागल कहा जाने लगा. कहा जाने लगा कि उन्हें पागलपन के दौरे आते हैं. वो बायपोलर हैं. ख़ुद के लिए, औरों के लिए ख़तरा बन गई हैं. वो मेंटली फिट हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए परिवार के कहने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. इसी असहायता के दौर में एंट्री हुई कोर्ट की. फरवरी 2008 में लॉस ऐंजेलिस की एक अदालत में याचिका डाली गई. ये याचिका डाली थी ब्रिटनी के पिता जेमी स्पीयर्स ने. क्या कहा गया था याचिका में?

इसमें जेमी ने कोर्ट से ब्रिटनी की ‘टेम्पररी कन्ज़रवेटरशिप’ मांगी थी. क्या होता है कन्ज़रवेटरशिप? ये एक क़ानूनी व्यवस्था है. ऐसे वयस्क, जिनकी दिमाग़ी स्थिति पर शुबहा हो. ऐसा लगे कि वो मानसिक तौर पर फिट नहीं. अपना सही-ग़लत तय करने के क़ाबिल नहीं. अपनी संपत्ति को मैनेज़ करने लायक मानसिक स्थिति में नहीं. ऐसे लोगों की देखभाल के लिए अदालत एक अभिभावक नियुक्त करती है. इस व्यवस्था को कन्ज़रवेटरशिप कहा जाता है.

ब्रिटनी के पिता जेमी स्पीयर्स. (तस्वीर: एपी)
ब्रिटनी के पिता जेमी स्पीयर्स. (तस्वीर: एपी)

कोर्ट ने जेमी स्पीयर्स की याचिका स्वीकार कर ली. ब्रिटनी और उनकी ज़ायदाद का कंट्रोल उनके पिता जेमी को सौंप दिया गया. जेमी, ब्रिटनी के कन्ज़रवेटर हो गए. ये व्यवस्था पिछले 12 साल से चली आ रही है. क्या ब्रिटनी ने कभी इसका विरोध किया? 2008 में कन्ज़रवेटरशिप स्थापित किए जाने के कुछ महीने बाद की बात है. ब्रिटनी पर MTV की एक डॉक्यूमेंट्री आई थी. नाम था- ब्रिटनी: फॉर दी रिकॉर्ड. इसमें ब्रिटनी ने कहा था-

मैं अभी जिस तरह से नियंत्रित रखी गई हूं, अगर ऐसा ना होता, अगर इतने सारे वकील, डॉक्टर और बाकी लोग हर दिन मुझपर नज़र ना रखते, अगर ये सब ना हो रहा होता, तो मैं बहुत आज़ाद महसूस करती.

इस बयान के बाद ब्रिटनी ने इस मसले पर चुप्पी लगा ली. इन 12 सालों में वो इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलीं. ब्रिटनी भले ख़ामोश हों, मगर कोई था जो लगातार उनके लिए आवाज़ उठा रहा था. किसकी आवाज़ थी ये? ये आवाज़ें ब्रिटनी के फ़ैन्स की थीं. वो सालों से ब्रिटनी को इस कंट्रोल से निकालने के लिए संघर्ष रहे हैं. उनके अभियान का नाम है- फ्री ब्रिटनी कैंपेन.

क्या लगता है, कितने फ़ैन्स शामिल होंगे इस कैंपेन में?

जवाब है, लाखों लोग. ये जगह-जगह प्रदर्शन करते हैं. सोशल मीडिया पर मुहिम चलाते हैं. लीगल एक्सपर्ट्स से सपोर्ट लेते हैं. कई प्रशंसक तो इतने प्रतिबद्ध हैं कि उनके लिए कैंपेन का काम पार्ट-टाइम जॉब हो गया है. ऐसी नौकरी, जिसमें पैसे नहीं मिलते. बल्कि प्रशंसक अपनी जेब से पैसा ख़र्च करके आयोजन करवाते हैं. अपने पैसों से प्लेन टिकट्स ख़रीदकर दूर-दराज़ के शहरों में आयोजित कैंपेन प्रोग्राम में हिस्सा लेते हैं. इन्होंने ब्रिटनी की कथित रिहाई को अपने जीवन का ध्येय बना लिया है. आप इंटरनेट पर सर्च कीजिएगा. ब्रिटनी फ़ैन्स के ऐसे हज़ारों ग्रुप्स मिल जाएंगे आपको.

फ्री ब्रिटनी कैंपेन के तहत लोग ब्रिटनी की कथित रिहाई की मांग करते हैं. (तस्वीर: एएफपी)
फ्री ब्रिटनी कैंपेन के तहत लोग ब्रिटनी की कथित रिहाई की मांग करते हैं. (तस्वीर: एएफपी)

हम ये सब आपको आज क्यों बता रहे हैं?

क्योंकि बरसों से चुप ब्रिटनी आज अपनी चुप्पी तोड़ने वाली हैं. वो कोर्ट के आगे अपना पक्ष रखने वाली हैं. अपने बिज़नस, अपनी संपत्ति और निजी ज़िंदगी पर लगाई गई बंदिशों पर अपनी राय रखने वाली हैं.

कोर्ट ने ब्रिटनी को इतने साल बाद अब क्यों बुलाया? क्योंकि अप्रैल 2021 में ख़ुद ब्रिटनी ने इसकी अपील की थी. अपने वकील के मार्फ़त उन्होंने कोर्ट में अर्ज़ी दी. कहा, वो सीधे अपनी बात रखना चाहती हैं. ब्रिटनी की ओर से ये भी आग्रह किया गया कि ये सुनवाई जल्द-से-जल्द हो. कोर्ट ने अपील मंज़ूर की और सुनवाई के लिए 23 जून की तारीख़ मुकर्रर हुई. इसी वजह से उम्मीद लगाई जा रही है कि शायद ब्रिटनी कोर्ट के आगे कन्ज़रवेटरशिप ख़त्म करने का आग्रह करें.

क्या ये पहली बार है, जब ब्रिटनी कन्ज़रवेटरशिप से रिहाई चाह रही हों?

जवाब है, नहीं. इसकी जानकारी दी है, न्यू यॉर्क टाइम्स ने. NYT ने इस मामले से जुड़े कोर्ट रेकॉर्ड्स हासिल किए. इनसे पता चला कि ब्रिटनी सालों से आज़ाद होना चाह रही थीं. उन्होंने कोर्ट में कहलवाया कि उनकी ज़िंदगी गिरफ़्त में है. प्यार करने और डेट पर जाने जैसे फ़ैसलों में भी उन्हें आज़ादी नहीं. यहां तक कि रसोई की दराज़ों का रंग क्या होगा, ये तय करने का भी उन्हें अधिकार नहीं है. NYT के मुताबिक, 2016 में कोर्ट द्वारा नियुक्त एक जांचकर्ता ने ब्रिटनी से बात करने के बाद अपनी रिपोर्ट में लिखा-

ब्रिटनी का कहना है कि ये व्यवस्था उनके शोषण का औज़ार बन गई है. इसे उनके खिलाफ़ इस्तेमाल किया जा रहा है. उन पर बहुत ज़्यादा कंट्रोल बिठा दिया गया है. दी सिस्टम हैड टू, टू मच कंट्रोल ऑन हर.

जांचकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में आगे लिखा-

ब्रिटनी ने कहा कि ये व्यवस्था जल्द-से-जल्द ख़त्म कर दी जाए. वो अपना फ़ायदा उठाए जाने से तंग आ चुकी हैं. वो काम करती हैं, पैसे कमाती हैं, और उनके इर्द-गिर्द बाकी लोग उन्हीं पैसों पर पलते हैं.

2019 में भी ब्रिटनी ने कोर्ट को संदेश भेजा था. इसमें कहा गया था कि कन्ज़रवेटरशिप के चलते उन्हें मेंटल हेल्थ सेंटर में जबरन रखा गया है. उनसे उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ चीजें करवाई जाती हैं. 2020 में ब्रिटनी के वकील ने अदालत को ये भी बताया था कि वो अपने पिता से बहुत डरती हैं.

आरोप है कि ब्रिटनी के पिता को अपनी बेटी की परवाह नहीं है. असल मुद्दा है, ब्रिटनी की ज़ायदाद. ब्रिटनी के पास तकरीबन 500 करोड़ रुपये की संपत्ति है. कन्ज़रवेटरशिप के चलते, इस संपत्ति से जुड़े फ़ैसलों का कंट्रोल ब्रिटनी के पिता के पास है. वो दावा करते हैं कि उनकी मंशा केवल ब्रिटनी की भलाई है. वो चाहते हैं कि कोई उनकी बेटी का फ़ायदा न उठाए. जेमी के मुताबिक, अगर ब्रिटनी ठीक हों, फिट हों, तो उन्हें कन्ज़रवेटरशिप ख़त्म किए जाने से कोई एतराज़ नहीं है. मगर कई आलोचक इस सफ़ाई को दिखावटी मानते हैं.

रिपोर्ट लिखे जाने तक कोर्ट की कार्रवाई शुरू नहीं हुई थी. इसीलिए हम फिलहाल उनका स्टेटमेंट नहीं जानते. उनकी कन्ज़रवेटरशिप ख़त्म होगी या नहीं, ये भी अभी नहीं पता. हां, इतना ज़रूर है कि फ़ैन्स के चलते अब ये मुद्दा बहुत ज़ोर पकड़ चुका है. सवाल पूछा जा रहा है कि अगर ब्रिटनी को कभी मानसिक परेशानी थी भी, तो क्या कन्ज़रवेटरशिप उसका हल था? क्या मेंटली बीमार इंसान को स्वस्थ होने, सामान्य जीवन जीने का अधिकार नहीं? जाते-जाते एक रेकमेंडेशन देता हूं. NYT ने इसी बरस ब्रिटनी पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है. नाम है- फ्रेमिंग ब्रिटनी स्पीयर्स. आप इसे Hulu पर देख सकते हैं. इसे देखकर आपको समझ आ जाएगा कि ब्रिटनी के साथ जो हुआ, उसका जिम्मेदार कौन है?


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