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56 हजार को पार कर चुके सोने के भाव एकदम से क्यों टूटे?

पिछले कुछ महीने से सोने की कीमत लगातार बढ़ रही थी. लेकिन फिर अचानक से गिरने लगी. सोने में लगातार दो दिन (10 और 11 अगस्त) गिरावट देखने को मिली. इन दो दिनों में सोना 4500 रुपए सस्ता हुआ. भारत में सोना 56,000 को पार कर गया था. बुधवार यानी 12 अगस्त को सोने का कारोबार 52,200 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.

पिछले साल अगस्त में सोना 39 हजार के आसपास था, जो इस साल 56 हजार को पार कर गया था. कोरोना काल में सोने की कीमत इतनी तेजी से क्यों बढ़ी? फिर दो दिन में 4500 रुपए कैसे टूट गई, इसे समझने की कोशिश करते हैं.

लेकिन सबसे पहले ब्रीफ में सोने के मार्केट के बारे में जान लेते हैं. हर चीज की खरीद के लिए एक जगह होती है, जिसे मार्केट कहते हैं. सोना-चांदी का व्यापार दो जगह पर होता है- बुलियन मार्केट और दूसरा होता है सर्राफा बाजार. सर्राफा बाजार जहां हमारे और आपके जैसे आम लोग सोना खरीदते हैं. वहीं सोने के व्यापारी वायदा बाजार में खरीदारी करते हैं. बुलियन मार्केट वही जगह है, जहां सोने-चांदी का व्यापार वायदा बाजार (फ्यूचर मार्केट) के जरिए होता है. इंग्लैंड के लंदन में सबसे बड़ा बुलियन मार्केट है. इसे सोने और चांदी के सौदे के लिए प्राइमरी ग्लोबल मार्केट माना जाता है.

सांकेतिक फोटो
सांकेतिक फोटो

यहां सोने की कीमत तय होती है. दुनिया के सभी देशों की सरकारों के साथ मिलकर तय होता है कि सोने की कीमत क्या होनी चाहिए. भारत में एक नियामक है, जिसे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज कहा जाता है. इसे लोग MCX नाम से भी जानते हैं. यह संगठन भारत के बाजार में सोने की मांग और आपूर्ति के आंकड़े जुटाकर सोने की कीमत तय करता है. इसका को-ऑर्डिनेशन लंदन के बुलियन मार्केट असोसिएशन से भी है.

सोने में एकदम से गिरावट का क्या मतलब है?

‘इंडिया टुडे’ (हिंदी) के एडिटर अंशुमान तिवारी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय और भारतीय, दोनों ही बाजारों में सोने और चांदी में तेज गिरावट आई, जबकि सोने और चांदी में लगातार बढ़ोतरी की संभावना थी. दो दिनों में सोना 4500 रुपए प्रति 10 ग्राम टूटा. चांदी की कीमत 14 से 15 हजार प्रति किलो टूटी. उनका कहना है-

सोना संकट का साथी है. कोरोना के समय बहुत लोगों ने सोने में निवेश किया. सोने में जो निवेश था, उसे बाहर निकलने का रास्ता चाहिए था. सोने-चांदी का बाजार छोटा बाजार है. निवेशकों की संख्या भी छोटी है. चूंकि कीमत 50 हजार से पार चली गई थी, तो कहीं ना कहीं मुनाफा वसूली की संभावना देखी जा रही थी.

सोने को संकट का साथी माना जाता है. कोरोना के समय लोगों ने सोने में खूब निवेश किया.
सोने को संकट का साथी माना जाता है. कोरोना के समय लोगों ने सोने में खूब निवेश किया.

इस मुनाफा वसूली का मौका दिया रूस की वैक्सीन ने. रूस ने दुनिया के सामने वैक्सीन ला दिया. हालांकि इस वैक्सीन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

उन्होंने कहा,

कोरोना को लेकर इतनी ज्यादा आशंका है कि वैक्सीन बनने की खबर आते ही उम्मीद जगी है. उम्मीद जगते ही सोने और चांदी के बाजार में जो गहरा सट्टेबाजी का दबाव बना था, उसे रिलीज करने का चांस मिला. लोगों ने तेजी से मुनाफा वसूली की और वो मुनाफा निकाल लिया, जो पहले से सोने-चांदी में मौजूद थे, इसलिए कीमत तेजी से घटी.

पर सोने की कीमत बढ़ क्यों रही थी?

अंशुमान तिवारी का कहना है,

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में कई अलग-अलग एसेट्स होते हैं, जिनमें लोग निवेश करते हैं. स्टॉक मार्केट, कमोडिटी और अन्य. इन सबका व्यवहार अलग-अलग होता है. इनके भविष्य की खरीद या गिरावट को निर्धारित करने के लिए पीछे खड़ी होती है देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था. अर्थव्यवस्था से इनकी कीमत तय होती है.

दूसरा पहलू ये है कि जो बाजार में पूंजी छोड़ने वाले लोग हैं, वो बाजार में कितना पैसा छोड़ते हैं, वो कितनी पूंजी बनाए रखना चाहते हैं, इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है. कोरोना के बाद पूरी दुनिया में मंदी है. भारत में भी गिरावट की स्थिति चल रही है. माइक्रो इकनॉमी में जब गिरावट होती है, तो उसका असर कंपनियों के नतीजों पर दिखता है. ऐसे में लोग स्टॉक मार्केट की जगह ‘सेफ हैवन’ कहे जाने वाले सोने में निवेश करने लगते हैं. इस समय के हालात को देखते हुए बड़े पैमाने पर सोना-चांदी में निवेश किया गया था. कोविड के कारण बड़े पैमाने पर मंदी के खतरे को देखते हुए लोगों ने अपने निवेश को सोने और चांदी में लगाया. ये प्रत्यक्ष कारण है, जिससे कीमत बढ़ी.

26 Aboveground gold stock

अंशुमान तिवारी का कहना है कि इसके अलावा कुछ तकनीक कारण हैं. उन्होंने कहा,

इस बार बुलियन मार्केट स्टॉक मार्केट के पैरलल चल रहा है, उसने दुनियाभर के निवेशकों को जोखिम में डाल दिया है. आम तौर पर जब स्टॉक मार्केट में बढ़ोतरी होती है, तो सोने-चांदी में बढ़ोतरी नहीं होती. लेकिन इस बार दोनों मार्केट साथ बढ़ रहे थे. इसकी वजह ये है कि स्टॉक की जो प्राइज है, वो अपने लॉन्ग टर्म एवरेज से काफी ऊपर है. यानी स्टॉक मार्केट में निवेश करने वालों को पता है कि इस मंदी में स्टॉक मार्केट का बबल बस्ट होगा. स्टॉक मार्केट की तुलना में सोना एक सस्ता विकल्प है, इसलिए सोने और चांदी में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ.

कोरोना के समय मिला ज्यादा रिटर्न

अंशुमान तिवारी का कहना है कि सोने ने फरवरी से लेकर अब तक करीब 30 प्रतिशत रिटर्न दिया है. आम तौर पर किसी और एसेट्स में देखने को नहीं मिलता. उस हिसाब से देखें, तो सोना 4000 रुपए ही सस्ता हुआ है. जो गिरावट देखने को मिली, ऐसा लगता है कि वो सोने के फिर से अट्रैक्टिव इनवेस्टमेंट बनाएगी. सोने में मंदी का रुख रहने की संभावना नहीं है. तेजी ही देखने को मिल सकती है. सोने में तेजी आने वाले समय में भी देखेने को मिलेगी, लेकिन ये तेजी उतनी नहीं होगी, जितनी हमने पिछले चार-पांच महीनों में देखी है. दुनिया की अर्थव्यवस्था में मंदी और गहराई, तो सोना ऊपर जा सकता है. कुछ एक्सपर्ट दिवाली तक सोने के 70 हजार तक पहुंचने की उम्मीद जता रहे हैं.


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