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फ़ेसबुक ने भड़काऊ पोस्ट लिखने वाले बीजेपी नेताओं के खिलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की?

14 अगस्त 2020. अमरीका के मशहूर अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई. लिखने वाले न्यूली पुर्नेल और जेफ़ हॉर्विट्स. इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि फ़ेसबुक ने कथित रूप से हेट स्पीच देने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसा क्यों? रिपोर्ट ने दावा किया है कि बकौल फ़ेसबुक इंडिया की पॉलिसी हेड अंखी दास, बीजेपी नेताओं के खिलाफ़ ऐक्शन लेने से फ़ेसबुक इंडिया के बिज़नेस पर बुरा असर पड़ सकता है. 

क्या है पूरा मामला?

सबसे पहला नाम तेलंगाना में बीजेपी के विधायक टी राजा सिंह का WSJ के लेख में आता है. लिखा गया है कि उन्होंने अपनी एक फ़ेसबुक पोस्ट में कथित तौर पर दावा किया था कि रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को गोली मार देनी चाहिए. साथ ही, उन्हें देशद्रोही क़रार देने और मस्जिदों को गिरा देने जैसी बातें भी अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में लिखीं. 

भाजपा विधायक टी राजा सिंह

WSJ ने लिखा है कि फ़ेसबुक ने अपनी जांच में राजा सिंह की पोस्ट को आपत्तिजनक और साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाला माना. ये भी पाया कि टी राजा सिंह की फ़ेसबुक पोस्ट से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दंगे भड़क सकते हैं. तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर फ़ेसबुक इस तरह के नफ़रती कंटेंट डालने वालों के खिलाफ जो कार्रवाई करता है, वही कार्रवाई टी राजा सिंह के खिलाफ़ करने के बारे में बात हुई. उन्हें फ़ेसबुक से बैन करने की. लेकिन टी राजा सिंह अभी भी फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐक्टिव हैं. फ़ेसबुक के कुछ पुराने और कुछ मौजूदा कर्मचारियों से बातचीत के आधार पर WSJ ने आरोप लगाया है कि अंखी दास ने फ़ेसबुक के हेट स्पीच रूल को टी राजा सिंह और अन्य तीन “हिंदू राष्ट्रवादी” नेताओं पर लागू करने से इंकार कर दिया. 

फ़ेसबुक इंडिया की पॉलिसी निदेशक अंखी दास

WSJ के लेख में आगे दावा किया गया है कि फ़ेसबुक की ओर से भारत सरकार से लॉबीइंग करने वाली यानी संवाद करने वाली अंखी दास ने कर्मचारियों से कथित तौर पर कहा कि नरेंद्र मोदी की पार्टी के नेताओं के खिलाफ यदि कार्रवाई की जाती है तो फ़ेसबुक के इंडिया में बिज़नेस को नुक़सान होगा.

जिस समय भारत में तबलीग़ी जमात को कथित रूप से कोरोना फैलाने का दोषी कहा जा रहा था, उस समय भाजपा के कुछ नेताओं ने मुस्लिमों पर “कोरोना जिहाद” करने जैसे फ़ेसबुक कमेंट किए थे. और बक़ौल WSJ के लेख, ऐसी पोस्ट लिखने वाले नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. 

इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में अंखी दास ने मोदी की प्रशंसा में एक लेख भी लिखा था. इस लेख में फ़ेसबुक के लाइक वाला थम्ज़ अप का चिन्ह लगा हुआ था. बाद में इसी लेख को नरेंद्र मोदी ने अपनी वेबसाइट और अपने ऐप पर भी शेयर किया था.

अप्रैल 2019 यानी लोकसभा चुनाव के दौरान फ़ेसबुक ने कहा कि उसने पाकिस्तान मिलिट्री और कांग्रेस पार्टी से जुड़े ग़ैरप्रामाणिक पेज डिलीट कर दिए हैं. लेकिन WSJ ने आरोप लगाए हैं कि फ़ेसबुक ने तब भाजपा से जुड़े ऐसे कई सारे पेज भी डिलीट किए थे, लेकिन अंखी दास के कहने पर इन पेजों के डिलीट करने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई. 

भाजपा नेता कपिल मिश्रा

फ़रवरी 2020. भाजपा नेता कपिल मिश्रा मौजपुर चौक पहुंचकर भाषण दे रहे थे. कहा गया कि कपिल मिश्रा के भाषण के बाद ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के. कपिल मिश्रा का ये भाषण फ़ेसबुक पर अपलोड भी किया गया. फ़ेसबुक ने वीडियो तो हटा दिया, लेकिन कपिल मिश्रा का वेरिफ़ाइड फ़ेसबुक अकाउंट बरक़रार रहने दिया. वो भी तब, जब जून 2020 में मार्क ज़ुकरबर्ग ने बिना नाम लेते हुए कपिल मिश्रा के केस का उदाहरण दिया था. और कहा था कि अपने हाथों में क़ानून लेने की बात करना हिंसा भड़काने का परफ़ेक्ट उदाहरण है.

तमाम शिकायतों पर फ़ेसबुक ने क्या कहा?

अंखी पर उठे सवालों का फ़ेसबुक की प्रवक्ता एंडी स्टोन ने जवाब दिया. कहा कि टी राजा सिंह पर कार्रवाई करने से राजनीतिक धड़ों पर दिक़्क़त हो सकती है, ऐसी चिंता अंखी दास ने ज़ाहिर की थी. लेकिन सिर्फ़ अंखी दास की आपत्ति की वजह से ही टी राजा सिंह को फ़ेसबुक पर रहने दिया गया, ऐसा नहीं है. हम अभी भी इस पर विचार कर रहे हैं कि टी राजा सिंह को प्रतिबंधित किया जाए या नहीं. 

WSJ का दावा है कि जब अपनी रिपोर्ट के लिए उन्होंने फ़ेसबुक से संपर्क किया, तो फ़ेसबुक ने टी राजा सिंह के पेज से कई सारी चीज़ें डिलीट कर दीं. साथ ही WSJ ने जब लोकसभा सांसद अनंत कुमार हेगड़े द्वारा “कोरोना जिहाद” पर किए पोस्ट को लेकर फ़ेसबुक से सवाल पूछा, तब ही फ़ेसबुक ने हेगड़े की पोस्ट को डिलीट किया.

विपक्ष को मिला मौक़ा

WSJ की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस को मौक़ा मिल गया. राहुल गांधी ने ट्वीट किया. कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत में फ़ेसबुक और वॉट्सऐप को कंट्रोल कर रहे हैं.  राहुल गांधी ने कहा कि ये फ़ेक न्यूज़ और हेट स्पीच का प्रसार कर रहे हैं, ताकि उन्हें चुनाव में इसका लाभ मिले. ये कहते हुए राहुल ने WSJ का आर्टिकल भी चस्पा कर दिया.

इसके बाद भाजपा नेता और क़ानून व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद सामने आए. उन्होंने राहुल गांधी के ट्वीट का ज़िक्र करते हुए कहा कि जो हारे हुए लोग ख़ुद की पार्टी के लोगों को प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं, वो भाजपा और आरएसएस पर सवाल उठा रहे हैं. फिर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चुनाव के पहले जो फ़ेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका के साथ मिलकर आकड़ों को हथियार बना रही थी, और अब उसी कांग्रेस में हमारे ऊपर सवाल उठाने का बूता आ गया है?

लेकिन रविशंकर प्रसाद जब कांग्रेस पर सवाल खड़े कर रहे थे, तो उस समय वो ये बात शायद भूल रहे थे कि कैम्ब्रिज एनालिटिका की सेवा लेने वालों में बस कांग्रेस ही नहीं, भाजपा भी शामिल थी. और मौजूदा वक़्त में भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल जदयू भी. 

WSJ की रिपोर्ट सामने आने के बाद संसदीय IT कमिटी के प्रमुख और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने कहा है कि वो इस मामले को देखेंगे. उन्होंने ट्वीट किया और कहा,

“सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति इस मुद्दे पर निश्चित रूप से फ़ेसबुक का पक्ष जानने की इच्छा रखती है. और ये भी कि भारत में हेट स्पीच को रोकने के लिए फ़ेसबुक क्या कर सकता है?”

इस मुद्दे पर लोकसभा सांसद और भाजपा नेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में एक लेख लिखा है. कहा है, इस मुद्दे पर वामपंथियों-कांग्रेसियों में फ़ेसबुक को लेकर रोष है, जो ख़ुद वामपंथियों-कांग्रेसियों की तरफ़ झुकी हुई संस्था है. लेकिन इस पूरे मुद्दे पर जो बवाल हुआ है, वो बस इसलिए क्योंकि फ़ेसबुक ने कुछ लोगों के विचारों को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर रहने दिया. राठौड़ ने कहा कि सिंगापुर और अमरीका में फ़ेसबुक को Conservative (फ़ौरी अनुवाद : रूढ़िवादी) विचारधाराओं को रोकने लिए किस तरह सवालों का सामना करना पड़ा है. और भारत में फ़ेसबुक ने वामपंथी व कांग्रेसी विचारों से अलग सभी विचारों को “फ़ेक न्यूज़” का बनावटी लेबल लगाकर फ़िल्टर कर दिया.

अपने लेख में राठौड़ ने भी कैम्ब्रिज एनालिटिका का उदाहरण दिया और कहा कि कैसे इस पूरे मामले को चुपके से दबा दिया गया. 

फ़ेसबुक ने क्या पहले कभी हेट स्पीच को लेकर कार्रवाई की है?

एलेक्स ज़ोंस. अमरीकी रेडियो शो होस्ट करते रहे हैं और दक्षिणपंथी नेता हैं. अमरीका में गोरी चमड़ी वाले लोगों का दबदबा होना चाहिए, ऐसे दावे उनके भाषणों से मिलते रहे हैं. 2018 में उनके ऐसे कई दावों को लेकर सबसे पहले यूट्यूब ने उनके वीडियो पर प्रतिबंध लगाया. फिर फ़ेसबुक ने उनकी कई पोस्ट डिलीट कर दीं, और 30 दिनों तक अकाउंट बंद कर दिया. इसके कुछ दिनों के भीतर ही फ़ेसबुक ने एलेक्स को फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम यूज करने से प्रतिबंधित कर दिया.

लूई फ़र्राखान का भी उदाहरण देखिए. अमरीकी धार्मिक नेता हैं. नेशन एंड इस्लाम नाम के संगठन के मुखिया हैं. उन्होंने यहूदियों की तुलना दीमकों से की थी. सबसे पहले ट्विटर ने उन पर प्रतिबंध लगाया. उसके बाद फ़ेसबुक ने भी उन्हें बैन कर दिया. 

क्या सोशल मीडिया कम्पनियां सरकारों या संगठनों के दबाव में काम करती हैं?

ऐसा कहा जा सकता है. गूगल के उदाहरण से समझें. गूगल ने साल 2006 में चीन में अपनी सर्च इंजन सेवा शुरू की थी. आरोप लगे कि सरकार के दबाव में उसने सर्च रिज़ल्ट बदल डाले. सैन फ़्रांसिस्को क्रॉनिकल में छपी ख़बर के मुताबिक़, चीनी नागरिक जब गूगल पर सर्च करते थे तो उन्हें “फ़्री तिब्बत” और “डिमॉक्रेसी” जैसे शब्द सर्च रिज़ल्ट में नहीं दिखाई देते थे. सर्च में ये लिखा होता था कि कई परिणाम सरकार के कहने पर नहीं दिखाए जा रहे हैं.

अंखी दास ने कहा, हिंसक धमकियां मिल रही हैं

16 अगस्त की रात अंखी दास ने दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज की. कहा कि WSJ में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अंखी दास ने 4 पेज की शिकायत में उन फ़ेसबुक और ट्विटर खातों का पता भी दिया है, जिन पतों से उन्हें धमकियां मिल रही हैं.


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