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कोरोना का खतरनाक संक्रमण कहां जाकर थमेगा?

आज से करीब 100 साल पहले 1918 में एक महामारी दुनिया में फैली थी. स्पेनिश फ्लू नाम से. कहते हैं कि सिर्फ सालभर में उस वक्त दुनिया के एक तिहाई लोग इस महामारी की चपेट में आ गए. यूरोप, अमेरिका, भारत, हर जगह ये महामारी पहुंच गई थी. दुनिया की सबसे जानलेवा महामारियों में स्पेनिश फ्लू को गिना जाता है. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इस महामारी से मरने वालों की दर एक फीसदी से भी कम थी. इसके बावजूद इससे मरने वालों की तादाद आज की दिल्ली के दोगुने से भी ज्यादा थी. यानी करीब 5 करोड़ लोगों की इसमें मौत हुई थी. कहीं-कहीं 10 करोड़ लोगों के मरने का भी आंकड़ा मिलता है. समझने की बात इतनी सी है कि अगर महामारी काबू में ना हो तो मृत्यु दर कम होने के बावजूद भी लाशों का अंबार लग सकता है. और महामारियों के इतिहास से सबक ये मिलता है कि अगर वक्त पर संक्रमण नहीं रोका गया तो फिर मौतों गिनती करने के अलावा कुछ बचता नहीं है. कोरोना भी एक महामारी है. लेकिन अफसोस अब लोगों ने इसे महामारी मानना छोड़ दिया है. और इसी वजह से देश में कोरोना से होने वाली मौतों का ग्राफ एक बार फिर सीधे ऊपर चढ़ने लगा है, पहले से ज़्यादा तेज़ी से.

24 घंटे में 1 लाख से अधिक मामले

जिस तरह संक्रमण के आंकड़ें आ रहे हैं उनसे लगता है कि कोरोना फिर से एक बहुत बड़ी आफत बन रहा है. रविवार को देश में कोरोना के एक लाख 3 हज़ार 558 केस दर्ज हुए हैं. सिर्फ 24 घंटे में इतने नए केस. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. देश में पिछले साल 17 सितंबर में कोरोना के अधिकतम नए मामले दर्ज हुए थे. और ये आंकड़ा था- 97 हज़ार 894. लेकिन अब इससे 6 ह़जार ज्यादा मामले आए हैं. और बात सिर्फ ये पुराना रिकॉर्ड तोड़ने की ही नहीं है. ज़्यादा चिंता की बात संक्रमण की रफ्तार है. पिछले साल संक्रमण के रोज़ाना वाले आंकड़े 20 हज़ार से 97 हज़ार पहुंचने में 76 दिन लगे थे. लेकिन इस बार सिर्फ 25 दिन में केस बढ़कर 20 हज़ार से एक लाख पार चले गए. पिछले साल जब हमारे पास वैक्सीन नहीं थी तब भी इतने तेज़ कोरोना केस नहीं बढ़ रहे थे. संक्रमण की ये ही रफ्तार रही थी, 2 लाख रोज़ाना वाला आंकड़ा भी ज़्यादा दूर नहीं होगा.

हालात कितनी जल्दी खराब हो रहे हैं इसका अंदाजा यूं लगाइए कि फरवरी तक अगर एक हज़ार लोग कोरोना टेस्ट कराते थे, तो उनमें सिर्फ 16 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती थी. अब ये रेट 12 फीसदी तक पहुंच गया है. यानी हज़ार लोगों का कोरोना टेस्ट हो तो 120 तक पॉजिटिव मिल रहे हैं. ये रफ्तार भी बहुत तेज़ी से बढ़ रही है. जब पिछले सितंबर में देश में सबसे ज्यादा कोरोना मरीज थे, तब भी सिर्फ पॉजिटिव आने वालों की दर 9 फीसदी ही थी.

संक्रमण की इस दूसरी लहर में बस फर्क इतना है कि सिर्फ कुछ राज्यों में ज़्यादा संक्रमण फैल रहा है. रविवार को जितने मामले आए उनमें से करीब 55 फीसदी अकेले महाराष्ट्र ने जोड़े. महाराष्ट्र में कल 24 घंटे में कोरोना के 57 हज़ार 74 केस आए. दूसरे नंबर पर है छत्तीसगढ़. छत्तीसगढ़ में 5 हज़ार 250 केस दर्ज हुए हैं. तीसरे नंबर पर कर्नाटक है. यहां 4 हज़ार 553 केस दर्ज हुए हैं. इन तीन राज्यों के साथ अगर पंजाब और केरल का नाम भी जोड़ दें तो कुल नए मामलों का 75 फीसदी हिस्सा हो जाएगा. और इन पांच राज्यों के साथ दिल्ली, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश को भी जोड़ दें तो 8 राज्यों से ही 82 फीसदी नए मामले आ रहे हैं.

दिल्ली और केरल में भी लगातार बढ़ रहे मामले

अब आप ये सोच रहे हैं कि कि चिंता की बात सिर्फ इन आठ राज्यों में ही है, तो ऐसा भी नहीं है. अगर आपके राज्य का नाम इन 8 में नहीं है, तो कुछ और राज्यों के नाम भी हैं जहां कोरोना ने सिर उठाना शुरू कर दिया है. इन आठ के अलावा 4 राज्यों में कोरोना के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है. यानी चिंता देश के 12 राज्यों से है. एक बार फिर इनके नाम देख लेते हैं. – महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, कर्नाटक, दिल्ली, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केरल.

सरकारें भी और वैज्ञानिक भी ये मान रहे हैं कि जैसे हालात महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पैदा हो गए हैं उसका जवाब सिर्फ वैक्सीन नहीं हो सकता. संक्रमण काबू करने का तरीका पिछले साल वाला ही होगा. यानी लॉकडाउन. और इसलिए महाराष्ट्र ने आंशिक लॉकडाउन लगा दिया है. महाराष्ट्र में धारा 144 लगा दी गई है. सुबह 7 बजे से रात 8 बजे के बीच कहीं भी 5 लोगों से ज्यादा के इकट्ठे होने पर रोक है. रात में किसी के बिना इजाज़त या बिना वाजिब वजह के सार्वजनिक जगहों पर भी पाबंदी है. शनिवार और रविवार को भी सार्वजनिक जगहों पर ना जाने वाला नियम लागू रहेगा. 30 अप्रैल तक ये नियम लागू रहेंगे. ऐसी ही बंदिशें कई और राज्यों में भी लागू की गई हैं.

जब लॉकडाउन होता है, तो क्या होता है, बाज़ार, फैक्ट्रियां, काम-धंधे बंद होते हैं. और इनके बंद होने से बात फिर मज़दूरों के पलायन पर पहुंच जाती है. पिछले साल जब सब कुछ बंद था, तो हमने मज़दूरों को हज़ारों मील पैदल जाते देखा था. जब कोरोना के हालात ठीक हो गए थे, तो ये मज़दूर गांव से अपने धंधे पर आए थे. अब एक बार फिर महाराष्ट्र में लॉकडाउन के बाद मज़दूर यूपी-बिहार में अपने गांवों की तरफ निकल पड़े हैं. हालांकि इस बार बस और ट्रेन चल रही हैं, तो पैदल जाने की नौबत नहीं है. इसमें दिक्कत वाली बात ये है कि महाराष्ट्र से जो लोग बाहर जा रहे हैं, अगर उनकी सही से जांच या उन्हें क्वारेंटीन नहीं किया गया, तो बाकी राज्यों के गांव-देहात तक महाराष्ट्र से कोरोना संक्रमण जा सकता है. और फिर चुनौती और बड़ी हो जाएगी.

एकाएक क्यों बढ़ रहे मामले?

इस नए संक्रमण को लेकर कई तरह के डर हैं, कई सवाल हैं. एक सवाल ये है कि जब पिछले साल के सितंबर महीने में हम कोरोना संक्रमण के पीक से गुज़र चुके हैं, तो अब मामले तेज़ी से क्यों बढ़ने लगे हैं? सितंबर वाले पीक के बाद वैज्ञानिक कहने लगे थे कि अब शहरों में संक्रमण कम ही होगा क्योंकि बड़े स्तर पर लोगों में इम्यूनिटी डेवलप हो चुकी है. सीरो सर्वे के आंकड़ों के आधार पर ये जानकारी आई थी कि कई शहरों में तो 50 फीसदी तक लोगों में एंटीबॉडिज़ बन गई हैं. पूरे देश के लिहाज से ये आंकड़ा 20 फीसदी का था. सीरो-सर्वे के आधार पर ये बात कही जा रही थी कि पुणे-मुंबई जैसे बड़े शहरों मे अब कोरोना उस स्तर तक नहीं फैलगा. लेकिन ये बात गलत साबित हो रही है. अब ऐसे शहरों में भी कोरोना फैल रहा है और वैज्ञानिक इस पर कुछ साफ कहने की स्थिति में भी नहीं है.

कोरोना की पहले वेव झेलने के बाद हालांकि अब हम स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर पहले से बेहतर स्थिति में हैं. लेकिन अगर ये रफ्तार ना रुकी तो हमारे अस्पताल, बेड्स, आईसीयू सब कम पड़ जाएंगे. देश में अब कुल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 7 लाख 41 हज़ार 830 हो गई है. यानी देश में अब तक आए कुल कोरोना मरीज़ों का 5.89 फीसदी एक्टिव केस हैं. कुल एक्टिव मामलों के 58 फीसदी अकेले महाराष्ट्र में हैं. और इसलिए अब महाराष्ट्र से वो तस्वीरें आने लगी हैं, जहां अस्पतालों में कहीं बेड की कमी की वजह से एक बेड पर ही दो- दो मरीजों को सुलाया जाता है, तो कहीं मरीज़ की मौत हो जा रही है.

देश की राजधानी दिल्ली में भी लगातार बढ़ते कोरोना मामलों के बीच प्लाज़्मा की डिमांड बढ़ रही है. जबकि प्लाज़्मा दान करने वालों की संख्या कम पड़ रही है. दिल्ली में कोरोना के मामलों की आंकड़ा 4 हज़ार को पार कर गया है. हालांकि दिल्ली अभी देश के महाराष्ट्र जैसे राज्यों से बेहतर स्थिति में है.

लोग लापरवाही क्यों कर रहे?

हमें मालूम है कि इन आंकड़ों के बावजूद लोग कोरोना को अब गंभीरता से नहीं ले रहे. शायद उसकी वजह कम मृत्यु दर भी हो. पिछले 24 घंटे में देश में 478 लोगों की मौत हुई. इनमें से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मौतें 222 हुई. इसके बाद दूसरे नंबर 51 मौतें पंजाब में हुई.

मौतों का ये आंकड़ा या मृत्यु दर अभी कम ज़रूर है, लेकिन एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये तेज़ी से बढ़ सकती है. मृत्यु दर कम इसलिए क्योंकि अभी जवानों में ज्यादा कोरोना फैल रहा है. अगर इनसे ये परिवार के और लोगों में फैलता हो तो मृत्यु दर बढ़ सकती है.

अब आखिर में बात आती है कि कोरोना इतने तेज़ फैल क्यों रहा है? हमारी लापरवाही की वजह से. कोरोना को गंभीरता से ना लेने की लापरवाही. कोविड एपरोप्रिएट बिहेवियर ना रखने की लापरवाही. कोरोना का ये संक्रमण रोकना हमारे हाथ में हैं. हमें ये समझना चाहिए कि अभी मौत के आंकड़े खबरों में दिखते हैं, लेकिन किसी दिन इनमें एक नंबर हमारे घर से भी हो सकता है. इसलिए हमें वो दिन नहीं आने देना है. सरकार क्या कर रही है या चुनाव में भीड़ उमड़ रही है, या कौन क्या कह रहा है, इन बातों में ज्यादा उलझने से अच्छा है हम अपना ख्याल खुद रखें. अब तभी कोरोना काबू में हो सकता है.


वीडियो- कोरोना के बढ़ते केसेज और लॉकडाउन की आहट महंगाई के बारे में क्या संकेत देती है?

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