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झारखंड: JPSC की परीक्षा में लगातार झोल हो रहे, स्टूडेंट्स 5 साल से परेशान

22 अप्रैल 2020. जेपीएसी यानी झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया. ये नोटिफिकेशन छठी जेपीएससी यानी संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2016 का फाइनल रिजल्ट था. छठी जेपीएससी की ये विवादित भर्ती प्रक्रिया पिछले पांच साल से चल रही थी. विवादित इसलिए कि प्री का एग्जाम तीन बार जारी किया गया. इसके बावजूद अभी भी कोर्ट में मामला लंबित है. जब ये रिजल्ट जारी हुआ तो कैंडिडेट्स को उम्मीद थी कि इस बार कोई गड़बड़ी नहीं हुई होगी. क्योंकि साफ-सुथरे जेपीएससी का वादा करने वाले हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बन चुके थे. लेकिन 27 अप्रैल 2020 को जब मुख्य परीक्षा में शामिल कैंडिडेट्स की  मार्कशीट जारी हुई तो फाइनल रिजल्ट में भी गड़बड़ियों की एक लंबी फेहरिस्त सामने आ गई. 

पहली गड़बड़ी 

कट ऑफ से कम नंबर पाने वाले को पास कर दिया गया. जेपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट में अभ्यर्थी महेंद्र कुमार महतो कट ऑफ से एक नंबर कम लाने के बावजूद सफल घोषित कर दिए गए. महेंद्र बैकवर्ड कैटेगरी-I (BC-I) के अंतर्गत आते हैं. जिसका कट ऑफ 594 नंबर तय किया गया था. बाद में जब इस पर हल्ला मचा तो आयोग ने इसे मिस प्रिंट बताते हुए कट ऑफ को 593 कर दिया. 

महेंद्र कुमार महतो का रिजल्ट. (स्रोत- सोशल मीडिया)
महेंद्र कुमार महतो का रिजल्ट. (स्रोत- सोशल मीडिया)

दूसरी गड़बड़ी 

कट ऑफ के बराबर या ज्यादा नंबर पाने वाले फेल हो गए. दीपक कुमार दुबे को 609 नंबर लाने के बावजूद सेलेक्ट नहीं किया गया. जबकि जनरल कैटेगरी का कट ऑफ 600 अंक है. इसी तरह जनरल कैटेगरी में ही आने वाले फैसल अल सईद 600 नंबर लाने के बावजूद सफल घोषित नहीं किए गए. यानी फाइनल रिजल्ट में कट ऑफ के बराबर और ज्यादा नंबर लाने के बावजूद इन्हें सेलेक्ट नहीं किया गया है.

तीसरी गड़बड़ी 

जेपीएससी के सिलेबस के मुताबिक मुख्य परीक्षा में 6 पेपर होंगे. कुल पूर्णांक 1050 अंकों का होगा. पहले पेपर में सामान्य हिन्दी और सामान्य अंग्रेजी के 50-50 अंकों के दो क्वेश्चन पेपर होंगे. सिलेबस में साफ-साफ लिखा है कि पहला पेपर क्वॉलिफाइंग होगा. इसमें कुल 100 में से कम से कम 30 नंबर लाना अनिवार्य होगा. छठीं जेपीएससी से पहले भी ये इसी तरह होता आया था. लेकिन छठीं जेपीएससी के फाइनल रिजल्ट में पेपर-I के नंबर भी जोड़े गए हैं. जबकि इस बदलाव के बारे में न तो नोटिफिकेशन जारी करते समय कुछ बताया गया और न ही एग्जाम के समय. ऐसे में अभ्यर्थियों का आरोप है कि मनमाने तरीके से किए गए इस बदलाव की वजह से हजारों अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है. क्योंकि अभी तक इस पेपर की तैयारी क्वॉलिफाई कर लेने के हिसाब से ही की जाती थी. 

Jpsc 6th का नोटिफिकेशन. जिसके सिलेबस में पेपर-I के क्वालिफाइंग होने की बात लिखी है.
Jpsc 6th का नोटिफिकेशन. जिसके सिलेबस में पेपर-I के क्वालिफाइंग होने की बात लिखी है.

कैंडिडेट अजय चौधरी कहते हैं,  

2 अप्रैल 2013 को वी एस दुबे कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर  जेपीएससी ने ये फैसला किया था कि मुख्य परीक्षा का प्रथम प्रश्न पत्र क्वालिफाइंग रहेगा और इसके मार्क्स मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़े जाएंगे. यूपीएससी, बीपीएससी और दूसरे स्टेट सर्विस कमीशन भी क्वालिफाइंग मार्क्स को फाइनल मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ते हैं. इसके बावजूद जेपीएससी ने बिना कोई जानकारी दिए मुख्य परीक्षा के स्ट्रक्चर में बदलाव किया है.  

चौथी गड़बड़ी

अभ्यर्थियों का आरोप है कि रिजर्व्ड कैटेगरी के वो कैंडिडेट जो फाइनल मेरिट लिस्ट में 600 या उससे ज्यादा नंबर पाकर अनरिजर्व्ड कैटेगरी में सेलेक्ट हुए उन्हें उनकी प्राथमिकता वाली सर्विस नहीं दी गई है. यानी कि ज्यादा नंबर लाने के बावजूद कैंडिडेट्स को मनपसंद सर्विस नहीं मिली है. 584 नंबर पाने वाले एक कैंडिडेट (SC) को प्रशासनिक सेवा के लिए सेलेक्ट किया गया है जबकि 626 नंबर पाने वाले कैंडिडेट (SC) को (जो अनरिजर्व्ड कैटेगरी में सेलेक्ट किया गया है) वित्त सेवा दिया गया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि ये सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन की अवहेलना है. 

ऊपर JPSC 6th का रिजल्ट जिसमें 594 नंबर कट ऑफ जारी किया गया था. नीचे बाद में जारी किया गया शुद्धि पत्र जिसमें कट ऑफ 593 कर दिया गया.
ऊपर JPSC 6th का रिजल्ट जिसमें 594 नंबर कट ऑफ जारी किया गया था. नीचे बाद में जारी किया गया शुद्धि पत्र जिसमें कट ऑफ 593 कर दिया गया.

रिजल्ट में धांधली के अभ्यर्थियों के आरोपों को लेकर हमने बात की जेपीएससी के परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार से. क्वालिफाइंग मार्क्स जोड़े जाने को सही बताते हुए ज्ञानेंद्र कुमार कहते हैं,

सरकार की ओर से परीक्षा का जो स्वरूप निर्धारित किया गया है उसमें कुल लिखित परीक्षा के लिए 1050 अंक निर्धारित है. उसमें पेपर-I भी सम्मिलित है. छठीं जेपीएससी के नोटिफिकेशन में ये कहीं नहीं लिखा था कि पेपर-I के नंबर जोड़े नहीं जाएंगे. इससे पहले के जो नोटिफिकेशन होते थे उसमें ये स्पष्ट लिखा होता था कि इसके नंबर नहीं जोड़े जाएंगे. 

इस बदलाव की जानकारी क्यों नहीं दी गई? इस सवाल पर ज्ञानेंद्र कुमार कहते हैं कि ये नोटिफिकेशन काफी पहले जारी किया गया था और उस वक्त वे कमीशन में नहीं थे. लेकिन रिजल्ट नोटिफिकेशन के नियमों ही आधार पर जारी किया गया है.

609 नंबर पाने वाले दीपक के न चुने जाने के सवाल पर ज्ञानेंद्र कुमार कहते हैं

जब तक उनका नंबर आया तब तक केवल झारखंड प्लानिंग सर्विस की ही सीट बची हुई थी. और झारखंड प्लानिंग सर्विस में सब्जेक्ट का बार है. जैसे ग्रेजुएशन में आपका मैथ कॉमर्स आदि होगा तभी आपका सेलेक्शन होगा. उन्होंने इन सब्जेक्ट से ग्रेजुएशन नहीं किया था तो उनको छोड़कर नीचे वाले कैंडिडेट को सेलेक्ट किया गया. 

प्रॉयरिटी वाइज सर्विस न मिलने के आरोप पर भी ज्ञानेंद्र कुमार नियम न होने की बात कहते हैं, 

इसके संबंध में सरकार की कोई स्पष्ट नियमावली नहीं है. UPSC वगैरह में आप देखेंगे कि उसमें स्पष्ट नियमावली होती है लेकिन हमारे यहां झारखंड में ऐसी कोई नियमावली नहीं है. 

जेपीएससी के रिजल्ट में जिस चीज को धांधली के सबसे बड़े प्रमाण के रूप में दिखाया जा रहा है, उसे ज्ञानेंद्र कुमार टाइपिंग मिस्टेक बताते हैं. कट ऑफ मार्क्स से नीचे होने के बावजूद सेलेक्ट किए गए कैंडिडेट के सवाल पर ज्ञानेंद्र कहते हैं,

कट ऑफ मार्क्स 593 ही था. टाइपिंग एरर के चलते वो 594 हो गया था. जिसे बाद में शुद्धि पत्र जारी कर के सही कर दिया गया था. 

2016 में जारी किया गया JPSC 6th का नोटिफिकेशन
2016 में जारी किया गया JPSC 6th का नोटिफिकेशन

5 साल से चल रही भर्ती प्रक्रिया

ये तो हो गई फाइनल रिजल्ट में हुई गड़बड़ियों की बात. जेपीएससी की छठी भर्ती परीक्षा में हर कदम पर इतनी गड़बड़ी हुई हैं कि 2015 में जिस भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था वो लगभग 5 साल में भी पूरी नहीं हो पाई है. इसकी वजह भी जान लीजिए- 

# 2015 में पहली बार छठीं जेपीएससी के लिए नोटिफिकेशन निकाला गया. अक्टूबर 2016 में इस नोटिफिकेशन को वापस ले लिया गया और 326 पदों के लिए नया नोटिफिकेशन जारी किया गया.

# दिसंबर 2016 में प्री एग्जाम आयोजित किया गया और 23 फरवरी 2017 को पहली बार इसका रिजल्ट घोषित किया गया. इस रिजल्ट में 5138 कैंडिडेट्स को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया.

# इस रिजल्ट में BC-II कैटेगरी के कई ऐसे स्टूडेंट्स थे जो जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स से ज्यादा नंबर लाने के बावजूद फेल हो गए थे. आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कैंडिडेट्स और विपक्ष ने इस रिजल्ट का विरोध किया. मामला कोर्ट तक पहुंचा. 

# कोर्ट के आदेश के बाद 11 अगस्त 2017 को दूसरी बार प्री एग्जाम का रिजल्ट घोषित किया गया. इसमें BC-I और BC-II कैटेगरी के 965 और उम्मीदवार सफल घोषित किए गए. 

 # छठीं जेपीएससी के नोटिफिकेशन में स्पष्ट लिखा था कि कैटेगरीवाइज रिक्तियों के आधार पर 15 गुना कैंडिडेट्स को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया जाएगा.   लेकिन दूसरे रिजल्ट ने मामला सुलझाने की बजाय और उलझा दिया था. 6103 वाले रिजल्ट में जनरल, एससी, एसटी का रिजल्ट तो पहले की तरह 15 गुना ही रह जाता है लेकिन BC-I का 39 गुना और BC-II का 261 गुना तक पहुंच जाता है. 

# इस रिजल्ट का भी सड़क से लेकर विधानसभा तक भारी विरोध होता है. तब विपक्ष में रही JMM और कांग्रेस लगातार तीन विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर देती हैं. जिसके बाद सरकार इस रिजल्ट को भी रद करने का फैसला करती है. 

# 6 अगस्त 2018 को तीसरी बार प्री एग्जाम का रिजल्ट घोषित किया जाता है. इस बार 34634 कैंडिडेट्स को सफल घोषित किया जाता है. इस रिजल्ट के आधार पर 28 जनवरी से 1 फरवरी 2019 तक मुख्य परीक्षा आयोजित की जाती है. 

# इसी बीच तीसरे रिजल्ट (34634) को भी झारखंड हाईकोर्ट में चैलेंज किया जाता है. जहां हाईकोर्ट की डबल बेंच इस रिजल्ट को रद कर देती है और 6103 कैंडिडेट्स के आधार पर मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी करने का आदेश देती है. बाद में एक दूसरे कैंडिडेट द्वारा 6103 रिजल्ट को चुनौती दी जाती है जिस पर अभी भी फैसला आना बाकी है. 

# मेन्स देने वाले कुछ कैंडिडेट्स ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि, खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते.

# 15 फरवरी 2020 को 6103 रिजल्ट के आधार पर मुख्य परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया. 24 फरवरी से 6 मार्च तक इंटरव्यू आयोजित किया जाता है. जिसके बाद 22 अप्रैल को फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया गया. 

रिजल्ट घोषित होते ही एक बार फिर से इसका विरोध शुरू हो गया है. भाजपा के शासन काल में जेपीएससी की छठी भर्ती को लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी रघुबर सरकार पर खूब हमलावर रही है. झामुमो और सहयोगी दलों ने विधानसभा चुनाव में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था. पांच साल के कार्यकाल में एक भी JPSC भर्ती पूरी न कराने को लेकर हेमंत सोरेन लगातार रघुबर दास की सरकार को कठघरे में खड़ा करते रहे थे. लेकिन अब उनकी सरकार में घोषित हुए रिजल्ट में तमाम गड़बड़ी सामने आ रही है. जिसे लेकर अभ्यर्थी लगातार उनसे सवाल कर रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आ रहा है. लॉकडाउन की वजह से घरों में बंद कैंडिडेट्स सोशल मीडिया पर कमीशन पर धांधली और हेमंत सोरेन सरकार पर वादाखिलाफी करने का आरोप लगा रहे हैं. 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल करते हुए अजय चौधरी कहते हैं,

जिस 6103 रिजल्ट के विरोध में JMM ने तीन दिन विधानसभा नहीं चलने दी थी. आज उसी रिजल्ट के आधार पर फाइनल रिजल्ट कैसे घोषित करा सकती है? 

जब मामला हाईकोर्ट में लंबित है तो फिर किस हड़बड़ी में मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी किया गया? 

हेमंत सोरेन स्वयं कई बार JPSC में धोखाधड़ी और घोटाले की बात कह चुके हैं. ऐसे में सरकार बनने के बाद बिना कोई जांच कराए किसके दबाव में रिजल्ट घोषित कर रहे हैं? 

 

शुरू से लेकर अब तक देखें तो छठी जेपीएससी में बहुत सारी गड़बड़ियां हुईं हैं. आयोग के द्वारा भी और सरकार की तरफ से भी. यही वजह रही कि बार-बार ये भर्ती प्रक्रिया कोर्ट में पहुचंती रही और पांच साल बाद भी इस पर सवालिया निशान लग रहे हैं. सत्ताधारी JMM के विधायक ही इस परीक्षा को रद करने की मांग कर रहे हैं.  विपक्ष में रहते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार JPSC की सफाई की बात करते रहे हैं. अब जब वे सत्ता में हैं तो उनके सामने अपनी कथनी को कर दिखाने की चुनौती है.


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