Submit your post

Follow Us

विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को क्यों आई राजा महेंद्र प्रताप सिंह की याद?

अलीगढ़. इस शहर के नाम के साथ जुड़ा है अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी AMU का नाम. अलीगढ़ जिस सूबे में पड़ता है, माने यूपी, वो खड़ा है विधानसभा चुनाव की दहलीज़ पर. इसीलिए इस बात का महत्व बढ़ जाता है कि AMU के लिए राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने ज़मीन दान की थी. आज प्रधानमंत्री मोदी ने अलीगढ़ पहुंचकर राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का शिलान्यास कर दिया.

चुनाव के करीब ये सब घटता देख इस बात पर ध्यान जाए बिना नहीं रहता कि राजा महेंद्र प्रताप जाट समाज से आते थे. वही जाट समाज, जो किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा से नाराज़ बताया जा रहा है. आखिर क्या वजह है कि यूपी में कार्यकाल के खात्मे से पहले सरकार को महेंद्र प्रताप की विरासत सहेजने की याद आई. और क्या बात सिर्फ एक यूनिवर्सिटी के शिलान्यास की ही है?

प्रधानमंत्री मोदी आज यूपी के दौरे पर थे. अलीगढ़ में पीएम ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया. इसके अलावा अलीगढ़ में प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर के मॉडल की प्रदर्शनी में शामिल हुए. गौर करिएगा डिफेंस कॉरिडोर का शिलान्यास नहीं हुआ, सिर्फ मॉडल की प्रदर्शन थी.

पीएम मोदी का कहना था कि राजा महेंद्र प्रताप जैसे आज़ादी के नायकों से देश को परिचित नहीं कराया गया. ये सही बात है कि राजा महेंद्र प्रताप का ज्यादा ज़िक्र नहीं मिलता है. पिछले तीन-चार साल में ही उनके नाम की ज्यादा चर्चा हो रही है. तो पहले राजा महेंद्र प्रताप से थोड़ा परिचय हम बढ़ा लेते हैं. फिर मौजूदा राजनीति में उनके नाम के मायनों पर बात करेंगे.

Raja Mahendra Pratap
राजा महेंद्र प्रताप सिंह. (फाइल फोटो- India Today)

अंग्रेज़ों के दौर में उत्तर प्रदेश के हाथरस में मुरसान नाम की रियासत हुआ करती थी. रियासत की निशानियों के तौर पर खंडहर की शक्ल में कुछ महल हाथरस में आज भी हैं. तो मुरसान में 1 दिसंबर 1986 में घनश्याम सिंह के घर तीसरा बेटा हुआ. महेंद्र प्रताप नाम रखा गया. उस वक्त मुरसान रियासत के राजा थे हरनारायण सिंह. उनके कोई बेटा नहीं था. तो महेंद्र प्रताप को गोद ले लिया. इस तरह से महेंद्र प्रताप बन गए राजकुमार और आगे चलकर मुरसान यानी हाथरस के राजा हुए.

महेंद्र प्रताप ने कॉलेज की पढ़ाई की अलीगढ़ के मोहम्मद एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज से. यानी आज का अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी. तो पढ़ाई लिखाई के बाद राजा महेंद्र प्रताप सिंह राजकाज के बजाय आज़ादी के आंदोलन की तरफ निकल पड़े. आपको पता ही 20वीं सदी के शुरू में देश में स्वशासन की मांग ज़ोर पकड़ने लगी थी. अंग्रेज़ी हुकूमत का विरोध हो रहा था.

तो 1906 में राजा महेंद्र प्रताप ने कांग्रेस के कलकता अधिवेशन में हिस्सा लिया और फिर पूरी तरह से ब्रितानी हुकूमत को उखाड़ फेंकने में जुट गए. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जो काम सुभाष चंद्र बोस ने किया, लगभग वैसी ही लाइन पर पहले विश्व युद्ध के दौरान राजा महेंद्र प्रताप चले. वो अंग्रेज़ों को भारत से खदड़ने के लिए बाहरी मुल्कों से मदद मांग रहे थे.

अफगानिस्तान जाकर उन्होंने 1915 में निर्वासन में भारत की सरकार बनाने का ऐलान कर दिया था. अफगानिस्तान के अलावा जर्मनी और रूस जाकर भी अंग्रेज़ों के खिलाफ मोर्चाबंदी की कोशिश की. रूस जाकर बाल्शेविक क्रांति के नेता लेनिन से मिले. भारत की आज़ादी के लिए मदद मांगी. तो इस तरह से आज़ादी के पहले तक वो ज्यादातर विदेश में ही रहे.

1946 में भारत लौटे. और देश की आज़ादी के बाद वो चुनावी राजनीति में उतर आए. 1957 में देश के दूसरे आम चुनाव में मथुरा लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा. तब जनसंघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी भी उनके सामने मैदान में थे. राजा महेंद्र प्रताप चुनाव जीते और संसद पहुंचे. उनके राजनीतिक विचारधारा के बारे में कहा जाता है कि मार्क्सवाद के समर्थक थे. और दक्षिणपंथी राजनीति के तो बिल्कुल विरोधी.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (सर सैयद अहमद खान ने इस  यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी)
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (सर सैयद अहमद खान ने इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी)

राजा महेंद्र प्रताप का शिक्षा पर खास ज़ोर रहा. 1909 में उन्होंने प्रेम महाविद्यालय वृंदावन में खुलवाया. 1929 में उन्होंने AMU के लिए 3 एकड़ ज़मीन 90 साल के लिए लीज़ पर दी थी. इसी तथ्य को पकड़कर बीजेपी महेंद्र प्रताप के नाम नई राजनीति शुरू करती है. इसकी शुरुआत हुई 2014 में. केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद. तब अलीगढ़ में बीजेपी नेताओं ने ऐलान किया था कि वो AMU में राजा महेंद्र प्रताप की जयंती मनाएंगे.

विवाद बढ़ा तो उस वक्त के वायस चांसलर ज़मीरुद्दीन शाह ने महेंद्र प्रताप की जयंती पर सेमीनार कराने का ऐलान कर दिया. इसके बाद AMU में जयंती मनाने पर अड़े बीजेपी नेता तो शांत हो गए, लेकिन दूसरा पक्ष नाराज़ हो गया. यूनिवर्सिटी के छात्र और टीचर संगठनों ने वायस चांसलर का विरोध शुरू कर दिया. वाइस चासंलर पर आरोप लगाया कि वो बीजेपी नेताओं को खुश करने के लिए सेमीनार करवा रहे हैं.

इसके बाद भी विवाद चलते रहे. बीच बीच में मांग ये भी उठी कि AMU का नाम बदलकर राजा महेंद्र प्रताप पर करना चाहिए. वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के वो मैसेज भी वायरल हुए कि देखिए राजा महेंद्र प्रताप की AMU में तस्वीर तक नहीं लगने दी है, उनका कितना अपमान हो रहा है. खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कहा कि AMU में एक भी शिलापट्ट का नाम राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर नहीं हैं.

तो पहले ये स्थापित किया गया कि AMU राजा महेंद्र प्रताप के योगदान का सम्मान नहीं करती है. और फिर उनको सम्मान देने के नाम पर यूनिवर्सिटी बनाने का ऐलान हुआ. अक्टूबर 2019 में अलीगढ़ की रैली में योगी आदित्यनाथ ने यूनिवर्सिटी बनाने का ऐलान कर दिया था. अब चुनाव से चंद महीने पहले इस यूनिवर्सिटी को भी बिटविन द लाइंस पढ़ा जा रहा है. जैसा कि हमने शुरू में आपको बताया, राजा महेंद्र प्रताप जाट समुदाय से थे. अभी पश्चिमी यूपी में बीजेपी को जाटों को खुश करने की सबसे ज्यादा दरकार है.

पश्चिमी यूपी की जाट पॉलिटिक्स क्या है

पश्चिम यूपी के 12 ज़िलों में करीब 17 फीसदी वोट जाट समुदाय के हैं. बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस ये ज़िले जाट बेल्ट में गिने जाते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट वोट बैंक में बीजेपी का कोई खास दखल नहीं था. 2013 में मुफ्फरनगर में हिंदू-मुस्लिम का दंगा हुआ. और उसके बाद 2014 में लोकसभा का चुनाव.

इस चुनाव में पश्चिम यूपी में बीजेपी की एक तरफा जीत हुई. पश्चिम यूपी में जाटों की पार्टी माने जानी वाली RLD हाशिए पर चली गई. और बीजेपी का ग्राफ बढ़ता गया. फायदा विधानसभा चुनाव में भी हुआ. 2012 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की जाट बहुल 76 सीटों में से बीजेपी के हिस्से में आई सिर्फ 12 सीटें. लेकिन 2017 में ज्यादातर सीटें बीजेपी की तरफ आई. 66 सीटें मिली थी. सीएसडीएस के सर्वे मुताबिक 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जाटों के सिर्फ 7 फीसदी वोट मिले थे. फिर 2014 में ये नंबर 77 पर पहुंचा. और 2019 के लोकसभा चुनाव में 91 फीसदी जाट वोट बीजेपी को गए.

Aligarh
बीजेपी के इस कदम से क्या उसे जाट वोट मिलेंगे? (फोटो- PTI)

बीजेपी का ये जाट समीकरण अब जाकर बिगड़ गया है. पश्चिमी यूपी के जाट ज्यादतर किसान हैं. राकेश टिकैत की अगुवाई वाले किसान आंदोलन को जाटों का अच्छा समर्थन भी मिल रहा है. बीजेपी के पास पश्चिमी यूपी में कोई कद्दावर जाट नेता नहीं है. पश्चिमी यूपी के बड़े जाट नेता के तौर पर चौधरी चरण सिंह को देखा जाता है. लेकिन उनकी विरासत पर आरएलडी की राजनीति चल रही है. इसलिए प्रतीकों वाली राजनीति में बीजेपी अपना आइकन स्थापित करने की कोशिश कर रही है. ये भी माना जा रहा है कि राजा महेंद्र प्रताप के सहारे बीजेपी जाट और मुस्लिम वाले डिवाइड को बढ़ाना चाहती है.

अब राजनीति की इतनी बात हो गई है तो आखिर में यूनिवर्सिटी के बारे में भी थोड़ी सी जानकारी बढ़ा लीजिए. अलीगढ़ की कोल तहसील के लोढ़ा और मुसईपुर गांवों में यूनिवर्सिटी के लिए जमीन प्रस्तावित की गई है. जिला प्रशासन इसके लिए 37 एकड़ सरकारी भूमि दे रहा है. इसके अलावा 10 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा. बजट 101 करोड़ का रखा गया दो साल के भीतर जनवरी 2023 तक ये परियोजना करने का लक्ष्य रखा गया. यूनिवर्सिटी बनने के बाद इसमें अलीगढ़, हाथरस, कासगंज व एटा के लगभग 395 कॉलेज शामिल होंगे.

अन्य बड़ी खबरें-

1. तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को एक साल से ज़्यादा हो चुका है. और दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे धरने को 10 महीने. किसान दिल्ली में नहीं घुस पाए तो सिंघू बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर, गाज़ीपुर बॉर्डर और दूसरी जगहों पर जम गए. अब तक किसान एक मौसम ठंड, एक मौसम गर्मी और एक मौसम बारिश को ठेंगा दिखा चुके हैं. चूंकि किसानों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करके सरकार अपने हाथ खराब करना नहीं चाहती, किसानों को बॉर्डर से नहीं हटाया गया. लेकिन इसने आंदोलन और आंदोलन स्थल के आसपास की ज़िंदगी को एक ही जगह बांधकर रख दिया. अब सरकार ने एक और दिशा से एक प्रयास किया है. किसान आंदोलन के संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर दिए हैं. आयोग ने लिखा है,

”ऐसे आरोप हैं कि किसानों के धरने के चलते औद्योगिक इकाइयों पर बुरा असर पड़ा है और 9 हज़ार के करीब सूक्ष्म, मध्यम और बड़े उद्योग प्रभावित हैं. बुरा असर कथित रूप से यातायात पर भी पड़ा है और सड़कों पर जाम के चलते यात्री, मरीज़, विकलांग और वृद्ध नागरिकों को तकलीफ पहुंच रही है. लोगों को अपनी मंज़िल तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ रहा है, क्योंकि सड़क पर बैरियर लगे हैं. ये भी आरोप है कि आंदोलनकारी किसानों द्वारा कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है और आसपास के लोगों को अपने घरों से निकलने नहीं दिया जा रहा.”

आयोग ने चारों सूबों के पुलिस महानिदेशकों से अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने को कहा है. इसमें महानिदेशकों को अपने द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी. आयोग ने इंस्टीट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ से कहा है कि आंदोलन के चले उद्योगिक गतिविधियों पर पड़े नकारात्मक असर का अध्ययन करे. इसी तरह नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से अंदोलन स्थल पर कोविड प्रोटोकॉल के पालन के संबंध में जानकारी मांगी गई है.

झज्जर के डीएम से धरना स्थल पर हुए कथित गैंग रेप पर भी जानकारी मांगी गई है. दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से कहा गया है कि आंदोलन के कारण धरनास्थल के आसपास बसने वाले लोगों के जीवन और रोज़गार पर पड़े असर पर रिपोर्ट दे.

2. ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सुष्मिता देव असम में कांग्रेस से सबसे कद्दावर बांग्ला चेहरों में से एक थीं. लेकिन लंबे समय तक अपनी पार्टी से नाराज़ रहीं और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं. अब तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित कर दिया है. तृणमूल कांग्रेस सुष्मिता को एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है. तो राज्यसभा के लिए उनका नामांकन बताता है कि त्रिपुरा और असम की बराक घाटी में बसने वाले बांग्ला भाषियों को लेकर तृणमूल गंभीर दिखना चाहती है.

सुष्मिता सिलचर से सांसद रही हैं. उनके पिता संतोष मोहन देव यहीं से पांच बार सांसद रहे. दो बार त्रिपुरा वेस्ट सीट से सांसद रहे. तो सुष्मिता का नामांकन बराक घाटी और त्रिपुरा में तृणमूल की तैयारियों का हिस्सा है. चलते चलते एक बात का ज़िक्र और कर दें. सुष्मिता देव के ज़िक्र के साथ उनके पिता संतोष मोहन देव का ज़िक्र हमेशा होता है. क्योंकि वो एक राष्ट्रीय पार्टी के कद्दावर नेता थे. एक ज़िक्र कई दफे छूट जाता है कि सुष्मिता की मां बिथिका देव भी सिलचर से विधायक रही हैं.

3. तृणमूल कांग्रेस के राज वाले पश्चिम बंगाल में भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह के उत्तर 24 परगना स्थित घर पर तीन देसी बम दागे गए थे. 13 सितंबर को NIA ने इस मामले में जांच का ज़िम्मा ले लिया. लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते और अर्जुन सिंह के घर के पास फिर से देसी बम का धमाका हो गया. पिछली बार बम अर्जुन सिंह के घर के गेट पर दगे थे.

इस बार धमाके की आवाज़ घर से तकरीबन 200 मीटर दूर से आई. अर्जुन सिंह बैरकपुर से सांसद भी हैं. उन्होंने कहा कि ये धमाका उनपर दबाव बनाने के लिए किए गए हैं, क्योंकि अब जांच NIA कर रही है. आज हुए धमाके के संबंध में पश्चिम बंगाल पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है. 8 सितंबर और आज हुए धमाकों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई.

पश्चिम बंगाल में तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है. कोलकाता की भवानीपुर सीट से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लड़ रही हैं. तीनों सीटों के लिए 30 सितंबर को वोट डाले जाएंगे. भवानीपुर के अलावा जंगीपुर और शमशेरगंज में भी उपचुनाव होगा. 31 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को एक चिट्ठी भेजकर 61 भाजपा नेताओं की सुरक्षा बढ़ाने को कहा था. इस लिस्ट में अर्जुन सिंह का नाम भी था.

4. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने थोक महंगाई दर के आंकड़े जारी किए. बता दें कि जिन आंकड़ों का ऐलान होता है, वो पिछले महीने के होते हैं. तो आज जब सरकार ने कहा कि थोक महंगाई दर 11.39 फीसदी है, तो ये आंकड़े अगस्त के हैं. जुलाई के लिए थोक महंगाई दर 11.16 फीसदी थी. मतलब थोक महंगाई बढ़ी है. वैसे जून में ये दर 12.07 फीसदी थी.

5. एथलेटिक्स में भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाले सूबेदार नीरज चोपड़ा के कोच उवे हॉन की बर्खास्तगी हो गई है. जैवलिन थ्रो माने भाला फेंक की दुनिया में उवे हॉन का नाम बड़े अदब से लिया जाता है. वो पृथ्वी पर अकेले शख्स हैं, जिन्होंने 100 मीटर के पार भाला फेंका है. 2018 में नीरज चोपड़ा ने जब एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड जीते, तब उवे हॉन ही उन्हें ट्रेन कर रहे थे.

नीरज ने इन दोनों मेडल्स का क्रेडिट हॉन को दिया था. हॉन टोक्यो ओलंपिक्स के दौरान भी नेशनल जैवलिन कोच की भूमिका में थे. 13 सितंबर को एथलैटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अदील सुमारीवाला ने बताया कि हॉन का प्रदर्शन अच्छा नहीं है. उनकी जगह दो नए कोच नियुक्त किए जाएंगे. वैसे टोक्यो एथलैटिक्स में नीरज को कोच करने वाले क्लॉस बार्तोनीत्ज़ अपने पद पर बने रहेंगे.

हॉन की रवानगी का अंदेशा तभी से था, जब इस साल जून में उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एथलैटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा ओलंपिक तैयारियों की आलोचना की थी. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक हॉन ने अखबार से ये भी कहा था कि एथलीट्स के लिए जब सप्लिमेंट्स की मांग की जाती है, तब सही चीज़ उपलब्ध नहीं कराई जाती. हॉन ने तब ये भी कहा था कि उन्हें और क्लॉस बार्तोनीत्ज़ को ज़ोर डालकर कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया गया था. हॉन ने इसके लिए ब्लैकमेल शब्द का इस्तेमाल किया था.


वीडियो- UP चुनाव: राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी का क्रेडिट छात्र नेताओं ने किसे दे दिया?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.