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फेसबुक को ठेंगा क्यों दिखा रही हैं दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां?

फेसबुक और इसके मालिक मार्क जकरबर्ग इन दिनों परेशानी में हैं. कंपनी के खिलाफ कैंपेन चल रहा है. आरोप है कि फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म पर नफरत परोसता है और चांदी कूटता है. इसके बाद कई दिग्गज कंपनियों ने फेसबुक को विज्ञापन देना बंद कर दिया. अब विज्ञापन बंद करने वाली कंपनियों की लिस्ट ‘शुक्ल पक्ष के चांद’ की तरह बढ़ती ही जा रही है. इस वजह से फेसबुक पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तो इन कंपनियों से पैसा नहीं आएगा. दूसरा, इनके विरोध के कारण फेसबुक का भरोसा गिरता जा रहा है. तो आज इसी बारे में जानेंगे कि पूरा मामला क्या है और क्यों फेसबुक का फेस उतरा हुआ है?

माजरा क्या है

पिछले सप्ताह अमेरिका में एक ट्रेंड चला. टि्वटर पर. ट्रेंड था #StopHateForProfit. इसे चलाने वालों में कुछ संगठन थे. इनके नाम हैं- एंटी डिफेमेशन लीग, नेशनल एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ कलर्ड पीपल और कलर ऑफ चेंज. इनकी शिकायत फेसबुक की कंटेंट पॉलिसी को लेकर है. कंटेंट यानी फेसबुक पर दिखने वाले वीडियो, आर्टिकल और पोस्ट. इन संगठनों का आरोप है कि फेसबुक अपने यहां पर लोगों में नफरत फैलाने वाले, भेदभाव करने वाले, लिंग, रंग और नस्ल के आधार पर नीचा दिखाने वाले कंटेंट पर सख्ती नहीं करता है. वह बस पैसा कमाने पर ध्यान देता है.

यह कैंपेन चला अमेरिका में एक ब्लैक व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद. अमेरिका के शहर मिनियापोलिस में एक श्वेत पुलिसवाले ने फ्लॉयड की गर्दन को घुटने से दबाया. और तब तक दबाया, जब तक कि फ्लॉयड की मौत नहीं हो गई. मामला सामने आने के बाद विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए. समानता के हक के लिए Black Lives Matter नाम से अभियान चला. विरोध प्रदर्शन हुए और अभी भी हो रहे हैं.

George Floyd
जॉर्ज फ़्लॉयड और और उनके ऊपर चढ़े डेरेक चॉविन (फोटो: एपी)

इसके बाद दुनियाभर की कंपनियों ने चमड़ी के रंग और नस्ल को लेकर भेदभाव करने वाले अपने प्रॉडक्ट में बदलाव किया है. कई कंपनियों ने गोरा करने का दावा करने वाले उत्पादों को बंद कर दिया. जैसे भारत में हिंदुस्तान यूनीलीवर ने फेयर एंड लवली क्रीम से ‘फेयर’ हटाने का फैसला किया है.

इस मामले में फेसबुक भी बैकफुट पर है. उस पर आरोप है कि उसने हिंसा फैलाने वाले कंटेंट और वेबसाइटों के आर्टिकलों पर कार्रवाई नहीं की. साथ ही पुरातनपंथी विचारधारा वाली वेबसाइटों को बढ़ावा दिया. ऐसे में #StopHateForProfit कैंपेन चलाकर संगठनों ने बड़ी कंपनियों से कहा कि वे जुलाई से फेसबुक पर विज्ञापन देना बंद करें, जिससे कि फेसबुक नीति में बदलाव करने पर विचार करे.

क्या चाहते हैं #StopHateForProfit अभियान चलाने वाले

# नफरत और हिंसा फैलाने वाले कंटेंट पर रोक लगे.

# दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से पैसा कमाना बंद किया जाए.

# रंग, नस्ल और लिंग के आधार पर भेदभाव झेलने वालों की मदद के लिए अलग नीति बनाई जाए.

# नफरत फैलाने वाले मामलों को लेकर पारदर्शिता बरती जाए. बताया जाए कि इस तरह कब और कितने मामले सामने आए.

# विज्ञापन देने वाली कंपनियों को यह बताया जाए कि कितनी बार उनका विज्ञापन ऐसे कंटेंट के साथ दिखाया गया, जिसे बाद में हटाना पड़ा हो. ऐसा होने पर विज्ञापन कंपनियों को रिफंड भी दिया जाए.

इसके बाद क्या हुआ

#StopHateForProfit बढ़ने के बाद कई कंपनियों ने फेसबुक का बॉयकॉट शुरू किया. अब तक करीब 160 विज्ञापनदाता फेसबुक से नाता तोड़ चुके हैं. इनमें छोटी और बड़ी, दोनों तरह की कंपनियां हैं. 26 जून को रोजमर्रा का सामान बनाने वाली कंपनी यूनीलीवर ने फेसबुक के बॉयकॉट का ऐलान किया. कहा कि वह साल 2020 के आखिर तक फेसबुक को दिए जाने वाले अपने विज्ञापनों पर रोक लगा रही है. वह फेसबुक के साथ ही इंस्टाग्राम और टि्वटर पर भी विज्ञापन नहीं देगी.

कंपनी ने बयान जारी कर कहा,

इस समय इन प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देते रहना लोगों और समाज के लिए सही नहीं होगा.

यूनीलीवर के बॉयकॉट के ऐलान के बाद शेयर मार्केट में फेसबुक की वैल्यू धड़ाम हो गई. क्योंकि यूनीलीवर हर साल फेसबुक पर विज्ञापन के लिए करीब 1,890 करोड़ रुपये खर्च करता है. ऐसे में फेसबुक की मोटी कमाई छीन गई. इससे निवेशकों में फेसबुक से भरोसा डिगा. 26 जून को फेसबुक के शेयरों में आठ प्रतिशत की गिरावट देखी गई. फेसबुक के एक शेयर की कीमत 216.08 डॉलर यानी करीब 16,422 रुपये ही रह गई. साथ ही कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन भी 4.32 लाख करोड़ रुपये घट गया. इस वजह से मार्क जकरबर्ग की संपत्ति में भी गिरावट आई. दुनिया के सबसे रईस लोगों की लिस्ट में वे चौथे से पांचवे नंबर पर आ गए.

कौन-कौन सी कंपनियों फेसबुक को दिखाया ठेंगा

अभी तक ज्यादातर अमेरिकी कंपनियों ने ही फेसबुक पर विज्ञापन देने से इनकार किया है. यूनीलीवर के बाद होंडा, वेरिजोन, मोजिला ने भी फेसबुक के विज्ञापनों पर रोक लगा दी है. जिन कंपनियों ने फेसबुक से नाता तोड़ा है, उनमें से कुछ बड़े नाम हैं-

यूनीलीवर– रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान बनाने वाली दुनिया की बड़ी कंपनियों में से एक. डव, पियर्स, वैसलीन, पेप्सोडेंट, लक्स, लाइफबॉय, लेक्मे जैसे प्रॉडक्ट इसी कंपनी के हैं.

वेरिजोन– अमेरिकी टेलीकॉम कंपनी.

हर्शेज– चॉकलेट कंपनी.

होंडा– कार और बाइक बनाने वाली कंपनी.

द नॉर्थ फेस– कपड़े, जूते बनाने वाली कंपनी.

बेन एंड जेरीज– आइसक्रीम कंपनी.

कोका कोला– सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी.

स्टारबक्स– कॉफी रेस्तरां की चैन.

पेप्सिको– सॉफ्टड्रिंक कंपनी.

लिवाय स्ट्रॉस– जींस और कपड़े बनाने वाली कंपनी.

स्टारबक्स और यूनीलीवर जैसी कुछ कंपनियों ने तो फेसबुक के साथ ही टि्वटर को भी विज्ञापन देने में ‘वणक्कम’ कर दिया है.

करीब 160 कंपनियों ने फेसबुक को विज्ञापन न देने का फैसला किया है.
करीब 160 कंपनियों ने फेसबुक को विज्ञापन न देने का फैसला किया है.

जकरबर्ग भैया ने क्या कहा

बड़ी-बड़ी कंपनियों के पीछे हटने से फेसबुक पर दबाव बढ़ा है. उसने कंटेंट को लेकर नई नीति बनाने का ऐलान भी किया है. फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने 26 जून को विज्ञापन देने वालों को मनाने के लिए नई नीतियों का ऐलान किया. उदाहरण के तौर पर, फेसबुक अब से इस तरह के विज्ञापनों पर रोक लगाएगा, जो किसी विशेष रंग, वर्ण, धार्मिक संबंध, सेक्शुअल पसंद या शरणार्थियों को दूसरों के लिए खतरा बताता हो. साथ ही फेसबुक की नीतियों का उल्लंघन करने वाले राजनीतिक कंटेंट पर भी चेतावनी जारी करेगा.  चुनाव से 72 घंटे पहले चुनावी हालात के फर्जी दावों वाली सामग्री को भी हटाया जाएगा.

लेकिन फेसबुक की नीतियों के खिलाफ अभियान चला रहे लोग इन कदमों को नाकाफी मानते हैं. उनका कहना है कि अभियान के तहत जो मांगें की जा रही हैं, उनके सामने तो यह कदम बहुत कम हैं. फेसबुक को अगर यह लगता है कि उसने जो किया है, वह काफी है, तो यह उसकी गलती होगी. फेसबुक के इक्के-दुक्के बदलावों से कुछ नहीं होने वाला. हर बार फेसबुक माफी मांगकर बच जाता है. वह नफरत और हिंसा फैलाने के खिलाफ कभी बड़े कदम नहीं उठाता. लेकिन बस बहुत हुआ, अब फेसबुक को बड़ी और विस्तृत नीति बनानी होगी.

कितनी कमाई करता है फेसबुक

रॉयटर्स की खबर के अनुसार, फेसबुक हर साल 5.29 लाख करोड़ रुपये के विज्ञापन बेचता है. इसमें से एक-चौथाई हिस्सा यानी 1.30 लाख करोड़ रुपये के विज्ञापन यूनीलीवर जैसी बड़ी कंपनियों के होते हैं. साथ ही हजारों छोटी-छोटी कंपनियों से भी वह कमाई करता है. सीएनबीसी के अनुसार, फेसबुक के पास करीब 80 लाख विज्ञापनदाता है. यह दिखाता है कि फेसबुक की कितनी कमाई है.

अब सबकी नजरें फेसबुक पर है. देखना होगा कि वह अपनी कंटेंट पॉलिसी में क्या बदलाव करता है.


Video: प्रोटेस्ट के दौरान घुटने पर बैठ कर विरोध करने का इतिहास जान लीजिए

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