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कोरोना काल में लोगों की मदद करने वालों पर क्यों हो रहे केस दर्ज?

कोरोना वायरस के कारण देश में त्राहिमाम के हालात हैं. ऐसे में जहां कुछ लोग जमाखोरी और कालाबाजारी कर रहे हैं, ओवर प्राइसिंग कर रहे हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो दूसरों की मदद कर रहे हैं. ‘दी लल्लनटॉप’ के खास शो ‘उम्मीद की बात’ में ऐसे लोगों को बारे में आपको बताया जाता है. लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें दूसरों की मदद करना काफी भारी पड़ा है. ऐसे लोगों की फेहरिस्त में ताजा नाम है पप्पू यादव का. तो आज इस खबर में हम आपको ऐसे ही लोगों के बारे में बताने वाले हैं जिन पर FIR हो गई, क्या इनका कसूर केवल ये कि इन्होंने इस कोरोना काल में लोगों की मदद की थी?

पूर्व सांसद पप्पू यादव पर केस

शुरुआत पप्पू यादव से. पप्पू यादव को सुपौल जिले की वीरपुर जेल में रखा गया है. उन्हें 32 साल पुराने एक मुकदमे में 11 मई को गिरफ्तार कर लिया गया. पप्पू यादव, जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और पूर्व सांसद हैं. मधेपुरा में 1989 में दो युवकों का अपहरण हुआ था. इसी मामले में पप्पू यादव अभियुक्त थे. 22 मार्च 2021 को कोर्ट ने वारंट जारी किया था. इसी मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई है. लेकिन इससे पहले उन्हें लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. पप्पू यादव और उनके समर्थकों का आरोप है कि राजीव प्रताप रूडी के घर खड़ी एंबुलेंसों का मामला वायरल करने के कारण उन पर कार्रवाई की गई है.

Pappu Yadav
पप्पू यादव, एंबुलेंस का मामला उठाकर चर्चा में आ गए थे. फोटो- आजतक

पप्पू यादव ने 7 मई को बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी के घर खड़ी एंबुलेंस के वीडियो वायरल किए. रूडी ने इन एबुलेंसों के लिए ड्राईवर ना होने की बात कही. इस पर पप्पू यादव 40 ड्राइवर ले आए. इस मामले में ना केवल बिहार सरकार पर सवाल उठे, बल्कि बीजेपी पर लोग निशाना साधने लगे. 11 तारीख को पप्पू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया. ये कोई पहली बार नहीं जब पप्पू यादव ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी, इससे पहले भी वे ऐसा करते रहे हैं. बिहार के काफी लोग पप्पू यादव को पसंद करते हैं क्योंकि कोरोना के वक्त में उन्होंने लोगों की काफी मदद की है और गिरफ्तार होने तक कर रहे थे.

आप विधायक दिलीप पांडे पर केस

अब बात करते हैं आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडेय की. दिलीप को दिल्ली पुलिस ने समन भेजा है. कहा है कि वो दवाओं का अवैध वितरण कर रहे हैं. 11 मई को दिल्ली पुलिस ने उनसे बात की और मामले की जानकारी ली. दिलीप पांडेय का कहना है कि केंद्र सरकार के इशारे पर उन्हें परेशान किया जा रहा है क्योंकि वो महामारी के वक्त में लोगों की मदद कर रहे हैं. वहीं इस मामले में पुलिस का कहना है कि वो दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दवाओं के अवैध वितरण में शामिल लोगों की जांच कर रहे हैं.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता चिन्मॉय बिस्वाल ने कहा कि डॉ. दीपक सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में उन राजनेताओं को लेकर याचिका दायर की है जो कोरोना की दवाओं के अवैध वितरण में शामिल हैं. इस पर कोर्ट ने पुलिस को जांच करने को कहा है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक इमरान हुसैन के खिलाफ भी एक याचिका दी गई है जिसमें उन पर ऑक्सीजन सिलेंडर के वितरण को लेकर आरोप लगाए गए हैं. वहीं इस मामले में दिलीप पांडे और इमरान के समर्थकों का कहना है कि लोगों की मदद करने पर उनके साथ ऐसा किया जा रहा है. दिल्ली में आप नेता दिलीप पांडे काफी सक्रिय हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं.

भोपाल के जावेद पर कार्रवाई

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाले जावेद पर भी पुलिस ने धारा 188 के तहत केस दर्ज किया था. वाकया बताएं उससे पहले जावेद का अपराध जान लीजिए. जावेद ने देखा कि लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं. उसने पत्नी से बात दी. दोनों में सहमति बनी की जो गहने हैं वो बेच दिए जाएं. जावेद ने गहने बेच दिए और उन पैसों से ऑटो में एक ऑक्सीजन सिलेंडर लगवा लिया. इसको रिफिल कराकर जावेद ऐसे लोगों की मदद करने लगे जिनको एंबुलेंस नहीं मिल पा रही थी. जावेद इसके लिए किसी से पैसे नहीं ले रहे थे. हर मरीज की मदद के बाद ऑटो को सैनेटाइज भी कर रहे थे.

Auto Javed Bhopal
भोपाल में जावेद कोरोना मरीजों को मुफ़्त में ऑटो से अस्पताल छोड़ते हैं. ऑटो में ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगा रखा है. (फ़ोटो- ANI)

लेकिन 1 मई शनिवार को पुलिस ने चेकिंग के दौरान उन्हें रोक लिया. पूछा कि कहां और क्यों जा रहे हो. लॉकडाउन का हवाला दिया. इमरजेंसी पास मांगा. जावेद सकपका गए. उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. पुलिस ने धारा 188 में उन पर केस दर्ज कर दिया. अब इसके बाद लोग सोशल मीडिया पर सरकार से सवाल करने लगे, और इस कार्रवाई को गलत बताने लगे. ऐसे में भोपाल पुलिस ने बयान जारी किया और बताया कि केस को खारिज कर दिया है, साथ ही जावेद के सेवा कार्य के लिए उन्हें विशेष पास जारी किया जा रहा है, ताकि वह आराम से लोगों की सेवा कर सके. पुलिस ने कहा कि जावेद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

यूपी के जौनपुर के विक्की पर भी केस

29 अप्रैल. प्राइवेट एंबुलेंस चलाने वाले विक्की अग्रहरि, जौनपुर के जिला अस्पताल में मौजूद थे. उन्होंने देखा कि लोग बिना ऑक्सीजन के तड़प रहे हैं. सांस लेने में लोगों को परेशानी हो रही है. उन्होंने अपनी एंबुलेंस से ऑक्सीजन सिलेंडर बाहर निकाला और लोगों को ऑक्सीजन देने लगे. उन्होंने करीब 30 लोगों को ऑक्सीजन मुहैया कराई. किसी से पैसे भी नहीं लिए. गलती ये हुई कि जो लोग उनकी फोटो ले रहे और वीडियो बना रहे थे, उन लोगों से उन्होंने ऐसा करने के लिए मना नहीं किया. क्योंकि यही फोटो-वीडियो थोड़ी ही देर में वायरल हो गए. अंदर अस्पताल के डॉक्टरों तक भी बात पहुंच गई. और नाराज अस्पताल प्रशासन ने उनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करा दिया.

Jaunpur
जिला अस्पताल प्रांगण में लोगों को ऑक्सीजन देते विक्की (लाल शर्ट में). फोटो- आजतक/राजकुमार सिंह

पुलिस ने महामारी अधिनियम की धारा 3 यानी स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ हिंसा करने या इसके लिए उकसाने, के तहत मामला दर्ज कर लिया. इसके अलावा IPC की धारा 188 (सरकारी आदेश को नहीं मानना) और 269 (संक्रमण फैलाना) भी लगा दी गईं. सीएमएस डॉक्टर अनिल शर्मा ने कहा कि OPD पर्ची काउंटर के पास एक युवक मरीजों को लेटाकर ऑक्सीजन दे रहा था. इसके लिए ना तो वह अधिकृत है और ना ही उसके पास कोई डिग्री है. यह मरीजों की जान से खिलवाड़ करना है. अस्पताल प्रशासन की छवि खराब करने के लिए ऐसा किया गया था. खैर इस मामले में भी पुलिस को सोशल मीडिया में घेरा गया, सवाल किए गए. पुलिस ने विक्की को ना तो गिरफ्तार किया और ना ही उसके खिलाफ कोई और कार्रवाई की.

यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी और उनकी टीम भी कोरोना काल में लोगों की जम कर मदद कर रही है. 12 मई शाम को खबरें आईं कि उनसे भी यूथ कांग्रेस के मुख्यालय पर दिल्ली पुलिस ने पूछताछ की है. हालांकि श्रीनिवास ने बाद में ट्वीट करके बताया कि सबकुछ ठीकठाक है और यह राहत कार्य से जुड़ा मामला नहीं था.


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