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शाबाश सरफ़राज़! तुमने एकदम सही काम किया

***फ्लैशबैक***

सईद अनवर 84 रन पर आउट हो चुका था. आमिर सोहेल क्रीज़ पे डटा हुआ था. ओपेनिंग बॉलर्स को दोनों बैट्समेन ने बारी बारी से धुना थ. ऐसा लग रहा था जैसे कॉलोनी का सबसे छोटा बच्चा इंटर पास महा-काइंया लड़के को गेंद फेंक रहा हो. वेकटेश प्रसाद की गेंद. आमिर सोहेल का स्लैश. गेंद बाउंड्री की ओर ऐसे भागी जैसे वहां लंगर बंट रहा हो. सोहेल फॉलो थ्रू में पिच पर टहलते हुए प्रसाद की तरफ बढ़ा. बल्ला उस ओर दिखाया जिस ओर गेंद गई थी. और उंगिलयों से इशारा करते हुए कहा, “तुझे वहीं मारूंगा *@#$%”.

अगली गेंद. ऑफ स्टम्प पर पड़ी गेंद इस बार हल्की सी छोटी पड़ी थी मगर आमिर सोहेल ने फिर से स्लैश करने की कोशिश की. इस बार गेंद पीछे डंडों पर जा लगी. स्टेडियम चीख बैठा लेकिन एक आवाज़ उससे भी ज़्यादा तेज़ और बुलंद थी. वो आवाज़ अलग ही सुनाई दे रही थी. आमिर वेंकटेश प्रसाद की आवाज़. उस आवाज़ में गुस्सा था, तिरस्कार था और सोहेल को एक हिदायत भी थी.

***आज का दिन***

आमिर सोहेल ने पाकिस्तानी टीवी चैनल पर न जाने क्या सोच कर कह दिया कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सरफ़राज़ को ज़्यादा इतराना नहीं चाहिए. वो अभी ही कप्तान बने हैं. वो ये न समझें कि उन्होंने पाकिस्तान को जिताया है. आमिर सोहेल ने ये बातें श्री लंका और पाकिस्तान के ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच में के बाद कही थीं. उनके हिसाब से मैच मेंकोई बाहरी फैक्टर है जो मैच जिताता है. सरफ़राज़ को बेवजह का ताज पहनाया जा रहा है. पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया ओअर आमिर की इस बात का हल्ला कट गया.

अब हुआ ये है कि आमिर सोहेल ने अपनी बात से पलटी मार ली है. न्यूज़ चैनल्स के लिए ये एकदम वैसा है कि कोई बला की खूबसूरत लड़की फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर उसे कैंसल कर दे. आमिर सोहेल कह रहे हैं कि उन्होंने जो भी कहा वो तब कहा जब पाकिस्तानी कैप्टन सरफ़राज़ ने पाकिस्तान की जीत मियांदाद को डेडीकेट करने से मना कर दिया और साथ ही ये भी कहा कि मियांदाद टीम को बहुत क्रिटिसाइज़ करते हैं.

ये बात समझ में नहीं आई कि कैसे मियांदाद को जीत डेडीकेट न करने से जीता हुआ मैच फ़िक्स्ड हो जाता है. न जाने कैसे मियांदाद को डेडीकेट न करने से सरफ़राज़ घटिया प्लेयर हो जाते हैं.  आमिर सोहेल शायद आज भी वेंकटेश प्रसाद की उस गुड लेंथ पर ऑफ़ स्टम्प के बाहर पड़ी गेंद को भूल नहीं पाए हैं जिसे स्लैश करने का अरमान आज भी ज़िन्दा है. ऊन्हें रवि शास्त्री ने 2011 वर्ल्ड कप मैच के पहले ही कहा था कि दुनिया के किसी भी कोने में हरी पिच पर इंडिया और पाकिस्तान का मैच करा लो, 10 में से 8 बार इंडिया ही जीतेगा. शास्त्री ने ये बात तब कही थी जब आमिर सोहेल पाकिस्तानी स्टूडियो में बैठ इंडिया से हरी पिच की भीख मांग रहे थे. पाकिस्तान की टीम मोहाली की पिच पर 29 रन से हार गई थी.

आज वही आमिर सोहेल पाकिस्तान में बैठ वहीं गंध फैला रहे हैं. कह दिया कि सरफ़राज़ कोई बढ़िया बैट्समैन नहीं हैं. लेकिन वो भूल गए कि एक समय पर मोईन खान को अपना आइडल मानने वाला कराची का सड़क पर क्रिकेट खेलने वाला लड़का पाकिस्तान को पहले अंडर 19 वर्ल्ड कप जिता कर लाया और अब उस चौखट पर खड़ा है जहां अगला कदम चैम्पियंस ट्रॉफी को चूमना होगा.


श्री लंका में अपनी कप्तानी में जब सरफ़राज़ इंडिया के खिलाफ़ टॉस के लिए जा रहा था तो यकीनन उसके पैर कांप रहे होंगे. और उसका जीतने का विश्वास तब ज़रूर डगमगाया होगा जब टीम 109 रन पर ऑल-आउट हो गयी थी. लेकिन उसके दिमाग में था कि इंडिया का रोहित शर्मा, पुजारा और गौरव धीमान जैसों से भरा टॉप ऑर्डर ही हर बार रन बनाता है और एक बार उनकी रेल बना दी तो पूरी टीम ढह जाएगी. उस दिन सरफ़राज़ के लिए तुरुप का इक्का साबित हुआ था जमशेद अहमद. 4 ओवर के अन्दर इडिया के टॉप तीन बल्लेबाज वापस जा चुके थे. अनवर अली के 5 विकेट और इंडिया के टॉप 6 बैट्समेन का मिला-जुला स्कोर था 11 रन. ये सरफ़राज़ की कप्तानी थी.


और वहीं ग्यारह साल बाद जब इंग्लैंड की पिच पर श्री लंका के खिलाफ़ 150 रन पर आधी टीम पवेलियन में जा चुकी थी, सरफ़राज़ अहमद क्रीज़ पर आता है टिक कर खेलता है, अपने सामने 2 बढ़िया बल्लेबाजों को जाते देखता है और फिर टेल-एंडर के साथ 75 रन की पार्टनरशिप करता है और पाकिस्तान को सेमी फाइनल में पहुंचा दिया. आमिर सोहेल को इसमें कोई बड़ी बात नहीं दिखती है. उन्हें ये दोयम दर्जे की बैटिंग लगती है. लगता है आमिर सोहेल को खुश करने के लिए सरफ़राज़ को किसी बॉलर को चौका मार कर ये कहना चाहिए था, “तुझे वहीं मारूंगा *@#$%”.

पाकिस्तान की टीम ने चैम्पियंस ट्रॉफी में अपना पहला मैच जब खेला तो सरफ़राज़ अहमद पहली बार इंडिया के खिलाफ़ कप्तानी कर रहा था. ये सरफ़राज़ के लिए बतौर कप्तान उसके जीवन का सबसे कठिन मैच रहा होगा. उसने इतना प्रेशर शायद ही कभी झेला होगा. और उस मैच में मिली हार के बाद अपनी टीम को संभाले रखना, उसमें वो जज़्बा कायम रखना कि खिलाड़ी जीतने के लिए खेलें और ऐन मौके पर अपनी टीम को जीत दिलाना एक बढ़िया खिलाड़ी और कप्तान की निशानी है. कम से कम आमिर सोहेल से तो लाख बेहतर जो एक चौका मार कर सातवें आसमान पर ऐसे पहुंच गया था कि अगली गेंद पर जब गिरा तो उसकी रीढ़ ही टूट गई.

पाकिस्तान क्रिकेट और इससे जुड़े लोग खुद में कभी भी एक साथ नहीं आ पाए हैं. चाहे बात मिसबाह की हो या यूनिस खान की या शाहिद अफ़रीदी की. आपको रमीज़ राजा और मोहम्मद यूसुफ़ एक टीवी शो में एक दूसरे को चोर और बेशरम और झूठा और मक्कार कहते हुए मिल जाएंगे. जावेद मियांदाद आपको शाहिद अफ़रीदी को नमक हराम कहते हुए मिल जाएंगे. इमरान खान भी किसी से कम्पैटिबल नहीं होते दिखते हैं.  कोई विदेशी कोच टीम को कोच करने को राज़ी नहीं होता दिखता है. पाकिस्तान ने सालों से अपनी ज़मीन पर मैच नहीं खेला है. और यहां एक प्लेयर अपने दम पर टीम को आईसीसी टूर्नामेंट के सेमी-फाइनल में ले जाता है तो एक सीनियर (सिर्फ खेलने के साल के तौर पर) प्लेयर उसे ये कहके उसे नीचे गिराने की कोशिश करते हैं कि सब कुछ किसी ‘बाहरी फैक्टर’ का कमाल है.

पाकिस्तान क्रिकेट के लिए ये शर्मनाक है और उन्हें ज़रुरत है कि वो अपने क्रिकेट को सुधारने से पहले आमिर सोहेल जैसे क्रिकेट ‘एक्सपर्ट्स’ के मुंह पर चिप्पियां लगा दें.


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