Submit your post

Follow Us

प्रशांत भूषण और कोर्ट की अवमानना: या इलाही ये माजरा क्या है?

प्रशांत भूषण, सुप्रीम कोर्ट, अदालत की अवमानना. ये तीन की-वर्ड पिछले कुछ दिन से लगातार चल रहे हैं. जानते हैं कि पूरा मामला क्या है.

विवाद शुरु कहां से हुआ?

प्रशांत भूषण के दो ट्वीट्स से.

पहला ट्वीट । तारीख़- 27 जून, 2020

“भविष्य में इतिहासकार जब भी पीछे मुड़कर देखेंगे तो पाएंगे कि किस तरह पिछले छह साल में देश में लोकतंत्र को ख़त्म किया गया. वो भी बिना घोषित इमरजेंसी के.”

इसी ट्वीट में आगे बढ़ते हुए भूषण ने सुप्रीम कोर्ट और देश के पिछले चार मुख्य न्यायाधीशों पर भी टिप्पणी कर दी.

दूसरा ट्वीट । तारीख़- 29 जून, 2020

एक तस्वीर थी. इसमें सीजेआई एसए बोबडे एक भारी-भरकम स्पोर्ट्स बाइक पर बैठे हैं. ये फोटो पोस्ट करते हुए भूषण ने लिखा-

“सीजेआई 50 लाख की मोटरसाइकिल चला रहे हैं. उन्होंने (सीजेआई ने) न मास्क लगाया है, न हेलमेट.”

इस ट्वीट में भी आगे बढ़ते हुए भूषण ने सीजेआई पर टिप्पणी कर दी और अप्रत्यक्ष रूप से एक पार्टी का नाम भी उनसे जोड़ दिया.

*(हमने दोनों ट्वीट पूरे-पूरे नहीं लिखे हैं. अंश भर लिखे हैं. ट्वीट के वो पार्ट नहीं लिखे हैं, जो अदालत की अवमानना के दायरे में आ गए हैं. और इसीलिए ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स भी नहीं दे रहे हैं.)

अदालत की अवमानना का आरोप

तारीख- 9 जुलाई ।

भूषण के बाइक वाले ट्वीट के आधार पर महक माहेश्वरी नाम के शख़्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई. भूषण पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाया. ये याचिका तो कोर्ट के सामने थी ही. लेकिन भूषण की मुश्किल 21 जुलाई को और बढ़ गई. जब सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र वाले ट्वीट पर स्वत: संज्ञान ले लिया.

22 जुलाई को प्रशांत भूषण और ट्विटर को नोटिस जारी किया गया. ट्विटर इंडिया ने दोनों ट्वीट हटा दिए. प्रशांत भूषण अदालत की अवमानना के आरोपी हुए.

प्रशांत भूषण ने क्या कहा?

तारीख- 23 जुलाई ।

प्रशांत भूषण ने नोटिस का जवाब दाख़िल किया. ये बातें लिखीं..

# “बाइक वाले ट्वीट में मैंने ये ध्यान नहीं दिया कि बाइक चल नहीं रही है. ऐसे में सीजेआई के हेलमेट लगाने का सवाल ही नहीं. मुझे इसका ख़ेद है.” ये भी लिखा कि सीजेआई की आलोचना से सुप्रीम कोर्ट की गरिमा कम नहीं होती.

# “उस ट्वीट में दूसरी बात (भूषण ने लॉकडाउन में कोर्ट बंद रखने पर भी सवाल उठाए थे) मैंने इस वजह से कही थी, क्योंकि महीनों से सुप्रीम कोर्ट का काम ठीक से न हो पाने से मैं व्यथित था.”

# लोकतंत्र वाले ट्वीट पर भूषण ने बड़ी बात लिखी –

“वो महज विचारों की अभिव्यक्ति थी. इसे अप्रिय और कड़वा कहा जा सकता है. लेकिन अदालत की अवमानना नहीं कहा जा सकता.”

कानून के जानकारों ने क्या कहा?

मामले पर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस कुरियन जोसफ ने राय दी कि सुनवाई संवैधानिक बेंच को करनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के 450 से ज़्यादा वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन प्रेसिडेंट को चिट्ठी लिखी –

“भारत के सुप्रीम कोर्ट की महानता में किसी आलोचना से उतनी कमी नहीं आई है, जितनी इस आलोचना पर दी गई उसकी प्रतिक्रिया से आई.”

Curian Joseph
पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसफ.

तमाम कानूनी जानकारों ने सुप्रीम कोर्ट की इस प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए तो कुछ ने समर्थन भी दिखाया. 15 पूर्व जजों समेत 103 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाने वालों की आलोचना की. लिखा-

“सुप्रीम कोर्ट के फैसले की निंदा आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है. हम इस तरह की बयानबाजी से चिंतित हैं.”

अटॉर्नी जनरल (सुप्रीम कोर्ट में सरकार की की तरफ से पक्ष रखने वाले वकील) केके वेणुगोपाल ने भी अदालत के सामने अपनी राय रखी. उन्होंने भूषण का बचाव किया. कहा कि उन्होंने जनहित में तमाम याचिकाएं लगाई हैं. अनुभवी वकील हैं. इस बार माफ़ कर दिया जाए, दोबारा वो ऐसा नहीं करेंगे. प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन ने भी उनकी जनहित याचिकाओं का हवाला दिया. लेकिन ये सभी दलीलें काम नहीं आईंं.

– 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने प्रशांत भूषण को अदालत की अवमानना का दोषी ठहरा दिया.

– 20 अगस्त की तारीख़ तय हुई सज़ा पर बहस के लिए.

सज़ा पर बहस

20 अगस्त को सज़ा पर बहस के दौरान तीन सदस्यीय बेंच ने कहा-

“प्रशांत भूषण करीब 30 साल से वकालत कर रहे हैं. उन्होंने कई अच्छे केस उठाए हैं. उनसे इस तरह की ग़ैर-ज़िम्मेदाराना हरकत की उम्मीद नहीं की जा सकती. उनके स्तर के वकील को मीडिया में, ट्विटर पर कोई बात कहने से पहले उसकी गंभीरता को देखना-समझना चाहिए.”

जमकर बहस हुई. राजीव धवन ने 42 साल पुराने मुगवालकर केस का भी हवाला दिया. इसके बाद अदालत ने भूषण की सज़ा पर फैसला सुरक्षित रखा. साथ ही उन्हें कुछ दिन का समय दिया. ताकि अगर वो चाहें तो माफ़ी मांगकर केस ख़त्म करने की दिशा में बढ़ सकते हैं.

गांधी जी के 103 साल पुराने भाषण का ज़िक्र

लेकिन प्रशांत भूषण ने माफी मांगने से ये कहते हुए इनकार कर दिया कि –

“मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए उम्मीद का अंतिम गढ़ है. अगर मैं इस अदालत के सामने अपने बयान को वापस लेता हूं और माफ़ी की पेशकश करता हूं तो मेरी अंतरात्मा और उस संस्थान की अवमानना होगी, जिसमें मैं सर्वोच्च विश्वास रखता हूं.”

महात्मा गांधी के 103 साल पुराने भाषण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा –

“मैं पूरी विनम्रता से वह दोहराता हूं, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने केस में कहा था- मैं रहम नहीं चाहता. मैं उदारता की अपील भी नहीं करता. मैं यहां हूं ताकि कानूनी रूप से मुझे जो भी सज़ा मिले, उसे खुशी-खुशी मंजूर कर सकूं.”

Gandhi
महात्मा गांधी. स्थान- चंपारण, बिहार. सन- 1917. यहां उन्होंने पहली बार सत्याग्रह किया था. और इसी के बाद जो परिस्थियां बनी थीं, उनमें गांधी जी ने वो भाषण दिया था, जिसका ज़िक्र अब प्रशांत भूषण ने किया.

माफ़ी पर बात अड़ गई

तारीख- 24 अगस्त ।

24 अगस्त को फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर अदालत बैठी. वेणुगोपाल ने कहा कि फूड सिक्योरिटी, मजदूरों , बुनियादी अधिकारों के लिए उनके (भूषण के) पिछले कार्यों को देखते हुए उन्हें सज़ा देना इतना भी ज़रूरी नहीं है. उन्हें चेतावनी देकर भी छोड़ा जा सकता है.

राजीव धवन बोले –

“हम नहीं चाहते कि कोई फैसला आने के बाद कुछ लोग भूषण को शहीद दर्जा देने लगें और कुछ कोर्ट के फैसले की तारीफ में लग जाएं. हम सिर्फ ये चाहते हैं कि ये केस ख़त्म हो, विवाद ख़त्म हो. लॉर्डशिप, जब आप रिटायर होंगे या नहीं भी होंगे, तो तमाम बातें होंगी. बात होगी कि कोर्ट ने फलां मामले में सही फैसला किया, या फलां मामले में नहीं किया. इसे रोका नहीं जा सकता. न्यायालय का तो अस्तित्व ही ज़िम्मेदार आलोचना पर टिका है.”

इस पर आई जस्टिस अरुण मिश्रा की टिप्पणी –

“अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कुछ प्रतिबंध भी हैं, जिन्हें बैलेंस किया जाना होता है. मैंने अपने जूडिशियल करियर में, किसी भी व्यक्ति को अवमानना का दोषी करार नहीं दिया है. लेकिन ये इंस्टीट्यूशन की छवि से जुड़ा मुद्दा है.

फिर माफी मांगने में गलत क्या है? क्या यह बहुत बुरा शब्द है? यह जादुई शब्द है, कई चीजों को ठीक कर सकता है. आपने किसी का दिल दुखाया है तो मरहम भी तो लगाना होगा.”

ख़ैर, 24 अगस्त को सुनवाई में भी प्रशांत भूषण ने माफी नहीं मांगी, जिसके बाद कोर्ट ने सजा पर फैसला सुरक्षित कर लिया. जानकारों का कहना है कि अगर प्रशांत भूषण माफ़ी नहीं मांगते तो कोर्ट की अवमानना अधिनियम की धारा 12 के तहत तय प्रावधान के मुताबिक, छह महीने तक की कैद या दो हजार रुपए तक जुर्माना या फिर दोनों हो सकती है.


मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण के बचाव में क्या कहा?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

विधायक विजय मिश्रा, जिन्हें यूपी पुलिस लाने लगी तो बेटियां बोलीं- गाड़ी नहीं पलटनी चाहिए

चलिए, विधायक जी की कन्नी-काटी जानते हैं.

नेशनल हैंडलूम डे: और ये है चित्र देखो, साड़ी पहचानो वाली क्विज

कभी सोचा नहीं होगा कि लल्लन साड़ियों पर भी क्विज बना सकता है. खेलो औऱ स्कोर करो.

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.