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दुनिया के ताकतवर नेताओं से ऐसी हरकतों की उम्मीद भला कौन करेगा!

दुनियादारी में हम तमाम देशों की राजनीति, छल-कपट, युद्ध, अपराध वगैरह के बारे में तो रोज ही बताते हैं आपको. मगर आज 100वें एपिसोड पर हमने सोचा, कुछ अलग करते हैं. आज आपको बताते हैं दुनिया की पॉलिटिक्स चलाने वाले कद्दावर लोगों से जुड़ा एक अलग सा पहलू. ऐसे कुछ वाकये, जब दुनिया के नामी लीडरान ने दिखाई बचकानी हरकतें. कुछ ऐसी हरकतें, जो सही में बचकानी थीं. कुछ ऐसी, जिनके पीछे मंशा भले कूटनीतिक थी लेकिन वो दिखने में थीं हास्यास्पद. कुछ ऐसी, जो हुईं तो हंसी-मज़ाक में लेकिन भारी पड़ गईं. कुछ ऐसी भी कहानियां हैं, जो सच में प्यारी थीं.

#1

इस लिस्ट में पहला नाम है लिंडन बी जॉनसन का. ये जनाब जॉन एफ कैनेडी के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति थे. 1963 में कैनेडी की हत्या के बाद इन्हें राष्ट्रपति बनाया गया. जॉनसन की एक आदत काफी चर्चित है. कई बार कहीं आते-जाते हुए जब उन्हें ज़ोर से पेशाब आता, तो वो कार से उतरकर सड़क किनारे ही फ़ारिग हो लेते. एक बार जॉनसन यूं ही सड़क किनारे फ़ारिग होने में लगे थे. उनकी सुरक्षा में तैनात सीक्रेट एजेंट नजदीक ही खड़ा था. एकाएक हवा चली. छींटें उड़कर उस सीक्रेट एजेंट के पांव पर गिरने लगीं. उसने जॉनसन से कहा- मिस्टर प्रेज़िडेंट, आप मेरे पांव पर पेशाब गिरा रहे हैं. जवाब में जॉनसन बोले- जानता हूं, ये भी मेरा विशेषाधिकार है.

Lyndon B Johnson
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन (फोटो: एएफपी)

#2

अब आते हैं दूसरे क़िस्से पर. बचपन में आपके साथ कभी ऐसा हुआ है क्या? कि कोई माइक हाथ लग गया हो और आप उसपर मिनटों तक ‘हैलो साउंड चेक हैलो’ बोलते रहे हों. अब सोचिए. एक देश का राष्ट्रपति है. वो एक माइक पर अपनी आवाज़ जांच रहा है. इसी दौरान वो एक बचकानी सी बात बोल जाता है. ये सोचकर कि ये रिकॉर्डिंग बाहर तो जाएगी नहीं. मगर ग़लती से वो रिकॉर्डिंग लीक हो जाती है. और इस लीक के कारण पैदा होता है एक डिप्लोमैटिक संकट.

Ronald Reagan
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन (फोटो: एएफपी)

ये बचकानापन किया था रॉनल्ड रीगन ने. वो 1981 से 1989 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे. अगस्त 1984 की बात है. उन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति हर हफ़्ते रेडियो संदेश दिया करते थे. ऐसे में एक हफ़्ते हुआ क्या कि रेडियो ब्रॉडकास्ट रिकॉर्ड करने से पहले रीगन माइक टेस्टिंग कर रहे थे. टेस्टिंग के दौरान उन्होंने कहा-

मेरे प्यारे अमेरिका वासियो, मुझे आपको बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि पांच मिनट के भीतर हम रूस पर बम गिराना शुरू कर देंगे.

रीगन ने ये लाइन मज़ाक में कही थी. आधिकारिक रेडियो ब्रॉडकास्ट में भी इस पंक्ति को शामिल नहीं किया गया. लेकिन ऐसे मौकों पर कही गई राष्ट्रपति की हर लाइन रेकॉर्ड का हिस्सा होती है. यही रेकॉर्ड हाथ लग गया मीडिया के. न्यू यॉर्क टाइम्स समेत कई अख़बारों ने ये ख़बर छाप भी दी. सोवियत ख़ूब बिफरा इसपर. पूरा रीगन प्रशासन बचाव में आ गया. इस प्रकरण के कारण महीनों से चल रही सोवियत-अमेरिका वार्ता का अगले कुछ दिनों तक बेड़ा गर्क रहा.

Us Bomb Russia
इस कारण सोवियत-अमेरिका वार्ता के बीच मामला बढ़ गया था. (फोटो: न्यू यॉर्क टाइम्स)

#3

लिस्ट में तीसरा वाकया है रूस से. यहां राष्ट्रपति हैं व्लादीमिर पुतिन. उनके बचकानेपन का एक क़िस्सा बड़ा चर्चित है. हुआ ये कि 2007 में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल पहुंची रूसी दौरे पर. यहां पुतिन के घर में दोनों लीडर्स की मीटिंग रखी गई. दोनों एक कमरे में बैठकर बात कर रहे थे कि एकाएक पुतिन का स्टाफ वहां लेकर पहुंचा एक कुत्ता. काले रंग का ये लैब्राडॉर पुतिन का कुत्ता कोनी था.

जैसे ही कोनी कमरे में आया, डर के मारे मर्केल का चेहरा सफ़ेद पड़ गया. क्यों? क्योंकि मर्केल को कुत्तों से बहुत डर लगता है. छुटपन में एक कुत्ते ने उन्हें काट लिया था. उसके बाद से ही मर्केल के मन में कुत्तों का ख़ौफ बैठ गया. मर्केल जब किसी विदेशी दौरे पर जाती हैं, तब उनका स्टाफ मेजबान देश को अडवांस में ही ये चीज बता देता है. जर्मन विदेश विभाग ने रूस को भी ये बताया था. शायद इसीलिए मीटिंग रूम में कुत्ता बुलाकर मर्केल को डराने की ये खुराफ़ात सूझी पुतिन को.

Angela Merkel Putin
2007 में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल रूसी दौरे पर पहुंची थी. (फोटो: एएफपी)

मीटिंग रूम में पहुंचा कोनी मर्केल को सूंघता रहा. डरी हुईं मर्केल हाथ से इशारा करके कोनी को दूर करने की कोशिश करती रहीं. और पुतिन क्या कर रहे थे? वो पास बैठकर मुस्कुरा रहे थे. कुछ मिनटों बाद पुतिन ने जैसे जीभ चिढ़ाते हुए मर्केल से कहा, काटेगा थोड़े न. नाराज़ मर्केल ने ताना दिया- हां, ये तो पत्रकारों को खाता है न. मीटिंग के बाद मर्केल ने मीडिया से कहा-

मैं समझती हूं कि उन्हें ये सब क्यों करना पड़ा. ऐसा करके शायद वो अपनी मर्दानगी साबित करना चाहते थे. उनके पास करने को बस यही बचा है.

#4

लिस्ट का चौथा क़िस्सा है जिम्बॉब्वे से. यहां राष्ट्रपति थे रॉबर्ट मुगाबे. 37 साल सत्ता में रहे. जितने जबराट, उतने ही विवादित. फरवरी 2015 की बात है. मुगाबे एक प्रोग्राम में पहुंचे. मंच पर चढ़कर भाषण देने के बाद वो पोडियम से उतर रहे थे. इसी दौरान उनका पांव लड़खड़ाया और वो गिर गए. आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें सहारा देकर उठाया.

Robert Mugabe Fell Down
जिम्बॉब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे(फोटो: एपी)

ये पूरा वाकया वहां मौजूद कैमरों में कैद हो गया. हो गया, तो हो गया. कोई हंसा तो नहीं था. 90 साल के बुजुर्ग के फिसलने पर कोई मूर्ख ही हंसेगा? लेकिन इसके बाद मुगाबे ने कुछ ऐसा किया कि ख़ुद ही अपनी हंसी उड़वा ली. मुगाबे बोले, मैं तो गिरा ही नहीं था. उनके सूचना मंत्री जोनाथन मोयो बोले, राष्ट्रपति के फिसलने का तो कोई सबूत ही नहीं है. पता चला, मोगाबे सरकार के इस कॉन्फिडेंस की वजह ये थी कि उन्होंने मौके पर मौजूद कई फटॉग्रफर्स से जबरन इस मोमेंट की तस्वीरें डिलीट करवाई थीं. हालांकि सारी फोटो तो नहीं ही डिलीट करवा सके. इसके बाद मुगाबे की बड़ी हंसी उड़ी. ट्विटर पर हैशटैग चल निकला- मुगाबे फॉल्स. लोगों ने इतने मीम बनाए उनके कि पूछिए मत.

Robert Mugabe Fell Down Meme
रॉबर्ट मुगाबे पर खूब मीम बने. (फोटो: ट्विटर)

#5

पांचवें नंबर का क़िस्सा बड़ा मज़ेदार है. इस कहानी में दो लोग हैं. एक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा. दूसरे, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी. ये वाकया है साल 2011 का. उस बरस फ्रांस में G20 सम्मेलन हुआ. ओबामा भी पहुंचे यहां. सम्मेलन में ओबामा और सरकोज़ी की कुर्सियां अगल-बगल थीं. जब भी ब्रेक होता, तो दोनों कुर्सी को पास खिसकाकर आपस में बात करने लगते. ऐसी ही एक बातचीत में दोनों के बीच इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ज़िक्र छिड़ा. सरकोज़ी ने धीमी आवाज़ में ओबामा से कहा-

वो नेतन्याहू तो बड़ा झूठा है. मैं तो बिल्कुल नहीं झेल सकता उसको.

President Obama Nicolas Sarkozy
फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा. (फोटो: एएफपी)

ये सुनकर ओबामा को भी अपना दर्द याद आया. वो बोले-

मेरा सोचिए, मेरा तो आपसे कहीं ज़्यादा साबका पड़ता है उसके साथ.

सरकोज़ी और ओबामा को रत्तीभर इल्म नहीं था कि उनके ब्लेज़र में टंका माइक्रोफोन ऑन रह गया है. इस चूक के कारण उनकी ये प्राइवेट चुगली हेडफोन लगाकर बैठे कुछ फ्रेंच पत्रकारों के कान में पहुंची. उन्होंने जो सुना, छाप दिया. ओबामा और नेतन्याहू में पहले से टेंशन चल रही थी. इस वाकये के बाद नेतन्याहू और खार खाने लगे उनसे.

Benjamin Netanyahu
इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (फोटो: एपी)

#6

लिस्ट की छठी कहानी है यूक्रेन से. यहां के संसद को समझ लीजिए लड़ाई का अखाड़ा. नेताओं का एक-दूसरे को घूंसा दिखाना. मुट्ठियां भींचना. चिल्लमचिल्ली. यहां ये सब आम है. इसी से जुड़ा एक चर्चित वाकया सुनाता हूं आपको. ये बात है 2015 की. यूक्रेन में संसद सत्र चल रहा था. प्रधानमंत्री अरसेनिये यात्सेनयुक अपनी सीट पर खड़े होकर किसी सवाल का जवाब दे रहे थे.

Arseniy Yatsenyuk
यूक्रेन के पूर्व पीएम अरसेनिये यात्सेनयुक (फोटो: एपी)

उनके एक जवाब पर एक विपक्षी सांसद ओलेग बरना को गुस्सा आया. ओलेग के बगल में बैठे एक सांसद का जन्मदिन था उस दिन. कुछ सांसदों ने बधाई देते हुए उन्हें लाल गुलाब का गुलदस्ता दिया था. ओलेग ने चुपके से वो गुलदस्ता उठाया और PM की तरफ बढ़े. PM ने सोचा, बंदा खुश होकर गुलदस्ता देने आ रहा है. उन्होंने खुशी-खुशी हाथ बढ़ाकर गुलदस्ता लिया. लेकिन ओलेग का इरादा कुछ और था. उन्होंने धप्पा देते हुए प्रधानमंत्री की जांघों के बीच में हाथ डाला और उन्हें गोद में उठाने लगे. ओलेग चाहते थे, प्रधानमंत्री को उठाकर संसद से बाहर फेंक दें. इतने में PM के समर्थक सांसद उन्हें बचाने वहां पहुंच गए. ओलेग के साथी भी आगे आए. फिर दोनों गुटों ने कार्टून्स की तरह एक-दूसरे से हाथापाई की.

Arseniy Yatsenyuk And Oleg Barna
2015 में विपक्षी सांसद ओलेग बरना ने यूक्रेन के पीएम अरसेनिये यात्सेनयुक को गोद में उठाने की कोशिश की (फोटो: एपी)

#7

लिस्ट में सातवां नाम है जॉन फोर्ब्स कैरी का. ये 2013 से 2017 तक अमेरिका के विदेश मंत्री रहे. जॉन कैरी की एक कमज़ोरी थी. क्या? उन्हें डोनट्स बड़े पसंद थे. वो भी ख़ास डंकिन डोनट्स. ये डंकिन डोनट्स एक अमेरिकी कंपनी है. इनकी दुकानें दुनियाभर में मिलेंगी आपको. कहते हैं, जॉन कैरी जब भी किसी विदेशी दौरे पर जाते तो सबसे पहले खोजते डंकिन डोनट्स की दुकान. वहां पहुंचकर पेटभर डोनट्स खाते. फिर मोटरी बांधकर थोड़े डोनट्स साथ भी ले जाते. विदेश यात्राओं के दौरान अक्सर वो अपने ट्विटर हैंडल से डंकिन डोनट्स की दुकानों की फोटो पोस्ट करते थे. और तो और, ये उन्हीं का डोनट प्रेम था कि 2015 में अमेरिकी विदेश विभाग की इमारत के भीतर डंकिन डोनट्स का एक छोटा स्टॉल खोल दिया गया.

John Kerry
2013 से 2017 तक अमेरिका के विदेश मंत्री रहे जॉन फोर्ब्स कैरी. (फोटो: एएफपी)

#8

लिस्ट की 8वीं और आख़िरी एंट्री एकबार फिर पुतिन हैं. पुतिन अपने बर्ताव के लिए बड़े कुख़्यात हैं. कहते हैं, उनकी किसी वर्ल्ड लीडर से पटती है कि नहीं, ये समझने का एक सिंपल तरीका. आपको बस ये देखना है कि पुतिन मीटिंग में टाइम पर पहुंचे कि नहीं. अगर टाइम से पहुंचे, मतलब दोस्ताना रिश्ते. अगर लेट से आए, मतलब खुन्नस. जितनी लेट, उतनी ज़्यादा खुन्नस. पुतिन की इसी बचकानी आदत से जुड़ा है ये क़िस्सा.

ये बात है मार्च 2020 की. तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयब एर्दोगान बड़ी हड़बड़ी में रूस पहुंचे. इस हड़बड़ी के पीछे था सीरिया में हुआ एक घटनाक्रम. 27 फरवरी को रूस ने वहां कुछ हवाई हमले किए थे. इसमें तुर्की के 36 सैनिक मारे गए. पहले तो तैश में आकर एर्दोगान ने बदला लेने की धमकी दी. फिर उन्हें समझ में आया कि बदला लेने का मतलब रूस से युद्ध करना. रूस से सीधे भिड़ने की स्थिति में वो थे नहीं. ऐसे में उन्होंने सोचा, पुतिन से मिलकर अपनी बात रखता हूं. इसी चक्कर में वो मॉस्को पहुंचे थे. यहां उन्हें क्रेमलिन में मीटिंग के लिए बुलाया गया. तय समय पर एर्दोगान और उनका डेलिगेशन क्रेमलिन पहुंचा. यहां उनसे कहा गया, मीटिंग रूम के बाहर इंतज़ार करिए. एर्दोगान खड़े होकर इंतज़ार करने लगे. खड़े-खड़े जब उनके पांव दुख गए, तो वो एक कुर्सी पर बैठ गए. तब तक रूस की सरकारी मीडिया भी एर्दोगान के मज़े लेने वहां पहुंच गई थी. उन्होंने एर्दोगान का विडियो बनाया और बाक़ायदा टाइमर लगाकर ये विडियो टीवी पर चलाया.

Putin Erdogan
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयब एर्दोगान (फोटो: एपी)

बिन बुलाए मॉस्को गए एर्दोगान की इस बेइज़्जती पर ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने एक कॉलम में लिखा-

शायद अब एर्दोगान को तुर्की डिप्लोमेसी में चर्चित एक कहावत हमेशा याद रहेगी. वहां कहते हैं कि अगर मिडिल ईस्ट के किसी अहम भोज में आप न बुलाए जाएं, तो मेन्यू चेक कीजिए. शायद आपको अपना नाम वहीं पर मिले.

जाते-जाते एक छोटा सा क़िस्सा और सुना देते हैं आपको. नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग उन हैं न. जो सबको परमाणु युद्ध की धमकी देते हैं. जून महीने में उन्होंने सैकड़ों बैलून तैयार करवाए. फिर इनके अंदर भरी गई नफ़रती पर्चियां, कूड़ा-कचरा और सिगरेट का जला हिस्सा. इन बैलून्स को दक्षिण कोरिया के आसमान में छोड़ दिया. एक क्रूर तानाशाह ने पड़ोस के एक्टिविस्ट्स द्वारा भेजी जाने वाली आलोचनाओं के जवाब में ये तरीका चुना था. कितना पेचीदा है न इंसानी दिमाग.

Kim Jong Un Ballons
नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग उन और उनके बैलून्स (फोटो: एपी)

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