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इस कांग्रेसी नेता ने सीडब्लूसी मीटिंग में चिट्ठी लिखने वालों को जमकर धोया

मैं चिट्ठी लिखे जाने से बहुत आहत हूं, मीडिया में लीक करने के बजाय इस मामले को पार्टी के भीतर उठाना चाहिए था. खैर जो हुआ, सो हुआ. मुझे किसी को लेकर कोई दुर्भावना नहीं है, उनको लेकर भी नहीं जिन्होंने चिट्ठी लिखी. इसे भूलकर अब आगे बढ़ते हैं. –
(सीडब्लूसी की मीटिंग में सोनिया गांधी, सोमवार को)

सोनिया गांधी की ये पंक्तियां दिखाती हैं कि इस बार की CWC मीटिंग कई लिहाज से ऐतिहासिक रही. यह पहला मौका था, जब इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सीडब्लूसी की मीटिंग का आयोजन हुआ. मतलब सब अपने-अपने ठिकाने पर थे और लैपटॉप या मोबाइल के जरिए मीटिंग अटेंड कर रहे थे. कुल मिलाकर यह वर्क फ्रॉम होम वाली सीडब्लूसी मीटिंग रही. फिर भी कांग्रेसी नेताओं में खूब गर्मागर्मी हुई. आइए जानते हैं कि सोनिया गांधी के अलावा दूसरे मेंबर्स ने सीडब्लूसी मीटिंग में क्या कहाः

 

मैं इस चिट्ठी के लिखे जाने की टाइमिंग से बहुत दुखी हूं. कांग्रेस अध्यक्ष मेरी मां हैं और यह हमला तब किया गया, जब वह बीमार चल रही हैं और राजस्थान संकट अभी-अभी टला है. …हमें एक तय वक्त में इलेक्शन कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए. 6 महीने का वक्त लेकर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की मीटिंग बुलाई जा सकती है.
– राहुल गांधी
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जब सीडब्लूसी के इलेक्शन हों, तब जो चाहे अध्यक्ष पद के लिए इलेक्शन लड़ ले. मैंने सोनिया जी से पूछा था कि जब जीतेंद्र प्रसाद आपके खिलाफ इलेक्शन लड़े, फिर भी आप उनको कमेटी में क्यों शामिल कर रही हैं? तो उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के संविधान के हिसाब से उनके खिलाफ इलेक्शन लड़ सकते हैं. बड़ा दिल दिखाते हुए सोनिया जी ने उन्हें पार्टी महासचिव बनाया. – अंबिका सोनी

 

ये कलेक्टिव लीडरशिप क्या होती है, जिसकी आप बात कर रहे हैं? तब यह कलेक्टिव लीडरशिप कहां गई थी, जब आप लोग एयरपोर्ट पर बाबा रामदेव से मिलने गए थे. क्या तब आपने कांग्रेस अध्यक्ष या पीएम से इसकी इजाजत ली थी? आप ऐसी चिट्ठी कैसे लिख सकते हैं, जिसमें गांधी परिवार को दरकिनार करके उन्हें सिर्फ एक ‘मार्गदर्शक आभामंडल’ तक सीमित करने की बात कही गई है? – अहमद पटेल
अहमद पटेल के चुनाव के समय बहुत झाम फैला था. इस बार भी खेला वैसा ही है.

 

मैंने फैसला लेने में गलती की है. सीडब्लूसी इसके दंड स्वरूप जो भी फैसला लेगी, उसे स्वीकार करने को मैं तैयार हूं. लेकिन कई लोग यहां मेरे पिता जी (जितेंद्र प्रसाद) के बारे में बातें कर रह हैं. कृपया इस बात का ध्यान रखें कि वह अपनी आखिरी सांस तक कांग्रेस पार्टी के लिए वफादार रहे थे. – जितिन प्रसाद

 

आपको यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि जब आप मंत्री थे, तब आप कलेक्टिव लीडरशिप और सबको साथ लेकर चलने में कितना भरोसा रखते थे. मैं इस बात को लेकर हैरान हूं कि जो इंडियन यूथ कांग्रेस की रैंक से उठकर यहां तक पहुंचे हैं, वो ऐसी चिट्ठी लिख रहे हैं.
– राजीव सातव

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फोटोःफेसबुक

 

ये दुर्भाग्यपूर्ण है… कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को शुरू किया जाए, जिससे लीडरशिप को लेकर किसी के मन में कोई संशय न रहे.
– पी चिदंबरम

 

मीटिंग से एक दिन पहले इस तरह का लेटर प्रकट होता है. इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. पार्टी से निलंबित चल रहा एक मेंबर (संजय झा) इस चिट्ठी के डिटेल्स और लिखने वालों के नाम उजागर करता है.
– रणदीप सुरजेवाला
randeep surjewala

 

संजय झा, ये कौन है? मैं उस शख्स को नहीं जानता. न उससे कभी मिला हूं और न ही कभी उससे जिंदगी में मैंने कभी बात की है. मैंने कांग्रेस को अपनी पूरी जिंदगी दी है. कुछ कांग्रेस के लोग कह रहे हैं कि ऐसा (चिट्ठी लिखने का काम) हमने बीजेपी के इशारे पर किया है. उनको बता दूं कि मैं और गुलाम नबी आजाद 1978 में तब भी इंदिरा जी के साथ खड़े थे, जब बहुत से भरोसेमंद साथ छोड़ गए थे. हम संजय गांधी के साथ सड़कों पर उतरे हैं और लाठियां खाईं हैं. हममें से कईयों के शरीर पर उस वक्त की चोटों के निशान अब भी मौजूद हैं. – आनंद शर्मा
Anand Sharma

 

मुझे जो भी लगता है, मैं सीडब्लूसी में पूरे भरोसे के साथ कहता हूं. लेकिन किसी को कोई समस्या नहीं होती. क्यों नहीं होती? क्योंकि जो लोग मीटिंग में मौजूद हैं और सोनिया गांधी के काम के तरीके से परिचित हैं, वह इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं.– आरपीएन सिंह

 

सीडब्लूसी के बाहर किसी कांग्रेसी नेता ने कहा है कि यह चिट्ठी हमने बीजेपी के इशारे पर लिखी है. अगर इन आरोपों को कोई साबित कर दे तो मैं अभी और यहीं अपना इस्तीफा सौंप दूंगा. जो कुछ हमने चिट्ठी में लिखा, उससे आप असहमत हो सकते हैं और हमसे चर्चा कर सकते हैं लेकिन हमें बदनाम न करें. – गुलाम नबी आजाद
गुलाम नबी आज़ाद ने चिट्ठी लिखने पर कई मोड़ लिए.

 

मैं जो भी हूं, सोनिया गांधी की वजह से हूं. मैं चिट्ठी लिखे जाने की टाइमिंग और नीयत पर उठ रहे सवालों से इंकार करता हूं. मुझे फांसी पर लटका दीजिए, लेकिन मेरे इरादों और नीयत पर शंका मत कीजिए. हमसे मीटिंग में ऐसा बर्ताव हो रहा है, जैसे हम कोई अपराधी हैं. क्या एक चिट्ठी लिखना भी अपराध है? – मुकुल वासनिक

 

मैं जब राजनीति में आया तो राजीव गांधी हमारे लिए भगवान की तरह थे. अगर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी एक स्वर्णिम त्रिभुज की तरह पार्टी के उद्धार के लिए काम करेंगे तो यह बहुत अच्छा होगा. – अधीर रंजन चौधरी

(ये बयान 25 अगस्त के अलग-अलग अखबारों से लिए गए हैं)

वीडियो – कांग्रेस वर्किंग कमेटी मीटिंग में किस नेता ने सुनाई सोनिया-राहुल को खरी-खरी?

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