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ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर के पीछे भागने से पहले ये महीन जानकारी पढ़ लो, काम आएगी

कोविड मरीज़, जिनकी दवा दरमत घर पर ही चल रही है, डॉक्टर उन्हें ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर इस्तेमाल करने की राय दे रहे हैं. मगर जब हमारे एक मित्र ने अपनी कोविड पॉज़िटिव दादी के लिए कॉन्संट्रेटर का इस्तेमाल किया तो इसने कुछ काम नहीं किया. उन्हें फिर ऑक्सीजन सिलिन्डर की ही मदद लेनी पड़ी. सोशल मीडिया पर कुछ और लोगों  ने भी इसी तरह की बात लिखी.

असल में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर का इस्तेमाल सभी मरीज़ों के लिए नहीं किया जा सकता है. साथ ही ये भी जरूरी है कि आपके पास सही स्पेसिफिकेशन्स वाला कॉन्संट्रेटर हो. जिस तरह स्मार्टफ़ोन अलग-अलग दाम में अलग-अलग खासियत या स्पेसिफिकेशन्स के साथ आते हैं, वही हाल कॉन्संट्रेटर का भी है. आपको पहले ये देखना पड़ेगा कि आपकी ज़रूरत कितनी है और आप जो कॉन्संट्रेटर ले रहे हैं वो इस ज़रूरत को पूरा कर सकता है या नहीं.

कैसे पता चलेगा कि मरीज़ को कितनी ऑक्सीजन चाहिए?

एक सामान्य व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन की मात्रा 95 से 100% के बीच होती है. इसे आप पल्स ऑक्सीमीटर नाम के एक छोटे से डिवाइस से नाप सकते हैं. कोविड पॉज़िटिव मरीज़ के खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. ये लेवल 94% या उससे कम होने पर ऑक्सीजन सपोर्ट की ज़रूरत पड़ सकती है.

Phillips Concentrator
कुछ कॉन्संट्रेटर लाने ले जाने के हिसाब से डिजाइन किए जाते हैं. (फ़ोटो: Philips)

ब्लड ऑक्सीजन लेवल जितना ज़्यादा गिरता है, मरीज़ को उतनी ज़्यादा ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ती है. इस ज़रूरत को लीटर प्रति मिनट या LPM में नापा जाता है.

इसके साथ ही अगर मरीज़ को दूसरी कुछ बीमारी हैं तो कोविड का असर बॉडी पर ज़्यादा होगा और इन्हें ज़्यादा ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ सकती है. अगर बीमारी लंग्स से जुड़ी है तो ऑक्सीजन की ज़रूरत और भी ज़्यादा हो जाती है. मरीज़ की कंडीशन के हिसाब से ही डॉक्टर ये तय करते हैं कि इन्हें कितनी ऑक्सीजन सप्लाई करनी है.

ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर की ज़रूरत किसे पड़ती है?

ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर हवा में मौजूद ऑक्सीजन को फ़िल्टर करके मरीज़ तक पहुंचाता है. इसे काम करने के लिए ऑक्सीजन सप्लाई की नहीं बिजली की ज़रूरत होती है. चूंकि ये खुद से ऑक्सीजन बना-बनाकर मरीज़ तक पहुंचाता है इसलिए इसकी कपैसिटी इतनी ज़्यादा नहीं होती. आम तौर पर कॉन्संट्रेटर 5LPM ऑक्सीजन सप्लाइ करते हैं मगर आपको मार्केट में इससे कम और इससे ज़्यादा LPM वाले कॉन्संट्रेटर भी मिल जाएंगे.

Inogen Concentrator 2
अलग-अलग रेट के कॉन्संट्रेटर में अलग-अलग खूबी मिलती हैं (फ़ोटो: Inogen)

IGIMS पटना के रेसिडेंट डॉक्टर दिनकर मिश्रा बताते हैं,

“ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर सिर्फ उन्हीं कोविड मरीज़ के लिए रिकमेंड किया जाता है जिनकी हालत स्टेबल होती है. ऐसे ज़्यादातर मरीज़ घर पर ही ट्रीटमेंट पा रहे होते हैं.”

डॉक्टर मिश्रा आगे कहते हैं,

“कॉन्संट्रेटर का इस्तेमाल सिर्फ़ उन कोविड मरीज़ के लिए ही किया जा सकता है जिनका ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल 80-85% या उससे ज़्यादा हो और जिन्हें 4-5 LPM ऑक्सीजन की ही ज़रूरत पड़ती हो. ऐसा इसलिए क्योंकि कॉन्संट्रेटर की ऑक्सीजन पहुंचाने की आम तौर पर यही लिमिट होती है.”

मान लीजिए किसी मरीज़ का ब्लड ऑक्सीजन लेवल 90% है. कॉन्संट्रेटर लगाने के बाद अगर ये लेवल बढ़कर 95% हो जाता है तो मतलब कि ये काम कर रहा है. अगर कॉन्संट्रेटर लगाने के बाद भी ऑक्सीजन लेवल गिरता रहता है तब फिर मरीज़ को सिलिन्डर लगाने की ज़रूरत पड़ेगी या फिर अस्पताल ले जाने की.

ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर का चुनाव कैसे करना है?

एक ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर का चुनाव उसके ऑक्सीजन फ़्लो या कपैसिटी के साथ-साथ ऑक्सीजन कॉन्संट्रेशन और पावर इनपुट वग़ैरह पर निर्भर करता है.

ऑक्सीजन फ़्लो: सबसे पहले तो आपको ये देखना है कि आपके मरीज़ को कितने LPM ऑक्सीजन चाहिए. अगर कोविड मरीज़ को 5 LPM या उससे कम ऑक्सीजन की ज़रूरत है तब तो ऐसा कॉन्संट्रेटर सही काम करेगा जिसका ऑक्सीजन फ़्लो या कपैसिटी कमज़ कम 5 LPM हो. लेकिन अगर मरीज़ को 5 LPM से ज़्यादा ऑक्सीजन चाहिए तब ये कॉन्संट्रेटर नहीं काम करेगा. इस केस में आपको ऐसा कॉन्संट्रेटर चाहिए होगा जो 8LPM या 10LPM ऑक्सीजन देता हो. आमतौर पर कॉन्संट्रेटर का LPM जितना ज़्यादा होता है उसका साइज़ भी उतना बड़ा होता और उसकी कीमत भी उतनी ही ज़्यादा होती है.

ऑक्सीजन फ़्लो में बदलाव: वैसे तो ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर में ऑक्सीजन फ़्लो को अपनी ज़रूरत के हिसाब से कम किया जा सकता है मगर हालिया दिनों में कॉन्संट्रेटर की बढ़ी हुई ज़रूरत को देखते हुए बहुत सारे ऐसे कॉन्संट्रेटर भी दिखाई पड़ रहे हैं जो सिंगल ऑक्सीजन फ़्लो पर ही काम करते हैं. आप खरीदते वक़्त ये जरूर देख लें कि आप ऑक्सीजन फ़्लो को कंट्रोल कर सकते हैं या नहीं. अच्छे कॉन्संट्रेटर अपनी मैक्सिमम कपैसिटी से लेकर 0.1 LPM तक का कंट्रोल देते हैं.

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कॉन्संट्रेटर लेने से पहले सारे स्पेक्स अच्छे से देख लीजिए. (फ़ोटो: Philips)

ऑक्सीजन कॉन्संट्रेशन: हवा में 21% ऑक्सीजन, 78% नाइट्रोजन और 1% में बाक़ी दूसरी गैस होती हैं. एक ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर हवा में से ऑक्सीजन को फ़िल्टर करके निकालता है. इस फिल्टर्ड ऑक्सीजन में O2 (ऑक्सीजन) की मात्रा जितनी ज़्यादा होती है ये मरीज़ के खून में मौजूद ऑक्सीजन को उतनी ही जल्दी पूरा करती है. जितना ज़्यादा कॉन्संट्रेशन लेवल उतना अच्छा कॉन्संट्रेटर. आप जो ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर ले रहे हैं उसका ऑक्सीजन कॉन्संट्रेशन कमज़ कम 90% तो होना ही चाहिए. आपको इस लेवल से ज़्यादा के भी कॉन्संट्रेटर मिल जाएंगे. कई कॉन्संट्रेटर 8LPM ऑक्सीजन फ़्लो का दावा करते हैं मगर इस सप्लाई पर इनका ऑक्सीजन कॉन्संट्रेशन 90 छोड़िए 50 से भी नीचे गिर जाता है. ऐसे कॉन्संट्रेटर किसी काम के नहीं है.

पावर: एक कॉन्संट्रेटर को काम करने के लिए बस एक पावर सप्लाई चाहिए होती है. यानी कि ये 24 घंटे लगातार काम कर सकता है बशर्ते कि इसे 24 घंटे बिजली मिलती रहे. अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां बिजली काफ़ी कटती है तब आप ऐसा कॉन्संट्रेटर देखिए जिसमें बैटरी का भी सिस्टम हो. मतलब कि ये वाले कॉन्संट्रेटर बिजली जाने के बाद भी 2 से 4 घंटे बैटरी पर चलते रहते हैं.

पल्स डोज़ या कन्टिन्यूअस फ़्लो: अगर हम ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर पर निबंध लिखने बैठें तो बताना पड़ेगा कि ये दो प्रकार के होते हैं. पहले होते हैं कन्टिन्यूअस फ़्लो वाले जो ऑक्सीजन की सप्लाई लगातार देते रहते हैं. दूसरे होते हैं पल्स डोज़ वाले जो इस बात की बात पहचान करते हैं कि मरीज़ कब सांस ले रहा है और कब छोड़ रहा है और ये उसी हिसाब से ऑक्सीजन सप्लाई देते हैं. कन्टिन्यूअस फ़्लो वाले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर रात में मरीज़ के सोने पर भी उसी तरह से ऑक्सीजन देते रहते हैं जिससे मरीज़ को सांस लेने में दिक्कत नहीं होती मगर पल्स डोज़ वाले कभी कभार इस बात की पहचान करने से चूक जाते हैं जिसकी वजह से रात में मरीज़ की आंख खुलती रहती है. आमतौर पर कन्टिन्यूअस फ़्लो वाले कॉन्संट्रेटर ही चलते हैं मगर कुछ महंगे वाले कॉन्संट्रेटर कन्टिन्यूअस और पल्स दोनों का ऑप्शन देते हैं. कॉन्संट्रेटर खरीदने से पहले आपको अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह ले लेनी चाहिए कि आपके मरीज़ के लिए कौन सा कॉन्संट्रेटर ज़्यादा सही है.

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कम वज़न वाले कॉन्संट्रेटर लाने ले जाने में आसान होते हैं. (फ़ोटो: Philips)

वज़न: एक कॉन्संट्रेटर का वज़न उन लोगों के लिए मैटर करता है जिन्हें इसे लेकर इधर उधर टहलना होता है. अगर आप कोविड मरीज़ के लिए इसे घर पर इस्तेमाल कर रहे हैं तो मुश्किल है कि आपको इसके हल्के या भारी होने से ज़्यादा फ़र्क पड़े. मगर फ़िर भी अगर आपको दो में से एक चुनना हो तो कम वज़न वाला सेलेक्ट करना ही बेहतर होगा.

ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर कहां मिलेगा?

भारत ने 30 अप्रैल को ये ऐलान किया कि ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, पोस्ट या कुरियर के ज़रिए बाहर से मंगाए गए ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर पर कस्टम क्लियरेन्स की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. मतलब कि इन्हें ठीक वैसे ही ऑर्डर किया जा सकेगा जैसे आप बाकी चीजों की ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं. ये छूट 31 जुलाई 2021 तक है. इसके साथ ही सरकार ने 1 मई को आयात किए हुए कॉन्संट्रेटर पर लगने वाली 28% GST को घटाकर 12% कर दिया है. ये वाली छूट 30 जून 2021 तक चालू रहेगी.

आप 1mg, Tushti Store, Healthklin, ColMed, Healthgenie, Nightingales India और IndiaMart पर ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर खरीद सकते हैं. कॉन्संट्रेटर बनाने वाले ब्रांड में शामिल हैं– Equinox, Inogen, Oxlife, Philips, Aspen, Hemodiaz, Yuwell, HG, Life Plus, Devilbliss, Olex और Greens. आप चाहें तो इन ब्रांड की वेबसाइट पर जाकर पर रेट वग़ैरह के बारे में पता कर सकते हैं.


वीडियो: ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, सिलिंडर और कैन में क्या अंतर होता है?

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