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कश्मीर में कौन बिगाड़ रहा माहौल? क्या तालिबान के लड़ाके घुसपैठ की फिराक में हैं

जब अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का देहांत हुआ, तो प्रशासन ने बहुत सारे एहतियाती कदम उठाए. भारी पुलिस बल तैनात हुआ, इंटरनेट सेवा बंद की गई और दूसरे प्रतिबंध लागू किए गए. लेकिन इन सबके बीच से रिसकर ये शिकायत बाहर आई कि गिलानी के अंतिम संस्कार में पुलिस प्रशासन ने मनमानी की, परिवार की नहीं सुनी. अब जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इस आरोप पर खुलकर अपना पक्ष रख दिया है. घाटी में एक बेहद भावुक माहौल के बीच हो रहे इस आरोप प्रत्यारोप के बारे में बात करेंगे और साथ ही ये भी समझेंगे कि गिलानी के बाद हुर्रियत और पाकिस्तान समर्थित अलगाववाद का भविष्य क्या है.

हाल के सालों कश्मीर से हमें वो वीडियो कम ही देखने को मिले हैं, जिसमें भीड़ सुरक्षाबलों पर पत्थराव कर रही है, या फिर सुरक्षाबलों की तरफ से पेलेट गन्स चल रही हैं. 4-5 साल पहले ऐसी घटनाएं कश्मीर में आम थी. आपको याद होगा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में कई दिनों तक इंटरनेट बंद रखा गया था. लेकिन उसके बाद ऐसी नौबत नहीं आई जब पूरी कश्मीर घाटी में एक साथ इंटरनेट बंद करना पड़ा हो. लेकिन इस सितंबर महीने में आकर चीज़ें थोड़ी बदलती हुई दिख रही हैं.

महीने के पहले 5 दिन कश्मीर में इंटरनेट बंद रखना पड़ा. और श्रीनगर जैसे कुछ इलाकों में छठे दिन भी इंटरनेट चालू नहीं हुआ. लोगों के निकलने, जुटने पर पाबंदियां हैं. पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती भी कह रही हैं कि उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है. ये सब शुरू हुआ हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद. तो अफगानिस्तान में तालिबान का आना, और कश्मीर में गिलानी की मौत. क्या इस मौके का फायदा उठाकर कश्मीर में माहौल बिगाड़ने की कोशिश शुरू हो गई. गिलानी की मौत के बाद क्या राजनीति वहां चल रही है इस पर बात करेंगे. लेकिन पहले थोड़ा सा बैकग्राउंडर.

क्या कहता है इतिहास

1990 के दशक के बाद से ये पहली बार है कि कश्मीर का सबसे मजबूत और बड़ा आतंकी संगठन हिज़्बुल मुजाहिद्दीन लगभग खत्म हो चुका है. पिछले दो सालों में किसी बड़े हमले में हिज्बुल मुजाहिद्दीन का नाम नहीं आया. कमांडर सरीखा हिज्बुल का कोई बड़ा आतंकी नहीं बचा है. हालांकि छिटपुट आतंकी कश्मीर में अब भी हो रहे हैं. और हाल के हमलों में TRF नाम का संगठन सबसे ज़्यादा एक्टिव रहा है. लेकिन इस गुट से जुड़े बड़े नामों को एक एक करके सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर्स में मार गिराया.

कहने का मतलब है कि आतंकियों के फ्रंट से सुरक्षाबलों के लिए अब वैसी चुनौती नहीं रही जैसी बुरहान वानी के वक्त थी, या रियाज़ नाइकू के वक्त थी. आतंकियों के अलावा कश्मीर के अमन को दूसरी चुनौती रहती हुर्रियत संगठनों से. इनकी राजनीति भी कमज़ोर पड़ी है. यासिन मलिक, मसरत आलम जैसे कई नेता जेलों में हैं. सैयद अली शाह गिलानी भी बहुत एक्टिव नहीं थे. तो ऐसा कोई नेता नहीं बचा था जिसकी अगुवाई में भीड़ इकट्ठी होकर कानून -व्यवस्था बिगाड़े. इसे चाहे प्रशासन की सख्ती कह लीजिए, या कामयाबी. पर हालात काबू में कर लिए गए.

Geelani Final
गिलानी की एक फाइल तस्वीर. फोटो सोर्स- आजतक

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी कश्मीर में उस तरह का विरोध नहीं हुआ, जिसकी आशंका पहले जताई जा रही थी. अगस्त 2019 के बाद तो पत्थरबाज़ी की घटनाएं लगभग खत्म ही हो गईं. तो इस रूप में कश्मीर 2021 के अगस्त महीने में पहुंचता है. अगस्त में पड़ोसी देश अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होता है. इसी बीच 1 सितंबर की रात कश्मीर के सबसे उम्रदराज अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत हो जाती है. यहां से चीज़ें बिगड़ना शुरू हो जाती हैं.

1 सितंबर की रात को ही श्रीनगर के हैदरपोरा में गिलानी के निवास के पास के कब्रिस्तान में उन्हें दफना दिया गया. इंटरनेट भी बंद कर दिया गया. गिलानी के बेटों का आरोप है कि उनका अंतिम संस्कार परिवार की मर्ज़ी के खिलाफ हुआ. बड़े बेटे नईम गिलानी का आरोप, कि पिता का इस्लामी क़ायदे से अंतिम संस्कार नहीं करने दिया गया. दरवाज़े तोड़कर जबरन शव को निकाल पुलिस निकाल ले गई. ऐसी बातें भी परिवार की तरफ से कही गई. और ऐसे आरोपों को महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं ने तूल दिया. ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश हुई कि मौत के बाद गिलानी को इज्ज़त नहीं बख्शी गई, बदले के भावना से काम हुआ.

इस तरह के आरोपों से वहां माहौल और तनावपूर्ण हो गया. और फिर कल यानी 6 सितंबर को जम्मू कश्मीर पुलिस ने गिलानी के अंतिम संस्कार के कुछ वीडियो जारी किए. कश्मीर ज़ोन पुलिस की तरफ से एक के बाद एक कई ट्वीट कर अपना पक्ष बताया गया.

क्या बताया पुलिस ने

पुलिस ने लिखा कि गिलानी की मौत के बाद IGP विजय कुमार उनके घर गए थे, उनके दोनों बेटों से मिले. निवेदन किया कि शव का अंतिम संस्कार रात में ही कर दें, ताकि कानून व्यवस्था ना बिगड़े. पुलिस के मुताबिक गिलानी के दोनों बेटे इसके लिए राज़ी भी हो गए थे. लेकिन 3 घंटे बाद पाकिस्तान के दबाव में उन्होंने अलग तरह का बर्ताव शुरू कर दिया. शव को पाकिस्तान के झंडे में लपेटा गया. पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाज़ी शुरू हो गई. पड़ोसियों को भी वहां आने के लिए भड़काया गया.

इसके बाद पुलिस की समझाइश पर रिश्तेदार उनका शव कब्रिस्तान लाए और इस्लामी तौर तरीकों से अंतिम संस्कार हुआ. पुलिस का कहना है कि गिलानी के दोनों बेटे कब्रिस्तान नहीं आए क्योंकि अपने पिता के प्रति सम्मान के बजाय उन्होंने पाकिस्तान से वफादारी को तरज़ीह दी. तो इस तरह से पुलिस ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने कुछ भी गैरइस्लामिक नहीं किया है. गिलानी के शव पर पाकिस्तानी झंडा लपेटने के मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ UAPA की धाराओं में केस भी दर्ज किया है.

पर पुलिस की सफाई के बाद भी ये मामला शांत होता नहीं दिख रहा है. प्रशासन ने कल कश्मीर के 8 ज़िलों में 5 दिनों बाद इंटरनेट सेवाएं शुरू कर दी. लेकिन श्रीनगर और उससे लगे बडगाम ज़िले में शो लिखे जाने तक इंटरनेट की बहाली की जानकारी नहीं आई थी. और इस मौके को भुनाने में लगी हैं कश्मीर की मैनस्ट्रीम पॉलिटिकल पार्टी. आज जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की तरफ से ट्विटर पर लिखा गया कि भारत अफगानों के अधिकारों पर जिंता जता रही है, लेकिन कश्मीरियों के हक जानबूझकर छीने जा रहे हैं. महबूबा ने ये भी लिखा कि प्रशासन ने उनको हाउस अरेस्ट कर रखा है.

Mehbooba Mufti
जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म होने के बाद से पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती लगातार हाशिए पर हैं और सरकार पर लगातार आरोप लगा रही हैं. (फोटो – इंडिया टुडे)

इस बीच हुर्रियत की तरफ से भी संगठन में जान फूंकने की कोशिशें फिर शुरू हो गई हैं. ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने मसरल आलम को नया चेयरमैन बनाया है. इसके अलावा शब्बीर अहमद शाह और गुलाम अहमद गुलज़ार को वाइस-चेयरमैन बनाया है. मसरत आलम अभी तिहाड़ जेल में बंद है. कश्मीर में पैसे के दम पर पत्थरबाज़ी को बढ़ावा देने के आरोप उन पर लगते रहे हैं. तो कुल मिलाकर कश्मीर कश्मीर की राजनीतिक पार्टियां और वहां के अलगाववादी नए माहौल में नए तरीके से अपनी राजनीतिक स्थापित करने में लगे हैं. और इसके साथ ही चिंता आतंक के मोर्चे से भी है.

तालिबान की नजर अब कश्मीर पर?

ऐसे अंदेशे जताए जा रहे हैं कि अफगानिस्तान के आखिरी किले पंजशीर में तालिबान की जीत के बाद पाकिस्तान पूरा ध्यान कश्मीर की तरफ लगाएगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की सूत्रों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर के उस पार 200 आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार हैं. कश्मीर में आतंक का खतरा बढ़ने का अंदेशा दूसरे देशों की तरफ से भी जताया जा रहा है.

भारत में रूस के राजदूत निकोलाई कुदाशेव का कश्मीर पर बयान आया है. उन्होंने कहा है कि अफगानिस्तान से आतंक बाहर फैलने का खतरा है, रूस की सीमा तक भी आतंक जा सकता है, कश्मीर तक भी आज सकता है. रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव यानी वहां के NSA निकोलाई पैट्रशेव भारत आने वाले हैं. भारत के NSA अजीत डोभाल से उनकी मुलाकात होने वाली है. यानी तालिबान से उपजे खतरे से निपटने के लिए भारत भी अपनी रणनीतिक किलेबंदी मजबूत करने में लगा.

अन्य बड़ी खबरें-

1. पहली सुर्खी है अफगानिस्तान से. अफगानिस्तान में अमेरिका और लोकतांत्रिक अफगान सरकार की हार हुई. लेकिन जीता कौन, इसे लेकर स्थिति अभी स्पष्ट होना बाकी है. हमने आपको 6 सितंबर को तफसील से बताया था कि कैसे सत्ता के लिए तालिबान के धड़ों और कुख्यात आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क के बीच संघर्ष चल रहा है. और इस पूरे खेल में एक बार फिर आतंकवाद के सबसे कट्टर समर्थक देश पाकिस्तान का नाम सामने आ रहा है.

पंजशीर में तालिबान के खिलाफ लड़ रहे नेशनल रेज़िस्टेंस फ्रंट के अहमद मसूद ने भी तालिबान को मिल रहे पाकिस्तानी समर्थन का ज़िक्र किया था. फिर 4 सितंबर को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल फैज़ हमीद बिना बताए काबुल पहुंचे और मुल्ला बरादर से मिल लिए. इन सारी घटनाओं के बाद तालिबान को ये कहना पड़ा कि वो अफगानिस्तान में पाकिस्तान समेत किसी बाहरी देश का दखल बर्दाश्त नहीं करेगा.

लेकिन इस घटनाक्रम ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान को पर्दे के पीछे से निकालकर सामने ला दिया है. अफगान लोगों ने अपने देश में पाकिस्तान के दखल को कभी पसंद नहीं किया. और अब ये नाराज़गी तालिबान के दमन के बावजूद सड़कों पर दिखने लगी है. आज काबुल में पाकिस्तान के खिलाफ एक रैली निकली जिसमें पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल हुईं. रैली में चल रहे लोग पोस्टर लेकर चल रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारे भी लगाए.

सभी नारे एक सूत्र से बंधे थे – पाकिस्तान, अफगानिस्तान छोड़ो, ISI हाय-हाय. प्रदर्शनकारियों ने आज़ादी का नारा भी लगाया. प्रदर्शनकारी काबुल स्थित प्रेज़िडेंशियल पैलेस के पास इकट्ठा हुए थे और काबुल सेरीना होटल तक जाना चाहते थे, जहां ISI के महानिदेशक ठहरे हुए हैं. समाचार एजेंसी AFP ने खबर दी है इस रैली को तितर-बितर करने के लिए तालिबान के लड़ाकों ने गोलियां भी चलाईं. इस प्रदर्शन की खबर मिलने पर अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत में भी प्रदर्शन शुरू हो गए, जिनमें सैंकड़ों लोग जुटे.

तालिबान भले ये कहे को वो पाकिस्तान का दखल बर्दाश्त नहीं करेगा, लेकिन ये तथ्य है कि तालिबान सरकार के लिए पाकिस्तान का समर्थन बहुत मायने रखता है. कई तालिबान लड़ाकों के परिवार पाकिस्तान में ही बसते हैं. इसलिए तालिबान पर पाकिस्तानी प्रभाव बने रहने की संभावना ही अधिक है. संभवतः इसीलिए तालिबान के लड़ाकों ने आज के प्रदर्शन को ज़्यादा बड़ा होने नहीं दिया. इस संघर्ष के बीच अफगानिस्तान में खाने और दवाओं जैसी ज़रूरी चीज़ों की किल्लत शुरू हो गई है क्योंकि सभी सेवाएं तालिबान के आने के बाद से लगभग ठप पड़ी हैं. ज़्यादा खराब हालत है पंजशीर प्रांत की, जिसने सबसे लंबे समय तक तालिबान का मुकाबला किया और आधिकारिक रूप से अब भी हार नहीं मानी है.

2. करनाल में हुई किसान महापंचायत. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर करनाल से ही विधायक हैं और इसीलिए यहां न किसान मोर्चा और न सरकार फीके दिखना चाहते हैं. दी लल्लनटॉप शो में आपने देखा था कि किस तरह 28 अगस्त के रोज़ करनाल में हरियाणा पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष हुआ. पुलिस के लाठीचार्ज में किसान ज़ख्मी भी हो गए थे. बाद में संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया कि एक किसान की मौत हो गई है. हरियाणा पुलिस ने कहा कि किसान की मृत्यु में पुलिस कार्रवाई की कोई भूमिका नहीं है. लेकिन तब तक करनाल एसडीएम रहे आयूष सिन्हा का एक वीडियो वायरल हो गया जिसमें वो पुलिस के जवानों को प्रदर्शनकारियों के सिर तोड़ने की हिदायते देते देखे गए.

बाद में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि एसडीएम ने ठीक नहीं किया और कार्रवाई होगी, लेकिन सीएम मनोहर लाल खट्टर ने एसडीएम का बचाव किया. 30 अगस्त को करनाल में किसान महापंचायत हुई थी. किसानों ने तीन मांगें रखी थीं-

– लाठीचार्ज के ज़िम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमे
– घायल किसानों को 2-2 लाख के मुआवज़े
– मृतक किसान के लिए 25 लाख के मुआवज़े और परिवार से एक सदस्य के लिए नौकरी

पंचायत ने चेतावनी दी थी कि अगर ये मांगे मानी नहीं गई तो 7 सितंबर को करनाल अनाज मंडी में एक बड़ी महापंचायत होगी और करनाल स्थित मिनी सेक्रेटेरियट अनिश्चितकाल के लिए घेर लिया जाएगा. चूंकि किसानों की सभी मांगें अभी तक मानी नहीं गई हैं, आज करनाल में एक बड़ी किसान महापंचायत का आयोजन हुआ. प्रशासन ने पहले ही करनाल के अलावा कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं और अर्धसैनिक बलों की 10 कंपनियों समेत कुल 40 कंपनियों से जवान करनाल में तैनात कर दिए थे. करनाल प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लगा दी थी, लेकिन सरकार ने इशारा किया था कि वो शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नहीं रोकेगी.

आज जब प्रशासन ने देखा कि वाकई बड़ी संख्या में किसान महापंचायत के लिए जुट रहे हैं, तब किसानों को बातचीत के लिए न्योता दिया गया. आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधि इसमें शामिल भी हुए. लेकिन जब प्रशासन की तरफ से ये कहा गया कि आयूष सिन्हा के खिलाफ जांच में एक महीना लगेगा, तो बातचीत बेनतीजा रही और किसानों के जत्थे मिनी सेक्रेटेरियट की तरफ बढ़ने लगे. शाम को खबर आई कि प्रदर्शनकारी किसान करनाल में मिनी सचिवालय के पास पहुंच गए. किसानों को रोकने के लिए पुलिस की तरफ से वाटरकैनन का इस्तेमाल हुआ. किसान नेता राकेश टिकैत की तरफ से टि्वटर पर जानकारी आई कि पुलिस ने किसान नेताओं को हिरासत में लिया था, लेकिन फिर छोड़ दिया. करनाल के अलावा जींद में भी किसानों ने प्रदर्शन किया. करनाल जींद हाइवे को जाम कर दिया.

5 सितंबर को यूपी के मुज़फ्फरनगर में किसान महापंचायत हुई थी और आज करनाल में हुई. मुज़फ्फरनगर की महापंचायत जब बिना किसी अप्रिय घटना के पूरी हुई, तो प्रशासन ने राहत की सांस ली थी. यही अब हरियाणा सरकार का भी लक्ष्य है. करनाल से सूचनाएं छन-छनकर आ रही हैं. हमारी नज़र इन सूचनाओं पर बनी हुई है और आप सभी अपडेट्स दी लल्लनटॉप पर पाते रहेंगे. लेकिन आगे बढ़ने से पहले आपको किसान आंदोलन से संबंधित एक और अपडेट दे देते हैं. आपको याद होगा कि 11 जनवरी को कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाई थी, जो सभी स्टेकहोल्डर्स से बात करके सुप्रीम कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपने वाली थी. इस कमेटी में तीन एक्सपर्ट थे-

अनिल घणावत
अशोक गुलाटी
प्रमोद जोशी

कमेटी ने कहा था कि वो 85 किसान संगठनों से मिली है. इसी साल मार्च के आखिर में खबर आई कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है. लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हुआ. ये हम नहीं कह रहे हैं, ये कहना है कमेटी के सदस्य अनिल घणावत का. उन्होंने अब भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने कहा है कि न रिपोर्ट सार्वजनिक की जा रही है और न ही अदालत में इसपर सुनवाई हो रही है. घणावत ने ये भी जोड़ा कि किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों का निराकरण नहीं हुआ है और इससे उन्हें पीड़ा पहुंची है.

3. प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट PMLA विशेष अदालत ने आज नीरव के रिश्तेदार मैनक मेहता के खिलाफ जारी सभी गैरज़मानती वॉरंट खत्म कर दिए. मैनक की पत्नी पूर्वी नीरव मोदी की बहन है. मेहता को 50 हज़ार के बॉन्ड पर बेल दी गई है. अदालत ने ये भी कहा कि मेहता को देश छोड़ने के लिए अदालत की अनुमति लेनी होगी. वैसे मेहता के वकील ने इसका विरोध किया. मैनक मेहता और उसकी पत्नी पूर्वी पीएनबी घोटाले में सहआरोपी हैं और उनके खिलाफ 2018 से ही गैरज़मानती वॉरंट जारी हैं. पूर्वी के खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हुआ था. फरवरी 2021 में पति-पत्नी ने कहा कि वो सरकारी गवाह बनना चाहते हैं, लेकिन उनकी मांग थी कि उनके खिलाफ जारी वॉरंट रद्द हों. गवाह बनने के बदले पूर्वी और मैनक को घोटाले की सभी जानकारियां और संबंधित लोगों के नाम एजेंसियों को बताने होंगे. मेहता के वकील का कहना है कि वो एक ब्रिटिश नागरिक है और हॉन्ग-कॉन्ग में रहता है. वकील ने ये भी कहा कि मेहता नीरव मोदी की संपत्तियों की जानकारी ED को देने को तैयार है.

4. झारखंड की विधासभा में नमाज़ के लिए एक कमरा क्या अलॉट हुआ, दो दिन से हंगामा शांत नहीं हो रहा. विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी ने मांग कर दी है कि नमाज़ के लिए हुए कमरे के आवंटन को रद्द किया जाए. आज भाजपा विधायक कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधानसभा पहुंच गए और विधानसभा के बाहर सीढ़ी पर बैठकर हनुमान चालीसा गाने लगे. कार्यवाही शुरू हुई तो स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो बार बार भाजपा विधायकों से सदन चलने देने की बात कहते रहे, लेकिन हंगामा थमा नहीं.

स्पीकर ने कहा कि अगर विधायक गुस्सा हैं, तो उन्हें पीट लें, लेकिन सदन चलने दें. उन्होंने ये भी जोड़ा कि भाजपा विधायकों को हनुमान चालीसा का आदर करना चाहिए और राजनैतिक मकसद के लिए उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. लेकिन भाजपा विधायक वेल में पहुंच गए और जय श्री राम का नारा लगाने लगे. उधर भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि स्पीकर निष्पक्ष नहीं हैं.

5. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बखेल के पिता नंद कुमार बघेल. ब्राह्मण समाज के खिलाफ की एक कथित टिप्पणी को लेकर सीएम के पिता नंद कुमार बघेल को रायपुर में गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया. जब नंद कुमार ने कहा कि वो ज़मानत नहीं भरना चाहते, तो अदालत ने उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इसपर भूपेश बघेल ने कहा कि अगर उनके पिता ने एक समाज के खिलाफ टिप्पणी की है, तो कानूनी कार्रवाई होगी, कोई कानून से ऊपर नहीं है.

दरअसल बघेल ने हाल ही में उत्तर प्रदेश की अपनी यात्रा पर ब्रॉह्मणों के बॉयकॉट के लिए कहा था. इसे लेकर 4 सितंबर के रोज़ रायपुर में सर्व ब्राह्मण समाज ने एक FIR दर्ज कराई थी, जिसके चलते आज उन्हें रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. ये हाल में बघेल के लिए दूसरे झटके की तरह है. दो हफ्ते पहले ही सीएम पद पर रोटेशन के लिए भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच खींचातानी हुई थी, जो दिल्ली तक पहुंची थी.


वीडियो- दी लल्लनटॉप शो: गिलानी की मौत के बाद कश्मीर में माहौल बिगाड़ने की साजिश कौन कर रहा है?

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