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कौन हैं ब्रू शरणार्थी परिवार जिन्हें 4 लाख की FD, घर देकर बसाएगी मोदी सरकार?

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देश में कई जगह विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बीच केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर भारत के ब्रू शरणार्थी समस्या का समाधान निकाला है. गृहमंत्री अमित शाह ने 16 जनवरी को ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाने को लेकर समझौता कराया. समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करते वक्त मिज़ोरम और त्रिपुरा, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे.

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि त्रिपुरा में करीब 34,000 ब्रू शरणार्थियों को बसाया जाएगा. इसके लिए 600 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया है. शरणार्थियों को वहां पर 40 बाई 30 फुट का एक प्लॉट दिया जाएगा. घर बनाने के लिए 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे. परिवार के नाम पर चार लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट दी जाएगी. इसके साथ ही दो साल तक 5,000 रुपये प्रति माह नकद सहायता दी जाएगी. दो साल तक शरणार्थियों को फ्री राशन भी दिया जाएगा.

1997 से ही शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं

1997 में मिज़ोरम से विस्थापित होने के बाद ब्रू समुदाय के हजारों लोग त्रिपुरा में बनाए गए शरणार्थी कैंपों में रह रहे थे. जुलाई 2018 में उन्हें वापस भेजने के लिए एक समझौता हुआ, लेकिन यह लागू नहीं हो सका. ब्रू लोगों ने फिर से हिंसा के डर से मिज़ोरम जाने से इनकार कर दिया था. मिज़ोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपल्स फोरम (MBDPF) ने जनवरी 2018 में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मांग की थी कि मिज़ोरम लौटने वाले हर ब्रू परिवार को 15 लाख दिए जाएं और हर स्वस्थ युवा को सरकारी नौकरी.

Bru People
रिफ्यूजी कैंप में रह रहे ब्रू. (फोटो: रॉयटर्स)

अक्टूबर 2019 में, समझौता जल्द पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय के निर्देश पर राशन की आपूर्ति रोक दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर गृह मंत्रालय से जवाब मांगा था. कई सिविल सोसाइटी संगठनों ने आरोप लगाया था कि भुखमरी के कारण कम से कम 7 शरणार्थियों की मौत हो गई थी. और अब जाकर समझौता पूरा हुआ है.

समझौते के बाद नेताओं ने क्या कहा है?

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देव ने ट्वीट करके कहा-

यह भारत सरकार, त्रिपुरा और मिज़ोरम की सरकारों और ब्रू-रियांग प्रतिनिधियों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जो 23 सालों से ब्रू-रियांग शरणार्थी संकट को खत्म करता है. इस फैसले के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का शुक्रिया.

मिज़ोरम के CM जोरमथांगा ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा-

आज हमने ब्रू नेताओं, त्रिपुरा सरकार और मिज़ोरम सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह 25 सालों से चल रहे ज्वलंत मुद्दे को स्थायी रूप से समाधान कर देगा.

समझौते के बाद पीएम मोदी ने कहा-

पूर्वोत्तर और उसके नागरिकों के विकास के लिए प्रतिबद्ध! आज के समझौते से ब्रू-रीनग शरणार्थियों को बहुत मदद मिलेगी. उन्हें कई विकास योजनाओं का फायदा मिलेगा. वाकई एक अच्छा दिन.

कौन हैं ब्रू लोग?

ब्रू पूर्वोत्तर में बसने वाला एक जनजाति समूह है. इनकी छिटपुट आबादी पूरे पूर्वोत्तर में है. मिज़ोरम के ज़्यादातर ब्रू मामित और कोलासिब ज़िलों में रहते हैं. तकरीबन एक दर्जन उपजातियां ब्रू के अंदर आती हैं. मिज़ोरम में ब्रू शेड्यूल्ड ट्राइब्स का एक समूह माना जाता है और त्रिपुरा में एक अलग जाति. लेकिन त्रिपुरा में इन्हें रियांग नाम से पुकारते हैं. इनकी भाषा भी ब्रू है.

फिलहाल इस भाषा की अपनी कोई लिपि नहीं है. लेकिन ब्रू लोग जिस राज्य में बसते हैं, वहां की भाषाएं भी बोल लेते हैं. जैसे बंगाली, असमिया या मिज़ो. कुछ ब्रू हिंदी और अंग्रेज़ी भी बोलते हैं. ब्रू पहले झूम खेती करते थे. इसमें जंगल के एक हिस्से को साफ करके वहां खेती की जाती है. कुछ फसलें लेने के बाद जंगल के किसी दूसरे हिस्से में यही कवायद फिर की जाती है. तो ब्रू एक बंजारा जाति समूह रहा है.

ब्रू पारंपरिक रूप से झुम खेती करते रहे हैं. ब्रू अब मिज़ोरम सरकार से एक जगह खेती के लिए ज़मीन चाहते हैं. मिज़ोरम सरकार इसके लिए तैयार नहीं है.
ब्रू पारंपरिक रूप से झूम खेती करते रहे हैं.

इन्हें अपना घर क्यों छोड़ना पड़ा था?

पूर्वोत्तर में लोग अपनी जातीय पहचान जैसे पहनावे, खान-पान और भाषा को लेकिर बहुत संजीदा हैं. जातीय पहचान को मुद्दा बनाकर ही कभी अलग राज्य, तो कभी अलग देश की मांग हुई. और इसके लिए उग्रवाद का भी सहारा लिया गया. तो मिज़ो उग्रवादियों ने भी देश से अलग होने की कोशिश की. जब इसकी संभावना दूर नज़र आने लगी, तो मिज़ो उग्रवाद ने मिज़ोरम पर मिज़ो जनजातियों का कब्ज़ा बनाए रखने के मकसद से हर उस जनजाति को निशाने पर ले लिया, जिसे वो बाहरी समझते थे.

1995 में ब्रू और मिज़ो के बीच टकराव बढ़ने के बाद यंग मिज़ो असोसिएशन और मिज़ो स्टूडेंट्स असोसिएशन ने ब्रू जनजाति को बाहरी घोषित कर दिया. साथ ही ये मांग की कि उन्हें राज्य में होने वाले चुनावों में वोट न डालने दिया जाए. ब्रू मिज़ो उग्रवादियों के निशाने पर आ गए.

इसके जवाब में ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (BNLF) नाम से ब्रू उग्रवादी खड़े हो गए. राजनीति के लिए ब्रू नेशनल यूनियन (BNU) भी बनी. BNU की मांग थी कि ब्रू लोगों के लिए एक ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल भी बने.

न्यूज़ एजेंसी ANI का 9 फरवरी 2012 का यह ट्वीट देख सकते हैं-

21 अक्टूबर, 1997 को ब्रू उग्रवादियों ने डम्पा टाइगर रिज़र्व में एक मिज़ो फॉरेस्ट अधिकारी की हत्या कर दी. इसके बाद इलाके में ब्रू लोगों के खिलाफ जमकर हिंसा हुई. ब्रू गुट दावा करते हैं कि 41 गावों में 1400 घर जलाए गए. हत्या और रेप हुए. मिज़ोरम पुलिस घर जलाने की बात तो मानती है, लेकिन हत्या और रेप के आंकड़ों पर कुछ नहीं कहती. ब्रू लोग जान बचाकर भागे. तब से ये रिलीफ कैंपों में रह रहे हैं. ये कैंप त्रिपुरा में उत्तर त्रिपुरा ज़िले के कंचनपुर और पानीसागर सब-डिविज़न में हैं.

नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिलीफ कैंप में रह रहे लोगों की ज़िंदगी बद से बदतर होती गई. ज्यादातर लोगों के पास काम लायक स्किल नहीं है, इसीलिए वो मज़दूरी करते हैं या जंगलों से खाना बटोरते हैं. हर 10 में से एक बच्चा किसी न किसी तरह का नशा करता है. शराब से लेकर ड्रग्स तक.


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