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अमेरिका समेत अन्य देशों से जो मदद भारत पहुंची, उसका क्या हुआ?

Coronavirus In India: देशभर में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं और भारत की स्थिति पर पूरी दुनिया चिंता जता रही है. ऐसे में तमाम देश भारत की मदद के लिए आगे आए और मदद भेजी, कुछ ने भेजने का ऐलान किया. इस मदद का क्या हुआ? क्या ये मदद जरूरतमंदों तक पहुंची? किस देश से कितनी मदद मिली? और क्या ये मदद, ये राहत सामग्री सही से बांटी जा रही है? पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं. हालांकि भारत सरकार की ओर से दावा किया गया है कि जो भी मदद भारत तक पहुंची है उसे राज्यों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है.

जानकारी का आभाव क्यों है?

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक उसने दूसरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की तरह, इस मदद के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई. विदेश से मिली मदद की जानकारी के लिए किस एजेंसी से संपर्क करना है या फिर किस वेबसाइट पर ये डेटा मिलेगा या कौन से अधिकारी से इस पर जानकारी मिल सकेगी, इस पर भी कोई स्पष्टता नहीं है.

कुछ का कहना है कि मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ, डिस्ट्रिब्यूशन का काम देख रही है, वहीं इस मंत्रालय के कुछ उच्च अधिकारियों के मुताबिक मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स (MEA) इस काम को देख रही है. यानी कौन मंत्रालय क्या काम कर रहा है, यह दूसरे मंत्रालय को पता नहीं है. इंडिया टुडे की वेबसाइट पर एक अधिकारी से हवाले से बताया गया है कि बाहर से जो प्राईवेट और सरकारी मदद, भारत सरकार को मिल रही है वो इंडियन रेड क्रॉस के माध्यम से MEA को सौंप दी जाती है. इसके बाद देश में इसे बांटने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ और मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स को सौंप दिया जाता है.

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भारत को कई बड़े देशों ने मदद भेजी है. फोटो- IndiaToday

अमेरिकी पत्रकार ने उठाया सवाल

गुरुवार 29 अप्रैल को यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की ब्रीफिंग के दौरान एक पत्रकार ने अमेरिकी टेक्सपेयर्स के पैसों से की जा रही मदद का हिसाब मांगा. उसने पूछा कि,”हम भारत में मदद भेज रहे हैं लेकिन दिल्ली में जो हमारा रिपोर्टर है वो दो दिन काम करने के बाद भी ये पता नहीं लगा पाया कि कितना सामान वहां पहुंच रहा है और कौन कितना सामान ले जा रहा है.” उसने कहा,

“कोई वेबसाइट नहीं है, कोई पारदर्शी सिस्टम नहीं है जहां से लोग जानकारी ले सकें. तो अमेरिकी टेक्सपोयर्स के लिए ये जवाबदेही होनी चाहिए कि जो मदद भेजी जा रही है, वो कैसे और कहां बांटी जा रही है.”

अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की उप प्रवक्ता जलीना पोर्टर ने कहा कि किसी भी विशेष वेबसाइट पर इसे लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा,

“जहां तक किसी वेबसाइट का सवाल है, फिलहाल हम कुछ घोषणा नहीं कर सकते हैं. लेकिन ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि अमेरिका इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि भारत में हमारे सहयोगी इस बारे में ख्याल रखेंगे.”

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को ये आश्वासन देना चाहता है कि इस मुश्किल वक्त में हम उन्हें सपोर्ट करेंगे. ये मदद उन्हें तुरंत मिलेगी और अतिरिक्त मदद भी रास्ते में है. जिनमें ऑक्सीजन सिलेंडर्स, रेगुलेटर्स, पल्स ऑक्सीमीटर्स और N-95 मास्क शामिल हैं. हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारत के फ्रंटलाइन हेल्थ केयर वर्कर्स को सुरक्षा मिले.

जल्द शुरू होगा सामान का वितरण

इंडिया टुडे का दावा है कि उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से इस बारे में बात करनी चाही लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया. हेल्थ मिनिस्ट्री कोविड टास्क फोर्स से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सरकारी खरीद का हिस्सा हैं और इनका वितरण 5 मई से शुरू हो जाएगा. इसके अलावा भारत सरकार, उस बड़ी सप्लाई का इंतजार कर रही है जिसका ऑर्डर पीएम केयर्स फंड के तहत दिया गया था.

हेल्थ मिनिस्ट्री के प्रवक्ता लव अग्रवाल ने शुक्रवार 30 अप्रैल को कहा था,

“हेल्थ मिनिस्ट्री फिलहाल विदेशों से आ रही सप्लाई और मदद को समझने और जमा करने की कोशिश कर रही है. इस बारे में काम किया जा रहा है.”

मई 3 तक भारत को यूके, मॉरीशस, सिंगापुर, रूस, यूएई, आयरलैंड, रोमानिया, यूएसए, थाईलैंड, जर्मनी, उज्बेकिस्तान, फ्रांस, बेल्जियम और इटली से मदद मिल चुकी है.

अभी तक भारत में मदद का इतना सामान पहुंच चुका हैं

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (Oxygen Concentrators) – 1,676
वेंटिलेटर्स (Ventilators) – 965
ऑक्सीजन सिलेंडर, अलग-अलग साइज  – 1,799
ऑक्सीजन सिलेंडर के रेगुलेटर्स – 1,023
ऑक्सीजन सिलेंडर के एडाप्टर- 20
ऑक्सीजन जेनरेटिंग प्लांट – 9
हाई फ्लो ह्यूमिडिफाई ऑक्सीजन थेरेपी डिवाइस- 20
बेड साइड मॉनीटर्स- 150
BiPAP मशीन, Coveralls पीपीई किट, गोगल्स, मास्क – 480
पल्स ऑक्सीमीटर्स- 210
एबॉट रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट – 8,84,000
N-95 फेस मास्क – 9,28,800
रेमडेसिविर (Remdesivir) – 1,36,000
इलेक्ट्रिक सिरिंज पंप्स – 200
एफनॉर/ बीएस फ्लेक्सिबल ट्यूब्स – 28
एंटी बैक्टिरियल फिल्टर्स – 500
मशीन फिल्टर्स और रिलेटेड पेशेंट्स सर्किट्स – 1,000

इस SOP के हिसाब से चल रहा काम

भारत तक काफी मदद पहुंची है और अब राज्यों तक भी मदद पहुंचने लगी है. भारत को सिंगापुर से 25 अप्रैल को पहली मदद पहुंची थी. तब से अब तक काफी देशों ने भारत की ओर मदद का हाथ बढाया है. इसके बाद केंद्र सरकार ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP तैयार करने में 7 दिन लिए. 2 मई को सरकार ने मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर को राज्यों तक ये सामान पहुंचाने के लिए अधिकृत किया और भारत सरकार के उपक्रम HLL लाइफकेयर को डिस्ट्रिब्यूशन मैनेजर बनाया.

SOP के हिसाब से विदेश मंत्रालय को विदेश से सहायता के सभी प्रस्तावों पर बात करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है. वहीं HLL को सभी जरूरी सर्टिफिकेट्स रेड क्रॉस सोसायटी से लेने होंगे. सरकार का कहना है कि राहत सामग्री को जरूरतमंदों को पहुंचाने में टाइम वेस्ट ना हो, इसके लिए सरकार ने हर संभव कोशिश की है और यह कोशिश जारी है. 26 अप्रैल से ही इस पर काम शुरू कर दिया गया था.

राज्य सरकारों तक पहुंचने लगी मदद

केंद्र सरकार का दावा है कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मदद में मिली चीजें भेजने का काम शुरू हो चुका है. बड़ी संख्या में चीजों को राज्यों और संस्थानों को दिया गया है. यूपी सरकार की ओर से बताया गया है कि काफी सामान जिनमें 15000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी शामिल हैं, यूपी को मिले हैं और इनको इस्तेमाल में लेना शुरू कर दिया गया है. गुजरात के हेल्थ मिनिस्टर नितिन पटेल के ऑफिस ने भी कन्फर्म किया कि वेंटिलेटर्स और दूसरा सामान पहुंच चुका है और सरकार ने तेजी से लोगों तक मदद पहुंचाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं. मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी बताया गया है कि वहां भी विदेशी मदद पहुंच रही है.

कर्नाटक के डिप्टी सीएम अश्वतनारायण ने भी कहा कि उन्हें मदद की खेप पहुंची है. लेकिन राजस्थान, पंजाब और झारखंड का दावा है कि उन्हें सरकार द्वारा भेजे गए सामान की जानकारी नहीं है. राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि केंद्र की ओर से इस पर कोई जानकारी नहीं मिली है. वहीं झारखंड के स्वास्थ्य सचिव अरुण सिंह ने कहा कि रेमडिसिविर के 2181 इंजेक्शन राज्य को मिले हैं, इसके अलावा अभी अन्य मदद नहीं मिल पाई है.

आजतक की एक खबर के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन सवालों के जवाब में मंगलवार 4 मई को कहा था कि तकरीबन 40 लाख सामग्री, जिनमें दवाइयां, ऑक्सीजन सिलेंडर, फेस मास्क और अन्य तरह की विदेशी मदद, 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 38 संस्थानों में भेजे गए हैं.


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