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अपने पहले टूर में डॉन ब्रेडमैन की टीम को हराने के लिए भारत ने क्या किया था?

तारीख 7 सितंबर 1947, रविवार का दिन था. पूना का डेक्कन जिमखाना ग्राउंड. फर्स्ट क्लास मैच शुरू होने वाला था. शेष भारत का मुकाबला महाराष्ट्र पास्ट और प्रेजेंट टीम से था. दोनों टीमों में बड़े-बड़े खिलाड़ी थे. डीबी देवधर अपना आखिरी फर्स्ट क्लास मैच खेल रहे थे. महाराष्ट्र टीम में विजय हजारे, मधुसूदन, नाना जोशी, खांडू रंगनेकर और सादु शिंदे जैसे खिलाड़ी खेल रहे थे. तो वहीं शेष भारत की कप्तानी वीनू मांकड़ कर रहे थे. और इस टीम में हेमू अधिकारी, दत्तू फड़कर, प्रोबीर सेन, जेनी ईरानी थे. गुल मोहम्मद, आमिर इलाही और फज़ल महमूद भी थे, जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए और फिर पाक क्रिकेट टीम के लिए खेले.

#Rest of India ने जीता टॉस

शेष भारत ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. महाराष्ट्र टीम की बल्लेबाजी बेहद खराब रही. पूरी टीम 128 रनों पर ऑलआउट. रंगनेकर ने सबसे अधिक 53 रन बनाए. जबकि आमिर इलाही ने चार विकेट हासिल किये. इसके बाद शेष भारत ने पहले दिन बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट खोकर 76 रन बनाए. पहले दिन कुल 14 विकेट्स गिरे. शेष भारत की पारी 275 रनों पर सिमटी. किशनचंद ने 88 रनों की पारी खेली.

जबकि नौवें नंबर पर आमिर इलाही ने 49 रन बनाए. दूसरे दिन ही महाराष्ट्र ने दूसरी पारी में महज 44 रन पर ही छह विकेट गंवा दिए. जबकि तीसरे और आखिरी दिन महाराष्ट्र की पारी 247 रनों पर सिमटी. विजय हजारे और डीबी देवधर के बीच 114 रनों की साझेदारी हुई थी. शेष भारत को 101 रनों का लक्ष्य मिला और महज 13.2 गेंदों में ही टारगेट हासिल कर लिया.

# 8 गेंदों का ओवर

खैर, जब इस मैच के स्कोरकार्ड पर नजर डालेंगे तो पता चलता है कि पहली पारी 36.6 ओवर्स में खत्म हुई. और शेष भारत के आमिर इलाही ने 5.6 ओवर की गेंदबाजी की. जबकि दूसरी पारी 88.7 ओवर में खत्म हुई. और मधुसूदन ने 8.7 ओवर की गेंदबाजी की. आमतौर पर टेस्ट मैच छह गेंदों का होता है.

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये मुकाबले में ओवर आठ गेंदों का था. इसलिए गेंदबाजों के बॉलिंग फिगर्स कुछ इस तरह के थे. हालांकि, ये पहला मौका नहीं था, जब आठ गेंदों का ओवर वाला मुकाबला खेला गया. मगर इस मैच में आठ गेंदों का ओवर कराने के पीछे एक मकसद था.

#1947-48 का AUS Tour

दरअसल, भारत को पहली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना था. डॉन ब्रेडमैन वाली टीम से भिड़ना था. ये ब्रेडमैन की सेकेंड लास्ट सीरीज भी थी. इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ एशेज खेलकर क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. चूंकि उस वक्त आठ गेंदों का ओवर होता था. इसी वजह से इस फर्स्ट क्लास मुकाबले को ट्रायल की तरह खेला गया. ताकि सभी खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया की गर्मी और आठ गेंदो के ओवर की आदत हो जाए. और खिलाड़ी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही तैयार हो जाएं.

बहरहाल, 1947-48 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली गयी. जिसमें भारत को 4-0 की शर्मनाक हार मिली. उससे पहले भारतीय टीम ने 9 फर्स्ट क्लास मैच भी खेले थे. दो में जीत मिली, तीन में हार और चार मैच ड्रॉ हुआ था. लाला अमरनाथ की अगुवाई वाली टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया ने बुरी तरह हराया.

# Bradman ने कूटे थे 715 रन

लाला अमरनाथ पूरे दौरे पर 58 की औसत से 1162 रन बनाए. पांच शतक लगाए. लेकिन टेस्ट सीरीज में वह एक भी शतक नहीं लगा पाए. टेस्ट सीरीज में भारत की तरफ से विजय हजारे ने सबसे अधिक 429 रन बनाए. जबकि डॉन ब्रैडमेन ने 715 रन कूटे थे. बता दें कि भारत ने 15 साल बाद यानि 1962 में फिर आठ गेंदों के ओवर को आजमाया था. लेकिन घरेलू सरजमीं पर भारत ने कभी भी ऐसा टेस्ट मैच नहीं खेला. जहाँ एक ओवर में आठ गेंदे फेंकी गयी हो.


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