Submit your post

Follow Us

चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी के तीसरे ऐतिहासिक संकल्प-पत्र में क्या बात लिखी हुई है?

साल 1917. रूस में बोल्शेविक क्रांति सफ़ल हुई. ज़ार निकोलस द्वितीय को कुर्सी से उतार दिया गया. बाद में परिवार सहित उनकी हत्या कर दी गई. रूस की गद्दी पर नए शासक का अवतरण हुआ. व्लादिमीर लेनिन. सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी का संस्थापक.

रूस में दुनिया की पहली कम्युनिस्ट सरकार बन चुकी थी. अब उनका इरादा अपनी विचारधारा को पूरी दुनिया में फैलाने का था. 1921 में मॉस्को ने अपने कुछ एजेंट चीन की तरफ़ रवाना किए. वे चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के लिए संभावनाएं तलाशने आए थे. ये लोग शंघाई में इकट्ठा हुए. इस बैठक में बहुत सारे बुद्धिजीवियों को बुलावा आया था. इनमें से एक नाम माओ ज़ेदोंग का भी था. उस समय माओ एक जूनियर स्कूल में प्रिंसिपल के तौर पर काम कर रहा था.
जुलाई 1921 की उस बैठकी में चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की नींव रखी गई. माओ को हुनान प्रांत की ज़िम्मेदारी मिली.

शंघाई CCP की जन्मभूमि थी. यानी सबसे पवित्र जगह. लेकिन जिस जगह पर पार्टी का भविष्य तय हुआ, वो यन्नान था. एक समय तक कम्युनिस्ट पार्टी और कुओमितांग में दोस्ती थी. जब कुओमितांग की कमान च्यांग काई-शेक के हाथों में आई, उसने कम्युनिस्टों को मिटाने का अभियान शुरू किया. दोनों के बीच छापामार लड़ाई चलती रही.

अक्टूबर 1934 में कुओमितांग ने निर्णायक लड़ाई शुरू की. माओ को अपने साथियों के साथ भागना पड़ा. ये सफ़र एक साल तक चला. उनका कारवां यन्नान में जाकर रुका. तब एक लाख में से केवल आठ हज़ार लोग ज़िंदा बचे थे.

इसी लॉन्ग मार्च के दौरान माओ को पार्टी का मिलिटरी कमांडर बना दिया गया. वो पार्टी के सबसे ताक़तवर लोगों में से था. लेकिन पार्टी के अंदर एक धड़ा उसे नापसंद करता था. इस धड़े का नाम था, 28 बोल्शेविक्स. इस धड़े में शामिल लोग मॉस्को से ट्रेनिंग लेकर आए थे. रूस मज़दूरों की क्रांति में यकीन रखता था. जबकि माओ का मानना था कि अगर क्रांति चीन में हो रही है तो चीन के हिसाब से हो. उसका भरोसा किसानों की क्रांति में था. इसी को लेकर दोनों धड़ों में असहमति थी.

माओ ने इस असहमति को पाटने की तरक़ीब खोज ली थी. यन्नान CCP का गढ़ था. इस दौरान चीनी सिविल वॉर भी धीमा पड़ चुका था. उसे पर्याप्त समय मिला. इस समय का इस्तेमाल उसने अपने विचारों को कलमबद्धध करने में किया.

1941 में माओ ने अपनी पहली चाल चली. लॉन्ग मार्च के बाद कम्युनिस्ट पार्टी की ख्याति फैल चुकी थी. चीन के अलग-अलग हिस्सों से लोग पार्टी में शामिल होने के लिए आ रहे थे. नए कार्यकर्ताओं के लिए ट्रेनिंग ज़रूरी थी. उनके लिए स्टडी सेशन और ग्रुप डिस्कशन टाइप की चीज़ें आयोजित करवाईं जाती थी. इन सेशंस के दौरान रंगरूटों को माओ के विचारों के बारे में पढ़ाया जाता था.

जब माइंडवॉश का काम पूरा हो गया, तब दूसरी चाल चली गई. तब माओ का परिवर्तित रूप दिखा. उसने कहा, लेट्स ब्रिंग डेमोक्रेसी.

उसने मिश्री घुले लफ़्ज़ों से कहा, पार्टी की आलोचना करिए. आलोचना से ही पार्टी मज़बूत होगी. अगर कोई मेरी आलोचना करता है तो मैं उसे अपना सौभाग्य मानता हूं.

पार्टी काडर उसकी बातों में आ गया. माओ और पार्टी की आलोचना शुरू हो गई. जो समझदार थे, वे इशारा समझ चुके थे. उन्होंने पार्टी को पवित्रतम मानकर धूल माथे पर लगा ली थी. जो नहीं समझ पाए, उन्होंने सब खोलकर रख दिया.

जब आलोचना खत्म हो गई. फिर आलोचकों की लिस्ट निकाली गई. और उन्हें धीरे-धीरे ठिकाने लगा दिया गया. ये सब 1942 से 1945 तक चला. इस दौरान कम-से-कम दस हज़ार लोगों की हत्या हुई. कुछ को निर्वासन में भेज दिया गया. इसमें ‘28 बोल्शेविक्स’ के मुखिया वांग मिंग भी थे. पार्टी-नेतृत्व में उच्च पद पर होने की वजह से उनकी जान तो बच गई. लेकिन उन्हें देश छोड़कर जाना पड़ा. मॉस्को में निर्वासन में ही उनकी मौत हो गई.

इस अभियान के पीछे दिमाग माओ का था. और बल उसके सिक्योरिटी चीफ़ कांग शेंग का. कांग शेंग चाल और चरित्र दोनों से बेरहम था. कहते हैं कि वो काले रंग की ड्रेस पहने काले घोड़े पर सवार होकर चलता था. उसके हाथ में हमेशा काले रंग की चाबुक होती थी. और, एक काला कुत्ता उसके साथ लगा रहता था.

शेंग किसी के भी बारे में झूठी ख़बरें प्लांट करने के लिए कुख्यात था. वो टॉर्चर का डर दिखाकर झूठी गवाही भी ले आता था. शेंग ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर विदेशी जासूस भरे हुए हैं. उन्हें नहीं हटाया तो पार्टी ख़त्म हो जाएगी. इस इल्ज़ाम की आड़ में उसने हज़ारों लोगों को टॉर्चर किया. कईयों को जान से मार दिया गया. पार्टी के 60 वरिष्ठ अधिकारियों को इतना बेबस कर दिया गया कि उन्हें आत्महत्या करनी पड़ी.

इस काल को इतिहास में ‘यन्नान शुद्धिकरण आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है.

इतिहासकार माइकल लिंच ने लिखा,

इसमें कोई शक़ नहीं है कि माओ अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार था. पार्टी सदस्य या तो अभिभूत थे या आतंकित. माओ ज़ेदोंग लाल बादशाह बन चुका था, जिसके शब्द और जिसकी इच्छा अगले तीस सालों तक चीन का मुस्तकबिल तय करने वाले थे.

शुद्धिकरण आंदोलन खत्म होने के बाद माओ ‘संकल्प-पत्र’ लेकर आया. इसने पहले पार्टी और बाद में चीन पर माओ के एकाधिकार की बुनियाद रखी. इसकी गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाइए कि सौ सालों के इतिहास में चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी सिर्फ़ दो संकल्प-पत्र लेकर आई है. पहली बार 1945 में, जबकि दूसरी बार 1981 में.

आज जानेंगे, इन दोनों संकल्प-पत्रों में क्या था? इनका महत्व क्या है? और, आज हम ये सब क्यों सुना रहे हैं?

पहले माओ के संकल्प-पत्र का ज़िक्र.

इसका नाम रखा गया था, ‘Resolution on Certain Questions in the History of Our Party’. इसमें पार्टी के बीते दो दशकों के संघर्ष पर बात की गई थी. शंघाई नरसंहार से लेकर लॉन्ग मार्च तक की गाथा सुनाई गई थी. उस लहजे में जिसमें पार्टी काडर की वफ़ादारी हासिल की जा सके. साथ ही साथ, पुराने नेताओं की नीतियों की आलोचना भी की गई थी. इसमें पार्टी के सदस्यों को ‘आत्म-आलोचना’ के लिए प्रेरित किया गया था. इससे माओ को दो फायदे हुए.
पहला, माओ को अपने विरोधियों की पहचान करने में आसानी हुई. अब उन्हें आसानी से रास्ते से हटाया जा सकता था.

और दूसरा, आलोचकों का हश्र देखकर बचे-खुचे लोग माओ की वफ़ादारी की कसमें खाने लगे थे.

अक्टूबर 1949 में कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन पर क़ब्ज़ा कर लिया. माओ पार्टी का चेयरमैन बना. उसने मरने तक चीन पर शासन किया.

सितंबर 1976 में माओ की मौत हो गई. उस समय तक उसके खाते में बहुत सारी नाकामियां जमा हो चुकीं थी. हंड्रेड फ़्लॉवर्स मूवमेंट, द ग्रेट लीप फ़ॉवर्ड, फ़ोर पेस्ट्स कैंपेन और सबसे बड़ा ब्लंडर ‘सांस्कृतिक क्रांति’. इन ग़लतियों के चलते लाखों की संख्या में लोग मारे गए थे. चीन में अकाल और भुखमरी का लंबा दौर चला. चीन के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे. पार्टी में नेतृत्व को लेकर भी वैक्यूम बना हुआ था.

ऐसे हालात के बीच डेंग जियाओपिंग चीन के सुप्रीम लीडर बने. 1981 में वो दूसरा संकल्प-पत्र लेकर आए. इसमें पार्टी की स्थापना से लेकर उनके समय तक के इतिहास का ज़िक्र किया गया था. इसमें सबसे ज़्यादा ध्यान माओ की सांस्कृतिक क्रांति पर दिया गया था. जियाओपिंग ने माओ की नीतियों की आलोचना की थी.
हालांकि, जियाओपिंग ने माओ के विचारों को पार्टी का आधार बताया. जियाओपिंग ने कहा था,

ये सच है कि कॉमरेड माओ ने सांस्कृतिक क्रांति के दौरान भारी ग़लतियां की. लेकिन अगर हम उनके पूरे जीवन की समीक्षा करें तो चीन की क्रांति में उनका योगदान उनकी ग़लतियों पर भारी पड़ता है.

माओ को स्वीकारने के बावजूद जियाओपिंग ने नीतियों में भारी फेरबदल किया. मसलन, व्यक्ति-केंद्रित नेतृत्व की बजाय सामूहिक नेतृत्व की स्वीकार्यता. इसके अलावा, उन्होंने आर्थिक सुधारों पर भी ज़ोर दिया. चीन के बाज़ार बाकी दुनिया के लिए खुलने लगे.

न्यू यॉर्क टाइम्स की 07 नवंबर 2021 की एक रिपोर्ट है.

To steer China’s future, Xi is rewriting its past

रिपोर्ट में जर्मनी की फ़्रेबर्ग यूनिवर्सिटी में इतिहासकार डेनियल लीज़ का एक बयान है. डेनियल कहते हैं,

चीन में सुप्रीम लीडर संकल्प-पत्र के ज़रिए पार्टी एलीट के बीच इतिहास और भविष्य का एक कॉमन फ़्रेमवर्क, कॉमन विजन तैयार कर रहे थे. अगर आप सत्ता के गलियारे में मौजूद लोगों को अतीत के मुद्दे पर एकमत नहीं करते, तो उन्हें भविष्य के लिए राज़ी करना लगभग असंभव होगा.

जियाओपिंग ने एक साथ दोनों चीज़ों को साध लिया था. उन्होंने अतीत के साथ बहुत छेड़छाड़ नहीं की थी. साथ ही, आगे के लिए उदार नीतियां भी ले आए.

आज इन सबकी चर्चा की वजह क्या है?

दरअसल, चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी अपने इतिहास का तीसरा संकल्प-पत्र लेकर आ रही है. सोमवार आठ नवंबर से बीजिंग में CCP का चार-दिवसीय कॉनक्लेव शुरू हो रहा है. इसी बैठक में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ‘ऐतिहासिक संकल्प-पत्र’ जारी करेंगे. इस दस्तावेज़ में CCP के सौ सालों की उपलब्धियों पर चर्चा की जाएगी.

पार्टी के मुखपत्र के अनुसार, शी जिनपिंग ने माओ और जियाओपिंग के बाद चीन में तीसरे युग की शुरुआत की है. जियाओपिंग चीन को अमीर बनाने का सपना देखते थे. जिनपिंग ने चीन को शक्तिशाली बनाने पर ज़ोर दिया है.

8 से 11 नवंबर तक चलने वाली बैठक में CCP के लगभग 370 वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. पूरी बैठक बंद कमरे में होगी. वहां मीडिया का एक्सेस नहीं होगा. इस बार के संकल्प-पत्र में क्या है, इसको लेकर जानकारी अभी सामने नहीं आई है. फिलहाल बस अनुमान लगाए जा रहे हैं.

स्टेट मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया संकल्प शी जिनपिंग की सत्ता और उनके विचारों को स्थापित करेगा.

जानकारों का मानना है कि इस बार इतिहास की आलोचना की बजाय उपलब्धियों पर ज़ोर होगा. इस शिफ़्टिंग की वजह क्या है?

जब माओ और जियाओपिंग रेज़ॉल्यूशन लेकर आए थे, उस समय चीन अलग-अलग संकटों के दौर से गुज़र रहा था. माओ के समय में चीन सिविल वॉर और जापानी आक्रमण से जूझ रहा था.
वहीं, जियाओपिंग के सामने माओ की हिंसक विरासत और अस्थिर नेतृत्व का संकट था.

जिनपिंग के सामने ऐसी कोई समस्या नहीं है.

जिनपिंग 2012 में सत्ता में आए थे. उस समय उन्होंने दो लक्ष्य निर्धारित किए थे. पहला, 2021 तक चीन को साधन-संपन्न बनाना. दूसरा, 2049 तक चीन को ‘महान आधुनिक समाजवादी राज्य’ के तौर पर स्थापित करना. जुलाई 2021 में पार्टी के सौवें स्थापना दिवस समारोह में जिनपिंग ने दावा किया कि पहला लक्ष्य पूरा हो चुका है. संभावना जताई जा रही है कि संकल्प-पत्र में दूसरे लक्ष्य की रूपरेखा पेश की जाएगी.

2018 में चीन ने राष्ट्रपति पद के लिए दो टर्म की बाध्यता खत्म कर दी थी. अब जिनपिंग चाहें तो उम्रभर के लिए पद पर बने रह सकते हैं. जिनपिंग का दूसरा कार्यकाल 2022 में खत्म हो रहा है. इतना तो तय माना जा रहा है कि जिनपिंग तीसरा कार्यकाल भी लेंगे. हालांकि, ये छूट उनके प्रधानमंत्री ली केक़ियांग समेत कई और वरिष्ठ मंत्रियों पर लागू नहीं होती. बीजिंग कॉन्क्लेव में नई भर्तियों पर भी चर्चा होने की संभावना है.

बीजिंग की बैठक में आगे जो कुछ भी होगा, उस पर हमारी नज़र रहेगी. आप बने रहिए लल्लनटॉप के साथ.


दुनियादारी: PM मोदी ने ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने को लेकर क्या प्लान बताया?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

शुद्ध और असली स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर करियर ग्राफ़ बाद में गिरता ही चला गया.

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.